Weird Ideas That Work (Hindi)


क्या आप भी उन्हीं घिसे पिटे रूल्स को फॉलो करके अपनी लाइफ और बिजनेस में चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं? कितने मासूम हैं आप। अपनी बोरिंग सोच के साथ आप अपनी सक्सेस का गला खुद ही घोंट रहे हैं और दुनिया आपके मजे ले रही है।

आज हम रोबर्ट सटन की बुक वियर्ड आइडियाज दैट वर्क से वो तरीके सीखेंगे जो सुनने में तो पागलपन लगेंगे पर असल में आपके दिमाग की बत्ती जला देंगे। ये लेसन आपको एवरेज लोगों की भीड़ से निकालकर एक असली इनोवेटर बना देंगे।


लेसन १ : उन लोगों को हायर करो जो आपको पसंद नहीं हैं

सुनने में यह बात किसी फिल्मी विलेन के प्लान जैसी लग रही होगी ना? हम सब की आदत होती है कि हम अपनी टीम में उन्हीं लोगों को रखना चाहते हैं जो हमारी हर बात पर 'जी हुजूर' कहें। हमें लगता है कि अगर ऑफिस में सब एक जैसे होंगे तो काम मक्खन की तरह चलेगा। लेकिन रोबर्ट सटन कहते हैं कि अगर आप सिर्फ अपने जैसे लोगों को रखेंगे तो आप इनोवेशन नहीं बल्कि एक 'भजन मंडली' बना रहे हैं। असल में आपको उन लोगों की जरूरत है जो आपकी सोच को चैलेंज करें।

सोचिए आपके पड़ोस वाले शर्मा जी जो हर बात में नुक्स निकालते हैं। अगर वह आपकी टीम में हों तो वह आपकी हर आइडिया की धज्जियां उड़ा देंगे। और यही तो आपको चाहिए। जब कोई आपके आइडिया में कमियां निकालता है तब ही आप उस आइडिया को और बेहतर बना पाते हैं। अगर सब एक ही जैसा सोचेंगे तो नया क्या होगा? रोबर्ट सटन का यह वियर्ड आइडिया कहता है कि ऐसे लोगों को ढूंढो जिनके स्किल्स आपसे अलग हों और जिनका बैकग्राउंड आपसे बिल्कुल मेल न खाता हो।

मान लीजिए आप एक नई चाय की दुकान खोलना चाहते हैं। अब अगर आप पांच ऐसे लोगों को काम पर रखेंगे जिन्हें सिर्फ अदरक वाली चाय पसंद है तो आप कभी 'मसाला चाय' या 'लेमन ग्रास चाय' के बारे में सोच ही नहीं पाएंगे। लेकिन अगर आप एक ऐसे बंदे को ले आएं जिसे चाय से नफरत है और कॉफी पसंद है तो शायद वह आपको कुछ ऐसा वियर्ड सुझाव दे दे जो मार्केट में तहलका मचा दे। वह शायद कहे कि 'भाई चाय को कुल्हड़ में नहीं बल्कि वाइन ग्लास में सर्व करो'। सुनने में यह अजीब लगेगा पर यही वियर्डनेस लोगों को खींचती है।

हमारा ईगो हमें रोकता है। हमें लगता है कि जो हमारी बात नहीं मान रहा वह हमारा दुश्मन है। लेकिन बिजनेस में वह आपका सबसे बड़ा दोस्त है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी कंपनी सिर्फ सरवाइव न करे बल्कि ग्रो करे तो आपको अपनी कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा। आपको ऐसे 'मिसफिट्स' की फौज तैयार करनी होगी जो रूल्स को तोड़ने का दम रखते हों। जब अलग अलग दिमाग टकराएंगे तभी तो असली चिंगारी निकलेगी।

अक्सर बॉस लोग इंटरव्यू में ऐसे सवाल पूछते हैं जिससे पता चले कि कैंडिडेट कंपनी के कल्चर में फिट होगा या नहीं। सटन कहते हैं कि भाई कल्चर फिट तो ठीक है पर क्या वह कल्चर में कुछ नया ला पाएगा? अगर आपकी टीम में सब शांत और डिसिप्लिन वाले लोग हैं तो एक ऐसा बंदा ढूंढो जो थोड़ा शोर मचाता हो और रिस्क लेने से न डरता हो। यह बैलेंस ही आपको आगे ले जाएगा।

तो अगली बार जब किसी को जॉब पर रखें तो यह न देखें कि आप उसके साथ बैठकर समोसे खा पाएंगे या नहीं। बल्कि यह देखें कि क्या वह आपकी सोच को हिला देने की ताकत रखता है। क्योंकि असली इनोवेशन नफरत और बहस के बीच से ही निकलता है। बोरिंग लोगों के साथ आप सिर्फ बोरिंग प्रोडक्ट्स ही बना सकते हैं।


लेसन २ : फेलियर को गले लगाओ और आलस को सजा दो

इंडियन सोसाइटी में 'फेल' शब्द सुनते ही लोगों को लगता है कि बस अब दुनिया खत्म हो गई। पापा की डांट और पड़ोसियों के ताने फ्री में मिलते हैं। लेकिन इनोवेशन की दुनिया में अगर आप फेल नहीं हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप कुछ नया ट्राई ही नहीं कर रहे हैं। रोबर्ट सटन का यह आइडिया कहता है कि फेलियर बुरी बात नहीं है बल्कि 'इनएक्शन' यानी कुछ न करना सबसे बड़ा पाप है।

सोचिए एक ऐसी कंपनी के बारे में जहाँ बॉस कहता है कि 'जो गलती करेगा उसे बोनस मिलेगा'। अब आप कहेंगे कि क्या पागलपन है? लेकिन जरा ठंडे दिमाग से सोचिए। अगर आप गलती करने से डरेंगे तो आप हमेशा वही सेफ काम करेंगे जो सालों से चलता आ रहा है। आप कभी कुछ तूफानी करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाएंगे। रोबर्ट सटन समझाते हैं कि रिवॉर्ड उन लोगों को मिलना चाहिए जो रिस्क लेते हैं चाहे वो फेल ही क्यों न हो जाएं। और सजा उन लोगों को मिलनी चाहिए जो चुपचाप अपनी कुर्सी पर चिपके रहते हैं और नया आइडिया लाने के नाम पर उन्हें बुखार आ जाता है।

मान लीजिए आप एक फिटनेस ऐप बना रहे हैं। आपकी टीम ने एक वियर्ड फीचर सोचा कि 'यूजर जब एक्सरसाइज नहीं करेगा तो ऐप उसे गालियां देगा'। आपने इसे लॉन्च किया और यह बुरी तरह फ्लॉप हो गया। लोग नाराज हो गए। अब यहाँ दो रास्ते हैं। या तो आप उस टीम को फायर कर दें या उन्हें शाबाशी दें कि 'कम से कम तुमने कुछ अलग तो सोचा'। अगर आप उन्हें शाबाशी देंगे तो अगली बार वो और जोश के साथ कुछ बेहतर बनाएंगे। लेकिन अगर आपने उन्हें डांटा तो अगली बार वो सिर्फ वही घिसे पिटे योगा वीडियो डालेंगे जो पूरी दुनिया डाल रही है।

मार्केट में वही टिकता है जो एक्सपेरिमेंट करता है। एडिसन ने बल्ब बनाने से पहले हजार बार फेलियर का स्वाद चखा था। अगर वह पहले ही फेलियर पर हार मान लेते तो आज हम सब मोमबत्ती जलाकर बैठे होते। रोबर्ट सटन कहते हैं कि क्रिएटिविटी एक नंबर्स गेम है। आपको बहुत सारे आइडियाज ट्राई करने पड़ेंगे जिनमें से ज्यादातर बेकार निकलेंगे। लेकिन उन बेकार आइडियाज के ढेर में ही आपको वो एक 'डायमंड' वाला आइडिया मिलेगा जो आपकी किस्मत बदल देगा।

अक्सर ऑफिसों में लोग अपनी गलतियों को छुपाते हैं जैसे वो कोई क्राइम हो। सटन कहते हैं कि अपनी गलतियों को सेलिब्रेट करो। एक 'मिस्टेक ऑफ द मंथ' अवार्ड रखो। जब लोग अपनी गलतियों पर हंसना सीख जाएंगे तभी वो खुलकर नए रिस्क ले पाएंगे। डर के साये में कभी कोई मास्टरपीस नहीं बनता। डर से सिर्फ रिपोर्ट कार्ड बनते हैं।

तो अगर आप अपनी लाइफ या बिजनेस में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो अपनी हार का जश्न मनाना सीखिए। अगर आप गिर रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप चल रहे हैं। जो सोए हुए हैं वो कभी नहीं गिरते। आलस और डर को अपना दुश्मन बनाइये और अपनी टीम को ये भरोसा दिलाइये कि यहाँ गलती करना मना नहीं है बल्कि कुछ न करना मना है।


लेसन ३ : अपनी पुरानी सक्सेस को कचरे के डिब्बे में डाल दो

क्या आपको वो दोस्त याद है जो आज भी अपनी दसवीं क्लास के मार्क्स के गुणगान गाता है? जबकि आज उसकी असल जिंदगी में लाले पड़े हुए हैं। कंपनियाँ भी अक्सर ऐसी ही होती हैं। रोबर्ट सटन कहते हैं कि पास्ट सक्सेस यानी पुरानी सफलता एक ड्रग की तरह होती है। यह आपको मदहोश कर देती है और आपको लगता है कि जो तरीका कल काम कर गया था वही कल भी काम करेगा। लेकिन हकीकत में पुरानी सफलता ही नए इनोवेशन की सबसे बड़ी दुश्मन है।

सोचिए अगर कोडक (Kodak) ने अपनी रील वाली फोटो की सफलता को छोड़कर डिजिटल कैमरे पर भरोसा किया होता तो आज वो गायब न होते। वो अपनी पुरानी जीत के नशे में इतने चूर थे कि उन्हें बदलती हुई दुनिया दिखी ही नहीं। सटन का यह वियर्ड आइडिया कहता है कि अपनी पुरानी यादों और सफलताओं को भूलना सीखें। अगर आप वही करते रहेंगे जो आप हमेशा से करते आए हैं तो आपको वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है।

मान लीजिए आपकी एक बहुत मशहूर मिठाई की दुकान है और आपका 'गुलाब जामुन' पूरे शहर में फेमस है। अब आप इतने कॉन्फिडेंट हो गए कि आपने दस साल तक कुछ नया ट्राई ही नहीं किया। वहीं पड़ोस में एक लड़के ने 'चॉकलेट समोसा' बेचना शुरू कर दिया। आप हँसे और कहा कि 'पागल है क्या? समोसा तो आलू का होता है'। लेकिन देखते ही देखते उसकी दुकान पर भीड़ लग गई और आपकी दुकान खाली हो गई। क्यों? क्योंकि आपने अपनी पुरानी सक्सेस को पकड़कर रखा था और उसने एक वियर्ड आइडिया पर दांव खेला।

सटन कहते हैं कि आपको अपनी खुद की कंपनी के खिलाफ 'अटैक' करना चाहिए। खुद से पूछिए कि अगर आज मुझे अपनी ही कंपनी को बर्बाद करना हो तो मैं क्या नया आइडिया लाऊंगा? जब आप अपनी पुरानी सोच को खुद ही चुनौती देंगे तभी आप मार्केट में टिक पाएंगे। आपको हर उस रूल को तोड़ना होगा जिसने आपको कल जिताया था क्योंकि आज का गेम बिल्कुल अलग है।

इनोवेशन का मतलब ही है पुरानी चीजों को नए तरीके से देखना। अगर आप अपने पास्ट से चिपके रहेंगे तो आप कभी फ्यूचर नहीं देख पाएंगे। पुरानी सक्सेस आपको 'कंफर्ट' देती है और कंफर्ट में कभी कोई बड़ा आविष्कार नहीं होता। आपको हमेशा भूखा और थोड़ा सा पागल रहना पड़ेगा। अपनी पुरानी ट्रॉफीज को अलमारी में बंद करिये और आज के लिए एक नया वियर्ड रास्ता खोजिये।

अंत में बस इतना समझ लीजिये कि दुनिया उन्हीं को याद रखती है जिन्होंने लीक से हटकर कुछ किया। अगर आप वही पुरानी लकीर पीटते रहेंगे तो आप सिर्फ एक नंबर बनकर रह जाएंगे। रोबर्ट सटन की यह बुक हमें सिखाती है कि पागलपन और जीनियस होने के बीच एक बहुत बारीक लाइन होती है। उस लाइन को पार करिये। रिस्क लीजिये। वियर्ड बनिए। क्योंकि यही वियर्ड आइडियाज ही दुनिया बदलते हैं।


तो दोस्तों, क्या आप भी अपनी लाइफ में कुछ वियर्ड और तूफानी करने के लिए तैयार हैं? कमेंट में लिखिए 'मैं तैयार हूं' और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा पुरानी यादों में खोया रहता है। चलिए मिलकर इस बोरिंग दुनिया को थोड़ा और वियर्ड बनाते हैं।

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