क्या आप अभी भी उसी घिसी पिटी सोच के साथ जी रहे हैं जो दादाजी के जमाने में चलती थी। बधाई हो। आप बहुत जल्द बिजनेस और करियर की रेस से बाहर होने वाले हैं। जब दुनिया रॉकेट की स्पीड से बदल रही है तब आपका पुराना एटीट्यूड आपको सिर्फ बर्बादी की तरफ ले जाएगा और आप हाथ मलते रह जाएंगे।
गैरी हेमल की बुक व्हाट मैटर्स नाउ हमें सिखाती है कि आज के दौर में जीतना है तो पुराने रूल्स को तोड़ना होगा। इस आर्टिकल में हम उन 3 लेसन्स के बारे में बात करेंगे जो आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देंगे और कामयाबी का रास्ता दिखाएंगे।
लेसन १ : वैल्यूज का असली खेल - मुनाफा नहीं इंसानियत
आजकल के जमाने में लोग सोचते हैं कि बिजनेस का मतलब सिर्फ पैसा कमाना है। जैसे तैसे करके बस कस्टमर की जेब ढीली कर दो और अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। लेकिन गैरी हेमल साहब कहते हैं कि अगर आप ऐसी घटिया सोच रखते हैं तो आपका बिजनेस बहुत जल्द आईसीयू (ICU) में नजर आएगा। असल में आज के दौर में जो चीज सबसे ज्यादा मैटर करती है वह है आपकी वैल्यूज। यानी आप किस उसूल पर अपना काम करते हैं।
जरा सोचिए आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां वेटर आपको ऐसे देखता है जैसे आपने उसकी जायदाद हड़प ली हो। खाना टेबल पर ऐसे पटकता है जैसे एहसान कर रहा हो। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। चाहे उनका खाना कितना ही स्वादिष्ट क्यों न हो आप वहां थूकना भी पसंद नहीं करेंगे। यही फर्क होता है एक लालची दुकानदार और एक वैल्यू ड्रिवन बिजनेस में। आज के लोग बहुत स्मार्ट हैं। उन्हें पता चल जाता है कि आप सिर्फ अपना बैंक बैलेंस देख रहे हैं या वाकई उनकी लाइफ में कोई वैल्यू जोड़ रहे हैं।
इंसानियत और एथिक्स अब सिर्फ किताबी बातें नहीं रह गई हैं। यह आज के कंपटीशन में जिंदा रहने का इकलौता रास्ता है। अगर आप अपने एम्प्लॉई को मशीन समझते हैं और उनसे सिर्फ काम निकलवाना जानते हैं तो यकीन मानिए वे भी आपको धोखा देने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे। लेकिन अगर आपकी कंपनी के कुछ उसूल हैं अगर आप लोगों की इज्जत करते हैं तो वे आपके लिए उस वक्त भी खड़े रहेंगे जब मार्केट में मंदी आएगी।
याद रखिए पैसा तो कोई भी कमा लेता है लेकिन भरोसा कमाना सबके बस की बात नहीं। जो कंपनी सिर्फ मुनाफे के पीछे भागती है वह एक सीजन की बारिश की तरह होती है जो आती है और चली जाती है। लेकिन जो वैल्यूज के साथ चलती है वह बरगद के पेड़ की तरह होती है जो हर तूफान में खड़ा रहता है। इसलिए अपनी नियत साफ रखिए क्योंकि भगवान के घर देर है पर अंधेर नहीं और कस्टमर के घर तो आजकल सोशल मीडिया है जहां एक गलत हरकत और आपका खेल खत्म। अपनी वैल्यूज को इतना मजबूत बनाइये कि लोग आपकी सर्विस के लिए नहीं आपके नाम के लिए लाइन लगाएं।
लेसन २ : इनोवेशन का तड़का - नया नहीं किया तो समझो गए काम से
अगर आपको लगता है कि एक बार कोई अच्छा आइडिया मिल गया और अब आप पूरी जिंदगी उसी के भरोसे मजे करेंगे तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। गैरी हेमल साफ कहते हैं कि इनोवेशन कोई एक बार की जाने वाली चीज नहीं है बल्कि यह तो रोज सुबह ब्रश करने जैसा है। अगर एक दिन भी छोड़ा तो मुंह से बदबू आने लगेगी और लोग आपसे दूर भागने लगेंगे। पुराने जमाने के बिजनेस मॉडल अब वैसे ही आउटडेटेड हो चुके हैं जैसे नोकिया के कीपैड वाले फोन।
कल्पना कीजिए कि आज के जमाने में कोई धोबी आपसे कहे कि वह आपके कपड़े सिर्फ तालाब के पानी से धोएगा और सुखाने के लिए पेड़ों की टहनियों पर टांगेगा क्योंकि उसके दादाजी यही करते थे। क्या आप उसे अपने महंगे कपड़े देंगे। कभी नहीं। आप उसे पागल समझकर वहां से रफूचक्कर हो जाएंगे। यही हाल उन लोगों का होता है जो कहते हैं कि हमारा काम तो सालों से ऐसे ही चल रहा है। भाई साहब दुनिया बदल गई है। अब लोग बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं और आप अभी भी बैलगाड़ी के टायर में हवा चेक कर रहे हैं।
इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आप मंगल ग्रह पर जाने वाली मशीन बना लें। इसका सीधा सा मतलब है कि आप अपनी सर्विस या प्रोडक्ट को आज की जरूरतों के हिसाब से कैसे बेहतर बना रहे हैं। अगर आपके पास कोई नया आइडिया नहीं है तो आप सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा हैं। और भीड़ को हमेशा कुचला जाता है। क्या आपने कभी गौर किया है कि क्यों कुछ कंपनियां रातों रात गायब हो जाती हैं। क्योंकि उन्होंने वक्त के साथ बदलना और कुछ नया करना जरूरी नहीं समझा।
आज की दुनिया में कंपटीशन इतना खूंखार है कि अगर आपने पलक झपकाई तो कोई दूसरा आपकी थाली से निवाला छीन ले जाएगा। लोग अक्सर रिस्क लेने से डरते हैं और सोचते हैं कि जैसा चल रहा है वैसा चलने दो। लेकिन सबसे बड़ा रिस्क तो कुछ नया न करने में है। गैरी हेमल हमें याद दिलाते हैं कि इनोवेशन सिर्फ लैब में नहीं होता बल्कि यह आपकी सोच में होना चाहिए। जब आप हर छोटी चीज को एक अलग नजरिए से देखते हैं तब आप कुछ ऐसा क्रिएट करते हैं जिसकी दुनिया को जरूरत होती है। इसलिए लकीर के फकीर मत बनिए। अपनी क्रिएटिविटी को जगाइये और हर दिन खुद से पूछिए कि मैं आज क्या अलग कर सकता हूं। वरना इतिहास के पन्नों में आपका नाम सिर्फ एक फुटनोट बनकर रह जाएगा।
लेसन ३ : अडैप्टेबिलिटी का जादू - गिरगिट की तरह रंग बदलना सीखो
अगर आप सोच रहे हैं कि अडैप्टेबिलिटी का मतलब सिर्फ एडजस्ट करना है तो आप गलत हैं। गैरी हेमल के अनुसार यह आज के दौर में जिंदा रहने की पहली शर्त है। दुनिया इतनी तेजी से करवट ले रही है कि कल का किंग आज का फकीर बन सकता है। जो लोग अपनी जिद पर अड़े रहते हैं कि हम तो नहीं बदलेंगे उन्हें समय ऐसे उखाड़ कर फेंकता है जैसे तूफान में कमजोर पेड़। आपको अपनी ईगो साइड में रखकर मार्केट की लहरों के साथ बहना सीखना होगा।
जरा उस अंकल के बारे में सोचिए जो आज भी बैंक की लाइन में लगकर पासबुक प्रिंट करवाने में गर्व महसूस करते हैं और यूपीआई (UPI) को स्कैम समझते हैं। वह खुद को बहुत समझदार समझते हैं लेकिन असल में वह उस दुनिया में जी रहे हैं जो अब खत्म हो चुकी है। जब पूरी दुनिया डिजिटल हो गई और आप अभी भी कबूतर से चिट्ठी भेजने की प्रैक्टिस कर रहे हैं तो मजाक तो आपका ही बनेगा। बिजनेस और करियर में भी यही होता है। मार्केट की डिमांड बदलती है टेक्नोलॉजी बदलती है और अगर आपकी सीखने की स्पीड जीरो है तो आपका करियर भी जल्द ही जीरो हो जाएगा।
अडैप्टेबिलिटी का मतलब है अपनी पुरानी चमड़ी को उतारकर नई खाल पहनना। इसमें थोड़ी तकलीफ होती है थोड़ा डर लगता है लेकिन यही ग्रोथ का रास्ता है। गैरी हेमल कहते हैं कि जो कंपनियां या इंसान अपनी गलतियों से नहीं सीखते और खुद को रीइन्वेंट नहीं करते वे बहुत जल्द म्यूजियम का हिस्सा बन जाते हैं। क्या आपको याद है कि कैसे बड़े बड़े ब्रांड्स सिर्फ इसलिए डूब गए क्योंकि उन्होंने बदलते वक्त को पहचानने से इनकार कर दिया था। वे अपनी कामयाबी के नशे में इतने चूर थे कि उन्हें सामने खड़ी तबाही दिखी ही नहीं।
आपको गिरगिट की तरह रंग बदलना आना चाहिए। गिरगिट यह काम खुद को बचाने के लिए करता है और आपको यह काम खुद को सफल बनाने के लिए करना है। यह कोई चालाकी नहीं बल्कि समझदारी है। अगर आज एआई (AI) का जमाना है तो उसे सीखिए। अगर कस्टमर की पसंद बदल रही है तो अपनी स्ट्रेटजी बदलिए। अपनी पुरानी सफलताओं की माला जपना बंद कीजिए क्योंकि बीता हुआ कल आपकी आज की रोटी का इंतजाम नहीं करेगा। जो इंसान हर सिचुएशन में खुद को ढाल लेता है उसे दुनिया की कोई भी ताकत नहीं हरा सकती। इसलिए जिद्दी मत बनिए फ्लेक्सिबल बनिए।
तो दोस्तों, गैरी हेमल की यह बातें सिर्फ एक किताब के पन्ने नहीं हैं बल्कि आपके करियर और लाइफ के लिए एक वेक अप कॉल हैं। दुनिया बदल रही है कंपटीशन गलाकाट है और इनोवेशन ही आपकी ढाल है। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही पुराने ढर्रे पर चलकर गुमनामी में खो जाना चाहते हैं या इन लेसन्स को अपनाकर सफलता के शिखर पर पहुंचना चाहते हैं।
आज ही खुद से एक वादा कीजिए कि आप अपनी वैल्यूज से समझौता नहीं करेंगे हर दिन कुछ नया सोचेंगे और वक्त के साथ खुद को बदलते रहेंगे। अगर आप तैयार हैं तो कमेंट में आई एम रेडी जरूर लिखें और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे सच में अपनी लाइफ बदलने की जरूरत है। आपकी एक छोटी सी शुरुआत बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।
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