आप अकेले ही पूरी दुनिया जीत लेंगे। अगर आपको भी यही गलतफहमी है तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। बिना पार्टनरशिप के सक्सेस ढूंढना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी चलाना। अकेले भागकर थक जाओगे पर पहुंचोगे कहीं नहीं।
आज के इस कॉम्पिटिशन वाले दौर में अगर आप सिर्फ अपने बारे में सोच रहे हैं तो आप बहुत बड़ी ग्रोथ और बड़े मौके मिस कर रहे हैं। जोनाथन टिश की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे सही कोलबोरेशन आपकी लाइफ और बिजनेस को पूरी तरह बदल सकता है।
लेसन १ : विन विन पार्टनरशिप की ताकत
आजकल के दौर में हर किसी को लगता है कि वह सुपरमैन है। सब कुछ अकेला कर लेगा। पर सच तो यह है कि अकेले आप सिर्फ सरदर्द और थकान हासिल कर सकते हैं। जोनाथन टिश अपनी बुक में साफ कहते हैं कि असली पावर अकेले चलने में नहीं बल्कि साथ मिलकर चलने में है। लेकिन यहाँ एक कैच है। पार्टनरशिप का मतलब यह नहीं कि आप किसी का कंधा इस्तेमाल करें और अपना काम निकाल लें। यह कोई मतलबी रिश्ते वाली बात नहीं हो रही है।
असली पार्टनरशिप वह है जिसे हम विन विन सिचुएशन कहते हैं। मतलब आपका भी फायदा और सामने वाले का भी फायदा। अगर आप यह सोच रहे हैं कि सामने वाले को चूना लगाकर आप अमीर बन जाएंगे तो आप गलत रास्ते पर हैं। मान लीजिए आप एक बहुत अच्छे शेफ हैं और आपको दुनिया का सबसे बेहतरीन समोसा बनाना आता है। अब आप अकेले ही आलू छील रहे हैं। अकेले ही तल रहे हैं और अकेले ही गल्ले पर बैठकर हिसाब भी देख रहे हैं। नतीजा क्या होगा। शाम तक आपके पास सिर्फ पैरों में सूजन और जले हुए हाथ होंगे।
अब इमेजिन करिए कि आपने एक ऐसे इंसान से हाथ मिलाया जो मार्केटिंग का किंग है। आपने उससे कहा कि भाई तू समोसे बेच मैं सिर्फ बनाऊंगा। अब आप दोनों का टैलेंट मिल गया। आप समोसे की क्वालिटी पर ध्यान दे रहे हैं और वह सेल्स पर। इसे कहते हैं पार्टनरशिप की असली ताकत। इसमें दोनों जीत रहे हैं। अगर आप सिर्फ अपना फायदा देखेंगे तो सामने वाला कल आपके साथ काम नहीं करेगा। और फिर आप वापस वही पुराने अकेले शेफ बन जाएंगे जो खुद ही समोसा खाता है और खुद ही रोता है।
पार्टनरशिप में ईगो को साइड में रखना पड़ता है। बहुत से लोग इसलिए फेल हो जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सारा क्रेडिट उन्हें ही मिलना चाहिए। भाई क्रेडिट खाकर पेट नहीं भरता। पैसा और ग्रोथ साथ मिलकर काम करने से आती है। जब आप दूसरे की ग्रोथ की चिंता करते हैं तो कुदरत आपकी ग्रोथ का रास्ता खुद खोल देती है। यह लेसन हमें सिखाता है कि अगर आपको बहुत दूर तक जाना है तो हाथ पकड़ना सीखिए। अकेले भागने वाले अक्सर बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
जब दो लोग एक ही विजन के साथ मिलते हैं तो एक और एक ग्यारह हो जाते हैं। जो काम आप अकेले छह महीने में करते वह पार्टनरशिप में दो महीने में खत्म हो सकता है। यह टाइम बचाने का सबसे स्मार्ट तरीका है। क्या आप अब भी अपनी छोटी सी दुनिया में अकेले राजा बनकर घूमना चाहते हैं या फिर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं। चॉइस आपकी है। पर याद रहे बिना विन विन के कोई भी रिश्ता ज्यादा दिन नहीं टिकता।
लेसन २ : कम्युनिटी और स्टेकहोल्डर्स का साथ
अक्सर लोग बिजनेस को एक युद्ध की तरह देखते हैं। जहाँ उन्हें लगता है कि सबको हराकर ही वह जीत सकते हैं। लेकिन जोनाथन टिश कहते हैं कि असली लीडर वह नहीं जो सबको पीछे छोड़ दे। असली लीडर वह है जो सबको साथ लेकर आगे बढ़े। इसे ही वह कोलबोरेटिव लीडरशिप कहते हैं। सोचिए अगर आप एक मोहल्ले में एक बहुत बड़ा और आलीशान बंगला बना लें। लेकिन उस मोहल्ले की सड़कें टूटी हों और वहाँ गंदगी फैली हो। क्या आपके उस करोड़ों के बंगले की कोई वैल्यू रह जाएगी। बिल्कुल नहीं।
ठीक यही बात आपके काम और करियर पर लागू होती है। अगर आप सिर्फ अपने बैंक बैलेंस के बारे में सोचते हैं और उन लोगों को भूल जाते हैं जिनकी वजह से आप वहाँ पहुंचे हैं। तो आपकी सक्सेस एक ताश के पत्तों के महल की तरह है जो कभी भी गिर सकती है। बुक में बताया गया है कि आपको अपने स्टेकहोल्डर्स का ख्याल रखना चाहिए। अब ये स्टेकहोल्डर्स कौन हैं। ये आपके एम्प्लॉई हैं। आपके कस्टमर हैं। और यहाँ तक कि आपके पड़ोसी और समाज भी हैं।
इमेजिन करिए एक जिम ओनर को। वह चाहता है कि उसके पास सबसे ज्यादा मेंबर्स आएं। अब एक तरीका तो यह है कि वह खूब सारा पैसा एड्स पर खर्च करे। दूसरा तरीका यह है कि वह अपने आसपास के जूस वाले और स्पोर्ट्स शूज बेचने वाले दुकानदार से दोस्ती कर ले। वह उनसे कहे कि भाई अगर कोई तेरे पास आए तो उसे मेरे जिम का वाउचर देना। और अगर कोई मेरे पास आए तो मैं उसे तेरी दुकान पर भेजूंगा। इसे कहते हैं कम्युनिटी को साथ लेकर चलना। इसमें किसी का नुकसान नहीं है। बस सब एक दूसरे की मदद कर रहे हैं।
आजकल के इन्फ्लुएंसर जमाने में हम अक्सर खुद को एक ब्रांड समझने लगते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमारे पीछे जो टीम खड़ी है उनकी भी अपनी खुशियां और दुख हैं। अगर आप अपने एम्प्लॉई की सैलरी काट कर अपना नया आईफोन ले रहे हैं तो आप एक बहुत बुरे पार्टनर हैं। जो इंसान अपने साथ काम करने वालों को इज्जत और सही रिवॉर्ड नहीं दे सकता। वह कभी भी बड़ा एम्पायर खड़ा नहीं कर सकता। लोग आपके लिए काम तभी करेंगे जब उन्हें लगेगा कि आपकी तरक्की में उनकी भी तरक्की छुपी है।
सफलता का मतलब सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। सफलता का मतलब है एक ऐसा सिस्टम बनाना जहाँ हर कोई खुश हो। जब आप समाज के लिए कुछ करते हैं तो समाज भी आपको सपोर्ट करता है। जोनाथन टिश ने होटल इंडस्ट्री में यही किया। उन्होंने सिर्फ कमरे नहीं बेचे। उन्होंने उस शहर और उस कम्युनिटी को बेहतर बनाने में हाथ बटाया जहाँ उनके होटल्स थे। नतीजा यह हुआ कि लोगों ने उन्हें सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं बल्कि अपना माना।
अगर आप आज भी यह सोचकर बैठे हैं कि मैं तो बस अपना काम करूंगा और दुनिया जाए भाड़ में। तो दोस्त तैयार रहिएगा। क्योंकि जब आपका बुरा वक्त आएगा तब भाड़ में जाने वाली वही दुनिया आपके काम नहीं आएगी। इसलिए हाथ बढ़ाना सीखिए। लोगों के साथ जुड़ना सीखिए। क्योंकि जब पूरी कम्युनिटी आपके साथ खड़ी होती है। तो बड़े से बड़ा तूफान भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
लेसन ३ : ट्रस्ट और ट्रांसपेरेंसी का महत्व
पार्टनरशिप करना सुनने में तो बहुत कूल लगता है। ऐसा लगता है जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म की जोड़ी बन रही हो। लेकिन हकीकत में यह किसी शादी से कम नहीं है। और किसी भी रिश्ते की जान होती है उसका भरोसा। जोनाथन टिश कहते हैं कि बिना ट्रस्ट के पार्टनरशिप वैसी ही है जैसे बिना नेटवर्क के स्मार्टफोन। दिखने में तो बहुत चमक धमक वाला लगेगा पर काम एक ढेले का नहीं करेगा।
आजकल लोग हाथ मिलाने से पहले वकील के पास जाते हैं और सौ पन्नों का कॉन्ट्रैक्ट बनवाते हैं। अच्छी बात है। कानून अपनी जगह है। लेकिन अगर आपके दिल में चोर है तो कोई भी कागज आपको सक्सेसफुल नहीं बना सकता। असल में बिजनेस में सबसे बड़ी करेंसी पैसा नहीं बल्कि आपकी जुबान होती है। अगर आपने कहा है कि काम मंडे को होगा तो वो मंडे को ही होना चाहिए। अगर आप बार बार बहाने बनाएंगे तो सामने वाला समझ जाएगा कि आप सिर्फ बातें बनाने में उस्ताद हैं।
मान लीजिए आपका एक दोस्त है जिसने आपके साथ मिलकर एक नया स्टार्टअप शुरू किया। अब आपको लगता है कि आप तो बहुत स्मार्ट हैं। आपने कुछ खर्चे छुपा लिए या कुछ क्लाइंट्स की जानकारी उसे नहीं दी। आपको लगेगा कि आपने एक्स्ट्रा पैसे बचा लिए। लेकिन जिस दिन उसे इस बात की भनक लगेगी। उस दिन सिर्फ आपका पार्टनर नहीं जाएगा बल्कि मार्केट में आपकी इज्जत का कचरा हो जाएगा। और यकीन मानिए इस डिजिटल जमाने में बुरी खबर आग की तरह फैलती है। एक बार भरोसा टूटा तो समझो खेल खत्म।
ट्रांसपेरेंसी का मतलब है कि सब कुछ साफ होना चाहिए। अगर बिजनेस में लॉस हो रहा है तो बैठकर बात करो। अगर कोई गलती हो गई है तो उसे मानो। लोग अक्सर अपनी गलतियां छुपाने के लिए और दस झूठ बोलते हैं। ये झूठ का पहाड़ एक दिन आपके सिर पर ही गिरेगा। जोनाथन टिश समझाते हैं कि जब आप अपने पार्टनर्स के साथ ईमानदार होते हैं। तो मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी वो आपका साथ नहीं छोड़ते।
सक्सेस का मतलब यह नहीं कि आप कितने चालाक हैं। सक्सेस का मतलब है कि कितने लोग आप पर आंख बंद करके भरोसा कर सकते हैं। जब आपकी इमेज एक ईमानदार इंसान की बन जाती है। तो बड़े बड़े इन्वेस्टर्स और पार्टनर्स खुद आपके पास चलकर आते हैं। उन्हें पता होता है कि इस बंदे के साथ पैसा और वक्त दोनों सेफ हैं। इसलिए अगर आप लॉन्ग टर्म की गेम खेलना चाहते हैं। तो अपनी ईमानदारी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाइए।
अंत में बस इतना ही कहूंगा कि दुनिया बहुत छोटी है। आज आप जिसे धोखा दे रहे हैं कल शायद आपको उसी की जरूरत पड़ जाए। इसलिए हाथ मिलाइए तो दिल से मिलाइए। पार्टनरशिप को सिर्फ एक डील मत समझिए। इसे एक जिम्मेदारी समझिए। जब आप और आपके पार्टनर के बीच का भरोसा मजबूत होगा। तो आप मिलकर आसमान भी छू सकते हैं।
तो दोस्तों, अकेले चलना बंद करिए और साथ मिलकर कुछ बड़ा क्रिएट करिए। आज ही अपने आसपास नजर घुमाइए और देखिए कि कौन ऐसा इंसान है जिसके साथ मिलकर आप एक विन विन सिचुएशन बना सकते हैं। याद रखिए। असली पावर 'में' नहीं बल्कि 'हम' में है। अगर आपको यह लेसन पसंद आए तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करिए जिसे आप अपना पार्टनर बनाना चाहते हैं। कमेंट में बताइए कि क्या आप भी किसी पार्टनरशिप की तलाश में हैं। चलिए मिलकर आगे बढ़ते हैं।
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