The Outsourcing Revolution (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अकेले ही पूरी दुनिया का बोझ उठाने की कोशिश कर रहे हैं और अंत में गधे की तरह थक कर सो जाते हैं। बधाई हो आप अपनी लाइफ और बिजनेस दोनों को बर्बाद करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना रहे हैं। बिना आउटसोर्सिंग के आप सिर्फ मेहनत कर रहे हैं तरक्की नहीं।

आज के इस आर्टिकल में हम माइकल कोर्बेट की बुक से वह राज जानेंगे जो आपको एक थके हुए मजदूर से एक स्मार्ट लीडर बना देंगे। हम देखेंगे कि कैसे सही काम को सही इंसान को सौंपकर आप अपनी ग्रोथ की रफ़्तार को दस गुना बढ़ा सकते हैं।


लेसन १ : अपनी असली ताकत पहचानिए और बाकी सब कूड़ा बाहर फेंकिए

क्या आपको भी लगता है कि आप सुपरमैन के सगे भाई हैं। सुबह उठकर ईमेल का जवाब देना फिर ऑफिस की फाइलें ठिकाने लगाना और शाम को घर का राशन लाना। अगर आप यह सब अकेले कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप बिजनेस नहीं चला रहे बल्कि खुद को सजा दे रहे हैं। माइकल कोर्बेट अपनी बुक में बहुत ही कड़वा लेकिन सच बोलते हैं। वह कहते हैं कि हर इंसान और हर कंपनी के पास कुछ खास हुनर होता है जिसे कोर कॉम्पिटेंसी कहते हैं। यह वही चीज है जिसमें आप दुनिया में सबसे बेस्ट हो सकते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि हम उस एक बेस्ट काम पर ध्यान देने के बजाय दस ऐसे फालतू कामों में उलझे रहते हैं जिनसे हमारा दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं होना चाहिए।

सोचिए, एक बहुत बड़ा शेफ है जो दुनिया की सबसे बेहतरीन बिरयानी बनाता है। अब अगर वह शेफ अपनी बिरयानी बनाने के बजाय दुकान का झाड़ू लगाने और ग्राहकों के बर्तन धोने में अपना सारा टाइम निकाल दे तो क्या होगा। उसकी बिरयानी की क्वालिटी गिर जाएगी और धीरे धीरे उसके कस्टमर भाग जाएंगे। यही हाल आज के यंग एंटरप्रेन्योर्स का है। वे ग्राफिक डिजाइन भी खुद करेंगे सोशल मीडिया पोस्ट भी खुद डालेंगे और अकाउंट्स भी खुद संभालेंगे। भाई अगर सब तुम ही करोगे तो वह जो तुम्हारा असली टैलेंट है जिसे लोग खरीदने आए हैं वह कहां जाएगा।

सच्चाई तो यह है कि हम भारतीय लोगों को लगता है कि अगर हम किसी काम के लिए दूसरे को पैसे देंगे तो हम लुट जाएंगे। हम सोचते हैं कि यार यह 500 रुपये मैं बचा लेता हूं और खुद ही यह डिजाइन बना लेता हूं। लेकिन आप यह भूल जाते हैं कि उस 500 रुपये को बचाने के चक्कर में आपने अपने कीमती 5 घंटे बर्बाद कर दिए। उन 5 घंटों में आप शायद 5000 रुपये का नया क्लाइंट ला सकते थे। यह वही गरीबी वाली मानसिकता है जो हमें कभी बड़ा बनने नहीं देती।

आउटसोर्सिंग का पहला नियम यही है कि आप अपनी वैल्यू को पहचानें। अगर आपकी एक घंटे की कीमत 2000 रुपये है तो ऐसा कोई भी काम खुद मत करिए जो मार्केट में 500 रुपये में हो सकता है। यह कोई आलस नहीं है बल्कि यह एक स्मार्ट कैलकुलेशन है। जब आप छोटे छोटे और सिरदर्द वाले काम दूसरों को सौंप देते हैं तो आपका दिमाग खाली होता है। उस खाली दिमाग में ही बड़े आइडियाज आते हैं। जब तक आप फाइलों के नीचे दबे रहेंगे तब तक आप ऊपर उठने का सपना भी नहीं देख सकते। इसलिए आज ही अपनी लिस्ट बनाइए और देखिए कि कौन से ऐसे काम हैं जो आपको तरक्की करने से रोक रहे हैं। उन कामों को लात मारिए और किसी एक्सपर्ट को पकड़ा दीजिए। तभी आप असली मायने में एक लीडर बन पाएंगे वरना जिंदगी भर खुद के ही ऑफिस में एक क्लर्क बनकर रह जाएंगे।


लेसन २ : कंजूसी छोड़िए और क्वालिटी पर दांव लगाइए

ज्यादातर लोग आउटसोर्सिंग का नाम सुनते ही अपनी जेब पर हाथ रख लेते हैं। उनको लगता है कि आउटसोर्सिंग का मतलब है किसी सस्ते से फ्रीलांसर को पकड़ना और उससे कोल्हू के बैल की तरह काम करवाना। अगर आप भी यही सोच रहे हैं कि कम पैसे देकर आप दुनिया जीत लेंगे तो आप गलत नहीं बहुत गलत हैं। माइकल कोर्बेट कहते हैं कि आउटसोर्सिंग का असली मकसद पैसा बचाना नहीं बल्कि उस काम की क्वालिटी को वहां तक ले जाना है जहां आप अकेले कभी नहीं पहुंच सकते थे।

मान लीजिए आपको अपने बिजनेस के लिए एक वेबसाइट बनवानी है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला यह कि आप अपने किसी दूर के रिश्तेदार के लड़के को पकड़ें जिसने कल ही कंप्यूटर चलाना सीखा है और उसे 2000 रुपये थमा दें। दूसरा रास्ता यह है कि आप एक प्रोफेशनल एजेंसी या एक्सपर्ट को ढूंढें जो आपसे थोड़े ज्यादा पैसे ले लेकिन आपको एक वर्ल्ड क्लास वेबसाइट बनाकर दे। अब अगर आप कंजूसी के चक्कर में उस रिश्तेदार के लड़के को चुनते हैं तो बधाई हो। आपकी वेबसाइट ऐसी दिखेगी जैसे 1990 के दशक का कोई सरकारी फॉर्म हो। कस्टमर आपकी साइट पर आएगा और डर के मारे भाग जाएगा। आपने पैसे तो बचा लिए लेकिन अपना पूरा बिजनेस दांव पर लगा दिया।

सफल लोग जानते हैं कि हर फील्ड का एक उस्ताद होता है। आउटसोर्सिंग का मतलब है उन उस्तादों की फौज खड़ी करना। जब आप किसी एक्सपर्ट को काम देते हैं तो आप सिर्फ उसका समय नहीं खरीदते बल्कि उसका सालों का तजुर्बा और उसकी गलतियों से सीखी हुई समझ भी खरीदते हैं। एक प्रोफेशनल बंदा वह काम 2 घंटे में कर देगा जिसे करने में आपको 2 हफ्ते लग जाते और फिर भी रिजल्ट कचरा ही आता।

हमारे यहाँ एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि अगर काम महंगा है तो वह बेकार है। भाई साहब सस्ता रोए बार बार और महंगा रोए एक बार। आउटसोर्सिंग को एक खर्च की तरह मत देखिए बल्कि इसे एक इन्वेस्टमेंट की तरह देखिए। जब आप किसी काम को आउटसोर्स करते हैं तो आप असल में अपनी कंपनी की क्षमता को बढ़ा रहे होते हैं। आप एक साथ दस जगहों पर मौजूद हो सकते हैं क्योंकि आपके लिए दस अलग अलग एक्सपर्ट्स काम कर रहे हैं।

सोचिए अगर एलन मस्क खुद ही रॉकेट के नट बोल्ट कसने बैठ जाते तो क्या वह कभी मंगल ग्रह पर जाने की सोच पाते। उन्होंने दुनिया के बेहतरीन इंजीनियर्स को काम सौंपा ताकि वह खुद बड़े विजन पर काम कर सकें। आपको भी यही करना है। छोटी सोच और फालतू की कंजूसी आपको कभी उस मुकाम पर नहीं ले जाएगी जहां का आपने सपना देखा है। क्वालिटी के साथ समझौता करना मतलब अपने ब्रांड के साथ गद्दारी करना है। इसलिए जब भी काम बाहर दें तो यह न देखें कि कितना बच रहा है बल्कि यह देखें कि कितना बेहतर हो रहा है। अगर काम की क्वालिटी बढ़ेगी तो पैसा अपने आप पीछे पीछे भागकर आएगा।


लेसन ३ : पार्टनरशिप का हाथ थामिए और भरोसे का किला बनाइए

अगर आप यह सोचते हैं कि किसी को काम सौंप दिया और अब आपका काम खत्म हो गया तो आप गहरी नींद में हैं। आउटसोर्सिंग का मतलब यह नहीं है कि आपने किसी को पैसे दिए और अब वह जादू की छड़ी घुमाकर आपका सारा काम परफेक्ट कर देगा। माइकल कोर्बेट हमें समझाते हैं कि आउटसोर्सिंग असल में एक पार्टनरशिप है। यह वैसा ही है जैसे किसी के साथ शादी करना। अगर आप अपने पार्टनर पर शक करेंगे या उसे हर छोटी बात पर टोकेंगे तो रिश्ता टूटना तय है।

अक्सर लोग क्या करते हैं। उन्होंने किसी एक्सपर्ट को काम दिया और फिर हर दस मिनट में उसे फोन करके पूछेंगे कि भाई कितना हुआ। भाई साहब अगर आपको उस पर इतना ही शक था तो काम दिया ही क्यों। इसे कहते हैं माइक्रो मैनेजमेंट और यह आउटसोर्सिंग का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब आप किसी को काम देते हैं तो उसे आजादी भी दीजिए। उसे अपने विजन का हिस्सा बनाइए। उसे सिर्फ एक नौकर की तरह मत देखिए बल्कि उसे अपना एक अहम हिस्सा मानिए।

जब तक सामने वाले को यह महसूस नहीं होगा कि यह प्रोजेक्ट उसका भी है तब तक वह अपनी जान नहीं लगाएगा। भरोसा एक ऐसी चीज है जो रातों रात नहीं बनती लेकिन अगर एक बार बन जाए तो आपका बिजनेस रॉकेट की तरह उड़ सकता है। सोचिए अगर आप अपने फ्रीलांसर को यह समझा सकें कि आपकी जीत में उसकी भी जीत है तो वह अपना खून पसीना एक कर देगा।

सफल बिजनेस वह नहीं होते जो सबको दबाकर रखते हैं बल्कि वह होते हैं जो सबको साथ लेकर बढ़ते हैं। आउटसोर्सिंग में कम्युनिकेशन यानी बातचीत का बहुत बड़ा रोल है। अपनी बातें साफ रखिए। उन्हें बताइए कि आपको क्या चाहिए और कब तक चाहिए। लेकिन साथ ही उनके सुझावों को भी सुनिए। हो सकता है जिस काम को आप एक तरीके से सोच रहे हों आपका पार्टनर उसे और भी बेहतर तरीके से करने का रास्ता बता दे।

अंत में याद रखिए कि आउटसोर्सिंग कोई भागने का रास्ता नहीं है बल्कि यह एक साथ मिलकर बड़ी मंजिल पाने का जरिया है। जब आप भरोसे का एक मजबूत सिस्टम बना लेते हैं तो आप अकेले नहीं होते। आपके पास एक ऐसी टीम होती है जो आपके सोते समय भी आपके लिए काम कर रही होती है। यही वह राज है जो एक छोटे से स्टार्टअप को एक बहुत बड़ी कंपनी बना देता है।


अब वक्त आ गया है कि आप उस मजदूर वाली जैकेट को उतारें और एक असली लीडर की तरह सोचना शुरू करें। अपनी ताकत को पहचानिए और उन कामों को दूसरों को सौंपिए जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। आज ही कमेंट्स में मुझे बताइए कि ऐसा कौन सा एक काम है जिसे आप इसी वक्त आउटसोर्स करना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो दिन भर काम में डूबा रहता है लेकिन फिर भी आगे नहीं बढ़ पा रहा। चलिए साथ मिलकर इस आउटसोर्सिंग रेवोल्यूशन का हिस्सा बनते हैं।

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