Traction (Hindi)


आपका स्टार्टअप फ्लॉप होने वाला है और आपको पता भी नहीं है। आप दिन रात दुनिया का बेस्ट प्रोडक्ट बनाने में लगे हैं पर उसे खरीदने वाला कोई नहीं है। बिना ट्रेक्शन के आपका बिज़नेस सिर्फ एक महंगा शौक है। क्या आप भी अपनी मेहनत और पैसा बर्बाद करना चाहते हैं?।

गैब्रियल वेनबर्ग की बुक ट्रेक्शन हमें सिखाती है कि कस्टमर्स कैसे लाएं। अगर आप भी पुराने मार्केटिंग के तरीकों में फंसे हैं तो ये ३ लेसन आपकी आंखें खोल देंगे। चलिए जानते हैं स्टार्टअप को सच में ग्रो करने के वो सीक्रेट्स जो बड़े बड़े एक्सपर्ट्स छुपाते हैं।


लेसन १ : ५० परसेंट रूल - प्रोडक्ट ही सब कुछ नहीं होता

क्या आपको भी लगता है कि अगर आप दुनिया की सबसे बेहतरीन चाय बनाएंगे तो लोग खुद खिंचे चले आएंगे? अगर हां तो मुबारक हो आप भी उसी जाल में फंसे हैं जिसमें ९० परसेंट स्टार्टअप दम तोड़ देते हैं। हमारे देश में एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि बस प्रोडक्ट अच्छा बना लो फिर तो लाइन लग जाएगी। लोग कोडिंग में दिन रात एक कर देते हैं। डिजाइन को चमकाने में अपनी रातों की नींद खराब कर देते हैं। पर जब बात आती है कि इसे खरीदेगा कौन तो सन्नाटा छा जाता है। ट्रेक्शन बुक के लेखक गैब्रियल वेनबर्ग कहते हैं कि यह आपके स्टार्टअप की सबसे बड़ी हार है। इसे ५० परसेंट रूल कहते हैं और यह सुनने में जितना सिंपल है निभाने में उतना ही कड़ा है।

सीधा सा हिसाब है कि अगर आप अपना ५० परसेंट समय प्रोडक्ट बनाने में लगा रहे हैं तो बाकी का ५० परसेंट समय कस्टमर्स ढूंढने में जाना चाहिए। इसे एक रियल लाइफ एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए आपने शहर के सबसे पॉश इलाके में एक गजब का रेस्टोरेंट खोला। आपने शेफ इटली से बुलाया और फर्नीचर पेरिस से मंगवाया। खाना इतना टेस्टी है कि फरिश्ते भी आ जाएं। पर आपने किसी को बताया ही नहीं कि रेस्टोरेंट खुल गया है। अब आप खाली टेबल को देख कर रो रहे हैं क्योंकि लोग बगल वाले ढाबे पर भीड़ लगाए खड़े हैं। क्यों? क्योंकि उस ढाबे वाले ने गली के नुक्कड़ पर बड़ा सा बोर्ड लगाया है। उसने ट्रेक्शन पर काम किया और आपने सिर्फ प्रोडक्ट की सजावट पर।

ज्यादातर फाउंडर्स को लगता है कि मार्केटिंग तो बाद का काम है। पहले एक बार पूरा ऐप बन जाए फिर देखेंगे। यही वह मोमेंट है जब आप अपने पैसे को आग लगा रहे होते हैं। बिना कस्टमर फीडबैक के आप जो बना रहे हैं शायद उसकी किसी को जरूरत ही न हो। आप एक ऐसी छतरी बना रहे हैं जो धूप में रंग बदलती है पर लोगों को तो बस बारिश से बचने वाली सस्ती छतरी चाहिए थी। अगर आप शुरू से ही कस्टमर्स से बात नहीं करेंगे तो आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं। ट्रेक्शन का मतलब है वह खिंचाव जो मार्केट से आपके प्रोडक्ट की तरफ आता है। यह खिंचाव रातों रात नहीं आता। इसके लिए आपको पहले दिन से पसीना बहाना पड़ता है।

अक्सर लोग अपनी ईगो में फंस जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनका आईडिया इतना क्रांतिकारी है कि मार्क जुकरबर्ग खुद फोन करेगा। हकीकत यह है कि दुनिया को आपके आईडिया से कोई फर्क नहीं पड़ता। दुनिया को फर्क पड़ता है अपनी प्रॉब्लम के सोल्यूशन से। और वह सोल्यूशन उन तक पहुँचाना ही असली खेल है। अगर आप दिन में ८ घंटे काम करते हैं तो ४ घंटे सिर्फ इस पर लगाइए कि अगला कस्टमर कहाँ से आएगा। चाहे वह कोल्ड ईमेल हो या सोशल मीडिया पर लोगों से बात करना। यह सुनने में बोरिंग लग सकता है पर यही वह कड़वी दवा है जो आपके स्टार्टअप को वेंटिलेटर पर जाने से बचाएगी। ५० परसेंट रूल को इग्नोर करना मतलब अपनी मेहनत की चिता खुद सजाना है। इसलिए कोडिंग छोड़िए और थोड़ा बाहर निकल कर लोगों से बात करिए। क्या पता जिस फीचर पर आप महीने से काम कर रहे हैं उसकी किसी को परवाह ही न हो।


लेसन २ : बुल्सआई फ्रेमवर्क - हर जगह हाथ मारना बंद करो

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अखबार हर जगह एड डाल देंगे तो सक्सेस मिल जाएगी? यह तो वही बात हुई कि आप अंधेरे कमरे में चारों तरफ गोलियां चला रहे हैं इस उम्मीद में कि कहीं तो शिकार फँसेगा। इसे स्ट्रैटेजी नहीं बल्कि बेवकूफी कहते हैं। ट्रेक्शन बुक हमें 'बुल्सआई फ्रेमवर्क' सिखाती है जो हमें बताती है कि आपको हर जगह होने की जरूरत नहीं है। आपको बस उस एक सही जगह पर होना है जहाँ आपका कस्टमर बैठा है। दुनिया में १९ अलग अलग मार्केटिंग चैनल्स हैं। पर आपके स्टार्टअप के लिए शायद उनमें से सिर्फ एक या दो ही काम करेंगे। बाकी १७ चैनल्स पर पैसा खर्च करना मतलब अपने नोटों से होली खेलना है।

मान लीजिए आप बुजुर्गों के लिए घुटनों के दर्द का तेल बेच रहे हैं। अब आप इसके लिए स्नैपचैट पर कूल फिल्टर बना रहे हैं और मीम्स शेयर कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि दादा जी वहां आकर आपके मीम्स देख रहे होंगे? बिल्कुल नहीं। दादा जी शायद सुबह पार्क में टहल रहे हैं या अखबार पढ़ रहे हैं। आपकी ऑडियंस कहीं और है और आप पसीना कहीं और बहा रहे हैं। यही गलती बड़े बड़े पढ़े लिखे लोग भी कर देते हैं। वो ट्रेंड के पीछे भागते हैं। अगर सबको लग रहा है कि इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग बेस्ट है तो वो भी वहीं कूद जाते हैं। चाहे उनका प्रोडक्ट एक बीटूबी सॉफ्टवेयर ही क्यों न हो जिसे कोई इन्फ्लुएंसर प्रमोट नहीं कर सकता।

बुल्सआई फ्रेमवर्क तीन लेयर्स में काम करता है। पहली लेयर है 'व्हाट्स पॉसिबल'। यहाँ आप उन सभी १९ चैनल्स के बारे में सोचते हैं जो दुनिया में मौजूद हैं। दूसरी लेयर है 'प्रोबेबल'। यहाँ आप उन टॉप ३ चैनल्स को चुनते हैं जो आपको लगता है कि आपके लिए काम कर सकते हैं। और सबसे अंदर वाली लेयर है 'बुल्सआई'। यानी वह एक चैनल जो आपको सबसे सस्ता और सबसे ज्यादा कस्टमर लाकर दे रहा है। ज्यादातर लोग पहली लेयर से सीधे जंप मारकर सारा पैसा एक जगह लगा देते हैं। वो टेस्टिंग नहीं करते। वो बस दुआ करते हैं कि काश यह चल जाए। याद रखिए बिज़नेस दुआओं पर नहीं डेटा पर चलता है।

हकीकत तो यह है कि जो चैनल आज काम कर रहा है शायद कल न करे। इसलिए आपको एक जासूस की तरह हर चैनल को टेस्ट करना चाहिए। छोटे छोटे एक्सपेरिमेंट करिए। थोड़े पैसे फेसबुक पर लगाइए और थोड़े गूगल पर। देखिए कहाँ से लोग सच में आपका प्रोडक्ट खरीद रहे हैं। कई बार आपको ताज्जुब होगा कि जिस चैनल को आप बेकार समझ रहे थे वही आपको करोड़पति बना रहा है। मार्केटिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है पर यह ईगो का खेल भी नहीं है। अगर आपको ईमेल मार्केटिंग से रिजल्ट मिल रहा है तो फिर दुनिया चाहे कितना भी चिल्लाए आपको टिकटॉक पर नाचने की जरूरत नहीं है। अपनी बुल्सआई को पहचानिए और उस पर इतना जोर लगाइए कि कॉम्पिटिशन को समझ ही न आए कि आप उन्हें पीछे छोड़कर कब आगे निकल गए।


लेसन ३ : क्रिटिकल पाथ - भटकना छोड़ो और काम की बात करो

क्या आपने कभी उन लोगों को देखा है जो जिम तो जाते हैं पर वहां वर्कआउट से ज्यादा सेल्फी लेने और प्रोटीन शेक की बातें करने में वक्त बिताते हैं? स्टार्टअप की दुनिया में भी यही होता है। लोग ऑफिस का फर्नीचर चुनने, लोगो का कलर बदलने और नेटवर्किंग इवेंट्स में समोसे खाने को 'काम' समझते हैं। लेखक इसे सबसे बड़ा धोखा कहते हैं। असली काम सिर्फ वो है जो आपको आपके ट्रेक्शन गोल तक ले जाए। इसी को कहते हैं 'क्रिटिकल पाथ'। यह वह सबसे सीधा रास्ता है जो आपको हार से जीत की तरफ ले जाता है। अगर कोई काम आपको सीधे कस्टमर तक नहीं पहुँचा रहा है तो समझ लीजिए आप बस अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।

मान लीजिए आपका लक्ष्य है अगले तीन महीने में १००० पेड कस्टमर्स लाना। अब आपके पास दो ऑप्शन हैं। पहला यह कि आप अपनी वेबसाइट का फॉन्ट सुंदर करें और दूसरा यह कि आप १० कोल्ड कॉल्स करें। वेबसाइट का फॉन्ट बदलना आपको बहुत बिजी रखेगा और आपको लगेगा कि आप बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। पर हकीकत में उससे एक भी नया कस्टमर नहीं आएगा। वहीं दूसरी तरफ कॉल करना आपको डरावना लग सकता है पर वही आपको आपके लक्ष्य के करीब ले जाएगा। हम अक्सर मुश्किल काम से बचने के लिए आसान और बेकार के कामों में खुद को उलझा लेते हैं। इसे 'प्रोडक्टिव प्रोक्रैस्टिनेशन' कहते हैं यानी काम के नाम पर काम से जी चुराना।

क्रिटिकल पाथ पर चलना मतलब हर उस चीज को 'ना' कहना जो आपके ट्रेक्शन गोल के बीच में आती है। अगर आप एक एडुटेक स्टार्टअप चला रहे हैं और आपका गोल है स्टूडेंट्स को एनरोल करना तो फिर आपको ऑफिस की पेंटिंग से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। स्टार्टअप में आपके पास रिसोर्स कम होते हैं और दुश्मन बहुत ज्यादा। आपका सबसे बड़ा दुश्मन है 'डिस्ट्रैक्शन'। हर नया आईडिया एक डिस्ट्रैक्शन है। हर नई मीटिंग एक डिस्ट्रैक्शन है। जब तक आप अपने क्रिटिकल पाथ पर नहीं हैं तब तक आप सिर्फ एक जगह खड़े होकर गोल गोल घूम रहे हैं। लोग आपको सलाह देंगे कि आपको यह भी करना चाहिए और वह भी। पर आपको अर्जुन की तरह सिर्फ मछली की आंख यानी अपने ट्रेक्शन गोल को देखना है।

अंत में याद रखिए कि ट्रेक्शन ही वह ऑक्सीजन है जो आपके स्टार्टअप को जिंदा रखेगी। बिना कस्टमर के आपका विजन सिर्फ एक सपना है जो कभी पूरा नहीं होगा। अगर आप आज रुक कर यह नहीं देख रहे कि आप कहाँ जा रहे हैं तो आप बहुत जल्द कहीं नहीं पहुँचेंगे। यह बुक हमें याद दिलाती है कि स्टार्टअप बनाना कोई आर्ट गैलरी खोलना नहीं है जहाँ लोग आकर बस तारीफ करें। यह एक जंग है जहाँ जीत सिर्फ उसी की होती है जिसके पास सबसे ज्यादा और सबसे वफादार कस्टमर्स होते हैं। तो क्या आप तैयार हैं अपने क्रिटिकल पाथ पर चलने के लिए? या फिर आप अभी भी अपनी वेबसाइट का लोगो ही बदलते रहेंगे? फैसला आपका है।


अगर आपको आज यह समझ आ गया है कि सिर्फ प्रोडक्ट बनाने से घर नहीं चलता तो आज ही अपने बिज़नेस का एक 'ट्रेक्शन गोल' सेट करें। नीचे कमेंट में बताएं कि आपके बिज़नेस के लिए वह एक बुल्सआई चैनल कौन सा हो सकता है? इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो महीनों से सिर्फ अपना ऐप ही बना रहा है पर मार्केटिंग से डरता है। जागिए और ट्रेक्शन पर काम शुरू करिए क्योंकि बिना कस्टमर के सब बेकार है।

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