क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि वारेन बफेट सिर्फ किस्मत के धनी हैं। सच तो यह है कि आपकी खाली जेब का कारण आपकी खराब मैनेजमेंट स्किल्स हैं। बिना यह बुक पढ़े आप बस अंधेरे में हाथ पैर मार रहे हैं और अपनी मेहनत की कमाई को कचरे में फेंक रहे हैं।
इस आर्टिकल में हम जेम्स ओलाफलिन की शानदार किताब द रियल वारेन बफेट से ऐसे 3 लेसन्स सीखेंगे जो आपकी पैसे देखने की नजर बदल देंगे। चलिए जानते हैं कि कैसे आप भी बफेट की तरह अपना साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं।
लेसन १ : कैपिटल एलोकेशन की पावर
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके पड़ोस वाले अंकल दिन रात मेहनत करने के बाद भी वहीं के वहीं क्यों हैं और वारेन बफेट ऑफिस में बैठकर बस कोका कोला पीते हुए अरबों कमा लेते हैं। इसका जवाब मेहनत नहीं बल्कि कैपिटल एलोकेशन है। कैपिटल एलोकेशन का सीधा मतलब है कि आप अपने पैसे और समय को कहाँ इन्वेस्ट कर रहे हैं। बफेट कहते हैं कि एक अच्छा सीईओ वह नहीं है जो बहुत मेहनत करता है बल्कि वह है जो यह जानता है कि पैसा कहाँ लगाने से सबसे ज्यादा फायदा होगा।
सोचिये आपके पास दो दोस्त हैं। एक दोस्त वह है जो अपनी पूरी सैलरी पार्टी और नए आईफोन पर उड़ा देता है ताकि लोग उसे अमीर समझें। दूसरा दोस्त वह है जो उसी पैसे से एक छोटा सा साइड बिजनेस शुरू करता है या अच्छे स्टॉक्स खरीदता है। दस साल बाद पहला दोस्त आज भी ईएमआई के चक्कर में फंसा होगा और दूसरा शायद अपनी मर्सिडीज में घूम रहा होगा। इसे कहते हैं दिमाग का इस्तेमाल करना। बफेट ने बर्कशायर हैथवे को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी इसलिए नहीं बनाया कि वह बहुत ज्यादा काम करते थे। उन्होंने यह जादू इसलिए किया क्योंकि उन्होंने हमेशा वही पैसा लगाया जहाँ रिटर्न की उम्मीद सबसे ज्यादा थी।
हम में से ज्यादातर लोग अपनी लाइफ के सबसे बड़े रिसोर्स यानी समय को गलत जगह एलोकेट करते हैं। आप घंटों बैठकर सोशल मीडिया पर रील देखते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि आपके पास पैसे नहीं हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक फटे हुए थैले में पानी भरने की कोशिश कर रहे हों। बफेट की सफलता का राज यह है कि वह जानते हैं कि कब 'ना' कहना है। वह फालतू की मीटिंग्स में नहीं जाते और न ही वह हर चमकती हुई चीज के पीछे भागते हैं। वह सिर्फ उन चीजों पर फोकस करते हैं जो उनकी वेल्थ को बढ़ाती हैं।
रियल लाइफ में कैपिटल एलोकेशन को समझना है तो अपनी मम्मी से सीखिये। उनके पास महीने का बजट होता है। वह जानती हैं कि कितना पैसा खाने पर लगाना है और कितना इमरजेंसी के लिए बचाना है। अगर वह पूरा पैसा नए सूट पर खर्च कर देंगी तो घर में नमक के लाले पड़ जाएंगे। बिजनेस और लाइफ में भी यही नियम लागू होता है। अगर आप अपने बिजनेस का प्रॉफिट नए ऑफिस के फर्नीचर पर खर्च कर रहे हैं जबकि आपको मार्केटिंग की जरूरत है तो आप बहुत जल्द सड़क पर आने वाले हैं। बफेट ने कभी दिखावे के लिए पैसा खर्च नहीं किया। वह आज भी उसी पुराने घर में रहते हैं जो उन्होंने दशकों पहले खरीदा था। उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि उनका हर एक रुपया उनके लिए और दस रुपये कमाकर लाए।
अक्सर लोग अपनी गलतियों से नहीं सीखते और बार बार गलत जगह इन्वेस्ट करते रहते हैं। यह वैसी ही बात हुई कि आप एक डूबती हुई नाव के छेद को भरने के बजाय उसमें नया पेंट कर रहे हों। अगर आप अपनी लाइफ और पैसे को सही तरीके से मैनेज करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह देखना शुरू कीजिये कि आपका पैसा जा कहाँ रहा है। क्या वह आपको अमीर बना रहा है या सिर्फ आपके बैंक को। कैपिटल एलोकेशन एक कला है जिसे सीखने के लिए आपको ईगो को साइड में रखना पड़ता है।
लेसन २ : ट्रस्ट बेस्ड लीडरशिप
क्या आपको वो बॉस याद है जो आपके सिर पर खड़ा होकर पूछता रहता था कि भाई ईमेल भेजा या नहीं। या वो रिश्तेदार जो चाय की दुकान पर बैठकर देश चलाने की बातें करता है लेकिन खुद का घर नहीं संभाल पाता। वारेन बफेट इन सब से बिल्कुल अलग हैं। बफेट का लीडरशिप स्टाइल इतना सिंपल है कि शायद आपको यकीन भी न हो। वह काबिल लोगों को चुनते हैं और फिर उन्हें अकेला छोड़ देते हैं। इसे कहते हैं ट्रस्ट बेस्ड लीडरशिप। बफेट का मानना है कि अगर आपने किसी समझदार इंसान को काम पर रखा है और फिर भी आप उसे बता रहे हैं कि काम कैसे करना है तो आप दुनिया के सबसे बड़े बेवकूफ हैं।
आजकल की कॉर्पोरेट दुनिया में माइक्रो मैनेजमेंट का बहुत फैशन है। बॉस को लगता है कि अगर उसने हर छोटी बात में दखल नहीं दिया तो कंपनी डूब जाएगी। बफेट की बर्कशायर हैथवे में हजारों कर्मचारी हैं लेकिन हेड ऑफिस में सिर्फ मुट्ठी भर लोग बैठते हैं। वह अपनी कंपनियों के मैनेजरों को पूरी आजादी देते हैं। वह उनसे साल में बस एक बार बात करते हैं। सोचिये अगर आप अपने काम में इतने माहिर हों कि आपका बॉस आपको परेशान करना ही छोड़ दे। कितना सुकून होगा न। बफेट कहते हैं कि अगर आप लोगों पर भरोसा नहीं कर सकते तो आप कभी बड़े लीडर नहीं बन पाएंगे।
मान लीजिये आपने घर में एक नया रसोइया रखा है। अब अगर आप हर पांच मिनट में किचन में जाकर उसे बताएंगे कि नमक कितना डालना है या प्याज कैसे काटना है तो दो चीजें होंगी। या तो वह खाना खराब कर देगा या फिर वह नौकरी छोड़कर भाग जाएगा। बफेट जानते हैं कि एक टैलेंटेड इंसान को सबसे ज्यादा नफरत टोका टाकी से होती है। वह ऐसे लोगों को ढूंढते हैं जिनके पास इंटीग्रिटी यानी ईमानदारी हो और फिर उन्हें पूरी छूट दे देते हैं। उनका कहना है कि अगर किसी में ईमानदारी नहीं है तो उसकी बुद्धिमानी आपको बर्बाद कर देगी।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बफेट आंख बंद करके किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं। वह इंसान को परखने में उस्ताद हैं। वह देखते हैं कि क्या सामने वाला अपने काम को लेकर पैशनेट है। क्या वह उस कंपनी को अपनी खुद की कंपनी समझकर चलाएगा। एक बार जब उन्हें सही इंसान मिल जाता है तो वह उसे खुद का फैसला लेने देते हैं। हमारे यहाँ तो लोग एक चपरासी पर भी भरोसा नहीं करते और फिर शिकायत करते हैं कि सारा काम हमें ही करना पड़ता है। बफेट की लीडरशिप हमें सिखाती है कि अगर आपको आसमान छूना है तो आपको दूसरों के पंखों पर भरोसा करना ही होगा।
असली लीडर वह नहीं होता जो सबसे ज्यादा चिल्लाता है या सबसे ज्यादा हुक्म चलाता है। असली लीडर वह है जो लोगों को इतना मोटिवेट कर दे कि उन्हें किसी सुपरवाइजर की जरूरत ही न पड़े। बफेट अपने मैनेजर्स को एक ही निर्देश देते हैं कि बस कंपनी की गुडविल खराब नहीं होनी चाहिए। पैसा खो जाए तो गम नहीं लेकिन इज्जत नहीं जानी चाहिए। यह भरोसा ही है जो बर्कशायर की कंपनियों को इतना मजबूत बनाता है। अगर आप अपनी टीम या अपनी लाइफ में लोगों का साथ चाहते हैं तो उन्हें कंट्रोल करना बंद कीजिये और उन पर भरोसा करना शुरू कीजिये। क्योंकि बिना भरोसे के लीडरशिप वैसी ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी। दिखती बहुत अच्छी है पर चलती कहीं नहीं।
लेसन ३ : रिस्क मैनेजमेंट और लॉन्ग टर्म विजन
क्या आपने कभी उन लोगों को देखा है जो रात भर में अमीर बनने के चक्कर में अपनी पुश्तैनी जमीन या बीवी के गहने तक दांव पर लगा देते हैं। ऐसे लोग अक्सर किसी 'बाबा' की टिप्स पर या सोशल मीडिया के किसी इन्फ्लुएंसर की बातों में आकर अपना सब कुछ लुटा बैठते हैं। वारेन बफेट कहते हैं कि इन्वेस्टिंग का पहला नियम है कि कभी पैसा मत खोना और दूसरा नियम है कि पहले नियम को कभी मत भूलना। बफेट कोई जादूगर नहीं हैं जो भविष्य देख सकते हैं। वह बस एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो तब तक बैट नहीं घुमाते जब तक उन्हें अपनी पसंद की बॉल न मिल जाए। इसे कहते हैं रिस्क मैनेजमेंट।
आजकल के दौर में सबको 'क्विक मनी' चाहिए। लोग चाहते हैं कि आज पैसा लगाएं और कल सुबह उठकर उनके पास बंगला और गाड़ी हो। इसी लालच में वे ऐसी कंपनियों या स्कीम्स में पैसा डाल देते हैं जिनका न कोई सिर होता है न पैर। बफेट का विजन बहुत लंबा होता है। वह कहते हैं कि अगर आप किसी स्टॉक को दस साल तक रखने की हिम्मत नहीं रखते तो उसे दस मिनट के लिए भी मत खरीदिये। यह बात सुनकर हमारे आधे 'ट्रेडर' भाई तो बेहोश हो जाएंगे जो हर पांच मिनट में अपना पोर्टफोलियो चेक करते हैं जैसे कि स्क्रीन देखने से शेयर का भाव बढ़ जाएगा।
मान लीजिये आपने एक आम का पेड़ लगाया। अब क्या आप अगले ही दिन बाल्टी लेकर खड़े हो जाएंगे कि भाई आम कहाँ हैं। बिल्कुल नहीं। आप उसे पानी देंगे उसकी देखभाल करेंगे और सालों तक इन्तजार करेंगे। लेकिन जब वह पेड़ फल देना शुरू करेगा तो वह आपकी अगली तीन पीढ़ियों तक को खिलाएगा। बफेट की सफलता इसी धैर्य का फल है। वह उन कंपनियों को चुनते हैं जिनका बिजनेस मॉडल पत्थर की लकीर जैसा मजबूत हो और फिर उसे सालों तक पकड़ कर रखते हैं। हम तो एक दिन मार्केट गिरते ही पसीने छोड़ देते हैं और डर के मारे अपना नुकसान करवा लेते हैं।
बफेट की एक और खास बात यह है कि वह कभी भी उस चीज में हाथ नहीं डालते जो उन्हें समझ नहीं आती। अगर उन्हें समझ नहीं आता कि कोई टेक कंपनी कैसे पैसे कमा रही है तो वह उसे नहीं छुएंगे चाहे पूरी दुनिया उसमें पैसा लगा रही हो। इसे 'सर्कल ऑफ कॉम्पिटेंस' कहते हैं। लेकिन हमारे यहाँ तो लोग पड़ोसी की सलाह पर क्रिप्टो खरीद लेते हैं और जब पैसा डूबता है तो सरकार को गाली देते हैं। रिस्क मैनेजमेंट का मतलब यह नहीं है कि आप रिस्क न लें बल्कि इसका मतलब यह है कि आप सिर्फ वही रिस्क लें जिसे आप झेल सकें।
अंत में याद रखिये कि वेल्थ बनाना कोई स्प्रिंट रेस नहीं है बल्कि यह एक मैराथन है। जो लोग शुरू में बहुत तेज भागते हैं वे अक्सर बीच में ही हांफ कर बैठ जाते हैं। बफेट आज 90 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और उनकी 90 परसेंट से ज्यादा वेल्थ उनके 65वें जन्मदिन के बाद बनी है। यह है कम्पाउंडिंग की ताकत और लॉन्ग टर्म विजन का कमाल। अगर आप अपनी लाइफ में वाकई कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आज के छोटे मोटे फायदों को छोड़कर भविष्य की बड़ी तस्वीर देखना शुरू कीजिये। याद रखिये कि रोम एक दिन में नहीं बना था और न ही आपका बैंक बैलेंस एक दिन में करोड़ों का होगा।
वारेन बफेट की जिंदगी हमें सिखाती है कि पैसा कमाना सिर्फ गणित नहीं बल्कि एक अनुशासन है। अगर आप अपने रिसोर्स सही जगह लगाते हैं लोगों पर भरोसा करना सीखते हैं और धैर्य के साथ निवेश करते हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अब समय है कि आप अपनी आदतों को बदलें। आज ही अपने कैपिटल एलोकेशन पर ध्यान दें और तय करें कि आप इन्वेस्टर बनना चाहते हैं या सिर्फ एक कंज्यूमर। अगर आपको ये लेसन्स पसंद आए तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हर हफ्ते नई स्कीम के पीछे भागता है। और कमेंट में बताइये कि बफेट का कौन सा नियम आपको सबसे ज्यादा पसंद आया।
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