Who Not How (Hindi)


क्या आप अभी भी गधों की तरह हर काम खुद करने की कोशिश कर रहे हैं। बधाई हो आप अपनी सक्सेस का गला घोंट रहे हैं और अपनी लाइफ के कीमती साल बर्बाद कर रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सब कुछ अकेले मैनेज करना बहादुरी है तो यकीन मानिए आपसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं है।

​इस आर्टिकल में हम डैन सुलिवन की बुक हु नॉट हाउ से वह ३ पावरफुल लेसन सीखेंगे जो आपकी सोच बदल देंगे। हम जानेंगे कि कैसे खुद को घिसना बंद करके आप सही लोगों की मदद से अपने बड़े गोल्स को चुटकियों में हासिल कर सकते हैं।


लेसन १ : अपनी मेंटालिटी बदलिए और हाउ के बजाय हु को ढूंढिए

​हम में से ज्यादातर लोग बचपन से ही एक गलत रेस का हिस्सा बन जाते हैं। स्कूल से लेकर नौकरी तक हमें यही सिखाया जाता है कि अगर कोई काम करना है तो उसे खुद करना सीखो। जब भी हमारे सामने कोई नया गोल या मुश्किल आती है तो हमारा दिमाग तुरंत एक सवाल पूछता है कि मैं इसे कैसे करूं। आप रात भर जागकर यूट्यूब ट्यूटोरियल्स देखते हैं और खुद को एक थके हुए सुपरहीरो की तरह महसूस करते हैं जो सब कुछ अकेले संभालना चाहता है। सच तो यह है कि आप सुपरहीरो नहीं बल्कि एक ऐसे इंसान बन रहे हैं जो जल्दी ही बर्नआउट होने वाला है।

​सोचिए कि आपको एक नई वेबसाइट बनानी है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह है कि आप खुद कोडिंग सीखने बैठ जाएं और अगले छह महीने इसी में बर्बाद कर दें कि जावास्क्रिप्ट का वो एक ब्रैकेट गलत क्यों लग गया। दूसरा रास्ता यह है कि आप उस इंसान को ढूंढें जो कोडिंग का मास्टर है। जब आप पूछते हैं कि मैं यह कैसे करूं तो आप अपनी ग्रोथ की लिमिट तय कर देते हैं। लेकिन जब आप पूछते हैं कि यह मेरे लिए कौन कर सकता है तो आप अचानक से अपनी काबिलियत को सौ गुना बढ़ा देते हैं।

​डैन सुलिवन कहते हैं कि हाउ पूछना एक बोझ है जो आपको अपनी असली ताकत से दूर रखता है। आपके पास दिन में सिर्फ २४ घंटे हैं और आप उन घंटों को हर छोटे मोटे काम में बर्बाद नहीं कर सकते। मान लीजिए आपको अपने घर की पुताई करनी है। अब आप खुद ब्रश उठाकर दीवारों पर पेंट थपेड़ने लगेंगे तो शायद आप थोड़े पैसे बचा लें लेकिन आप अपना वो कीमती वक्त खो देंगे जिसमें आप अपने बिजनेस का अगला बड़ा प्लान बना सकते थे। ऊपर से आपकी पुताई देखकर पड़ोसी भी यही कहेंगे कि भाई कम से कम किसी प्रोफेशनल को तो बुला लिया होता।

​जिंदगी में बड़े गोल्स वही हासिल करते हैं जो दूसरों की स्किल्स की इज्जत करना जानते हैं। जब आप किसी हु यानी किसी सही व्यक्ति को काम सौंपते हैं तो आप दरअसल अपना वक्त वापस खरीद रहे होते हैं। यह वक्त ही आपकी सबसे बड़ी दौलत है। अगर आप हर काम खुद करेंगे तो आप हमेशा एक एम्प्लॉई की तरह सोचेंगे चाहे आप अपना बिजनेस ही क्यों न चला रहे हों। एक लीडर वह होता है जो विजन देखता है और उस विजन को पूरा करने के लिए सही खिलाड़ियों की टीम बनाता है।

​इसलिए अगली बार जब कोई बड़ा प्रोजेक्ट आए तो गूगल पर हाउ टू सर्च करने के बजाय अपने फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट देखें। यह देखें कि आपकी टीम में या आपके सर्कल में ऐसा कौन है जिसके लिए वह काम बच्चों का खेल है। खुद को थकाना बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी है। सही हु को ढूंढना ही असली सक्सेस का शॉर्टकट है। जब आप दूसरों को मौका देते हैं तो आप न सिर्फ अपना काम आसान करते हैं बल्कि उन्हें भी ग्रो करने का एक प्लेटफॉर्म देते हैं। यह एक विन विन गेम है जिसमें हारने वाला सिर्फ आपका वो पुराना वर्जन है जो अकेला सब कुछ करना चाहता था।


लेसन २ : टाइम फ्रीडम के लिए डेलीगेशन की पावर को समझिए

​पहला लेसन सीखने के बाद अब आप शायद यह सोच रहे होंगे कि भाई हु को ढूंढना तो ठीक है पर क्या वह मेरे जैसा परफेक्ट काम कर पाएगा। यही वो जाल है जिसमें ९९ परसेंट लोग फंसकर अपनी जिंदगी तबाह कर लेते हैं। आपको लगता है कि आप दुनिया के इकलौते कलाकार हैं और आपके बिना तो चिड़िया भी पर नहीं मारेगी। सच तो यह है कि आपका यह परफेक्शन वाला भूत असल में एक बीमारी है जो आपको आगे बढ़ने से रोक रही है। जब आप हर छोटी चीज को माइक्रो मैनेज करते हैं तो आप खुद को एक ऐसे पिंजरे में बंद कर लेते हैं जिसकी चाबी आपके पास ही होती है पर आप उसे कभी इस्तेमाल नहीं करते।

​टाइम फ्रीडम का मतलब यह नहीं है कि आप सारा दिन सोफे पर बैठकर नेटफ्लिक्स देखें। इसका असली मतलब यह है कि आपके पास वो काम करने का वक्त हो जो आपको सबसे ज्यादा खुशी देता है और जो आपके बिजनेस को करोड़ों तक ले जा सकता है। अगर आप आज भी अपने ऑफिस का बिल भरने या सोशल मीडिया के कमेंट्स का जवाब देने में तीन घंटे लगा रहे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी वैल्यू खुद ही कम कर रहे हैं। आप खुद को एक हाई लेवल एग्जीक्यूटिव समझते हैं पर असल में आप अपने ही बिजनेस के चपरासी बने हुए हैं। क्या आपको नहीं लगता कि आपकी मेहनत और टैलेंट इससे कहीं ज्यादा डिजर्व करता है।

​हु नॉट हाउ का जादू तब शुरू होता है जब आप डेलीगेशन को एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक इन्वेस्टमेंट की तरह देखते हैं। जब आप किसी को काम सौंपते हैं तो आप उसे सिर्फ एक टास्क नहीं दे रहे होते बल्कि आप अपने लिए फ्रीडम के चंद घंटे खरीद रहे होते हैं। मान लीजिए आप एक बहुत अच्छे राइटर हैं पर आपको एडिटिंग से नफरत है। फिर भी आप खुद ही एडिट करने बैठ जाते हैं क्योंकि आपको लगता है कि कोई और आपके इमोशन्स को नहीं समझ पाएगा। नतीजा क्या होता है। आप एक आर्टिकल लिखने में हफ्ता लगा देते हैं और आपका दिमाग दही बन जाता है। वहीं अगर आप एक एडिटर यानी एक हु को ढूंढ लें तो आप उस हफ्ते में दस नए आर्टिकल्स लिख सकते हैं। अब आप ही बताइए कि ज्यादा समझदारी किसमें है।

​लोग अक्सर डरते हैं कि अगर उन्होंने काम दूसरों को दे दिया तो उनकी अहमियत कम हो जाएगी। असल में बात इसके बिल्कुल उलट है। आपकी अहमियत इस बात से तय होती है कि आप कितनी बड़ी प्रॉब्लम्स सॉल्व कर सकते हैं। और बड़ी प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए आपको मानसिक शांति और खाली वक्त चाहिए। अगर आपका दिमाग इस बात में उलझा रहेगा कि कल ऑफिस में पानी की बोतलें आई या नहीं तो आप बड़े गोल्स के बारे में कभी सोच ही नहीं पाएंगे। डेलीगेशन का मतलब काम से पीछा छुड़ाना नहीं है बल्कि खुद को उन कामों के लिए तैयार करना है जो सिर्फ और सिर्फ आप कर सकते हैं।

कई लोग दूसरों को काम सौंपने के बाद भी उनके सिर पर ऐसे खड़े रहते हैं जैसे वो कोई जासूसी कर रहे हों। इसे डेलीगेशन नहीं बल्कि दूसरों का खून पीना कहते हैं। अगर आपने किसी हु को चुना है तो उस पर भरोसा करना सीखिए। उसे गलती करने का मौका दीजिए क्योंकि आपकी पहली कोशिश भी कोई मास्टरपीस नहीं थी। जब आप दूसरों को जिम्मेदारी देते हैं तो वो भी अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं और आपको वो रिजल्ट्स मिलते हैं जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की थी। याद रखिए कि एक थका हुआ और चिड़चिड़ा इंसान कभी ग्रेट लीडर नहीं बन सकता। खुद को आजाद कीजिए ताकि आप अपनी कंपनी और अपनी लाइफ को एक नई ऊँचाई पर ले जा सकें।


लेसन ३ : कोलैबोरेशन से विजन को बड़ा बनाएं और विन विन सिचुएशन क्रिएट करें

​पिछले दो लेसन्स में हमने सीखा कि कैसे खुद को घिसना बंद करना है और वक्त की चोरी कैसे करनी है। लेकिन अब सवाल आता है कि इस खाली वक्त का करना क्या है। क्या सिर्फ आराम करना ही मकसद है। बिल्कुल नहीं। हु नॉट हाउ का असली जादू तब शुरू होता है जब आप बड़े विजन की ओर कदम बढ़ाते हैं। अकेले इंसान का सपना एक छोटा सा पौधा हो सकता है लेकिन जब बहुत सारे सही हु यानी लोग जुड़ते हैं तो वह एक विशाल बरगद का पेड़ बन जाता है। कोलैबोरेशन का मतलब सिर्फ काम बांटना नहीं है बल्कि अपनी लिमिट्स को दूसरों की ताकतों के साथ जोड़कर कुछ ऐसा बनाना है जो आप अकेले कभी सोच भी नहीं सकते थे।

​आजकल के दौर में कई लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने किसी की मदद ली तो क्रेडिट बंट जाएगा। उन्हें लगता है कि जीत का सारा सेहरा सिर्फ उनके सिर पर होना चाहिए। यह बिलकुल वैसी ही बात हुई जैसे कोई क्रिकेट मैच में कहे कि बैटिंग भी मैं करूंगा बॉलिंग भी मैं करूंगा और फील्डिंग भी मैं ही देख लूंगा। ऐसे खिलाड़ी को टीम में रखने से अच्छा है कि उसे घर बैठा दिया जाए। अगर आप अपनी सक्सेस का १० प्रतिशत हिस्सा दूसरों के साथ शेयर नहीं कर सकते तो यकीन मानिए आप कभी भी १०० प्रतिशत तक पहुँच ही नहीं पाएंगे। डैन सुलिवन कहते हैं कि जब आप दूसरों को उनके हुनर का इस्तेमाल करने का मौका देते हैं तो आप उनके लिए एक ऐसी दुनिया बनाते हैं जहाँ वो भी जीत रहे होते हैं।

​सोचिए अगर स्टीव जॉब्स ने अकेले ही आईफोन बनाने की कोशिश की होती तो शायद आज भी वो किसी गैराज में बैठकर तार जोड़ रहे होते। उन्होंने सही हु को ढूंढा। उन्होंने डिजाइनर्स इंजीनियर्स और मार्केटर्स को एक विजन दिया। उन्होंने यह नहीं पूछा कि मैं इसे कैसे बनाऊं बल्कि उन्होंने यह देखा कि इसे बनाने के लिए दुनिया के सबसे बेहतरीन लोग कौन हैं। जब आप दूसरों को अपने विजन में शामिल करते हैं तो उनकी एनर्जी आपकी ग्रोथ को रॉकेट की तरह ऊपर ले जाती है। और मजेदार बात यह है कि जब आप दूसरों को अमीर और सफल बनने में मदद करते हैं तो कुदरत अपने आप आपको वह सब कुछ दे देती है जिसके आप हकदार हैं।

​अक्सर लोग सस्ते के चक्कर में गलत लोगों को चुन लेते हैं और फिर रोते हैं कि काम खराब हो गया। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप पांच स्टार होटल का खाना किसी ठेले वाले के दाम पर ढूंढ रहे हों। अगर आपको क्वालिटी चाहिए तो आपको सही हु की कद्र करनी होगी। जब आप अच्छे लोगों के साथ कोलैबोरेट करते हैं तो आपका स्ट्रेस लेवल कम हो जाता है और आपकी क्रिएटिविटी बढ़ जाती है। आप उन चीजों पर फोकस कर पाते हैं जो वाकई मायने रखती हैं। आपकी लाइफ एक फिल्म की तरह हो जाती है जहाँ आप डायरेक्टर हैं और हर कोई अपना बेस्ट रोल निभा रहा है।

​तो अब वक्त आ गया है कि आप अपनी उस लिस्ट को जला दें जिसमें हजारों हाउ लिखे हुए हैं। एक नई लिस्ट बनाइए जिसमें सिर्फ हु लिखे हों। अपनी ईगो को साइड में रखिए और लोगों से हाथ मिलाना शुरू कीजिए। याद रखिए कि दुनिया के सबसे अमीर लोग नेटवर्क बनाते हैं और बाकी सब काम ढूंढते हैं। आप क्या बनना चाहते हैं। एक थका हुआ मजदूर या एक इंस्पायरिंग लीडर। फैसला आपके हाथ में है।

​दोस्तों, जिंदगी बहुत छोटी है इसे हर छोटे काम का एक्सपर्ट बनने में बर्बाद मत कीजिए। आज ही नीचे कमेंट्स में मुझे बताइए कि ऐसा कौन सा एक काम है जिसे आप आज ही किसी और को सौंपने वाले हैं। अपनी फ्रीडम को वापस पाइए और बड़े सपनों की ओर बढ़िए। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो सब कुछ अकेले करने की कोशिश में अपनी जान सुखा रहा है। याद रखिए जब आप दूसरों को ग्रो करते हैं तभी आप खुद भी आसमान छूते हैं।

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