What the Customer Wants You to Know (Hindi)


अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो कस्टमर के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे पड़ोस वाली पिंकी के पीछे उसका टॉमी भागता है तो बधाई हो आप अपनी सेल्स की अर्थी खुद उठा रहे हैं। आप सोच रहे हैं कि आप सेल्स कर रहे हैं पर असल में आप बस एक रिजेक्टेड लवर की तरह अपना टाइम और इज्जत दोनों गँवा रहे हैं।

आज हम राम चरन की शानदार बुक वॉट द कस्टमर वांट्स यू टू नो के जरिए समझेंगे कि सेल्स कोई भीख मांगना नहीं बल्कि एक साइंस है। आइए जानते हैं वो 3 बड़े लेसन जो आपके पुराने और घिसे पिटे सेल्स के तरीके को पूरी तरह से बदल देंगे।


लेसन १ : सेल्स का मतलब माल चिपकाना नहीं बल्कि सॉल्यूशन देना है

हमारे यहाँ सेल्स का मतलब समझा जाता है कि किसी के गले में अपना प्रोडक्ट जबरदस्ती डाल दो और पैसे लेकर रफूचक्कर हो जाओ। अगर आप भी यही सोचते हैं तो यकीन मानिए कि आप सेल्समैन नहीं बल्कि एक प्रोफेशनल सिरदर्द हैं। राम चरन अपनी बुक में साफ कहते हैं कि असली सेल्स तब शुरू होती है जब आप बेचना बंद कर देते हैं। सोचिए, आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं और वह बिना आपकी बात सुने, बिना आपकी नब्ज चेक किए, आपको चार कड़वी गोलियां थमा दे और कहे कि इसे खा लो सब ठीक हो जाएगा। क्या आप दोबारा उस डॉक्टर की शक्ल देखना चाहेंगे? बिल्कुल नहीं। आप शायद उसे अपनी सोसाइटी से बाहर निकलवाने के लिए मोर्चो निकाल देंगे। सेल्स में भी हम यही गलती करते हैं। हम कस्टमर के पास जाते हैं और बस अपने प्रोडक्ट के फीचर्स का गुणगान करने लगते हैं जैसे कि हम अपने ही रिश्ते के लिए अपनी तारीफ कर रहे हों।

कस्टमर को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि आपकी कंपनी कितनी बड़ी है या आपके प्रोडक्ट में कितने बटन लगे हैं। उसे बस एक ही बात से मतलब है कि क्या आप उसकी रातों की नींद हराम करने वाली प्रॉब्लम को खत्म कर सकते हैं। मान लीजिए आपका एक दोस्त है जो हमेशा रोता रहता है कि उसका वजन बढ़ रहा है। अब आप उसे एक ऐसी ट्रेडमिल बेचने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें स्पीकर लगे हैं और वह गाना गाती है। अरे भाई, उसे गाने नहीं सुनने, उसे पतला होना है। अगर आप उसे यह समझा पाते कि आपकी मशीन उसके घुटनों पर जोर डाले बिना उसका वजन कम करेगी, तो शायद वह अपना आधा बैंक बैलेंस आपको दे देता। लेकिन आप तो उसे म्यूजिक सिस्टम समझाने में लगे थे। यही सबसे बड़ी बेवकूफी है।

सेल्स की दुनिया में अगर आपको किंग बनना है तो पहले एक अच्छा जासूस बनना पड़ेगा। जासूस का काम क्या होता है? सवाल पूछना और सबूत इकट्ठा करना। आपको कस्टमर से ऐसे सवाल पूछने चाहिए जो उसे यह सोचने पर मजबूर कर दें कि अरे यार, यह बंदा तो मेरी प्रॉब्लम को मुझसे ज्यादा बेहतर समझता है। जब आप कस्टमर की परेशानी को शब्दों में बयां कर देते हैं, तो वह खुद ब खुद मान लेता है कि आपके पास ही उसका इलाज है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी किसी पुरानी बीमारी के लिए किसी वैद जी के पास जाएं और वह आपकी शक्ल देखते ही बता दें कि कल रात आपने चुपके से चार समोसे खाए थे। बस, वहीं पर आपका भरोसा जीत लिया जाता है।

पुराने जमाने के सेल्समैन गिटपिट बोलकर डील क्लोज करते थे, लेकिन आज का स्मार्ट कस्टमर आपकी चिकनी चुपड़ी बातों से नहीं बल्कि आपकी वैल्यू से इम्प्रेस होता है। अगर आप केवल एक टारगेट पूरा करने वाले रोबोट बने रहेंगे, तो कस्टमर आपको ब्लॉक करने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करेगा। लेकिन अगर आप उसके बिजनेस पार्टनर की तरह सोचेंगे, जो उसकी तरक्की में हाथ बंटाना चाहता है, तो वह खुद आपको चाय पर बुलाएगा। तो अगली बार जब किसी मीटिंग में जाएं, तो अपना कैटलॉग दिखाने से पहले अपनी सुनने की क्षमता को बढ़ाएं। सेल्स कोई जंग नहीं है जिसे जीतना है, यह एक रिश्ता है जिसे निभाना है। अगर आप कस्टमर की लाइफ में वैल्यू ऐड नहीं कर सकते, तो चुपचाप घर बैठिए और नेटफ्लिक्स देखिए, कम से कम किसी का वक्त तो बर्बाद नहीं होगा।


लेसन २ : कस्टमर के धंधे को अपने पिताजी का धंधा समझकर पढ़िए

ज्यादातर सेल्स के सूरमाओं की दिक्कत यह है कि उन्हें अपने प्रोडक्ट का कोना कोना पता होता है पर कस्टमर के बिजनेस का 'ब' भी नहीं पता होता। राम चरन कहते हैं कि अगर आप यह नहीं जानते कि आपका कस्टमर पैसा कैसे कमाता है और उसका पैसा कहां डूब रहा है, तो आप सेल्स नहीं बस तुक्का मार रहे हैं। सोचिए, आप एक हलवाई को जाकर यह समझा रहे हैं कि आपका नया सॉफ्टवेयर क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई पर चलता है। वह बेचारा सोच रहा होगा कि क्या इसमें चाशनी कम लगेगी या समोसे अपने आप तल जाएंगे? अगर आप उसे यह नहीं बता सकते कि इस सॉफ्टवेयर से उसके दूध की बर्बादी 20 परसेंट कम हो जाएगी, तो आपके एआई का वह अचार भी नहीं डालेगा।

कस्टमर को यह जानना है कि आप उसकी बैलेंस शीट में चमक कैसे लाएंगे। आपको उसके बिजनेस मॉडल का पोस्टमार्टम करना आना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि उसके कॉम्पिटिटर कौन हैं और उसकी मार्केट में इज्जत क्या है। जब आप मीटिंग में बैठकर यह कहते हैं कि सर, आपकी इन्वेंटरी पिछले छह महीने से फंसी हुई है और मेरा यह सॉल्यूशन उसे क्लियर करने में मदद करेगा, तब कस्टमर को आपके चेहरे में साक्षात लक्ष्मी जी नजर आने लगती हैं। वरना तो आप उसके लिए बस एक और सेल्समैन हैं जो उसका कीमती वक्त बर्बाद करने आया है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी को शादी के लिए प्रपोज करें और आपको पता ही न हो कि उसे खाने में क्या पसंद है या उसे लाइफ में क्या चाहिए। आप बस अपनी सैलरी और हाइट गिनाते जा रहे हैं। भाई साहब, शादी तो क्या, वह आपको चाय के लिए भी नहीं पूछेगा।

आज के दौर में इंफॉर्मेशन की कोई कमी नहीं है। कस्टमर को आपके प्रोडक्ट की प्राइस गूगल पर मिल जाएगी। उसे यह जानना है कि आपके आने से उसके बिजनेस में क्या वैल्यू बढ़ेगी। आपको एक कंसल्टेंट की तरह सोचना होगा। इसका मतलब है कि कभी कभी आपको कस्टमर को यह भी कहना पड़ सकता है कि सर, अभी आपको मेरा प्रोडक्ट खरीदने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपकी असल प्रॉब्लम कहीं और है। यह सुनकर कस्टमर को पहले तो झटका लगेगा, जैसे किसी ने उसे मुफ्त में बिरयानी खिला दी हो, लेकिन फिर जो भरोसा पैदा होगा, वह जिंदगी भर की सेल पक्की कर देगा।

लेकिन हमारे यहाँ तो लोग सेल्स को चेप होने का कॉम्पिटिशन समझते हैं। अगर कस्टमर फोन न उठाए तो दस बार और करो, जैसे कि वह आपकी रूठी हुई गर्लफ्रेंड हो। भाई, अगर आप उसके काम की बात करेंगे तो वह खुद आपको रेड कार्पेट बिछाकर बुलाएगा। आपको उसके रेवेन्यू, उसके खर्चे और उसके प्रॉफिट के बीच का गणित समझना होगा। जब आप यह गणित सुलझा देते हैं, तो आप एक वेंडर से हटकर एक बिजनेस पार्टनर बन जाते हैं। और याद रखिए, वेंडर बदले जाते हैं पर पार्टनर के साथ मिलकर तरक्की की जाती है। अगर आप सिर्फ अपनी जेब भरने की सोचेंगे तो एक दिन आप और आपकी कंपनी दोनों इतिहास बन जाएंगे। पर अगर आप कस्टमर की जेब भरने का रास्ता दिखाएंगे, तो आपकी तिजोरी अपने आप भर जाएगी।


लेसन ३ : वैल्यू प्रपोजिशन को कस्टमाइज करिए वरना रिजेक्शन के लिए तैयार रहिए

अगर आप अभी भी वही घिसा पिटा प्रेजेंटेशन हर कस्टमर को दिखा रहे हैं जो आपने 2019 में बनाया था, तो साहब आप सेल्स नहीं कर रहे, आप बस अपनी किस्मत के साथ जुआ खेल रहे हैं। राम चरन कहते हैं कि हर कस्टमर की भूख अलग होती है। किसी को दाल रोटी चाहिए तो किसी को पिज्जा। अब आप सबको जबरदस्ती करेले का जूस पिलाएंगे तो लोग भागेंगे ही। वैल्यू प्रपोजिशन का मतलब यह नहीं है कि आपके प्रोडक्ट में क्या खास है, इसका मतलब यह है कि उस खास चीज से कस्टमर को क्या फायदा है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक गंजे आदमी को कंघी बेच रहे हों और आप उसे कंघी के दांतों की मजबूती और प्लास्टिक की क्वालिटी बता रहे हैं। अरे भाई, उसके सिर पर बाल ही नहीं हैं, वह उस कंघी का क्या करेगा? उसे तो ऐसा कुछ चाहिए जो उसके सिर पर हरियाली वापस ला सके।

कस्टमर के पास आज चॉइस की सुनामी आई हुई है। अगर आप उसे स्पेशल फील नहीं कराएंगे, तो वह आपको टाटा बाय बाय कहने में देर नहीं लगाएगा। आपको अपनी पिच को ऐसे डिजाइन करना है जैसे कोई दर्जी शेरवानी सीता है। वह आपके कंधे, सीने और लंबाई का नाप लेता है तब जाकर वह फिट बैठती है। अगर आप रेडीमेड सेल्स पिच लेकर बाजार में निकलेंगे तो कहीं न कहीं से तो झोल आएगा ही। आपको यह दिखाना होगा कि आपने उसके बिजनेस पर होमवर्क किया है। जब आप बातचीत में उसके पिछले साल के घाटे या उसकी नई लॉन्च हुई सर्विस का जिक्र करते हैं, तो कस्टमर को लगता है कि यह बंदा मुझे जानता है। उसे लगता है कि आप उसके लिए एक मसीहा बनकर आए हैं जो सिर्फ उसकी प्रॉब्लम के लिए एक स्पेशल चाबी लेकर आया है।

लेकिन हमारे सेल्स के खिलाड़ी क्या करते हैं? वह जाते ही अपना लैपटॉप खोलते हैं और शुरू हो जाते हैं, हमारी कंपनी के इतने ऑफिस हैं, हमारे पास इतने एम्प्लॉई हैं। भाई, कस्टमर को आपकी कंपनी की जनसंख्या में कोई इंटरेस्ट नहीं है। उसे बस यह जानना है कि उसकी जिंदगी आसान होगी या नहीं। अगर आप अपनी वैल्यू को उसकी जरूरतों के हिसाब से तोड़ मरोड़कर पेश नहीं कर सकते, तो आपकी सेल्स का इंजन कभी स्टार्ट ही नहीं होगा। आपको अपनी बातों में यह जादू पैदा करना होगा कि कस्टमर को लगे कि यह डील उसके लिए नहीं बनी, बल्कि यह डील ही उसके लिए पैदा हुई है।

याद रखिए कि सेल्स सिर्फ एक ट्रांजेक्शन नहीं है, यह एक ट्रांसफॉर्मेशन है। आप कस्टमर को एक बुरी स्थिति से निकालकर एक बेहतर स्थिति में ले जा रहे हैं। राम चरन की यह बुक हमें सिखाती है कि जब आप कस्टमर की आंखों से दुनिया देखना शुरू करते हैं, तो सेल्स के दरवाजे अपने आप खुल जाते हैं। तो अपनी पुरानी सेल्स की चादर उतार फेंकिए और एक नए नजरिए के साथ मार्केट में उतरिए। क्योंकि असली सेल्समैन वह नहीं जो माल बेच दे, बल्कि वह है जिसके पास कस्टमर खुद दौड़कर आए।


तो दोस्तों, अगर आप भी अपनी सेल्स को रॉकेट की तरह उड़ाना चाहते हैं, तो राम चरन के इन तीन लेसन को अपने खून में उतार लीजिए। सेल्स कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस सही नीयत और सही नजरिए का खेल है। अगर आप आज भी पुराने तरीकों से चिपके रहेंगे, तो याद रखिए कि दुनिया आपको पीछे छोड़कर बहुत आगे निकल जाएगी।

अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट बॉक्स में बताइए कि इन तीनों लेसन में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा झकझोर गया? क्या आप अब भी वही पुरानी गलती कर रहे थे? अपने विचार शेयर करें और इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो सेल्स के नाम पर सिर्फ लोगों का सिर खाते हैं। चलिए, साथ मिलकर सेल्स की इस नई दुनिया को फतह करते हैं।

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