क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कस्टमर के सामने जाते ही भिखारी की तरह गिड़गिड़ाने लगते हैं और वह आपको एक सस्ती स्माइल देकर चलता कर देता है? अगर आप अब भी वही घिसी पिटी सेल्स पिच मार रहे हैं तो बधाई हो आप अपनी इज्जत और पैसा दोनों डुबाने में एक्सपर्ट बन चुके हैं।
इस आर्टिकल में हम डेविड मैटसन के उन ४९ सीक्रेट्स को डिकोड करेंगे जो आपकी सेल्स लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे। आज हम उन ३ बड़े लेसन्स पर फोकस करेंगे जो आपको एक सेल्समैन से एक प्रोफेशनल कंसल्टेंट बना देंगे।
लेसन १ : यू हैव टू लर्न टू फेल टू विन
सेल्स की दुनिया में कदम रखते ही हमें सिखाया जाता है कि हमेशा पॉजिटिव रहो और हर कॉल को क्लोज करो। लेकिन सच तो यह है कि अगर आप फेल होने से डरते हैं तो आप कभी बड़े सेल्समैन बन ही नहीं सकते। डेविड मैटसन कहते हैं कि सेल्स एक नंबर गेम है और यहाँ जीत का रास्ता हार की गलियों से होकर ही गुजरता है। हमारे यहाँ अक्सर सेल्स वालों को लगता है कि अगर कस्टमर ने 'नो' कह दिया तो शायद उनकी इज्जत कम हो गई या उनकी शक्ल में ही कोई कमी है। असल में सेल्स में फेलियर कोई पर्सनल अटैक नहीं है बल्कि यह प्रोसेस का एक हिस्सा है।
जरा सोचिए आप एक लड़के की तरह हैं जो मोहल्ले की हर लड़की को प्रोपोज कर रहा है और हर बार थप्पड़ खाकर वापस आ जाता है। अगर आप हर थप्पड़ के बाद घर में दुबक कर बैठ जाएंगे तो आपकी शादी कभी नहीं होने वाली। सेल्स भी बिलकुल वैसी ही है। यहाँ आपको थप्पड़ की जगह 'नो' मिलता है। सैंडलर रूल कहता है कि अपनी सेल्फ वर्थ को अपनी सेल्स परफॉरमेंस से अलग रखें। अगर आज आपने दस कॉल की और दसों ने मना कर दिया तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक बेकार इंसान हैं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि उन दस लोगों को आपकी जरूरत नहीं थी।
ज्यादातर लोग सेल्स में इसलिए फेल होते हैं क्योंकि वे रिजेक्शन को दिल पर ले लेते हैं। वे कस्टमर के सामने ऐसे जाते हैं जैसे कि वे कोई दान मांग रहे हों। जब आप डर के साथ किसी रूम में घुसते हैं तो कस्टमर को आपके पसीने की बदबू दूर से ही आ जाती है। वह समझ जाता है कि आप बेताब हैं और बेताबी हमेशा वैल्यू कम कर देती है। अगर आप फेल होने के लिए तैयार हैं तो आपके अंदर एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस आता है। आप कस्टमर से सवाल पूछने की हिम्मत रखते हैं क्योंकि आपको पता है कि अगर डील नहीं भी हुई तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा।
मान लीजिए आप एक प्रॉपर्टी डीलर हैं। आपने एक क्लाइंट को शानदार फ्लैट दिखाया और उसने अंत में कह दिया कि बजट ज्यादा है। अब एक नॉर्मल सेल्समैन वहां बैठकर उसे डिस्काउंट की भीख देगा या दुखी होकर वापस आ जाएगा। लेकिन एक सैंडलर प्रोफेशनल मुस्कुराकर कहेगा कि कोई बात नहीं शायद यह आपके लिए सही समय नहीं है। जब आप हारने से नहीं डरते तो कस्टमर को लगता है कि आपके पास कुछ ऐसा कीमती है जिसकी उसे ज्यादा जरूरत है न कि आपको उसकी। फेलियर को गले लगाना सीखिए क्योंकि हर 'नो' आपको उस एक 'यस' के करीब ले जाता है जो आपकी लाइफ बदल देगा। यह जीत की तरफ बढ़ने वाली पहली सीढ़ी है और अगर आप इस पर चढ़ने से डरेंगे तो ऊपर वाले फ्लोर का नजारा कभी नहीं देख पाएंगे।
लेसन २ : डोंट स्पिल योर गट्स इन द लॉबी
क्या आप भी उन सेल्स वालों में से हैं जो ऑफिस में घुसते ही अपना लैपटॉप खोलकर प्रजेंटेशन की उल्टियां करने लगते हैं? डेविड मैटसन कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। इसे वह 'स्पिलिंग योर गट्स' कहते हैं। मतलब अपनी सारी जानकारी और फायदे बिना पूछे ही कस्टमर के सामने परोस देना। हमारे यहाँ सेल्स के लड़के सोचते हैं कि जितना ज्यादा बोलेंगे कस्टमर उतना ज्यादा इम्प्रेस होगा। असल में आप जितना ज्यादा बोलते हैं आप उतने ही सस्ते नजर आते हैं। आप अपनी सारी वैल्युएबल जानकारी फ्री में बांट रहे होते हैं जबकि आपको उसकी कीमत वसूलनी चाहिए।
मान लीजिए आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं और इससे पहले कि आप अपनी बीमारी बताएं डॉक्टर आपको दवाइयों की लिस्ट थमा दे। वह कहे कि यह नीली गोली सिरदर्द के लिए है और यह पीली वाली पेट साफ करने के लिए। क्या आप उस डॉक्टर पर भरोसा करेंगे? बिल्कुल नहीं। आप तुरंत वहां से भाग जाएंगे क्योंकि उसने आपकी समस्या सुनी ही नहीं। सेल्स में भी यही होता है। जब आप बिना सवाल पूछे अपनी सर्विस के गुण गाने लगते हैं तो आप उस डॉक्टर की तरह लगते हैं जिसे सिर्फ अपनी दवाइयां बेचने से मतलब है मरीज के दर्द से नहीं।
अक्सर देखा गया है कि सेल्समैन जोश में आकर अपनी कंपनी की हिस्ट्री और अचीवमेंट्स बताने लगता है। कस्टमर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी कंपनी १९४७ से चल रही है या आपके पास कितने मेडल हैं। उसे सिर्फ इस बात से मतलब है कि क्या आप उसका सरदर्द ठीक कर सकते हैं। अगर आप लॉबी में ही अपनी सारी कहानी सुना देंगे तो मीटिंग रूम तक पहुँचते पहुँचते आपके पास कुछ भी नया नहीं बचेगा। कस्टमर आपकी सारी बातें सुन लेगा और फिर बड़े प्यार से कहेगा कि हम सोचकर बताएंगे। और हम सब जानते हैं कि उस 'सोचकर बताएंगे' का असली मतलब क्या होता है।
असली प्रोफेशनल वह है जो अपनी जुबान पर लगाम लगाता है और कस्टमर को बोलने का मौका देता है। आपको एक जासूस की तरह काम करना चाहिए न कि एक रेडियो की तरह। जब आप कम बोलते हैं और सही सवाल पूछते हैं तो कंट्रोल आपके हाथ में रहता है। कस्टमर को लगने लगता है कि आप उसे कुछ बेचने नहीं आए हैं बल्कि उसकी किसी मुश्किल को हल करने आए हैं। याद रखिए कि सेल्स में जो सवाल पूछता है वही गेम को लीड करता है। अगर आप शुरू में ही अपना सारा खजाना खोल देंगे तो अंत में क्लोजिंग के लिए आपके पास कोई तुरुप का इक्का नहीं बचेगा। इसलिए अपनी एक्साइटमेंट को कंट्रोल में रखिए और कस्टमर को अपनी बात खत्म करने दीजिए। जब वह पूरी तरह खाली हो जाए तब अपनी बात का वजन रखिए।
लेसन ३ : नो पेन नो सेल
अगर आपको लगता है कि आप किसी को सिर्फ मीठी बातें करके कुछ भी बेच देंगे तो आप गलतफहमी के शिकार हैं। सैंडलर का सबसे बड़ा रूल यही है कि जब तक कस्टमर को दर्द महसूस नहीं होगा वह अपनी जेब से पैसा नहीं निकालेगा। लोग बदलाव तभी करते हैं जब उनकी मौजूदा स्थिति इतनी तकलीफदेह हो जाए कि उसे सहना मुश्किल हो। एक सेल्समैन के तौर पर आपका काम प्रोडक्ट बेचना नहीं बल्कि उस घाव पर उंगली रखना है जिसे कस्टमर छिपाने की कोशिश कर रहा है। अगर आप उसका 'पेन' नहीं ढूंढ पाए तो आपकी डील कभी क्लोज नहीं होगी।
मान लीजिए आपके पास एक ऐसा दोस्त है जिसकी कार खटारा हो चुकी है और बीच सड़क पर बंद हो जाती है। आप उसे हर रोज नई कार के फीचर्स गिनाते हैं पर वह टस से मस नहीं होता। लेकिन जिस दिन उसकी कार उसकी होने वाली गर्लफ्रेंड के सामने बंद हो जाएगी और उसे धक्का मारना पड़ेगा तब उसे असली दर्द महसूस होगा। उस वक्त उसे फीचर्स की जरूरत नहीं होगी उसे उस बेइज्जती से छुटकारा चाहिए होगा। सेल्स में भी यही होता है। जब तक आप कस्टमर को यह अहसास नहीं दिलाते कि उसकी पुरानी मशीन या सर्विस की वजह से उसका कितना नुकसान और मानसिक तनाव हो रहा है तब तक वह आपको भाव नहीं देगा।
ज्यादातर सेल्स वाले सतह पर ही तैरते रहते हैं। वे पूछते हैं कि आपको क्या चाहिए और कस्टमर कहता है कि मुझे सस्ता और अच्छा चाहिए। यह असली पेन नहीं है। आपको गहराई में उतरना होगा। आपको पूछना होगा कि अगर यह समस्या हल नहीं हुई तो अगले छह महीने में आपके बिजनेस का क्या हाल होगा? जब कस्टमर खुद अपने मुंह से अपनी बर्बादी का मंजर बयान करता है तब वह खरीदने के लिए तैयार होता है। आपको एक डॉक्टर की तरह उस नस को पकड़ना है जहाँ सबसे ज्यादा दर्द है। अगर आप सिर्फ ऊपर से मरहम लगाएंगे तो वह आपको चलता कर देगा।
अक्सर हम डरते हैं कि ज्यादा सवाल पूछने से कस्टमर बुरा मान जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि लोग उन लोगों को पैसा देते हैं जो उनकी तकलीफ समझते हैं। अगर आप उसे यह यकीन दिला दें कि आपके पास उस दर्द की दवा है तो वह कीमत पर बहस करना बंद कर देगा। याद रखिए कि बिना पेन के कोई सेल नहीं होती। आप चाहे दुनिया के सबसे अच्छे वक्ता क्यों न हों अगर सामने वाले को अपनी समस्या की गंभीरता समझ नहीं आ रही तो आपकी मेहनत बेकार है। इसलिए अपनी प्रजेंटेशन बंद कीजिए और एक असली दर्द खोजने वाले जासूस बन जाइए। जब आप उसकी तकलीफ का समाधान पेश करेंगे तो वह खुद आपसे खरीदने की जिद्द करेगा।
सेल्स कोई जादू या किस्मत का खेल नहीं है बल्कि यह इंसानी दिमाग को समझने की एक कला है। डेविड मैटसन के यह सैंडलर रूल्स हमें सिखाते हैं कि प्रोफेशनल बनने के लिए अपनी पुरानी आदतों को छोड़ना पड़ता है। क्या आप अब भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके अपनाना चाहते हैं या एक मॉडर्न सेल्स मास्टर बनना चाहते हैं? चुनाव आपका है। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सेल्स में रिजेक्शन से डरते हैं और नीचे कमेंट में बताएं कि आपको इन तीनों में से कौन सा लेसन सबसे ज्यादा काम का लगा। चलिए आज से ही अपनी सेल्स का अंदाज बदलते हैं।
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