क्या आप अभी भी फालतू के बहाने बना रहे हैं कि आपके पास बिजनेस शुरू करने के लिए करोड़ों रुपये नहीं हैं। बहुत बढ़िया। इसी सोच के साथ आप अपनी पूरी लाइफ गरीबी और एवरेज बने रहने में निकाल देंगे। सच तो यह है कि आपकी खाली जेब ही आपकी सबसे बड़ी ताकत थी जिसे आपने अपनी बेवकूफी में खो दिया।
आज हम डेमंड जॉन की मशहूर बुक द पावर ऑफ ब्रोक से यह सीखेंगे कि कैसे पैसा न होना आपके लिए एक वरदान साबित हो सकता है। हम ३ ऐसे जबरदस्त लेसन देखेंगे जो आपकी बिजनेस और लाइफ के प्रति सोच को पूरी तरह से बदल कर रख देंगे।
लेसन १ : खाली जेब आपकी सबसे बड़ी ताकत है
दोस्तो, हम में से ज्यादातर लोग यही रोना रोते रहते हैं कि भाई मेरे पास तो पैसा ही नहीं है वरना मैं भी अंबानी या मस्क बन जाता। पर क्या आपने कभी सोचा है कि बहुत ज्यादा पैसा होना कभी कभी आपकी बर्बादी का कारण भी बन सकता है। डेमंड जॉन कहते हैं कि जब आपके पास बैंक बैलेंस जीरो होता है तब आपका दिमाग सुपर कंप्यूटर की तरह काम करने लगता है। इसे ही वह द पावर ऑफ ब्रोक कहते हैं।
सोचिए आपके पास एक बड़ा प्रोजेक्ट है और हाथ में लाखों रुपये हैं। आप क्या करेंगे। आप फौरन एक आलीशान ऑफिस किराए पर लेंगे। महंगे फर्नीचर मंगवाएंगे और ऐसे दस लोगों को नौकरी पर रख लेंगे जिनकी शायद आपको जरूरत भी नहीं थी। नतीजा क्या होगा। कुछ ही महीनों में आपका सारा पैसा खत्म हो जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा कि बिजनेस चला क्यों नहीं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब जेब गर्म होती है तब हम दिमाग कम और पैसा ज्यादा चलाते हैं। हम अपनी गलतियों को नोटों की गड्डियों के पीछे छुपाने की कोशिश करते हैं।
अब जरा दूसरी तरफ देखिए। आपके पास एक रुपया भी नहीं है पर एक जबरदस्त आईडिया है। अब आप क्या करेंगे। आप अपनी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करेंगे। आप ऑफिस के बजाय किसी दोस्त के गैराज में या अपने बेड पर बैठकर काम करेंगे। आप मार्केटिंग के लिए लाखों के विज्ञापन नहीं देंगे बल्कि सोशल मीडिया पर जाकर खुद लोगों से बात करेंगे। आप ऐसे जुगाड़ लगाएंगे जिसके बारे में एक अमीर आदमी कभी सोच भी नहीं सकता। यही वह समय होता है जब आप असली बिजनेस सीखते हैं।
डेमंड जॉन खुद जब फूबू (FUBU) ब्रांड शुरू कर रहे थे तब उनके पास सिलाई मशीन खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने अपनी मां के घर को गिरवी रख दिया था। उस समय उनके पास फेल होने का कोई ऑप्शन ही नहीं था। जब आपके पीछे शिकारी कुत्ता पड़ा हो तब आप यह नहीं देखते कि आपके जूते ब्रांडेड हैं या नहीं। आप बस अपनी जान बचाने के लिए पूरी ताकत से भागते हैं। यही भूख आपको एक आम इंसान से एक लेजेंडरी एंटरप्रेन्योर बनाती है।
आजकल के स्टार्टअप कल्चर में लोग फंडिंग के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे वह कोई जादुई चिराग हो। पर याद रखिए पैसा केवल एक फ्यूल है। अगर आपकी गाड़ी का इंजन ही खराब है तो कितना भी पेट्रोल डाल लो वह आगे नहीं बढ़ेगी। कम पैसे में काम शुरू करना आपको यह सिखाता है कि बिजनेस की बारीकियाँ क्या हैं। आप हर एक पैसे की कीमत समझते हैं। आप अपने कस्टमर की असली जरूरतों को पहचानते हैं क्योंकि आपके पास उन्हें लुभाने के लिए महंगे गिफ्ट्स नहीं होते।
तो अगर आज आपकी जेब खाली है तो दुखी होने के बजाय जश्न मनाइए। आप उस पोजीशन में हैं जहाँ से आप बिना किसी डर के कुछ भी नया ट्राई कर सकते हैं। आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं है पर पाने के लिए पूरी दुनिया पड़ी है। अपनी इस मजबूरी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए। याद रखिए इतिहास अक्सर वही लोग रचते हैं जिनके पास शुरुआत में कुछ नहीं था बस एक जिद्द थी कि उन्हें कुछ बड़ा करना है।
लेसन २ : अपनी ऑथेंटिसिटी को अपना ब्रांड बनाएं
दोस्तो, क्या आपको भी लगता है कि ब्रांड बनाने के लिए आपको टीवी पर करोड़ों के विज्ञापन देने पड़ेंगे या किसी बड़े फिल्मी सितारे को हायर करना पड़ेगा। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप उसी पुरानी और थकी हुई सोच के शिकार हैं जिसने कई बिजनेस को डूबते देखा है। डेमंड जॉन इस बुक में एक बहुत ही पते की बात कहते हैं। वह कहते हैं कि जब आपके पास पैसा नहीं होता तब आपके पास सिर्फ एक चीज बचती है और वह है आपकी अपनी असलियत यानी आपकी ऑथेंटिसिटी। और यकीन मानिए आज के दौर में लोग ब्रांड से नहीं बल्कि इंसान से जुड़ना चाहते हैं।
आजकल के जमाने में लोग इतने चालाक हो गए हैं कि वह मीठी मीठी बातों और बनावटी विज्ञापनों को एक सेकंड में पहचान लेते हैं। अगर आप किसी बड़ी कंपनी की तरह व्यवहार करने की कोशिश करेंगे जिसके पास बहुत पैसा है तो लोग आप पर कभी भरोसा नहीं करेंगे। इसके बजाय अगर आप अपनी कहानी को ईमानदारी से लोगों के सामने रखेंगे तो वह आपके फैन बन जाएंगे। सोचिए डेमंड ने जब फूबू शुरू किया था तब उनके पास कोई मार्केटिंग टीम नहीं थी। उन्होंने बस एक ऐसी टीशर्ट बनाई जिसे उनके मोहल्ले के लोग पहनना चाहते थे। उन्होंने अपनी कम्युनिटी की भाषा में बात की और वही उनकी सबसे बड़ी मार्केटिंग बन गई।
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वह थोड़े ज्यादा प्रोफेशनल दिखेंगे या अपनी वेबसाइट को बहुत ज्यादा चमका देंगे तो लोग उन्हें सीरियसली लेंगे। पर भाई साहब सच तो यह है कि लोग आपकी वेबसाइट की चमक नहीं बल्कि आपके काम की सच्चाई देखते हैं। क्या आप अपने कस्टमर की प्रॉब्लम सच में सॉल्व कर रहे हैं या बस उनकी जेब काटने के चक्कर में हैं। जब आप खाली हाथ मार्केट में उतरते हैं तब आप दिखावा नहीं कर सकते। आपको अपनी मेहनत और अपनी ईमानदारी को ही अपना चेहरा बनाना पड़ता है। यही वह चीज है जो आपको उन बड़ी कंपनियों से अलग बनाती है जो बस रोबोट की तरह काम करती हैं।
जब लोग देखते हैं कि आप जमीन से जुड़े हुए हैं और बिना किसी तामझाम के मेहनत कर रहे हैं तो वह खुद आपकी मदद करना चाहते हैं। इसे कहते हैं अंडरडॉग इफेक्ट। लोग चाहते हैं कि वह छोटा लड़का जीते जो पूरी दुनिया से अकेले लड़ रहा है। यही वजह है कि जब आप अपनी स्ट्रगल को छुपाने के बजाय उसे गर्व से बताते हैं तो लोग आपके कस्टमर नहीं बल्कि आपके सपोर्टर बन जाते हैं। वह आपकी कहानी का हिस्सा बनना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि वह भी कह सकें कि हमने इस बंदे को तब सपोर्ट किया था जब इसके पास कुछ नहीं था।
इसलिए, अगर आपके पास ब्रांडिंग के लिए बजट नहीं है तो टेंशन मत लीजिए। आप खुद एक ब्रांड हैं। आपकी आवाज आपका विज्ञापन है। आपकी ईमानदारी आपकी पैकेजिंग है। फेसबुक या इंस्टाग्राम पर जाकर वो महंगे और बोरिंग पोस्ट डालने के बजाय अपनी असली कहानी शेयर कीजिए। बताइए कि आपने आज क्या सीखा और आप यह काम क्यों कर रहे हैं। जब आप दिल से बात करते हैं तो वह सीधे दूसरे के दिल तक पहुँचती है। बिना एक रुपया खर्च किए आप वह भरोसा कमा सकते हैं जो बड़ी बड़ी कंपनियां सालो में नहीं कमा पातीं।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे यह भूख आपको सफलता की उस ऊंचाई तक ले जाएगी जहाँ पैसा सिर्फ एक नंबर बनकर रह जाएगा। लेकिन उससे पहले यह समझ लीजिए कि आपकी सादगी ही आपकी सबसे बड़ी लग्जरी है।
लेसन ३ : हसल और भूख ही असली इन्वेस्टमेंट है
दोस्तो, क्या आपने कभी गौर किया है कि दुनिया के सबसे बड़े अविष्कार और सबसे बड़ी कंपनियां अक्सर एक छोटे से कमरे या गैराज से ही क्यों शुरू हुई। इसका जवाब बहुत सिंपल है और वह है भूख। डेमंड जॉन कहते हैं कि जब आपका पेट भरा होता है तब आप सो जाते हैं पर जब आप भूखे होते हैं तब आप शिकार पर निकलते हैं। बिजनेस की दुनिया में यह भूख ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। लोग कहते हैं कि पैसा पैसे को खींचता है पर सच तो यह है कि हसल ही सफलता को खींचती है।
आजकल के दौर में युवाओं को लगता है कि अगर उनके पास एक अच्छी डिग्री और कुछ लाख रुपये आ जाएं तो वह रातों रात स्टार बन जाएंगे। भाई साहब यह कोई लॉटरी का टिकट नहीं है जिसे आपने खरीदा और आप अमीर हो गए। बिजनेस एक मैराथन है और इस रेस में वही टिकता है जिसकी सांसों में कुछ कर गुजरने का जुनून होता है। जब आपके पास पैसा नहीं होता तब आप हर उस दरवाजे को खटखटाते हैं जहाँ से आपको एक छोटी सी उम्मीद भी दिखती है। आप दिन रात एक कर देते हैं क्योंकि आपको पता है कि अगर आज आपने काम नहीं किया तो कल आपके पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा।
डेमंड जॉन जब फूबू के लिए मार्केट में निकले थे तब वह खुद सड़कों पर जाकर अपनी बनाई हुई टोपियां बेचते थे। वह हर उस इंसान से मिलते थे जो उनकी मदद कर सकता था। उन्हें हजारों बार मना किया गया पर उनकी भूख ने उन्हें रुकने नहीं दिया। यही वह हसल है जो आपको एक आम सेल्समैन से एक दिग्गज बिजनेस टाइकून बना देती है। जब आप खुद जमीन पर उतरकर काम करते हैं तब आपको मार्केट की वह नब्ज पता चलती है जो एसी कमरों में बैठकर कभी समझ नहीं आती। आप सीखते हैं कि रिजेक्शन को कैसे हैंडल करना है और कैसे एक ना को हां में बदलना है।
अक्सर लोग अपनी किस्मत का रोना रोते हैं कि हमें सही मौका नहीं मिला। पर भाई मौका कभी चलकर आपके पास नहीं आता आपको उसे छीनना पड़ता है। और वह छीनने की ताकत सिर्फ उस इंसान में होती है जो ब्रोक है यानी जिसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। जब आप अपनी पूरी ताकत एक ही लक्ष्य पर लगा देते हैं तो पूरी कायनात आपको सफल बनाने में जुट जाती है। पर इसके लिए आपको अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा। आपको वह फालतू की पार्टियां और दोस्तों के साथ घंटों गप्पे लड़ाना छोड़ना होगा। आपको अपनी मेहनत को अपनी इबादत बनाना होगा।
याद रखिए पैसा तो आज है और कल नहीं पर जो स्किल और जो जज्बा आप इस हसल के दौरान सीखते हैं वह आपसे कोई नहीं छीन सकता। वह आपकी पर्सनालिटी का हिस्सा बन जाता है। एक बार जब आप जीरो से हीरो बनने का सफर तय कर लेते हैं तो आपको दोबारा कभी गरीबी का डर नहीं सताता। क्योंकि आपको पता है कि अगर आज सब कुछ खत्म भी हो जाए तो आप अपनी मेहनत के दम पर दोबारा सब कुछ खड़ा कर सकते हैं। यही असली पावर ऑफ ब्रोक है।
तो दोस्तो, द पावर ऑफ ब्रोक हमें यही सिखाती है कि हमारी कमियां ही हमारी सबसे बड़ी खूबियां बन सकती हैं। अगर आपकी जेब खाली है तो यह ऊपर वाले का इशारा है कि अब आपको अपने दिमाग का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। अपनी ऑथेंटिसिटी को अपनी ताकत बनाइए और अपनी भूख को कभी मरने मत दीजिए। उठिए और आज ही उस आईडिया पर काम शुरू कीजिए जिसे आप पैसों की कमी की वजह से टाल रहे थे।
अगर इस आर्टिकल ने आपकी सोच की खिड़की को थोड़ा सा भी खोला है तो इसे उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बजट का बहाना बनाकर बैठे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वह कौन सा आईडिया है जिसे आप आज से ही शुरू करने वाले हैं। याद रखिए आपकी शुरुआत छोटी हो सकती है पर आपकी सोच नहीं।
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