What You Really Need to Lead (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि प्रमोशन के लिए बस चमचागिरी काफी है। अगर हाँ तो बधाई हो आप अपनी जिंदगी और करियर को बर्बाद करने की रेस में सबसे आगे खड़े हैं। बिना ओनरशिप माइंडसेट के आप लीडर नहीं बस एक महंगे नौकर बनकर रह जाएंगे।

इस किताब के जरिए हम समझेंगे कि असली लीडरशिप का मतलब कुर्सी नहीं बल्कि सही एक्शन लेना है। चलिए जानते हैं उन तीन पावरफुल लेसन के बारे में जो आपको एक साधारण एम्प्लॉई से एक दमदार लीडर बनाने की ताकत रखते हैं।


लेसन १ : लीडरशिप कोई टाइटल नहीं बल्कि आपका व्यवहार है

अक्सर लोग समझते हैं कि जब उनके नाम के आगे मैनेजर या डायरेक्टर का टैग लगेगा तभी वे लीडर कहलाएंगे। सच तो यह है कि दुनिया ऐसे लोगों से भरी पड़ी है जिनके पास बड़े बड़े केबिन हैं पर लीडरशिप के नाम पर वे बिल्कुल जीरो हैं। रॉबर्ट एस कापलन कहते हैं कि लीडरशिप कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको ऊपर से गिफ्ट में मिलती है। यह वह जिम्मेदारी है जिसे आपको खुद उठाना पड़ता है। इमेजिन करिए कि आपके ऑफिस में आग लग गई है। अब क्या आप वहां बैठकर इस बात का इंतजार करेंगे कि कब एचआर आएगी और आपको बाहर जाने की परमिशन देगी। या फिर आप खुद दरवाजा खोलेंगे और सबको बाहर निकालेंगे। जो इंसान बिना किसी के कहे एक्शन लेता है वही असली लीडर है।

हमारे समाज में एक बड़ी गलतफहमी है कि लीडर मतलब वो इंसान जो सिर्फ हुक्म चलाता है। अगर आप अपने जूनियर्स पर चिल्ला रहे हैं या उन्हें हर छोटी बात पर टोक रहे हैं तो आप लीडर नहीं बल्कि एक फ्रस्ट्रेटेड इंसान हैं। असली लीडरशिप तब दिखती है जब आप देखते हैं कि कोई काम बिगड़ रहा है और आप चुपचाप जाकर उसे ठीक कर देते हैं। बिना इस बात की चिंता किए कि इसका क्रेडिट किसे मिलेगा। लोग अक्सर सोचते हैं कि अरे भाई मेरी सैलरी तो सिर्फ फाइलें दबाने की है तो मैं कंपनी की ग्रोथ के बारे में क्यों सोचूं। यही वह सोच है जो आपको एक साधारण एम्प्लॉई की भीड़ में दबाकर रखती है।

सोचिए उस दोस्त के बारे में जो ग्रुप ट्रिप प्लान करते वक्त सबसे पहले आगे आता है। वह सबकी पसंद का होटल बुक करता है और गाड़ी का इंतजाम करता है। उसके पास कोई लीडर का सर्टिफिकेट नहीं है पर पूरा ग्रुप उसकी बात मानता है। क्यों। क्योंकि उसने जिम्मेदारी उठाई है। ऑफिस लाइफ में भी यही होता है। जब आप अपने बॉस के पास सिर्फ समस्याएं लेकर नहीं बल्कि उन समस्याओं के समाधान लेकर जाते हैं तब आप अपनी लीडरशिप साबित करते हैं। कापलन का कहना है कि लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप सबसे स्मार्ट हैं। इसका मतलब यह है कि आप सबसे ज्यादा फिक्रमंद हैं।

अगर आप आज भी इस इंतजार में बैठे हैं कि जब आपकी कुर्सी बड़ी होगी तब आप बड़े काम करेंगे तो यकीन मानिए वो दिन कभी नहीं आएगा। क्योंकि बड़ी कुर्सी उन्हीं को मिलती है जो छोटी कुर्सी पर बैठकर भी बड़े लेवल की जिम्मेदारी निभाते हैं। लीडरशिप एक मसल की तरह है जिसे आपको रोज ट्रेन करना पड़ता है। चाहे वह मीटिंग में अपना पॉइंट रखना हो या किसी सहकर्मी की मदद करना। आपका हर छोटा एक्शन यह तय करता है कि लोग आपको फॉलो करेंगे या बस आपकी पीठ पीछे आपकी बुराई करेंगे। इसलिए आज से ही टाइटल का मोह छोड़िए और एक लीडर की तरह बर्ताव करना शुरू कीजिए।


लेसन २ : एक ओनर की तरह सोचना ही आपकी असली पावर है

क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप किसी दोस्त की गाड़ी मांगकर चलाते हैं तो गड्ढों से थोड़ा बचकर निकलते हैं पर जैसे ही अपनी खुद की गाड़ी होती है तो आप उसे दुनिया का सबसे कीमती हीरा समझने लगते हैं। बस यही अंतर है एक एम्प्लॉई और एक ओनर के माइंडसेट में। रॉबर्ट एस कापलन कहते हैं कि लीडर बनने के लिए आपको कंपनी का मालिक होने की जरूरत नहीं है पर आपको यह सोचना जरूर पड़ेगा कि यह कंपनी आपकी अपनी है। अगर ऑफिस की लाइट फालतू जल रही है और आप उसे यह सोचकर बंद नहीं करते कि बिल तो कंपनी भरेगी तो समझ लीजिए कि आपकी लीडरशिप की बैटरी अभी लो है।

ओनर की तरह सोचने का मतलब यह नहीं है कि आप ऑफिस की तिजोरी पर कब्जा कर लें। इसका मतलब यह है कि आप अपनी डेस्क से बाहर निकलकर बड़ी तस्वीर को देखें। ज्यादातर लोग सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उन्हें जेडी यानी जॉब डिस्क्रिप्शन में लिखकर दिया गया है। अगर उनसे कोई एक्स्ट्रा काम करने को कह दे तो उनके चेहरे ऐसे बन जाते हैं जैसे किसी ने उनकी किडनी मांग ली हो। वे भूल जाते हैं कि जब आप सिर्फ अपने काम से काम रखते हैं तो आप सिर्फ एक मशीन का पुर्जा बनकर रह जाते हैं। लेकिन जब आप पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी खुद पर लेते हैं तब आप एक लीडर की तरह चमकते हैं।

सोचिए उस दुकान वाले के बारे में जहाँ आप रोज दूध लेने जाते हैं। अगर कभी उसके पास छुट्टा पैसा नहीं होता तो वह कहता है कि अरे भाईसाहब कल दे देना। क्यों। क्योंकि उसे पता है कि आप उसके परमानेंट कस्टमर हैं और वह अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहता है। वहीं किसी सरकारी दफ्तर में जाइए जहाँ बाबू को फर्क नहीं पड़ता कि आपका काम आज हो या अगले साल। वह सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगा है। अब आप खुद तय कीजिए कि आप उस भरोसेमंद दुकानदार जैसा बनना चाहते हैं या उस बोरिंग बाबू जैसा। ओनरशिप का मतलब है कि अगर कोई क्लाइंट नाराज है तो आप उसे यह कहकर नहीं टालते कि यह मेरे डिपार्टमेंट का काम नहीं है। आप उसे सुनते हैं और उसकी प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं।

जब आप ओनर की तरह सोचते हैं तो आप बहाने बनाना बंद कर देते हैं। एक एम्प्लॉई हमेशा कहता है कि बजट कम था या टीम अच्छी नहीं थी इसलिए प्रोजेक्ट फेल हो गया। लेकिन एक लीडर कहता है कि यह मेरा प्रोजेक्ट था और इसकी असफलता की पूरी जिम्मेदारी मेरी है। यह सुनने में थोड़ा डरावना लग सकता है पर यही वह बात है जो आपको भीड़ से अलग करती है। जब आप अपनी गलतियों को सीने पर मेडल की तरह सजाते हैं और उनसे सीखते हैं तो आपके साथ काम करने वाले लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। और याद रखिए कि बिना भरोसे के लीडरशिप की बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है।

आजकल के दौर में जहाँ हर कोई बस अपनी सैलरी और छुट्टी का हिसाब लगा रहा है वहां ओनरशिप दिखाने वाला इंसान हीरा माना जाता है। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी इज्जत करें और मैनेजमेंट आपको प्रमोट करने के लिए मजबूर हो जाए तो आपको अपनी जिम्मेदारी की सीमाएं तोड़नी होंगी। यह मत सोचिए कि आपको क्या मिल रहा है बल्कि यह सोचिए कि आप इस कंपनी या इस टीम में क्या वैल्यू जोड़ रहे हैं। जब आप अपनी कंपनी के पैसों को अपने पैसे की तरह बचाने लगते हैं और उसके गोल्स को अपना गोल बना लेते हैं तो कामयाबी खुद ब खुद आपके पीछे आने लगती है।


लेसन ३ : फीडबैक से मत डरिए क्योंकि आईना कभी झूठ नहीं बोलता

क्या आपने कभी किसी ऐसे इंसान के साथ काम किया है जिसे लगता है कि वह भगवान का दूसरा अवतार है और उससे कभी कोई गलती हो ही नहीं सकती। ऐसे लोगों को जब कोई सलाह दी जाती है तो उनका ईगो ऐसे फूल जाता है जैसे धूप में रखा हुआ पापड़। रॉबर्ट एस कापलन कहते हैं कि एक महान लीडर बनने के लिए आपको अपनी कमियों को गले लगाना सीखना होगा। अगर आप अपनी कमियों को सुनकर बुरा मान जाते हैं तो समझ लीजिए कि आप लीडरशिप की रेस से बाहर हो चुके हैं। असल में लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आपके पास हर सवाल का जवाब हो बल्कि लीडरशिप का मतलब यह है कि आप सही सवाल पूछने और जवाब सुनने की हिम्मत रखते हों।

इमेजिन करिए कि आप एक पार्टी में जा रहे हैं और आपके चेहरे पर थोड़ी सी कालिख लगी है। अब आपका एक सच्चा दोस्त आता है और आपको बता देता है कि भाई चेहरा साफ कर ले वरना लोग हँसेंगे। क्या आप उस पर गुस्सा करेंगे। बिल्कुल नहीं। आप उसका शुक्रिया अदा करेंगे। लेकिन ऑफिस में जब कोई सहकर्मी कहता है कि आपकी प्रेजेंटेशन थोड़ी और बेहतर हो सकती थी तो हमें लगता है कि उसने हमारे खानदान की बेइज्जती कर दी है। कापलन का कहना है कि एक लीडर को हमेशा फीडबैक का भूखा होना चाहिए। आपको खुद अपने जूनियर्स के पास जाकर पूछना चाहिए कि मैं आपकी मदद कैसे कर सकता हूँ या मैं अपनी लीडरशिप में क्या सुधार कर सकता हूँ।

जो लीडर फीडबैक के दरवाजे बंद कर देता है उसके पतन की कहानी वहीं से शुरू हो जाती है। जब आप अपने आसपास सिर्फ हाँ में हाँ मिलाने वाले चमचों को इकट्ठा कर लेते हैं तो आप एक भ्रम की दुनिया में जीने लगते हैं। आपको लगता है कि सब कुछ बढ़िया चल रहा है पर हकीकत में आपकी टीम अंदर ही अंदर दम तोड़ रही होती है। एक सच्चा लीडर वह है जो कड़वी बातों को सुनने का जिगरा रखता है। वह जानता है कि अगर उसे अपनी टीम को हिमालय की चोटी पर ले जाना है तो उसे पहले उन पत्थरों को हटाना होगा जो उसके जूतों में चुभ रहे हैं। और उन पत्थरों का पता उसे तभी चलेगा जब वह अपनी टीम की बात ध्यान से सुनेगा।

अक्सर हमें लगता है कि फीडबैक देना सिर्फ ऊपर वाले बॉस का काम है पर एक लीडर जानता है कि सीखना किसी से भी हो सकता है। चाहे वह ऑफिस का गार्ड हो या नया आया हुआ इंटर्न। जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं तो आपकी टीम का आप पर भरोसा और बढ़ जाता है। उन्हें लगता है कि उनका लीडर भी एक इंसान है जो बेहतर बनने की कोशिश कर रहा है। यह ईमानदारी ही आपको एक बॉस से ऊपर उठाकर एक मेंटर बना देती है। याद रखिए कि ईगो और लीडरशिप कभी एक साथ नहीं रह सकते। अगर आप ईगो को पालेंगे तो लीडरशिप मर जाएगी और अगर आप लीडरशिप को बढ़ाना चाहते हैं तो ईगो को आज ही कचरे के डिब्बे में डालना होगा।


लीडरशिप कोई ऐसी जादुई छड़ी नहीं है जो रातों रात आपको मिल जाएगी। यह तो हर रोज लिए गए उन छोटे छोटे फैसलों का नतीजा है जो आप अपने ऑफिस या घर में लेते हैं। अगर आप आज भी टाइटल और कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं तो रुकिए और खुद से पूछिए कि क्या लोग वाकई आपको फॉलो करना चाहते हैं या वे बस आपकी पावर से डरते हैं। असली लीडरशिप का बीज आपके अंदर ही है बस उसे ओनरशिप और विनम्रता के पानी से सींचने की जरूरत है।

तो क्या आप आज से ही एक ओनर की तरह सोचना शुरू करेंगे। नीचे कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि इस आर्टिकल का कौन सा हिस्सा आपके दिल को छू गया। इस लेख को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपनी लीडरशिप क्वालिटी को और निखारना चाहते हैं। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शुरुआत आपको कल का एक बड़ा लीडर बना सकती है।

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