क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सीधे एवरेस्ट चढ़ने का सपना देखते हैं और फिर घर के सामने वाले गड्ढे में गिर जाते हैं। बधाई हो आप अपनी लाइफ और बिजनेस को पूरी तरह बर्बाद करने की सही राह पर हैं। बिना किसी बैलेंस के सीधे गोल्स की तरफ भागना बेवकूफी है और आप यही कर रहे हैं।
आज हम रिच क्रिश्चियनसन की बुक दि जिगज़ैग प्रिंसिपल के बारे में बात करेंगे। यह बुक हमें सिखाती है कि सीधे रास्ते पर चलने की जिद कैसे आपको फेल करती है और ३ लेसन कैसे आपकी लाइफ और बिजनेस को पूरी तरह बदल सकते हैं।
लेसन १ : प्रॉफिटेबिलिटी को प्रायोरिटी दें वरना डूबना पक्का है
ज्यादातर लोग जब नया बिजनेस शुरू करते हैं या लाइफ का कोई बड़ा गोअल सेट करते हैं तो वे सीधे चांद पर पहुंचने की प्लानिंग करते हैं। वे सोचते हैं कि बस एक बार बड़ा इन्वेस्टमेंट कर दिया या दिन रात एक कर दी तो सीधे सक्सेस मिल जाएगी। लेकिन सच तो यह है कि बिना फ्यूल के रॉकेट भी उड़ान नहीं भर सकता। रिच क्रिश्चियनसन कहते हैं कि आपका पहला कदम हमेशा प्रॉफिट की तरफ होना चाहिए। अगर आप अपना घर फूंक कर तमाशा देख रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं बल्कि अपनी बर्बादी का जश्न मना रहे हैं।
सोचिए आपने एक बहुत बड़ा और आलीशान कैफे खोला। आपने इंटीरियर पर करोड़ों खर्च कर दिए और वेटर भी इटली से मंगवा लिए। लेकिन महीने के आखिर में आपकी जेब से पैसे जा रहे हैं क्योंकि कॉफी की सेल उतनी है ही नहीं। यह सीधे रास्ते पर चलने की जिद है। जिगज़ैग प्रिंसिपल कहता है कि पहले छोटा कदम उठाएं और इतना पैसा कमाएं कि आपका बिजनेस अपने पैरों पर खड़ा हो सके। जब तक आपकी जेब में पैसा नहीं आएगा तब तक आपका दिमाग नए आइडियाज के बारे में सोच ही नहीं पाएगा। भूखे पेट तो भजन भी नहीं होते और आप यहां दुनिया बदलने निकले हैं।
भारतीय घरों में अक्सर लोग उधार लेकर बड़ी गाड़ियां खरीदते हैं ताकि पड़ोसियों को अपनी अमीरी दिखा सकें। यह वही सीधी लकीर है जो सीधे खड्ढे में जाकर गिरती है। अगर आप प्रॉफिटेबल नहीं हैं तो आप बस एक टाइम बम पर बैठे हैं जो कभी भी फट सकता है। इसलिए सबसे पहले अपने काम से कैश फ्लो जनरेट करना सीखें। जब आपके पास पैसा आने लगता है तो आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और आप बड़े रिस्क लेने के लायक बनते हैं। बिना प्रॉफिट के आप बस एक फ्रीलांसर हैं जो अपनी मेहनत को भी नहीं वसूल पा रहा।
बहुत से स्टार्टअप्स आजकल फंडिंग के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई प्यासा रेगिस्तान में पानी ढूंढ रहा हो। वे भूल जाते हैं कि बिजनेस कस्टमर के पैसे से चलता है न कि इन्वेस्टर के उधार से। अगर आप पहले दिन से प्रॉफिटेबल होने का नहीं सोच रहे तो यकीन मानिए आप बस एक फैंसी हॉबी पाल रहे हैं। खुद को और अपने सपनों को बचाना है तो पहले पैसा कमाना सीखिए। अपनी ईगो को साइड में रखें और छोटे प्रॉफिट से शुरुआत करें। यही वह पहला मोड़ है जो आपको लंबी रेस का घोड़ा बनाएगा। जब आप फाइनेंशियल तौर पर सुरक्षित महसूस करते हैं तब ही आप अगले बड़े कदम के लिए तैयार होते हैं।
लेसन २ : बैलेंस बनाए रखें वरना एक्सीडेंट होना तय है
जब एक बार आपकी जेब में थोड़ा पैसा आने लगता है तो अक्सर इंसान को लगता है कि अब तो वह दुनिया का राजा बन गया है। यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है। लोग जोश में आकर अपनी पूरी ताकत और सारे रिसोर्स एक ही दिशा में झोंक देते हैं। रिच क्रिश्चियनसन कहते हैं कि लाइफ और बिजनेस कोई १०० मीटर की स्प्रिंट नहीं है बल्कि एक मैराथन है। अगर आप शुरू में ही अपनी सारी सांस फुला लेंगे तो बीच रास्ते में ही ढेर हो जाएंगे। जिगज़ैग का दूसरा मोड़ है बैलेंस। आपको अपनी ग्रोथ और अपने रिसोर्स के बीच एक गहरा तालमेल बिठाना होगा।
कल्पना कीजिए कि आपने जिम जाना शुरू किया और पहले ही दिन आपने सोचा कि आज ही सारा वजन उठा लूंगा ताकि कल तक बाइसेप्स बाहर आ जाएं। नतीजा क्या होगा। अगले दिन आप बेड से उठ भी नहीं पाएंगे और शायद जिम जाने का नाम भी नहीं लेंगे। यही हाल उन बिजनेस ओनर्स का होता है जो रातों-रात स्केलिंग के चक्कर में अपनी टीम और अपनी हेल्थ को निचोड़ देते हैं। आप एक रोबोट नहीं हैं और न ही आपके कर्मचारी। अगर आप अपनी मशीन में तेल नहीं डालेंगे और उसे लगातार चलाते रहेंगे तो वह एक न एक दिन जल ही जाएगी। बैलेंस का मतलब है कि जब आप एक लेवल ऊपर चढ़ें तो वहां रुककर अपनी सांसें संभालें और अपनी नीव को और मजबूत करें।
आजकल के दौर में लोग वर्क लाइफ बैलेंस की बातें तो बहुत करते हैं लेकिन असल में वे बस अपने फोन से चिपके रहते हैं। अगर आप अपने बिजनेस को बढ़ाने के चक्कर में अपने परिवार और अपनी मेंटल शांति को दांव पर लगा रहे हैं तो आप जीत नहीं रहे बल्कि हार रहे हैं। एक थका हुआ दिमाग कभी भी क्रिएटिव नहीं हो सकता। वह बस वही घिसे-पिटे फैसले लेगा जो उसे और गहरे संकट में डालेंगे। जिगज़ैग प्रिंसिपल हमें सिखाता है कि कभी-कभी रुकना या थोड़ा धीरे चलना असल में तेजी से आगे बढ़ने का ही एक हिस्सा है। यह वैसा ही है जैसे कार का गियर बदलते समय आप एक पल के लिए रेस से पैर हटाते हैं।
बहुत से लोग सोचते हैं कि जितना ज्यादा काम करेंगे उतनी ज्यादा तरक्की होगी। लेकिन सच तो यह है कि सही दिशा में किया गया थोड़ा सा काम गलत दिशा में की गई पहाड़ जैसी मेहनत से लाख गुना बेहतर है। अपने रिसोर्स यानी पैसा समय और एनर्जी को ऐसे मैनेज करें कि आपके पास हमेशा इमरजेंसी के लिए कुछ बैकअप बचा रहे। अगर आप अपनी पूरी बाल्टी एक ही बार में उलट देंगे तो प्यास लगने पर सिर्फ खाली बर्तन ही हाथ लगेगा। इसलिए अपनी लाइफ के हर हिस्से को थोड़ा-थोड़ा समय दें। जब आप अंदर से शांत और बैलेंस्ड होते हैं तो बाहर की चुनौतियों से लड़ना बच्चों का खेल बन जाता है।
लेसन ३ : जब बेस मजबूत हो जाए तब ही आकाश को छुएं
अब जब आपने पैसा कमाना सीख लिया है और बैलेंस बनाना भी आ गया है तो अब वक्त है अपने असली और बड़े गोअल्स की तरफ बढ़ने का। ज्यादातर लोग यही गलती करते हैं कि वे बिना पहले दो स्टेप्स पूरे किए सीधे तीसरे पर कूदना चाहते हैं। रिच क्रिश्चियनसन इसे स्केलिंग कहते हैं। यह वह मोड़ है जहाँ आप अपने बिजनेस या लाइफ को उस ऊंचाई पर ले जाते हैं जिसका आपने सपना देखा था। लेकिन याद रहे कि यह मोड़ तभी सुरक्षित है जब आपकी जमीन पक्की हो। अगर आपकी नीव रेत पर बनी है तो आप जितना ऊंचा चढ़ेंगे उतना ही जोर से नीचे गिरेंगे।
सोचिए एक छोटा सा ढाबा चलाने वाला इंसान रातों रात पूरे देश में १०० फ्रेंचाइजी खोलने की सोचने लगे। उसके पास न तो ट्रेनिंग सिस्टम है और न ही उतना बैकअप। नतीजा यह होगा कि वह अपनी क्वालिटी खो देगा और लोग उसे भूल जाएंगे। जिगज़ैग प्रिंसिपल कहता है कि जब आपका पहला जिग और दूसरा जैग पूरा हो जाए तब ही तीसरे स्टेप पर जोर लगाएं। भारतीय मार्केट में हमने देखा है कि कई कंपनियां बहुत तेजी से बढ़ती हैं और फिर अचानक गायब हो जाती हैं। वजह साफ है उन्होंने अपनी ताकत से ज्यादा पैर पसार लिए थे। आपको अपनी औकात और अपनी क्षमता का सही अंदाजा होना चाहिए वरना मार्केट आपको बहुत जल्दी आपकी जगह दिखा देगा।
स्केलिंग का मतलब सिर्फ ज्यादा पैसा या ज्यादा नाम नहीं है। इसका मतलब है अपने काम को एक सिस्टम में ढालना। अगर आपके बिना आपका बिजनेस एक दिन भी नहीं चल सकता तो आपने बिजनेस नहीं बल्कि अपने लिए एक नई नौकरी ढूंढ ली है। असली सक्सेस तब है जब आप वहां न हों फिर भी काम उसी क्वालिटी के साथ चलता रहे। इसमें थोडा समय लगता है और बहुत सारा सब्र। आपको उन लोगों पर भरोसा करना होगा जिन्हें आपने ट्रेन किया है। अगर आप हर छोटी चीज में अपनी उंगली करेंगे तो आप कभी भी बड़े गोअल्स तक नहीं पहुंच पाएंगे। खुद को फ्री करें ताकि आप बड़े विजन पर काम कर सकें।
सफलता कोई ऐसी मंजिल नहीं है जहाँ पहुंचकर आप सो जाएं। यह एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है। जब आप एक बड़ा गोअल अचीव कर लेते हैं तो फिर से एक नया जिगज़ैग शुरू हो जाता है। लाइफ कभी भी एक सीधी लकीर नहीं होती। इसमें उतार-चढ़ाव आएंगे मोड़ आएंगे और कभी-कभी आपको पीछे भी हटना पड़ेगा। लेकिन अगर आप इन ३ लेसन्स को याद रखेंगे तो आप कभी भी रास्ता नहीं भटकेंगे। अपनी जीत का जश्न मनाएं लेकिन अगले मोड़ के लिए हमेशा तैयार रहें। जो रुक गया समझो वह पीछे छूट गया।
तो दोस्तों, क्या आप भी अभी तक सीधे रास्ते पर चलने की गलती कर रहे थे। अब वक्त है अपनी स्ट्रैटेजी बदलने का। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बिना प्लानिंग के बड़े सपने देख रहे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका पहला 'प्रॉफिट गोअल' क्या होने वाला है। याद रखिये सीधा रास्ता अक्सर भटका देता है लेकिन जिगज़ैग आपको मंजिल तक पहुंचा देता है।
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