Unlimited Riches (Hindi)


क्या आप भी अपनी ९ से ५ की नौकरी में गधे की तरह घिस रहे हैं और सोचते हैं कि अमीर बनना सिर्फ नसीब का खेल है? सच तो यह है कि आपकी गरीबी का कारण आपकी किस्मत नहीं बल्कि आपका प्रॉपर्टी की समझ से कोसों दूर होना है। करोड़ों की डील्स आपके हाथ से फिसल रही हैं क्योंकि आप अभी भी बैंक में चिल्लर जमा कर रहे हैं और रियल एस्टेट के असली खेल से पूरी तरह अनजान हैं।

लेकिन फिक्र मत करिए। आज हम रोबर्ट शेमिन की किताब अनलिमिटेड रिचेस से वो सीक्रेट्स निकालेंगे जो आपको जीरो से रियल एस्टेट का हीरो बना सकते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपकी तिजोरी भर देंगे।


लेसन १ : ओपीएम का जादू - अपनी जेब खाली रखो और दूसरों के पैसों से रईस बनो

दोस्तो, अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि रियल एस्टेट में कदम रखने के लिए बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये होने चाहिए, तो बधाई हो। आप अपनी लाइफ की सबसे बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। रोबर्ट शेमिन अपनी किताब में चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि अमीर बनने के लिए पैसा नहीं, बल्कि दिमाग चाहिए। और इसी दिमाग के खेल का नाम है OPM यानी Other People's Money।

सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है। आप कहेंगे कि भाई, इंडिया में तो पड़ोसी चीनी उधार नहीं देता, कोई अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा हमें प्रॉपर्टी खरीदने के लिए क्यों देगा? यहीं पर सारा सार्केज्म और गेम छुपा है। असल में आप और हम जिस पैसे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, अमीर लोग उसी पैसे को दूसरों से लेकर बढ़ा रहे हैं। मान लीजिए आपके पास एक फूटी कौड़ी नहीं है, लेकिन आपके पास एक ऐसी डील है जहाँ १० लाख की जमीन ५ लाख में मिल रही है। अब अगर आप अपने उस अमीर दोस्त के पास जाएं जो सारा दिन बस एफडी के ब्याज पर खुश रहता है, और उसे कहें कि भाई पैसा तेरा और दिमाग मेरा, होने वाले मुनाफे में ५० परसेंट तेरा। क्या वो मना करेगा? बिल्कुल नहीं।

हम लोग पूरी जिंदगी बस सेविंग्स करने में निकाल देते हैं। हम सोचते हैं कि जब ६० साल की उम्र में रिटायर होंगे तब एक छोटा सा घर लेंगे। अरे भाई, तब तक तो प्रॉपर्टी के दाम मंगल ग्रह तक पहुँच चुके होंगे। ओपीएम का लेसन हमें यह सिखाता है कि आपको बैंक का, प्राइवेट इन्वेस्टर्स का या अपने रिश्तेदारों का पैसा इस्तेमाल करना है। लेकिन याद रहे, यह उधार लेकर ऐश करने का तरीका नहीं है। यह तरीका है दूसरों के आइडल पड़े हुए पैसे को काम पर लगाने का।

एक रियल लाइफ एक्जाम्पल देखिए। मेरा एक दोस्त है रमेश। रमेश के पास नौकरी थी और थोड़ी बहुत समझ। उसने एक ऐसी बिल्डिंग ढूंढी जिसका मालिक उसे जल्दी में बेचना चाहता था। रमेश के पास टोकन मनी तक के पैसे नहीं थे। उसने एक इन्वेस्टर पकड़ा और उसे फ्यूचर की रेंटल इनकम का लालच दिया। आज रमेश उस बिल्डिंग का मैनेजर भी है और हिस्सेदार भी, जबकि उसने अपनी जेब से एक रुपया भी नहीं लगाया।

जरा सोचिए, आप अपनी पूरी सैलरी बचाकर १० साल में एक फ्लैट लेंगे, वहीं ओपीएम का इस्तेमाल करने वाला बंदा उसी १० साल में १० बिल्डिंग्स खड़ी कर देगा। अब फैसला आपका है कि आपको कछुआ बनना है या स्मार्ट इन्वेस्टर। ओपीएम का सीधा सा मतलब है कि रिस्क और रिवॉर्ड को ऐसे बैलेंस करो कि आपकी जेब पर आंच न आए और दूसरों का पैसा आपके लिए नोट छापने की मशीन बन जाए। यह कोई स्कैम नहीं है, यह शुद्ध रूप से फाइनेंशियल इंटेलिजेंस है जिसे हम मिडिल क्लास लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।


लेसन २ : प्रॉफिट खरीदते वक्त होता है - सस्ते के चक्कर में नहीं, वैल्यू के पीछे भागो

दोस्तो, इंडिया में हम लोगों की एक पुरानी आदत है। हम सब्जी वाले से १० रुपये के धनिया के लिए ५ मिनट बहस करते हैं, लेकिन जब प्रॉपर्टी की बात आती है, तो हम इमोशनल हो जाते हैं। रोबर्ट शेमिन का दूसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि रियल एस्टेट में पैसा तब नहीं बनता जब आप उसे बेचते हैं, बल्कि पैसा तब बनता है जब आप उसे खरीदते हैं। अगर आपने प्रॉपर्टी सही दाम पर नहीं खरीदी, तो आप चाहे कितना भी पेंट करवा लें या टाइल्स बदलवा लें, आप घाटे में ही रहेंगे।

ज्यादातर लोग क्या करते हैं? वो एक चमकती हुई बिल्डिंग देखते हैं, बिल्डर के झूठे वादों में आते हैं और मार्केट रेट पर या उससे भी ऊपर प्रॉपर्टी बुक कर लेते हैं। वो सोचते हैं कि ५ साल बाद दाम बढ़ेंगे तब अमीर बनेंगे। भाई, इसे इन्वेस्टमेंट नहीं, इसे जुआ कहते हैं। असली अमीर वो है जो १० लाख की चीज को ७ लाख में खरीदने का हुनर रखता है। जब आप खरीदते वक्त ही ३ लाख का फायदा कर लेते हैं, तो मार्केट गिरे या चढ़े, आपकी जीत पक्की है।

लोग दिवाली की सेल में ५०० रुपये बचाने के लिए पागलों की तरह शॉपिंग करते हैं, लेकिन करोड़ों की डील में बिना मोलभाव किए साइन कर देते हैं। आपको 'मोटिवेटेड सेलर' ढूंढना होगा। वो इंसान जिसे पैसे की सख्त जरूरत है, या जिसकी प्रॉपर्टी में कोई ऐसी छोटी सी कमी है जिसे आप आसानी से ठीक कर सकते हैं।

एक मजेदार मिसाल देखिए। मेरे एक अंकल हैं जो हमेशा कहते थे कि अच्छी चीज महंगी ही मिलती है। उन्होंने एक आलीशान इलाके में एक रेडी-टू-मूव फ्लैट लिया। ५ साल बाद भी उसकी कीमत वैसी ही थी क्योंकि उन्होंने पहले ही उसे टॉप रेट पर खरीदा था। दूसरी तरफ, एक स्मार्ट इन्वेस्टर ने उसी इलाके में एक पुराना, बदसूरत सा दिखने वाला घर खरीदा जिसके नल टपक रहे थे। मोहल्ले वाले उस पर हंस रहे थे कि यह खंडहर क्यों ले लिया। लेकिन उस बंदे ने सिर्फ २ लाख रुपये लगाकर उसे चकाचक किया और आज उसकी वैल्यू अंकल के फ्लैट से डबल है।

यही खेल है। आपको कूड़े में सोना ढूंढना आना चाहिए। जब सब लोग चमक-धमक के पीछे भाग रहे हों, तब आप उन प्रॉपर्टीज को देखिए जिनमें पोटेंशियल है। अगर आप खरीदने के दिन ही प्रॉफिट में नहीं हैं, तो आप बस एक महंगी ईंटों की दीवार के मालिक हैं, इन्वेस्टर नहीं। अपनी आंखों पर पट्टी मत बांधिए और मार्केट की भीड़ का हिस्सा मत बनिए। याद रखिए, मार्केट वैल्यू और एक्चुअल प्राइस के बीच का जो गैप है, वही आपकी असली अमीरी है।


लेसन ३ : मल्टीपल स्ट्रीम्स ऑफ इनकम - रेंट के भरोसे मत बैठो, कैश फ्लो का जाल बिछाओ

दोस्तो, मिडिल क्लास आदमी का सबसे बड़ा सपना क्या होता है? एक घर हो और उसका रेंट आता रहे। बस, उसकी लाइफ सेट है। लेकिन रोबर्ट शेमिन कहते हैं कि अगर आप सिर्फ एक रेंटल इनकम के भरोसे हैं, तो आप अमीर नहीं बल्कि एक आलसी जमींदार हैं। अनलिमिटेड रिचेस का असली मतलब है एक ही प्रॉपर्टी से पैसे कमाने के दस रास्ते निकालना। अगर आपकी प्रॉपर्टी सिर्फ महीने के अंत में एक फिक्स चेक दे रही है, तो आप उसकी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

हम लोग अपने फोन का रिचार्ज तो सोच समझ कर करवाते हैं कि कहीं कोई एक्स्ट्रा डेटा मिल जाए, पर अपनी लाखों की प्रॉपर्टी को बस एक रेंट पर छोड़ देते हैं। अमीर लोग प्रॉपर्टी को एक मशीन की तरह देखते हैं। वो उसमें पार्किंग स्पेस रेंट पर देते हैं, छत पर मोबाइल टावर लगवाते हैं, या फिर उसे छोटे छोटे कमरों में बांटकर को-लिविंग स्पेस बना देते हैं। वो जानते हैं कि जितना ज्यादा आप अपनी एसेट को निचोड़ेंगे, उतना ही ज्यादा कैश फ्लो आपकी जेब में आएगा।

सोचिए एक ऐसे इंसान के बारे में जिसने एक बड़ा सा हॉल लिया। उसने उसे वैसे ही रेंट पर देने के बजाय, छोटे छोटे केबिन बनाए और उसे को-वर्किंग स्पेस की तरह ऑफिस वालों को दे दिया। जहाँ उसे साधारण रेंट २० हजार मिलता, अब वो वहां से ८० हजार कमा रहा है। इसे कहते हैं स्मार्ट स्केलिंग। रेंट तो बस एक शुरुआत है, असली पैसा तो उन एडिशनल सर्विसेज में है जो आप अपनी प्रॉपर्टी के साथ जोड़ सकते हैं।

अगर आप आज भी अपनी किस्मत को कोस रहे हैं कि आपके पास पैसे नहीं हैं, तो याद रखिए कि रियल एस्टेट ईंट पत्थर का नहीं बल्कि क्रिएटिविटी का बिजनेस है। ओपीएम से शुरुआत करिए, सही दाम पर डील पकड़िए और फिर उससे पैसे के झरने बहा दीजिए। अब और इंतजार मत करिए क्योंकि वक्त किसी के लिए नहीं रुकता और जमीन की कीमतें तो बिल्कुल भी नहीं।


तो क्या आप भी अपनी फाइनेंशियल फ्रीडम की चाबी ढूंढ रहे हैं? उठिए, मार्केट में निकलिए और अपनी पहली डील की तलाश शुरू कीजिए। अगर आपको यह लेसन पसंद आए हैं, तो इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो आज भी सिर्फ सैलरी पर जी रहे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आप अपनी पहली प्रॉपर्टी कब खरीदने वाले हैं? चलिए साथ मिलकर अमीर बनते हैं।

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