क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक छोटी सी गलती होने पर खुद को कमरे में बंद करके रोने लगते हैं? मुबारक हो आप अपनी लाइफ को बर्बाद करने का परफेक्ट रास्ता चुन चुके हैं। जबकि स्मार्ट लोग दबाकर गलतियाँ कर रहे हैं और आप परफेक्शन का अचार डाल रहे हैं। जितना आप फेल होने से डरेंगे उतना ही आप अपनी सक्सेस की अर्थी को कंधा दे रहे हैं।
आज हम रिचर्ड फारसन और राल्फ केयस की बुक से जानेंगे कि क्यों गलतियाँ करना आपकी लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन के जरिए समझते हैं कि कैसे ज्यादा फेलियर ही असल में जीत का असली रास्ता है।
लेसन १ : सक्सेस और फेलियर जुड़वा भाई हैं।
हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ स्कूल के रिजल्ट से लेकर ऑफिस की अप्रेजल मीटिंग तक सिर्फ एक ही शब्द का खौफ है और वो है फेलियर। बचपन से हमें सिखाया गया है कि बेटा गलती हुई तो समझो लंका लग गई। लेकिन रिचर्ड फारसन अपनी किताब में एक बहुत ही कड़वा मगर मजेदार सच बताते हैं। वो कहते हैं कि सक्सेस और फेलियर असल में अलग अलग दिशाएँ नहीं हैं बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर आप लाइफ में कुछ बड़ा उखाड़ना चाहते हैं तो आपको फेलियर के साथ डेटिंग शुरू करनी पड़ेगी।
सोचिये अगर थॉमस एडिसन पहली बार बल्ब नहीं जलने पर ये सोचकर बैठ जाते कि अरे यार मोहल्ले वाले क्या कहेंगे तो आज हम सब मोमबत्ती लेकर एक दूसरे का चेहरा देख रहे होते। हम अक्सर सोचते हैं कि जो इंसान सक्सेसफुल है उसने कभी कोई गलती नहीं की होगी। हमें लगता है कि उनके पास कोई जादुई चिराग है जिसे घिसते ही काम बन जाता है। लेकिन असलियत ये है कि उन्होंने इतनी गलतियाँ की हैं जितनी शायद आपने कभी ट्राई भी नहीं की होंगी।
मान लीजिये आप अपनी क्रश को इम्प्रेस करने के लिए पहली बार किचन में घुसे। आपने सोचा कि मास्टर शेफ की तरह पास्ता बनायेंगे। आपने रेसिपी देखी और शुरू हो गए। लेकिन नमक की जगह चीनी डाल दी और पास्ता की जगह कुछ ऐसा बना जो दिखने में सीमेंट जैसा लग रहा था। अब यहाँ दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो कसम खा लेते हैं कि आज के बाद किचन की तरफ देखेंगे भी नहीं और खुद को कोसते रहेंगे। दूसरे वो जो हंसते हुए ये सोचते हैं कि चलो आज पता चला कि चीनी वाला पास्ता कितना घटिया लगता है और अगली बार वो क्या नहीं करेंगे।
सक्सेस का रास्ता गलतियों के कूड़ेदान से होकर ही गुजरता है। अगर आप गलती नहीं कर रहे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि आप अपनी कंफर्ट जोन की रजाई ओढ़कर सो रहे हैं। आप वही घिसे पिटे काम कर रहे हैं जो आप पिछले पांच साल से करते आ रहे हैं। नया कुछ भी ट्राई करने का मतलब है रिस्क लेना और रिस्क का मतलब है फेल होने का चांस। लेकिन मजे की बात ये है कि जब आप फेल होते हैं तभी आपकी बुद्धि के चक्षु खुलते हैं।
किताब में ऑथर कहते हैं कि इनोवेशन यानी कुछ नया करने की जर्नी में फेलियर कोई स्टॉप नहीं है बल्कि ये पेट्रोल है जो आपकी गाड़ी को आगे बढ़ाता है। जब आप कोई गलती करते हैं तो आप ये नहीं हारते कि आप फेल हो गए बल्कि आप ये जीतते हैं कि आपको एक नया तरीका पता चल गया जो काम नहीं करता। भारतीय समाज में जहाँ शर्मा जी का बेटा हमेशा फर्स्ट आता है वहाँ ये बात थोड़ी अजीब लग सकती है। लेकिन यकीन मानिये अगर आप शर्मा जी के बेटे की तरह सिर्फ सेफ खेलेंगे तो आप कभी भी खुद का बड़ा ब्रांड नहीं बना पायेंगे।
गलती करना कोई शर्म की बात नहीं है बल्कि एक ही गलती को बार बार करना और उससे कुछ न सीखना असली बेवकूफी है। लाइफ आपको बार बार मौके देगी कि आप गिरें और फिर से उठें। घुटने छिलेंगे खून भी निकलेगा और लोग हंसेंगे भी। लेकिन जब आप उस फेलियर की राख से उठकर कुछ नया क्रिएट करेंगे तब वही लोग तालियां बजायेंगे। इसलिए डरना छोड़िये और गलतियाँ करना शुरू कीजिये क्योंकि जो सबसे ज्यादा गिरेगा वही सबसे ऊंचा उड़ेगा।
लेसन २ : परफेक्शनिज्म की बीमारी और रिस्क का मजा।
अगर आप उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि जब तक सब कुछ १०० परसेंट परफेक्ट नहीं होगा तब तक मैं काम शुरू नहीं करूँगा तो बॉस आप एक बहुत बड़ी बीमारी के शिकार हैं। इसे कहते हैं परफेक्शनिज्म। सुनने में यह शब्द बड़ा भारी और कूल लगता है लेकिन असल में यह आपकी तरक्की का सबसे बड़ा दुश्मन है। रिचर्ड फारसन कहते हैं कि परफेक्शन की तलाश आपको पंगु बना देती है। आप बस प्लान बनाते रह जाते हैं और दुनिया आपसे आगे निकल जाती है।
मान लीजिये आपके दोस्त ने एक नया बिजनेस शुरू करने का सोचा। अब वो पिछले दो साल से सिर्फ लोगो का कलर और ऑफिस के फर्नीचर की डिजाइन ही फाइनल कर रहा है। उसे लगता है कि जब तक सब कुछ एकदम कांच जैसा चमकता हुआ नहीं होगा तब तक वो मार्केट में नहीं उतरेगा। दूसरी तरफ एक और लड़का है जिसने एक ठेले से शुरुआत की। उसने हजार गलतियाँ कीं। कभी नमक ज्यादा हुआ तो कभी कस्टमर से बहस हुई। लेकिन आज उसके पास पांच आउटलेट हैं। क्यों? क्योंकि उसने गलतियाँ करने की हिम्मत दिखाई और परफेक्शन का इंतज़ार नहीं किया।
हम अक्सर सोचते हैं कि बड़े लोग या बड़ी कंपनियाँ कभी गलतियाँ नहीं करतीं। लेकिन सच तो ये है कि जितनी बड़ी कंपनी उतना बड़ा उनका गलतियों का बजट होता है। अगर आप रिस्क नहीं ले रहे हैं तो आप असल में सबसे बड़ा रिस्क ले रहे हैं। रिस्क न लेना यानी लाइफ को एक ठहरे हुए पानी की तरह बना देना जिसमें थोड़े समय बाद बदबू आने लगती है। जब आप गलती करने की छूट खुद को देते हैं तब आपके अंदर का असली क्रिएटिव इंसान बाहर आता है।
कुछ लोग तो इतने परफेक्ट होते हैं कि वो अपनी गलती पर भी दूसरों को दोष देने का टैलेंट रखते हैं। अगर वो गिर जाएँ तो कहेंगे कि जमीन ही टेढ़ी थी। लेकिन भाई साहब जब तक आप अपनी गलतियों की जिम्मेदारी नहीं लेंगे तब तक आप उनसे कुछ सीख नहीं पायेंगे। परफेक्शन एक ऐसा मृगतृष्णा है जिसके पीछे भागते भागते आप थक जायेंगे पर वो कभी हासिल नहीं होगा। क्योंकि जो आज परफेक्ट है वो कल पुराना हो जायेगा।
इनोवेशन का मतलब ही यही है कि आप कुछ ऐसा करें जो पहले कभी नहीं हुआ। और जो पहले कभी नहीं हुआ उसमें गलती होने की गुंजाइश ९९ परसेंट होती है। तो क्या हम हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएँ? बिल्कुल नहीं। ऑथर कहते हैं कि अपनी गलतियों को सेलिब्रेट करना सीखिए। जब आप कोई गलती करते हैं तो आप अपने कॉम्पिटिटर से एक कदम आगे होते हैं क्योंकि अब आपको पता है कि कौन सा रास्ता बंद है।
अपनी लाइफ को एक लैब की तरह देखिये। यहाँ आप साइंटिस्ट भी हैं और चूहे भी। एक्सपेरिमेंट करिये। चीजें खराब होंगी। रायता फैलेगा। लोग ज्ञान देंगे। लेकिन अंत में जीत आपकी ही होगी क्योंकि आपने डर को मात देकर एक्शन लिया है। याद रखिये इतिहास वो नहीं रचते जो हमेशा सही होते हैं बल्कि वो रचते हैं जो गलत होने के बावजूद हार नहीं मानते।
लेसन ३ : गलतियाँ ही असली डेटा और फीडबैक हैं।
अगर आप सोचते हैं कि गलती करना समय की बर्बादी है तो यकीन मानिये आप अपनी लाइफ की सबसे कीमती इन्फोर्मेशन को इग्नोर कर रहे हैं। रिचर्ड फारसन इस किताब में एक बहुत ही गहरी बात कहते हैं कि हर गलती असल में एक फीडबैक है जो आपको चिल्ला चिल्लाकर बता रही है कि बॉस इधर रास्ता बंद है कहीं और ट्राई करो। हम अपनी गलतियों को ईगो पर ले लेते हैं और दुखी हो जाते हैं जबकि स्मार्ट लोग उसे डेटा की तरह पढ़ते हैं।
मान लीजिये आपने जिम जाना शुरू किया और पहले ही दिन जोश में आकर १०० किलो का डंबल उठाने की कोशिश की। नतीजा ये हुआ कि आपकी कमर में मोच आ गई और आप अगले सात दिन तक बेड पर पड़े रहे। अब यहाँ दो रास्ते हैं। या तो आप जिम को गाली दें और कहें कि ये सब बकवास है या फिर आप इस गलती से ये सीखें कि आपकी बॉडी अभी इतने वजन के लिए तैयार नहीं है। आपकी चोट ने आपको वो लेसन दिया जो कोई कोच शायद एक महीने में भी नहीं समझा पाता। इसे ही कहते हैं अपनी गलतियों से डेटा निकालना।
ज्यादातर लोग फेलियर से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग क्या कहेंगे। सच तो ये है कि लोगों के पास आपके बारे में सोचने का इतना टाइम ही नहीं है। वो खुद अपनी गलतियों को छुपाने में बिजी हैं। सार्केज्म देखिये हम दूसरों की गलतियों पर हंसते हैं लेकिन खुद की गलतियों से ऐसा डरते हैं जैसे कोई भूत देख लिया हो। इनोवेशन की दुनिया में कोई भी चीज पहली बार में सही नहीं बनती। आपके हाथ में जो स्मार्टफोन है वो भी हजारों गलतियों और खराब प्रोटोटाइप्स का नतीजा है। अगर वो इंजीनियर पहली गलती पर हार मान लेते तो आज आप ये आर्टिकल पत्थर पर पढ़ रहे होते।
ऑथर कहते हैं कि जिस ऑर्गेनाइजेशन या इंसान के पास गलतियाँ करने का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा होता है वही सबसे ज्यादा ग्रो करता है। क्यों? क्योंकि उन्होंने हर पॉसिबल गलत रास्ता ट्राई कर लिया है और अब उनके पास सिर्फ सही रास्ता ही बचा है। इसे एक फिल्म की तरह देखिये। जब तक क्लाइमेक्स में हीरो पिटता नहीं है और गलतियाँ नहीं करता तब तक उसकी जीत में वो मजा नहीं आता। आपकी लाइफ की मूवी भी तभी हिट होगी जब इसमें ढेर सारी गलतियों के ट्विस्ट और टर्न्स होंगे।
जब आप अपनी गलती को एक लेसन की तरह देखने लगते हैं तो आपका डर गायब हो जाता है। आप एक ऐसे प्लेयर बन जाते हैं जो सिर्फ जीतने के लिए नहीं बल्कि सीखने के लिए खेलता है। और यकीन मानिये जो सीखने के लिए खेलता है उसे हराना नामुमकिन है। तो अब से जब भी कोई गलती हो तो अपना सर पकड़ने के बजाय एक पेन और पेपर उठाइये और लिखिये कि इस गलती ने आपको क्या नया सिखाया। यही वो सीक्रेट सॉस है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देगा।
गलतियाँ करने से मत डरिये बल्कि इस बात से डरिये कि आप डर की वजह से कुछ नया ट्राई ही नहीं कर रहे हैं। लाइफ बहुत छोटी है इसे परफेक्ट बनने की कोशिश में बर्बाद मत कीजिये। जाइये और जी भरकर गलतियाँ कीजिये क्योंकि जो सबसे ज्यादा गलतियाँ करेगा वही अंत में जीतेगा।
अगर आज की इस चर्चा ने आपकी सोच को थोड़ा भी बदला है तो अभी कमेंट में अपनी वो एक गलती शेयर कीजिये जिससे आपने सबसे बड़ा लेसन सीखा। शर्माइये मत आपकी एक गलती किसी और के लिए इंस्पिरेशन बन सकती है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो फेल होने के डर से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। याद रखिये गलतियाँ करना जिंदा होने की निशानी है।
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