The Motivation Myth (Hindi)


क्या आप भी उस जादुई मोटिवेशन का इंतज़ार कर रहे हैं जो आपकी लाइफ रातों-रात बदल देगा। बधाई हो आप अपनी जिंदगी के सबसे कीमती साल एक ऐसे धोखे में बर्बाद कर रहे हैं जो कभी सच नहीं होगा। बिना काम किए जोश ढूँढना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के रेस जीतने की उम्मीद करना। हँसिए मत क्योंकि यह जोक आप पर ही है।

जेफ हेडन की यह किताब आपके मोटिवेशन से जुड़े सारे भ्रम तोड़ देगी। इस आर्टिकल में हम उन 3 लेसन के बारे में बात करेंगे जो आपको आलस की दुनिया से बाहर निकालकर एक असली हाई अचीवर बनाएंगे।


लेसन १ : मोटिवेशन काम शुरू करने का कारण नहीं बल्कि उसका रिजल्ट है

हममें से ज्यादातर लोग एक बहुत बड़ी गलतफहमी पालकर बैठे हैं। हम सोचते हैं कि एक दिन अचानक आसमान से बिजली गिरेगी। हमारे अंदर एक जबरदस्त जोश जागेगा। और फिर हम बिस्तर छोड़कर सीधा जिम जाएंगे या अपना करोड़ों का बिजनेस शुरू कर देंगे। दोस्त अगर आप भी उस स्पार्क या मोटिवेशन का इंतज़ार कर रहे हैं तो मुबारक हो। आप शायद दुनिया के सबसे खाली और निकम्मे इंसान के तौर पर रिटायर होने वाले हैं। जेफ हेडन अपनी किताब में साफ कहते हैं कि मोटिवेशन कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको काम शुरू करने से पहले मिलती है। असल में मोटिवेशन तो उस मेहनत का बायप्रोडक्ट है जो आप काम शुरू करने के बाद महसूस करते हैं।

मान लीजिए आपको घर की सफाई करनी है। आप सोफे पर पड़े हुए हैं और कूड़े के ढेर को देख रहे हैं। आपको जरा भी मोटिवेशन नहीं आ रहा। लेकिन जैसे ही आप मजबूरी में उठकर सिर्फ एक कोना साफ करते हैं। आपको वह साफ जगह देखकर अच्छा लगता है। वह छोटी सी जीत आपके दिमाग में डोपामाइन रिलीज करती है। फिर आप सोचते हैं कि चलो एक और कोना साफ कर देते हैं। बस यही वह असली मोटिवेशन है। यह काम करने के बाद आया न कि पहले।

हमारे यहाँ लोग मोटिवेशनल वीडियो देखकर ऐसे उछलते हैं जैसे किसी ने पूँछ पर पैर रख दिया हो। लेकिन वह जोश सिर्फ दस मिनट का होता है। जैसे ही वीडियो खत्म होता है और सामने असली मेहनत वाला काम आता है। सारा मोटिवेशन वैसे ही गायब हो जाता है जैसे चुनाव के बाद नेता के वादे।

सच्चाई यह है कि हाई अचीवर्स कभी मोटिवेशन का वेट नहीं करते। वे जानते हैं कि मोटिवेशन एक कच्चा दोस्त है जो ऐन वक्त पर धोखा दे देगा। इसलिए वे रूटीन पर भरोसा करते हैं। जब आप कोई छोटा सा टास्क पूरा करते हैं। तो आपके दिमाग को सिग्नल मिलता है कि आपने कुछ हासिल किया है। यही सक्सेस की फीलिंग आपको अगला कदम उठाने का मोटिवेशन देती है।

अगर आप जिम जाने के लिए किसी जादुई एनर्जी का वेट कर रहे हैं। तो आप सिर्फ अपनी बॉडी ही नहीं बल्कि अपना कीमती समय भी सड़ा रहे हैं। जूते पहनिए और घर से बाहर निकलिए। मोटिवेशन आपको रास्ते में कहीं मिल जाएगा। वह घर पर आपके सोफे पर आपके साथ बैठकर चिप्स नहीं खाने वाला है।

याद रखिए कि शुरू करना ही सबसे मुश्किल हिस्सा है। एक बार जब गाड़ी चलने लगती है तो उसे धक्का देना आसान हो जाता है। आपका काम है बस उस इंजन को स्टार्ट करना। चाहे मन हो या न हो। जब आप बिना मन के भी काम करते हैं और उसे खत्म करते हैं। तब जो गर्व महसूस होता है। वही असली मोटिवेशन है। यही वह तरीका है जिससे दुनिया के सबसे सफल लोग काम करते हैं। वे मोटिवेशन के गुलाम नहीं बल्कि अपने एक्शन के मालिक होते हैं।


लेसन २ : बड़े सपने आपको डराते हैं पर छोटा प्रोसेस आपको जिताता है

जैसे ही हम कोई बड़ा गोल सेट करते हैं। जैसे कि एक साल में बीस किलो वजन कम करना या अगले दो साल में करोड़पति बनना। हमारा दिमाग खुशी से पागल हो जाता है। हमें लगता है कि हमने आधी जंग तो बस सोचने भर से जीत ली है। लेकिन हकीकत यह है कि बड़े सपने अक्सर आपको पंगु बना देते हैं। जब आप उस विशाल पहाड़ को देखते हैं। तो आपको समझ ही नहीं आता कि पहला कदम कहाँ रखें। और फिर आप क्या करते हैं। आप वही करते हैं जो आप सबसे बेहतर जानते हैं। यानी हार मानकर नेटफ्लिक्स पर कोई नई वेब सीरीज देखने लग जाते हैं।

जेफ हेडन कहते हैं कि गोल्स केवल यह तय करने के लिए अच्छे हैं कि आपको किस दिशा में जाना है। लेकिन अगर आप वाकई वहां पहुँचना चाहते हैं। तो आपको अपने गोल को भूलकर अपने प्रोसेस पर ध्यान देना होगा। सक्सेसफुल लोग सिर्फ एंड रिजल्ट के बारे में नहीं सोचते। वे उस डेली रूटीन के बारे में सोचते हैं जो उन्हें वहां ले जाएगा।

मान लीजिए आपको एक बहुत ही बोरिंग और मोटी किताब पढ़नी है। अगर आप पूरी किताब को एक साथ देखेंगे। तो आपको नींद आने लगेगी। लेकिन अगर आप यह तय करें कि आज मुझे सिर्फ दो पेज पढ़ने हैं। चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए। तो वह दो पेज पढ़ना आपके लिए आसान होगा। जब आप वह दो पेज पढ़ लेंगे। तो आपको वह जीत वाली फीलिंग आएगी जिसके बारे में हमने लेसन वन में बात की थी।

दिक्कत यह है कि हम सबको रातों-रात स्टार बनना है। हमें लगता है कि कोई चमत्कार होगा और हम सीधा शिखर पर पहुँच जाएंगे। लेकिन दोस्त कुदरत का नियम थोड़ा अलग है। यहाँ तक कि एक कीड़ा भी सीधा उड़ना नहीं सीखता। वह पहले रेंगता है। अगर आप अपने प्रोसेस को एन्जॉय नहीं कर सकते। तो आप कभी मंजिल तक नहीं पहुँचेंगे।

आपका गोल एक बहुत बड़ा और भारी पत्थर है जिसे आपको धक्का देना है। अगर आप रोज उसे सिर्फ एक इंच भी खिसकाते हैं। तो एक दिन वह पत्थर अपनी जगह से हट ही जाएगा। लेकिन अगर आप रोज सिर्फ खड़े होकर उस पत्थर को घूरते रहेंगे और यह सोचेंगे कि यह कितना भारी है। तो यकीन मानिए वह पत्थर वहीं रहेगा और आप बूढ़े होकर वहीं ढेर हो जाएंगे।

हाई अचीवर्स अपना एक सिस्टम बनाते हैं। उनके पास डेली चेकलिस्ट होती है। वे इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उन्हें दस मील चलना है। उनका पूरा फोकस इस बात पर होता है कि अगला कदम सही पड़ना चाहिए। जब आप प्रोसेस पर फोकस करते हैं। तो आप फेलियर के डर से आजाद हो जाते हैं। क्योंकि आपका काम सिर्फ आज के टास्क को पूरा करना है।

अगर आप एक राइटर बनना चाहते हैं। तो रोज एक पन्ना लिखिए। अगर आप फिटनेस चाहते हैं। तो रोज बीस मिनट पसीना बहाइए। गोल्स के बारे में डिंगे मारना बंद कीजिए। क्योंकि आपके बड़े-बड़े सपनों से पड़ोसियों को फर्क पड़े न पड़े। आपकी असफलता पर उन्हें हंसी जरूर आएगी। इसलिए चुपचाप अपने प्रोसेस पर काम कीजिए। जब आप अपने छोटे-छोटे डेली टास्क पूरे करने लगते हैं। तो मोटिवेशन अपने आप आपके पीछे-पीछे आने लगता है। जैसा कि हमने पहले देखा था कि एक्शन ही मोटिवेशन का पिता है। अब समय है उस एक्शन को एक सिस्टम में ढालने का।


लेसन ३ : अपनी इच्छाशक्ति पर नहीं बल्कि अपने माहौल पर भरोसा करें

हम अक्सर खुद को सुपरमैन समझते हैं। हमें लगता है कि हमारे अंदर इतनी इच्छाशक्ति या विलपावर है कि हम किसी भी लालच को हरा देंगे। लेकिन सच तो यह है कि आपकी विलपावर एक बैटरी की तरह है। जो दिन खत्म होते-होते पूरी तरह डिस्चार्ज हो जाती है। अगर आप अपने बेडरूम में चिप्स का पैकेट रखकर यह सोच रहे हैं कि आप अपनी डाइट कंट्रोल कर लेंगे। तो दोस्त आप सिर्फ खुद को बेवकूफ बना रहे हैं। रात के ग्यारह बजते ही आपकी वह महान इच्छाशक्ति घुटने टेक देगी और आप उस पैकेट को ऐसे साफ करेंगे जैसे वह आपकी आखिरी वसीयत हो।

जेफ हेडन का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यही है कि सफल लोग अपनी विलपावर पर निर्भर नहीं रहते। बल्कि वे अपना माहौल ऐसा बनाते हैं जहाँ फेल होना मुश्किल हो जाए। अगर आपको सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करनी है। तो अपना फोन दूसरे कमरे में रखिए और अपनी किताबें मेज पर खोलकर सोइए। जब आप सुबह उठेंगे और सामने किताबें देखेंगे। तो आपका दिमाग अपने आप काम पर लग जाएगा।

मान लीजिए आप सोशल मीडिया की लत छोड़ना चाहते हैं। लेकिन आपने अपने फोन के होम स्क्रीन पर ही इंस्टाग्राम और फेसबुक सजा रखा है। अब आप कह रहे हैं कि मैं इसे नहीं खोलूँगा। यह तो वही बात हुई कि आप हलवाई की दुकान पर बैठे हैं और कह रहे हैं कि मुझे मीठा पसंद नहीं है। आपकी नीयत कभी भी डोल सकती है। और जब डोलेगी। तो आप घंटों तक रील देखते हुए अपना कीमती वक्त नाले में बहा देंगे।

हाई अचीवर्स जानते हैं कि इंसान स्वभाव से आलसी है। इसलिए वे अपने रास्ते से हर वह बाधा हटा देते हैं जो उन्हें भटका सकती है। वे अपने काम करने की जगह को मंदिर की तरह साफ और डिस्ट्रैक्शन फ्री रखते हैं। वहाँ न कोई फालतू शोर होता है और न ही कोई फालतू इंसान।

सच्चाई यह है कि आपका माहौल आपकी आदतों को शेप देता है। अगर आपके दोस्त ऐसे हैं जो सिर्फ पार्टी और गॉसिप करते हैं। तो आप चाहे कितना भी मोटिवेशनल आर्टिकल पढ़ लें। आप कभी भी सीरियस नहीं हो पाएंगे। क्योंकि आपका माहौल आपको नीचे खींच रहा है। सफल होने के लिए आपको अपने आसपास के कचरे को साफ करना होगा। चाहे वह कचरा सामान हो या लोग।

जैसे लेसन टू में हमने प्रोसेस की बात की थी। माहौल उस प्रोसेस को आसान बनाता है। जब आपका माहौल आपके साथ होता है। तो आपको मोटिवेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती। काम करना आपकी मजबूरी नहीं बल्कि आपकी आदत बन जाता है।

तो अब वक्त आ गया है कि आप उस मोटिवेशन के मिथक को कचरे के डिब्बे में फेंक दें। काम शुरू कीजिए। अपना एक सिस्टम बनाइए और अपने माहौल को अपनी जीत के लिए तैयार कीजिए। दुनिया सिर्फ नतीजों को सलाम करती है। आपके स्ट्रगल के ड्रामे में किसी को कोई दिलचस्पी नहीं है। उठिए और वह काम कीजिए जो आपको करना चाहिए। क्योंकि कल कभी नहीं आता और आज कभी रुकता नहीं।


दोस्तों, मोटिवेशन का इंतज़ार करना बंद कीजिए और आज ही अपने सबसे छोटे टास्क से शुरुआत कीजिए। अगर यह आर्टिकल आपकी सोच को बदलने में कामयाब रहा है। तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा कल से काम शुरू करने की कसमें खाता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वह कौन सा छोटा काम है जिसे आप आज ही खत्म करने वाले हैं।

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