Great at Work (Hindi)


क्या आप अभी भी गधों की तरह १६ घंटे घिस रहे हैं और फिर भी प्रमोशन आपके दोस्त को मिल गया। बहुत शानदार। अपनी मेहनत को ऐसे ही बर्बाद करते रहिए क्योंकि आपको लगता है कि ज्यादा काम मतलब ज्यादा सक्सेस। पर असल में आप सिर्फ अपनी लाइफ और टाइम दोनों को कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं।

इस कड़वे सच के बाद अब वक्त है यह समझने का कि आखिर टॉप परफॉर्मर्स ऐसा क्या अलग करते हैं। मोर्टन हैनसेन की रिसर्च से निकले वो ३ पावरफुल लेसन जो आपकी वर्किंग लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए जानते हैं कम काम करके ज्यादा रिजल्ट पाने का असली सीक्रेट।


लेसन १ : डू लेस देन ऑब्सेस (Do Less Then Obsess)

आज की इस भागदौड़ वाली दुनिया में हमें सिखाया जाता है कि जितना ज्यादा काम करोगे उतने ही सफल बनोगे। यह सबसे बड़ा झूठ है जो आपसे बोला गया है। लोग पागलों की तरह हर प्रोजेक्ट में हाथ डालते हैं। वो सोचते हैं कि दस जगह गड्ढे खोदने से पानी जल्दी निकलेगा। पर असल में वो सिर्फ थक रहे हैं। मोर्टन हैनसेन इसे गलत साबित करते हैं। वो कहते हैं कि टॉप परफॉर्मर्स कम काम चुनते हैं। उनका पहला और सबसे जरूरी लेसन है डू लेस देन ऑब्सेस। इसका सीधा मतलब है कि अपने कामों की लिस्ट को छोटा करो। फिर उन बचे हुए कामों में अपनी पूरी आत्मा झोंक दो।

सोचिए आपके पास एक ऑफिस का दोस्त है जो हर मीटिंग में जाता है। वो हर ईमेल का जवाब तुरंत देता है। वो हर कमेटी का हिस्सा बनना चाहता है। देखने में वो बहुत बिजी लगता है। पर साल के अंत में उसका आउटपुट जीरो होता है। क्यों। क्योंकि उसकी एनर्जी बिखर चुकी है। वो हर जगह थोड़ा-थोड़ा काम कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वो इंसान है जो सिर्फ दो बड़े प्रोजेक्ट्स चुनता है। वो बाकी सब चीजों को ना बोल देता है। वो उन दो कामों में इतनी बारीकी से काम करता है कि रिजल्ट बेमिसाल होता है। यही फर्क है एक एवरेज वर्कर और एक लेजेंड में।

अक्सर हमें ना बोलने में डर लगता है। हमें लगता है कि अगर बॉस को मना किया तो नौकरी चली जाएगी। पर सच तो यह है कि हर चीज को हां बोलने वाले लोग कभी क्वालिटी नहीं दे पाते। अगर आप एक साथ पांच शादियों में जाने की कोशिश करेंगे तो आप किसी भी शादी का खाना शांति से नहीं खा पाएंगे। आप बस ट्रैफिक में फंसे रहेंगे। वर्क लाइफ में भी यही होता है। आप बस काम के ट्रैफिक में फंसे रहते हैं। कम काम चुनने का मतलब आलस नहीं है। यह एक बहुत बड़ी स्ट्रेटजी है।

जब आप कम काम चुनते हैं तो आपके पास सोचने का वक्त होता है। आप उस काम को बेहतर बनाने के नए तरीके ढूंढ सकते हैं। आप उसमें वो बारीकियां देख सकते हैं जो दूसरे नहीं देख पाते। गधे की तरह मेहनत करने वाले लोग बस लकीर के फकीर बने रहते हैं। वो बस टास्क पूरे करते हैं पर वैल्यू क्रिएट नहीं करते। दुनिया टास्क पूरे करने वालों को नहीं बल्कि वैल्यू क्रिएट करने वालों को पैसा देती है। इसलिए आज से ही अपनी टू डू लिस्ट को आधा कर दीजिए।

क्या आप तैयार हैं उन फालतू के कामों को कचरे में फेंकने के लिए। क्या आप तैयार हैं उस एक काम पर फोकस करने के लिए जो आपकी लाइफ बदल सकता है। ज्यादा काम करना बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी है। स्मार्ट लोग अपनी एनर्जी बचाते हैं और सही जगह लगाते हैं। जब आप कम चीजों पर फोकस करते हैं तो आप उनमें मास्टर बन जाते हैं। और मास्टर की डिमांड हमेशा मार्केट में सबसे ज्यादा होती है।


लेसन २ : पी २ पी यानी परपस और पैशन (P2P - Purpose and Passion)

पहले लेसन में हमने सीखा कि काम कम करो पर जो करो उसमें जान लगा दो। पर सवाल यह है कि उस काम को करने की हिम्मत और आग कहाँ से आएगी। यहाँ आता है मोर्टन हैनसेन का दूसरा सबसे क्रांतिकारी लेसन यानी पी २ पी। इसका मतलब है पैशन और परपस का एक ऐसा मिलन जो आपको थकने नहीं देगा। आज के दौर में हर कोई कहता है कि फॉलो योर पैशन। पर सिर्फ पैशन के पीछे भागना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल की फरारी चलाना। दिखने में बहुत कूल है पर कहीं पहुँचती नहीं है।

पैशन का मतलब है वो काम जो आपको खुशी देता है। लेकिन परपस का मतलब है वो काम जिससे दूसरों की लाइफ में कोई वैल्यू जुड़ती है। टॉप परफॉर्मर्स सिर्फ वही काम नहीं करते जो उन्हें पसंद है। वो यह भी देखते हैं कि उनके काम से दुनिया को क्या मिल रहा है। सोचिए एक ऐसे शेफ के बारे में जिसे खाना बनाना बहुत पसंद है। यह उसका पैशन है। पर अगर वो सिर्फ अपने लिए खाना बनाए तो वो सिर्फ एक शौक है। लेकिन जब वो दूसरों का पेट भरने और उन्हें खुशी देने के लिए खाना बनाता है तो वो उसका परपस बन जाता है। जब पैशन और परपस मिलते हैं तो आप सिर्फ काम नहीं करते बल्कि आप एक मिशन पर होते हैं।

हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जो कहते हैं कि मुझे मेरा काम पसंद नहीं है। वो रोज सुबह ऑफिस ऐसे जाते हैं जैसे किसी ने उन्हें जेल की सजा सुनाई हो। क्यों। क्योंकि उनके पास कोई परपस नहीं है। वो सिर्फ सैलरी के लिए काम कर रहे हैं। अगर आप सिर्फ पैसों के लिए काम करेंगे तो आप हमेशा एक थके हुए इंसान ही रहेंगे। आपको अपने काम में वो वजह ढूंढनी होगी जो पैसों से बड़ी हो। क्या आपका काम किसी की प्रॉब्लम सॉल्व कर रहा है। क्या आप अपनी कंपनी को बेहतर बना रहे हैं। जब आप दूसरों की मदद करने का मकसद ढूंढ लेते हैं तो आपकी परफॉरमेंस अपने आप रॉकेट की तरह ऊपर जाती है।

सिर्फ पैशन वाले लोग अक्सर जल्दी हार मान लेते हैं। जैसे ही काम मुश्किल होता है उनका पैशन ठंडा पड़ जाता है। वो कहते हैं कि शायद यह मेरे लिए नहीं बना है। पर जिस इंसान के पास परपस होता है वो मुश्किलों को चीर कर आगे निकलता है। उसे पता है कि उसका काम जरूरी है। वो जानता है कि उसके रुकने से दूसरों का नुकसान होगा। यही वो जिद है जो एक आम इंसान को ग्रेट बनाती है। आपको खुद से पूछना होगा कि क्या आपका काम सिर्फ आपकी जेब भर रहा है या किसी का भला भी कर रहा है।

लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या हमें अपनी पसंद का काम छोड़ देना चाहिए। बिल्कुल नहीं। लेकिन अपनी पसंद को दूसरों की जरूरत से जोड़ना सीखिए। अगर आपको कोडिंग पसंद है तो ऐसी ऐप बनाइए जो लोगों का समय बचाए। अगर आपको बात करना पसंद है तो लोगों को मोटिवेट करिए। जब आप अपनी खुशी और दूसरों की भलाई को मिला देते हैं तो आप कभी बर्न आउट नहीं होते। आप ऑफिस में सबसे ज्यादा एनर्जेटिक इंसान बन जाते हैं। और यकीन मानिए ऐसे लोगों को दुनिया सिर आँखों पर बिठाती है।


लेसन ३ : लर्निंग लूप्स (Learning Loops)

अब तक आपने काम कम करना सीख लिया और मकसद भी ढूंढ लिया। पर क्या इतना काफी है। बिल्कुल नहीं। अगर आप वही पुराने तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप कल भी वहीं रहेंगे जहाँ आज हैं। मोर्टन हैनसेन का तीसरा और सबसे प्रैक्टिकल लेसन है लर्निंग लूप्स। यह लेसन उन लोगों के लिए है जो सोचते हैं कि दस साल का एक्सपीरियंस मतलब दस साल की ग्रोथ। असल में बहुत से लोग एक ही साल के एक्सपीरियंस को दस बार दोहराते हैं। वो बस कोल्हू के बैल की तरह एक ही चक्कर काटे जा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि वो चाँद पर पहुँच जाएंगे।

लर्निंग लूप का मतलब है अपने काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना और हर हिस्से पर फीडबैक लेना। टॉप परफॉर्मर्स सिर्फ काम खत्म नहीं करते बल्कि वो हर टास्क के बाद खुद से पूछते हैं कि इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता था। सोचिए एक ऐसे सेल्समैन के बारे में जो रोज सौ कॉल करता है पर एक भी सेल नहीं होती। वो हर रोज वही घिसी-पिटी स्क्रिप्ट बोलता है। वो मेहनत तो बहुत कर रहा है पर सुधार जीरो है। वहीं एक स्मार्ट सेल्समैन हर कॉल के बाद अपनी गलती पकड़ता है। वो देखता है कि कस्टमर ने कहाँ फोन काटा। वो अपनी पिच बदलता है। इसे कहते हैं लर्निंग लूप में रहना।

हमारे समाज में गलती करने को पाप माना जाता है। बचपन से हमें सिखाया गया है कि फेल मत होना। पर मोर्टन कहते हैं कि अगर आप गलती नहीं कर रहे तो आप सीख भी नहीं रहे। लर्निंग लूप में आप छोटी गलतियाँ करते हैं और उनसे तुरंत सीखते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप पहली बार साइकिल चलाना सीखते हैं। आप गिरते हैं और फिर समझ जाते हैं कि बैलेंस कैसे बनाना है। पर ऑफिस में लोग गिरने के डर से साइकिल ही नहीं चलाते। वो बस पैदल चलते रहते हैं और सोचते हैं कि वो रेस जीत जाएंगे।

इस प्रोसेस को अपनी लाइफ में लाने के लिए आपको बहुत बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं है। बस रोज पंद्रह मिनट निकालिए और अपने दिन भर के काम को एनालाइज कीजिए। क्या आपने कोई ईमेल बेहतर लिखा। क्या आपने मीटिंग में अपनी बात सही से रखी। अगर नहीं तो कल उसे कैसे बदलेंगे। जो लोग फीडबैक से डरते हैं वो कभी आगे नहीं बढ़ पाते। फीडबैक कोई गाली नहीं है बल्कि यह एक तोहफा है जो आपको आपकी कमियां बताता है। जब आप अपनी कमियों को गले लगाते हैं तभी आप उन्हें ताकत में बदल पाते हैं।

लर्निंग लूप्स आपको एक एक्सपर्ट बनाते हैं। जब आप हर दिन केवल एक परसेंट सुधार करते हैं तो साल के अंत में आप एक बिल्कुल नए और बेहतर इंसान बन चुके होते हैं। टॉप परफॉर्मर्स इसी वजह से कम समय में ज्यादा काम कर लेते हैं क्योंकि वो अपनी पुरानी गलतियों को नहीं दोहराते। वो जानते हैं कि गधे की तरह मेहनत करने से ज्यादा जरूरी है सही दिशा में छोटे-छोटे कदम बढ़ाना। तो क्या आप तैयार हैं अपनी घिसी-पिटी आदतों को छोड़कर हर दिन कुछ नया सीखने के लिए। याद रखिए ग्रोथ ऑफिस की कुर्सी पर बैठने से नहीं बल्कि दिमाग की खिड़कियां खोलने से आती है।


तो दोस्तों, क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सिर्फ बिजी दिखने का नाटक करते हैं या फिर आप वाकई कुछ बड़ा करना चाहते हैं। आज ही अपने काम की लिस्ट उठाएं और उन चीजों को काट दें जो आपको पीछे खींच रही हैं। अपना परपस ढूंढें और लर्निंग लूप्स का हिस्सा बनें। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो ऑफिस में सबसे ज्यादा ओवरटाइम करता है पर फिर भी दुखी रहता है। आपकी एक शेयरिंग किसी का करियर बचा सकती है। नीचे कमेंट में बताएं कि इन ३ लेसन में से आप सबसे पहले कौन सा अपनाने वाले हैं।

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