Built, Not Born (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिलेनियर बनने के लिए खानदानी रईस होना जरूरी है। अगर हां तो बधाई हो आप अपनी लाइफ बर्बाद करने की सही राह पर हैं। बिना इस बुक के सीक्रेट्स जाने आप बस एक और फेल स्टार्टअप की कहानी बनकर रह जाएंगे जिसे दुनिया भूल जाएगी।

​टॉम गोलिसानो की यह बुक आपकी सारी गलतफहमियां दूर कर देगी। चलिए इस आर्टिकल में उन ३ प्रैक्टिकल लेसन को गहराई से समझते हैं जो आपको एक साधारण इंसान से एक सफल बिजनेस ओनर बना सकते हैं।


लेसन १ : बिजनेस आइडिया से बड़ा है उसका असली मैथ और कैश फ्लो

​अक्सर हमारे देश में लोग चाय की टपरी पर बैठकर ऐसे बिजनेस प्लान बनाते हैं जैसे कल ही एलन मस्क को पीछे छोड़ देंगे। लोग सोचते हैं कि बस एक क्रांतिकारी आइडिया मिल जाए और रातों रात करोड़ों की फंडिंग उनके बैंक अकाउंट में गिर जाएगी। टॉम गोलिसानो कहते हैं कि भाई जरा जमीन पर आ जाओ। अगर आपके पास दुनिया का सबसे अनोखा आइडिया भी है लेकिन आपको यह नहीं पता कि पैसा कहां से आएगा और कहां जाएगा तो आपका बिजनेस किसी फटे हुए गुब्बारे से ज्यादा कुछ नहीं है। लोग बड़े बड़े ऑफिस और फैंसी लोगो बनवाने में लाखों फूंक देते हैं पर जब बात कस्टमर से पैसा निकालने की आती है तो उनके हाथ पैर फूल जाते हैं।

मान लीजिए आपने एक बहुत ही कूल और टेक से भरा हुआ कैफे खोला। आपने वहां ऐसी मशीनें लगाईं जो शायद नासा के पास भी नहीं होंगी। अब आप वहां बैठकर इस इंतजार में हैं कि लोग आएंगे और आपकी महंगी कॉफी पिएंगे। लेकिन महीने के अंत में पता चलता है कि आपने बिजली का बिल और स्टाफ की सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं कमाए। इसे कहते हैं बिना मैथ का बिजनेस। टॉम समझाते हैं कि असली एंटरप्रेन्योर वह नहीं है जो सिर्फ सपने देखता है बल्कि वह है जो हर एक पैसे का हिसाब रखता है। आपको यह पता होना चाहिए कि अगर आप एक रुपया खर्च कर रहे हैं तो वह वापस कब और कैसे आएगा।

​इंडियंस के साथ दिक्कत यह है कि हम भावनाओं में बहकर बिजनेस करते हैं। हम सोचते हैं कि अरे मेरा दोस्त है इसे फ्री में खिला देते हैं या फिर चलो दिखावे के लिए एक बड़ी पार्टी कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वह फ्री की कॉफी आपके कैश फ्लो को कितना नुकसान पहुंचा रही है। टॉम गोलिसानो ने जब अपनी कंपनी पेचेक्स शुरू की थी तब उनके पास कोई करोड़ों की फंडिंग नहीं थी। उन्होंने बहुत ही छोटे लेवल से शुरुआत की और हर उस खर्चे को काटा जिसकी जरूरत नहीं थी। वह कहते हैं कि अगर आप अपने बिजनेस के नंबर्स को नहीं समझते तो आप असल में बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि जुआ खेल रहे हैं।

​ज्यादातर लोग इन्वेस्टर के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे वह कोई भगवान हो जो उनके डूबते जहाज को बचा लेगा। लेकिन टॉम का मानना है कि सबसे अच्छा इन्वेस्टर आपका कस्टमर होता है। अगर आपका प्रोडक्ट इतना अच्छा है कि लोग उसके लिए खुशी खुशी पैसे दे रहे हैं तो आपको किसी बाहर वाले की जरूरत नहीं है। दिखावे की दुनिया से बाहर निकलिए और अपने बिजनेस के कैलकुलेटर को दोस्त बनाइए। जब तक आपकी जेब में आने वाला पैसा बाहर जाने वाले पैसे से ज्यादा नहीं होगा तब तक आप सिर्फ एक शौक पाल रहे हैं बिजनेस नहीं।

​याद रखिए कि मार्केट को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका विजन कितना बड़ा है। मार्केट को सिर्फ रिजल्ट और मुनाफे से मतलब है। अगर आप अपने कैश फ्लो को कंट्रोल नहीं कर सकते तो जल्द ही कोई और आकर आपकी मार्केट पर कब्जा कर लेगा और आप बस अपनी पुरानी यादों के साथ बैठे रह जाएंगे। बिजनेस शुरू करना आसान है पर उसे फायदे में चलाना एक कला है जिसे सिर्फ वही सीख पाते हैं जो नंबर्स के साथ खेलना जानते हैं।


लेसन २ : दूसरों के पैसों पर ऐश नहीं खुद का प्रॉफिट बनाना सीखो

​आजकल के दौर में एंटरप्रेन्योर बनने का मतलब बदल गया है। लोग सोचते हैं कि जब तक किसी बड़े इन्वेस्टर से फंडिंग न मिल जाए तब तक उनका बिजनेस असली बिजनेस है ही नहीं। वह किसी कैफे में बैठकर लैपटॉप खोलकर बस पिच डेक बनाने में अपनी पूरी जवानी निकाल देते हैं। टॉम गोलिसानो इस सोच पर जोरदार प्रहार करते हैं। वह कहते हैं कि दूसरों के पैसों से रईसी दिखाना बहुत आसान है लेकिन असली मर्दानगी अपने कमाए हुए मुनाफे से बिजनेस बढ़ाना है। अगर आप सिर्फ इसलिए खुश हो रहे हैं कि किसी ने आपके आईडिया पर करोड़ों लगा दिए हैं तो आप असल में अपनी आजादी बेच रहे हैं।

आजकल के नए स्टार्टअप फाउंडर फंडिंग मिलते ही सबसे पहले क्या करते हैं। वह एक आलीशान ऑफिस लेते हैं जिसमें बीन बैग और प्ले स्टेशन रखा होता है। स्टाफ के लिए फ्री लंच और महंगी कॉफी का इंतजाम किया जाता है। लेकिन भाई साहब यह सब तो ठीक है पर क्या आपका बिजनेस खुद का खर्चा निकाल पा रहा है। अक्सर जवाब मिलता है कि अभी तो हम यूजर बेस बना रहे हैं प्रॉफिट तो बाद में आएगा। टॉम कहते हैं कि यह बाद कभी नहीं आता। अगर आप पहले दिन से प्रॉफिट के बारे में नहीं सोच रहे तो आप बिजनेस नहीं बल्कि चैरिटी चला रहे हैं। और यकीन मानिए मार्केट में कोई भी ज्यादा दिन तक आपकी चैरिटी को झेलने वाला नहीं है।

​इंडियंस में एक और बीमारी है और वह है शादी ब्याह की तरह बिजनेस में दिखावा करना। अगर पड़ोसी ने नया शोरूम खोला है तो हम उससे बड़ा शोरूम खोलेंगे चाहे उसके लिए बैंक से लोन ही क्यों न लेना पड़े। हम यह भूल जाते हैं कि बैंक का लोन और इन्वेस्टर का पैसा चुकाना भी पड़ता है। टॉम गोलिसानो ने पेचेक्स को खड़ा करने के लिए अपनी जमीन आसमान एक कर दी थी लेकिन उन्होंने कभी भी फिजूलखर्ची को बढ़ावा नहीं दिया। वह अपनी कंपनी में एक एक पेंसिल का हिसाब रखते थे। उनका मानना है कि जो कंपनी छोटी छोटी बचत नहीं कर सकती वह कभी बड़ी नहीं बन सकती।

​अक्सर लोग सोचते हैं कि पैसा आने से सारी समस्याएं हल हो जाएंगी। लेकिन सच तो यह है कि ज्यादा पैसा अक्सर आपकी गलतियों को छुपा देता है। जब आपके पास बहुत पैसा होता है तो आप गलत फैसले लेते हैं क्योंकि आपको लगता है कि नुकसान झेलने की ताकत आपके पास है। लेकिन जब पैसा खत्म होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। टॉम हमें सिखाते हैं कि कम साधनों में बिजनेस करना आपको ज्यादा समझदार और क्रिएटिव बनाता है। जब आपकी जेब खाली होती है तब आपका दिमाग सबसे तेज चलता है।

​इसलिए, अगर आप सच में एक सफल बिजनेसमैन बनना चाहते हैं तो अपनी नजर बैंक बैलेंस पर नहीं बल्कि प्रॉफिट मार्जिन पर रखिए। यह मत देखिए कि दुनिया आपके बारे में क्या सोच रही है बल्कि यह देखिए कि महीने के आखिरी दिन आपके पास कितना पैसा बच रहा है। दूसरों के पैसों पर पार्टी करना बंद कीजिए और अपने खून पसीने की कमाई से अपना साम्राज्य खड़ा कीजिए। जब आप अपने दम पर प्रॉफिट कमाना शुरू करते हैं तब आपको किसी के सामने झुकने की जरूरत नहीं पड़ती। यही वह आजादी है जिसे हर एंटरप्रेन्योर को हासिल करना चाहिए।


लेसन ३ : रिस्क का मतलब जुआ नहीं बल्कि सोची समझी चाल है

​हमारे समाज में लोग रिस्क को ऐसे देखते हैं जैसे कोई पहाड़ से बिना रस्सी के कूद रहा हो। जब भी कोई कहता है कि मैं बिजनेस शुरू कर रहा हूं तो आसपास के लोग ऐसे चेहरा बनाते हैं जैसे उसने कोई बड़ा गुनाह कर दिया हो। टॉम गोलिसानो कहते हैं कि रिस्क लेना जरूरी है लेकिन अंधा रिस्क लेना बेवकूफी है। एक असली बिजनेसमैन और एक जुआरी में सिर्फ एक ही फर्क होता है और वह है कैलकुलेशन। जुआरी किस्मत पर भरोसा करता है जबकि बिजनेसमैन अपने कंट्रोल और तैयारी पर। टॉम का मानना है कि आपको सिर्फ उतना ही रिस्क लेना चाहिए जितना आप खोने की ताकत रखते हैं।

मान लीजिए आपको एक नई मिठाई की दुकान खोलनी है। एक तरीका यह है कि आप अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दें और शहर के सबसे महंगे इलाके में दुकान खोल लें बिना यह जाने कि वहां के लोगों को मिठाई पसंद भी है या नहीं। यह रिस्क नहीं बल्कि खुदकुशी है। दूसरा तरीका यह है कि आप पहले अपने घर से छोटे ऑर्डर लेना शुरू करें और देखें कि लोग आपके स्वाद को पसंद कर रहे हैं या नहीं। जब डिमांड बढ़ जाए तब धीरे से कदम बढ़ाएं। टॉम गोलिसानो ने कभी भी अपनी पूरी संपत्ति दांव पर नहीं लगाई। वह हर कदम फूंक फूंक कर रखते थे।

​अक्सर लोग सोचते हैं कि बड़े रिस्क लेने से ही बड़ी कामयाबी मिलती है। लेकिन सच तो यह है कि बड़ी कामयाबी छोटे छोटे सही फैसलों का नतीजा होती है। टॉम कहते हैं कि आपको हमेशा यह पूछना चाहिए कि अगर यह आइडिया फेल हो गया तो सबसे बुरा क्या होगा। अगर उस बुरे वक्त के लिए आपके पास कोई प्लान नहीं है तो वह रिस्क लेने लायक नहीं है। इंडियंस अक्सर ईगो में आकर रिस्क लेते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने पीछे कदम खींचा तो लोग क्या कहेंगे। भाई साहब लोग तो तब भी कहेंगे जब आप सड़क पर आ जाएंगे। इसलिए लोगों की परवाह छोड़िए और अपने बिजनेस के रिस्क को मैनेज करना सीखिए।

​बिजनेस में रिस्क का मतलब यह भी है कि आप अपनी सारी ताकत एक ही जगह न लगाएं। टॉम ने पेचेक्स के दौरान कई बार उतार चढ़ाव देखे लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी इनकम के सोर्स और अपनी प्लानिंग को लचीला रखा। वह कहते हैं कि मार्केट कभी भी करवट ले सकता है। जो आज ट्रेंड में है वह कल कचरा बन सकता है। इसलिए हमेशा एक बैकअप प्लान तैयार रखिए। रिस्क लेना डरावना हो सकता है लेकिन अगर आपके पास सही डेटा और तैयारी है तो आप उस डर को अपनी ताकत बना सकते हैं।

टॉम गोलिसानो की यह बुक हमें सिखाती है कि बिलेनियर बनना कोई जादू नहीं है। यह बस सही समय पर सही फैसले लेने और अपनी गलतियों से सीखने का खेल है। अगर आप आज से ही अपने नंबर्स को समझना शुरू कर दें फिजूलखर्ची बंद कर दें और समझदारी से रिस्क लेना सीख लें तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। यह दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो चुनौतियों के सामने खड़े होने की हिम्मत रखते हैं पर साथ ही अपना दिमाग भी चलाते हैं।

​अब समय आ गया है कि आप अपने अंदर के उस डर को खत्म करें जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है। उठिए और अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए पहला कदम उठाइए। क्या आप तैयार हैं अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करने के लिए। फैसला आपका है।

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