क्या आप अभी भी उसी घिसे पिटे आइडिया के साथ बैठे हैं जिसे आपके पड़ोसी ने भी रिजेक्ट कर दिया था। बहुत बढ़िया। ऐसे ही आप अपनी ग्रोथ और कीमती समय को कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं। जब दुनिया किलर क्वेश्चन्स से धमाका कर रही है तब आप पुरानी सोच के साथ फेल होने का इंतजार कर रहे हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम फिल मैक्किनी की किताब बियौंड द ऑब्वियस से वह ३ लेसन सीखेंगे जो आपकी सोच को पूरी तरह से बदल देंगे। चलिए जानते हैं कि कैसे आप आउट ऑफ़ द बॉक्स सोचकर गेम चेंजर बन सकते हैं।
लेसन १ : पुराने आइडियाज की आग को बुझाना
दोस्तों, अगर आपको लगता है कि आप बहुत क्रिएटिव हैं और आपके पास दुनिया को बदलने वाले आइडियाज हैं तो जरा रुकिए। सच तो यह है कि आपके दिमाग की अलमारी उन पुराने और सड़े हुए आइडियाज से भरी पड़ी है जो पिछली सदी में ही एक्सपायर हो चुके थे। फिल मैक्किनी अपनी किताब बियौंड द ऑब्वियस में सबसे पहला और सबसे कड़वा लेसन यही देते हैं कि नए आइडियाज की तलाश करने से पहले पुराने आइडियाज की आग को बुझाना होगा। इसे वह फायर ऑफ ओल्ड आइडियाज कहते हैं।
जरा सोचिए। आप एक ऐसी बाल्टी में ताजी शिकंजी भरने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें पहले से ही दो दिन पुराना और बदबूदार नाले का पानी भरा हुआ है। क्या होगा। आपकी ताजी शिकंजी भी उसी कचरे का हिस्सा बन जाएगी। हमारे दिमाग का भी यही हाल है। हम वही पुराने घिसे पिटे तरीके अपनाते हैं और उम्मीद करते हैं कि रिजल्ट एकदम जादुई मिलेगा। यह तो वही बात हुई कि आप नोकिया ११०० लेकर ५जी इंटरनेट चलाने की जिद कर रहे हैं। जब तक आप उस पुराने फोन को कचरे में नहीं फेंकेंगे तब तक नया स्मार्टफोन हाथ में नहीं आएगा।
हमारे ऑफिस में या बिजनेस में अक्सर लोग कहते हैं कि अरे भाई हमारे यहाँ तो काम ऐसे ही होता आया है। यह लाइन असल में इनोवेशन की मौत का वारंट है। जब आप अपनी पुरानी आदतों और फेल हो चुके तरीकों से चिपके रहते हैं तो आप खुद को एक पिंजरे में कैद कर लेते हैं। मैक्किनी कहते हैं कि आपको अपने उन आइडियाज को पहचानना होगा जो अब काम नहीं कर रहे हैं और उन्हें बेरहमी से खत्म करना होगा। यह सुनने में थोड़ा डरावना लग सकता है क्योंकि हमें अपनी पुरानी चीजों से बड़ा लगाव होता है। बिलकुल वैसे ही जैसे आपको अपने उस फटे हुए पुराने बनियान से प्यार होता है जिसे आप चाहकर भी फेंक नहीं पाते।
लेकिन बिजनेस और करियर में यह इमोशनल ड्रामा नहीं चलता। अगर आप नए और क्रांतिकारी आइडियाज के लिए जगह नहीं बनाएंगे तो आपकी क्रिएटिविटी दम तोड़ देगी। पुराने आइडियाज को मारना ही असली इनोवेशन की पहली सीढ़ी है। जब तक आप उस पुरानी और टूटी हुई साइकिल को नहीं छोड़ेंगे तब तक आप फेरारी चलाने का सपना कैसे देख सकते हैं। अपनी कंपनी या अपनी लाइफ में उन नियमों को ढूंढिए जो सिर्फ इसलिए चल रहे हैं क्योंकि किसी ने उन्हें बदलने की हिम्मत नहीं की।
एक बार जब आप इन पुराने आइडियाज की आग को बुझा देते हैं तभी आपके दिमाग में वह खाली स्पेस बनता है जहाँ नए और किलर आइडियाज जन्म ले सकते हैं। यह प्रोसेस दर्दनाक हो सकता है लेकिन यह बहुत जरूरी है। यह लेसन हमें सिखाता है कि खाली दिमाग शैतान का घर नहीं बल्कि नए आइडियाज का वर्कशॉप होता है। बस शर्त यह है कि वह खाली होना चाहिए ना कि पुरानी यादों और नाकामयाबियों के कबाड़ से भरा हुआ। जब आप इस कबाड़ को बाहर फेंक देते हैं तभी आप अगले स्टेप के लिए तैयार होते हैं जहाँ हम असली सवालों का सामना करेंगे।
लेसन २ : किलर क्वेश्चन्स की पावर
पुराने कबाड़ को दिमाग से बाहर फेंकने के बाद अब बारी आती है असली खेल की। फिल मैक्किनी कहते हैं कि ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वह गलत सवालों के सही जवाब ढूंढ रहे होते हैं। यह तो वही बात हुई कि आप अपनी बीवी के गुस्से का इलाज गूगल पर सर्च कर रहे हैं। जवाब तो मिल जाएगा लेकिन क्या वह काम करेगा। बिलकुल नहीं। असली इनोवेशन की चाबी किलर क्वेश्चन्स में छिपी है। यह ऐसे सवाल होते हैं जो आपकी सोच की जड़ों को हिला कर रख देते हैं और आपको उस दिशा में देखने पर मजबूर करते हैं जहाँ आपने आज तक झाँका भी नहीं।
जरा सोचिए। अगर हेनरी फोर्ड ने लोगों से पूछा होता कि उन्हें क्या चाहिए तो लोग कहते कि हमें ज्यादा तेज दौड़ने वाला घोड़ा चाहिए। लेकिन फोर्ड ने खुद से एक अलग सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि मैं ट्रांसपोर्टेशन को घोड़ों से आजाद कैसे कर सकता हूँ। और इसी एक किलर क्वेश्चन ने कार का आविष्कार कर दिया। हम अपनी लाइफ में अक्सर बहुत ही घटिया सवाल पूछते हैं। जैसे कि मैं अपनी सेल १० परसेंट कैसे बढ़ाऊं। यह बहुत ही छोटा और मासूम सवाल है। इसकी जगह खुद से पूछिए कि अगर मेरा कॉम्पिटिटर मेरी सर्विस फ्री में देने लगे तो मैं मार्केट में कैसे टिकूंगा। अब आया ना ऊँट पहाड़ के नीचे।
किलर क्वेश्चन्स आपको कम्फर्ट जोन से बाहर निकालते हैं। यह आपको उस अंधेरे कमरे में ले जाते हैं जहाँ आपके डर और आपकी कमियां छिपी होती हैं। मैक्किनी कहते हैं कि एक अच्छा सवाल वह है जो आपको थोडी देर के लिए चुप कर दे और आपको सोचने पर मजबूर कर दे। जैसे कि अगर कल आपकी कंपनी पूरी तरह से जलकर खाक हो जाए और आपको जीरो से शुरू करना पड़े तो आप कौन सी एक चीज दोबारा कभी नहीं करेंगे। यह सवाल सुनते ही आपकी आंखों के सामने उन फालतू खर्चों और बेकार के प्रोजेक्ट्स की लिस्ट आ जाएगी जिन्हें आप सालों से ढो रहे हैं।
अक्सर बिजनेस मीटिंग्स में लोग सिर झुकाकर सिर्फ हाँ में हाँ मिलाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सवाल पूछना बेवकूफी है। लेकिन सच तो यह है कि जो सवाल नहीं पूछता वह सबसे बड़ा बेवकूफ है। आप अपनी टीम के साथ बैठिए और ऐसे सवाल दागिए जो उनके पसीने छुड़ा दें। जैसे कि हमारा सबसे वफादार कस्टमर हमें छोड़कर क्यों जा सकता है। या फिर हमारी सबसे बड़ी मजबूती ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी कब बन सकती है। यह सवाल आपको वह सच्चाई दिखाएंगे जो आपकी बड़ी बड़ी एक्सेल शीट्स और पीपीटी भी नहीं दिखा सकतीं।
यह किलर क्वेश्चन्स पूछना एक आर्ट है। इसमें आपको अपने ईगो को साइड में रखना पड़ता है। यह वही बात है कि आप आईने के सामने खड़े होकर खुद से पूछ रहे हैं कि क्या मैं वाकई उतना स्मार्ट हूँ जितना मैं सोशल मीडिया पर दिखता हूँ। जब आप खुद से और अपने काम से ऐसे चुभने वाले सवाल पूछते हैं तभी जाकर इनोवेशन का रास्ता खुलता है। बिना सही सवाल के आप सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि निशाना सीधे मछली की आँख पर लगेगा। लेकिन असलियत में तो आपका तीर पड़ोसी की खिड़की का कांच तोड़ रहा है।
किलर क्वेश्चन्स की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह आपको ऑब्वियस चीजों से ऊपर ले जाते हैं। जब आप वह सवाल पूछते हैं जो कोई और नहीं पूछ रहा तो आपको वह आइडियाज मिलते हैं जो किसी और के पास नहीं हैं। यह प्रोसेस आपको एक साधारण एम्प्लॉई या बिजनेस ओनर से उठाकर एक विजनरी लीडर बना देता है। लेकिन याद रखिए कि सिर्फ सवाल पूछना काफी नहीं है। उन सवालों से जो सच निकलकर आता है उसे झेलने की हिम्मत भी होनी चाहिए। और जब आप इन सवालों के जवाब ढूंढ लेते हैं तब आप तैयार होते हैं आखिरी स्टेप के लिए जहाँ इनोवेशन को एक सिस्टम बनाया जाता है।
लेसन ३ : इनोवेशन का सिस्टम बनाना
अब तक आपने कचरा साफ कर दिया और सही सवाल भी पूछ लिए। लेकिन क्या आपको लगता है कि सिर्फ एक बार महान आइडिया आने से आपकी नैया पार लग जाएगी। अगर ऐसा है तो आप वैसी ही गलती कर रहे हैं जैसे कोई इंसान एक दिन जिम जाकर आईने में अपनी सिक्स पैक एब्स ढूंढने लगता है। फिल मैक्किनी का तीसरा सबसे जरूरी लेसन यही है कि इनोवेशन कोई चमत्कार नहीं बल्कि एक सिस्टम है। इसे आपको अपने काम करने के तरीके के डीएनए में डालना होगा। इसे वह इनोवेशन का सिस्टम कहते हैं जहाँ आइडियाज सिर्फ इत्तेफाक से नहीं आते बल्कि एक प्रोसेस के तहत पैदा किए जाते हैं।
जरा अपने आसपास देखिए। बहुत सी कंपनियां एक बार बड़ा धमाका करती हैं और फिर गायब हो जाती हैं। क्यों। क्योंकि उनके पास इनोवेशन का कोई सिस्टम नहीं था। उन्होंने एक बार तुक्का मारा और निशाना लग गया। लेकिन तुक्का बार बार नहीं लगता। यह तो वही बात हुई कि आपने एक बार अंधेरे में बैट घुमाया और छक्का लग गया। अब आप सोच रहे हैं कि आप विराट कोहली बन गए हैं। असली खिलाड़ी वह है जो हर बॉल पर रन बनाना जानता हो। बिजनेस में भी आपको एक ऐसी मशीन तैयार करनी पड़ती है जो लगातार नए और बेहतर आइडियाज उगलती रहे।
मैक्किनी समझाते हैं कि इनोवेशन के तीन हिस्से होते हैं। पहला है आइडिएशन यानी नए विचार लाना। दूसरा है सिलेक्शन यानी उन हजारों कचरा आइडियाज में से एक हीरा ढूंढना। और तीसरा है एक्जीक्यूशन यानी उस हीरे को तराश कर मार्केट में उतारना। ज्यादातर लोग पहले स्टेप पर ही दम तोड़ देते हैं। वह सोचते बहुत हैं लेकिन करते कुछ नहीं। यह वैसा ही है जैसे आप रात भर बैठ कर दुनिया को सुधारने की प्लानिंग करते हैं और सुबह उठकर फिर वही आलू पराठा खाकर सो जाते हैं। बिना सिस्टम के आपके आइडियाज सिर्फ ख्याली पुलाव बनकर रह जाएंगे।
एक अच्छा सिस्टम वह है जहाँ फेल होने की इजाजत हो। अगर आपकी टीम नए आइडियाज देने से डरती है क्योंकि उन्हें लगता है कि फेल होने पर उनकी क्लास लगेगी तो भूल जाइए कि आप कभी इनोवेटिव बन पाएंगे। इनोवेशन के सिस्टम में गलतियों को हार नहीं बल्कि डेटा माना जाता है। आपको एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ लोग अजीब और बेतुके आइडियाज भी शेयर कर सकें। क्या पता किसी के उस पागलों वाले आइडिया में ही आपकी अगली बड़ी कामयाबी छिपी हो। जब तक आप एक सुरक्षित स्पेस नहीं देंगे तब तक लोग वही पुराना और सेफ रास्ता चुनते रहेंगे।
इनोवेशन का सिस्टम बनाने का मतलब यह भी है कि आप अपने कस्टमर की जरूरतों को करीब से समझें। सिर्फ इसलिए कुछ नया मत बनाइए क्योंकि आपको वह कूल लगता है। ऐसा प्रोडक्ट बनाना जिसे कोई खरीदना ही न चाहे इनोवेशन नहीं बल्कि बेवकूफी है। यह तो वही बात हुई कि आप रेगिस्तान में रेनकोट बेचने की दुकान खोल लें। सिस्टम आपको यह चेक करने में मदद करता है कि आपका आइडिया वाकई किसी की प्रॉब्लम सॉल्व कर रहा है या नहीं। फीडबैक लीजिए उसे इम्प्रूव कीजिए और फिर से मार्केट में उतारिए। यही वह लूप है जो एप्पल और गूगल जैसी कंपनियों को टॉप पर रखता है।
आखिर में याद रखिए कि इनोवेशन कोई मंजिल नहीं है बल्कि एक सफर है। यह एक ऐसी सीढ़ी है जिस पर आपको चढ़ते रहना होगा। अगर आप रुक गए तो आप पीछे छूट जाएंगे। फिल मैक्किनी की यह किताब हमें सिखाती है कि ऑब्वियस यानी जो सामने दिख रहा है उससे परे जाकर देखना ही असली जीत है। जब आप पुराने आइडियाज को छोड़ देते हैं किलर क्वेश्चन्स पूछते हैं और एक मजबूत सिस्टम बना लेते हैं तब आपको गेम चेंजर बनने से कोई नहीं रोक सकता। तो क्या आप तैयार हैं अपनी सोच की बाउंड्री को तोड़ने के लिए।
दोस्तों, आज हमने सीखा कि कैसे अपनी पुरानी सोच के पिंजरे को तोड़कर हम वाकई कुछ बड़ा कर सकते हैं। यह किताब सिर्फ बिजनेस के लिए नहीं बल्कि आपकी पर्सनल ग्रोथ के लिए एक आईना है। अब रुकिए और खुद से एक किलर क्वेश्चन पूछिए। क्या आप वाकई अपनी लाइफ में कुछ नया कर रहे हैं या सिर्फ कल वाले दिन को ही रिपीट कर रहे हैं। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया और इसने आपकी सोच की खिड़की खोली है तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा पुराने आइडियाज का रोना रोता रहता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वह एक किलर क्वेश्चन क्या है जो आप कल सुबह अपने काम में पूछने वाले हैं। चलिए मिलकर ऑब्वियस से आगे बढ़ते हैं।
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