This Is Marketing (Hindi)


अगर आपको लगता है कि फेसबुक पर पैसा फूंकने से ही सेल आएगी तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का जश्न मना रहे हैं। बिना सेठ गोडिन के ये लेसन समझे आप बस अंधेरे में तीर चला रहे हैं और आपका कॉम्पिटिटर आपकी हंसी उड़ा रहा है।

​मार्केटिंग का असली मतलब एड्स नहीं बल्कि लोगों का भरोसा जीतना है। इस आर्टिकल में हम उन 3 लेसन्स की बात करेंगे जो आपकी मार्केटिंग की पूरी सोच को जड़ से बदल देंगे और आपको एक सफल ब्रांड बनाने में मदद करेंगे।


लेसन १ : मार्केटिंग सिर्फ सामान बेचना नहीं बल्कि बदलाव लाना है

​ज्यादातर लोग समझते हैं कि मार्केटिंग का मतलब है किसी के गले में अपना प्रोडक्ट जबरदस्ती उतार देना। अगर आप भी यही सोचते हैं तो यकीन मानिए आप उस सेल्समैन की तरह हैं जो शादी के फंक्शन में घुसकर इंश्योरेंस बेचने की कोशिश करता है। लोग आपको देखकर अपना रास्ता बदल लेंगे। सेठ गोडिन कहते हैं कि असली मार्केटिंग वह नहीं है जहाँ आप शोर मचाते हैं बल्कि वह है जहाँ आप किसी की लाइफ में बदलाव लाते हैं। मार्केटिंग असल में एक सेवा है। यह किसी की समस्या का समाधान ढूँढने और उसे एक बेहतर स्थिति में पहुँचाने का नाम है।

​सोचिए आप एक जिम ट्रेनर हैं। अगर आप सिर्फ अपनी फीस और डंबल की बात करेंगे तो आप बस एक दुकानदार हैं। लेकिन अगर आप अपने क्लाइंट को यह महसूस कराते हैं कि एक्सरसाइज के बाद वह खुद को ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करेगा तो आप मार्केटिंग कर रहे हैं। आप उसे एक प्रोडक्ट नहीं बल्कि एक नया 'वर्जन' बेच रहे हैं। भारत में हम अक्सर देखते हैं कि लोग दिवाली की सेल में कुछ भी कचरा बेचने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि डिस्काउंट का बोर्ड लगा दिया तो काम हो गया। पर असलियत में लोग सामान नहीं खरीदते वे उस सामान से मिलने वाली फीलिंग को खरीदते हैं।

​अगर आप एक साबुन बेच रहे हैं तो आप सिर्फ झाग नहीं बेच रहे। आप उस इंसान को ताजगी का अहसास और खुद को संवारने का एक मौका दे रहे हैं। जब आप अपनी सोच को 'बेचने' से हटाकर 'बदलाव लाने' पर ले जाते हैं तब जादू शुरू होता है। आपकी मार्केटिंग तब सफल होती है जब आपका कस्टमर कहे कि इस चीज ने मेरी लाइफ आसान कर दी। बिना किसी वैल्यू के मार्केटिंग करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के कार को धक्का मारना। बहुत मेहनत लगेगी और आप कहीं पहुँचेंगे भी नहीं। इसलिए चिल्लाना बंद कीजिए और यह देखना शुरू कीजिए कि आप अपने कस्टमर की दुनिया में क्या सुधार कर सकते हैं। जब आप लोगों की मदद करना शुरू करते हैं तो वे खुद आपके पास खिंचे चले आते हैं।


लेसन २ : सबको खुश करने की कोशिश छोड़ो और अपने सबसे छोटे मार्केट पर फोकस करो

​अगर आप सबको अपना कस्टमर बनाना चाहते हैं तो यकीन मानिए आप किसी को भी अपना कस्टमर नहीं बना पाएंगे। यह बात सुनने में थोड़ी कड़वी लग सकती है पर यही सच है। ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप और बिजनेस इसी जाल में फंस जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनका प्रोडक्ट 'हर किसी' के लिए है। भाई साहब अगर आप चाय बेच रहे हैं और आप सोच रहे हैं कि पांच साल के बच्चे से लेकर अस्सी साल के दादाजी तक सबको आपकी चाय पसंद आए तो आप बस एक फीकी चाय बना रहे हैं। सेठ गोडिन हमें सिखाते हैं कि हमें 'स्मालेस्ट वायबल मार्केट' यानी सबसे छोटे और सटीक मार्केट को पकड़ना चाहिए।

​दुनिया बहुत बड़ी है और सबकी पसंद अलग है। जब आप सबको खुश करने निकलते हैं तो आप अपना फोकस खो देते हैं। आप एक ऐसी एवरेज चीज बना देते हैं जो किसी को भी खास नहीं लगती। सोचिए उस हलवाई के बारे में जिसकी दुकान पर समोसा भी मिलता है और पिज्जा भी। शायद उसका समोसा ठीक हो पर पिज्जा तो भगवान भरोसे ही होगा। इसके उलट उस दुकान को देखिए जो सिर्फ एक खास तरह की कचोरी के लिए मशहूर है। वहाँ लोग लाइन लगाकर खड़े होते हैं क्योंकि उसने अपना छोटा मार्केट चुन लिया है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि शहर के बाकी लोग क्या खा रहे हैं। उसे बस उन हजार लोगों की परवाह है जिन्हें वैसी ही कचोरी चाहिए।

​मार्केटिंग में ईगो बहुत बड़ी दुश्मन है। हमें लगता है कि अगर हम कम लोगों को टारगेट करेंगे तो पैसा कम कमाएंगे। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जब आप एक छोटे ग्रुप के लिए कुछ स्पेशल बनाते हैं तो आप उनके लिए खास बन जाते हैं। वे लोग आपकी मार्केटिंग खुद करने लगते हैं। वे अपने दोस्तों को बताते हैं कि भाई अगर ये चीज चाहिए तो वहीं जाना। इसे कहते हैं 'ट्राइब' बनाना। आपको भीड़ की जरूरत नहीं है। आपको उन चंद लोगों की जरूरत है जो आपके काम को समझें और उसकी इज्जत करें। जब आप अपने सबसे छोटे मार्केट के लिए बेस्ट बन जाते हैं तो धीरे-धीरे आपका दायरा खुद बढ़ने लगता है। लेकिन शुरुआत हमेशा संकरी गली से होती है न कि सीधे हाईवे से। इसलिए अपना 'कौन' पहचानिए और बाकी दुनिया को फिलहाल के लिए भूल जाइए।


लेसन ३ : लोगों को उनकी कहानियों और भावनाओं के जरिए जोड़ना सीखें

​इंसान लॉजिक से नहीं बल्कि इमोशन से चीजें खरीदता है। अगर आप सिर्फ फीचर्स की लिस्ट गिनाते रहेंगे तो लोग आपको किसी बोरिंग सेल्स मैनुअल की तरह इग्नोर कर देंगे। सेठ गोडिन कहते हैं कि मार्केटिंग असल में कहानियों का खेल है। लोग खुद को जो कहानी सुनाते हैं अगर आपका ब्रांड उस कहानी में फिट बैठता है तो आप जीत गए। इंडिया में लोग सिर्फ स्मार्टफोन नहीं खरीदते बल्कि वह उस फोन के साथ आने वाला स्टेटस और कॉन्फिडेंस खरीदते हैं। वे यह कहानी खुद को सुनाते हैं कि इस फोन के साथ मैं ज्यादा स्मार्ट और सफल दिखूँगा।

​मान लीजिए आप एक ऑनलाइन कोर्स बेच रहे हैं। अगर आप सिर्फ यह कहेंगे कि इसमें दस वीडियो हैं और पांच पीडीएफ हैं तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर आप उन्हें यह कहानी दिखाएंगे कि कैसे यह कोर्स उनकी करियर की रुकी हुई गाड़ी को फिर से रफ्तार दे सकता है तो वे जुड़ाव महसूस करेंगे। मार्केटिंग का काम लोगों की पहचान को छूना है। लोग अपनी पसंद की चीजों से अपनी पहचान बताते हैं। जैसे कोई खास ब्रांड के जूते पहनकर खुद को एथलीट महसूस करता है तो कोई खास कैफे में कॉफी पीकर खुद को मॉडर्न मानता है। आपको बस यह समझना है कि आपका कस्टमर खुद को क्या कहानी सुनाना चाहता है।

​क्या वे खुद को सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं? क्या वे दूसरों से अलग दिखना चाहते हैं? या फिर वे किसी खास कम्युनिटी का हिस्सा बनना चाहते हैं? जब आप उनकी इन गहरी जरूरतों को पहचान लेते हैं तब आपको विज्ञापन पर करोड़ों खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। आपकी बात सीधे उनके दिल तक पहुँचती है। बिना इमोशन के मार्केटिंग वैसी ही है जैसे बिना नमक के खाना। सब कुछ सही होने के बाद भी स्वाद गायब रहता है। इसलिए फीचर्स बेचना बंद कीजिए और भावनाएं बेचना शुरू कीजिए। जब आप किसी की कहानी का हिस्सा बन जाते हैं तो वह कस्टमर नहीं बल्कि आपका फैन बन जाता है।

​मार्केटिंग कोई जादू नहीं है और न ही यह लोगों को बेवकूफ बनाने का तरीका है। यह एक जिम्मेदारी है जो आप अपने कस्टमर्स के प्रति निभाते हैं। अगर आप वास्तव में एक सफल बिजनेस खड़ा करना चाहते हैं तो आज से ही सबको खुश करना बंद करें और उस छोटे से ग्रुप को ढूंढें जिनकी लाइफ आप बदल सकते हैं। याद रखिए आपकी सबसे बड़ी ताकत आपका प्रोडक्ट नहीं बल्कि वह भरोसा है जो आप लोगों के मन में पैदा करते हैं। अब रुकिए मत और नीचे कमेंट में बताइए कि आपका वह 'स्मालेस्ट वायबल मार्केट' कौन सा है जिसे आप सर्व करना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी मार्केटिंग को सिर्फ एड्स चलाना समझता है। चलिए साथ मिलकर मार्केटिंग के असली मायने बदलते हैं।

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