अगर आपको लगता है कि आप अपने बिजनेस के सारे सीक्रेट्स छुपाकर और अकेले काम करके दुनिया जीत लेंगे तो बधाई हो आप डायनासोर की तरह गायब होने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि स्मार्ट लोग विकिनोमिक्स समझकर कोलाबरेशन से करोड़ों छाप रहे हैं और आप अभी भी पुराने जमाने की घिसी पिटी सोच लेकर बैठे हैं।
आज हम डॉन टैपस्कॉट की फेमस बुक विकिनोमिक्स के उन राज को खोलेंगे जो आपके काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपको एक मॉडर्न और ग्लोबल लीडर बना सकते हैं।
लेसन १ : बीइंग ओपन (खुले विचार रखना)
अगर आपको लगता है कि आप अपने बिजनेस के आईडिया को तिजोरी में बंद करके दुनिया के सबसे बड़े अमीर बन जाएंगे तो शायद आप अभी भी नब्बे के दशक में जी रहे हैं। आजकल के जमाने में सीक्रेट्स रखना सक्सेस का मंत्र नहीं बल्कि फेलियर का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। विकिनोमिक्स का पहला सबसे बड़ा लेसन यही है कि आपको ओपन होना पड़ेगा। अब आप सोच रहे होंगे कि भाई अगर मैंने अपना आईडिया सबको बता दिया तो फिर मेरा फायदा क्या होगा। लोग तो मेरा आईडिया चुरा लेंगे।
यही तो आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। पुराने जमाने में कंपनियाँ अपनी रिसर्च और अपनी टेक्नोलॉजी को एक अंधेरे कमरे में छुपाकर रखती थीं। उन्हें डर रहता था कि कोई और उसे कॉपी न कर ले। लेकिन आज का जमाना कोलाबरेशन का है। जब आप अपने आईडिया को दुनिया के सामने रखते हैं तो दुनिया भर के टैलेंटेड लोग उसमें अपना दिमाग जोड़ते हैं।
मान लीजिए आपने एक बहुत बढ़िया रेसिपी बनाई है और आप उसे किसी को नहीं बता रहे। आप अकेले उस रेसिपी से खाना बनाकर बेच रहे हैं। आप दिन में कितना खाना बना लेंगे। शायद सौ प्लेट या दो सौ प्लेट। लेकिन अगर आप उस रेसिपी को ओपन सोर्स कर दें और दुनिया के हजारों शेफ के साथ शेयर करें तो वो आपकी रेसिपी में ऐसे तड़के लगाएंगे जिसके बारे में आपने सपने में भी नहीं सोचा होगा। आपका ब्रांड पूरी दुनिया में फैल जाएगा और आप सिर्फ एक शेफ नहीं बल्कि एक ग्लोबल फूड आइकन बन जाएंगे।
लेकिन नहीं आपको तो अपनी छोटी सी दुकान का मालिक बने रहना है। आज गोल्डकॉर्प जैसी बड़ी सोने की खान वाली कंपनी ने जब अपने सारे गुप्त डेटा को पब्लिक किया और दुनिया से कहा कि बताओ सोना कहाँ मिलेगा तो उन्हें ऐसी ऐसी जगहों पर सोना मिला जहाँ उनके खुद के एक्सपर्ट्स कभी सोच भी नहीं सकते थे। उन्होंने इनाम रखा और दुनिया भर के डेटा साइंटिस्ट्स ने उनके लिए काम किया। इसे कहते हैं दिमाग का सही इस्तेमाल करना।
अगर आप अभी भी अपनी जानकारी को मुट्ठी में दबाकर बैठे हैं तो याद रखिए कि मुट्ठी बंद करने से आप कुछ पकड़ तो सकते हैं पर नया कुछ हासिल नहीं कर सकते। ओपन होने का मतलब यह नहीं है कि आप अपना बैंक अकाउंट का पासवर्ड सबको बता दें। इसका मतलब है कि आप अपनी प्रोग्रेस और अपनी चुनौतियों को लोगों के साथ शेयर करें ताकि कोलाबरेशन का रास्ता खुले। जो लोग अकेले सब कुछ करने की कोशिश करते हैं वो अक्सर थक कर बीच रास्ते में ही बैठ जाते हैं। जबकि जो लोग ओपन होते हैं उनके पास पूरी दुनिया की ताकत होती है।
लेसन २ : पीयरिंग (साथ मिलकर काम करना)
पुराने जमाने में ऑफिस का मतलब होता था एक बॉस जो ऊपर बैठकर हुक्म चलाता था और नीचे काम करने वाले बेचारे कर्मचारी जो बस 'जी सर' कहना जानते थे। लेकिन विकिनोमिक्स हमें सिखाती है पीयरिंग का पावर। पीयरिंग का मतलब है एक ऐसा सिस्टम जहाँ कोई छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि सब बराबर के लेवल पर आकर एक दूसरे की मदद करते हैं। अगर आप अभी भी इसी घमंड में हैं कि आपकी कंपनी का हर फैसला आप ही लेंगे क्योंकि आप सबसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी कंपनी की कब्र खुद खोद रहे हैं।
आज के दौर में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत वो लोग हैं जो बिना किसी सैलरी के सिर्फ शौक और पैशन के लिए साथ मिलकर काम करते हैं। इसका सबसे बड़ा और जीता जागता उदाहरण है विकिपीडिया। याद करिए वो दिन जब एनसाइक्लोपीडिया की भारी भरकम किताबें बिकती थीं जिन्हें कुछ गिने चुने एक्सपर्ट्स लिखते थे। फिर आया विकिपीडिया जिसने कहा कि भाई हम सबको मौका देंगे। आज लाखों लोग मिलकर इसे दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञान का भंडार बना चुके हैं। और मजेदार बात यह है कि यह सब फ्री में हो रहा है।
अब जरा सोचिए कि अगर आप एक सॉफ्टवेयर कंपनी चला रहे हैं और आप सोचते हैं कि सिर्फ आपके दस इंजीनियर्स ही दुनिया का सबसे बेस्ट कोड लिख सकते हैं तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी पाल कर बैठे हैं। दुनिया के किसी कोने में बैठा कोई अठारह साल का लड़का शायद आपके उन दस इंजीनियर्स से ज्यादा स्मार्ट कोड लिख सकता है। लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम इसी पीयरिंग की वजह से आज दुनिया के सर्वर राज कर रहे हैं। यहाँ कोई किसी का नौकर नहीं है सब पार्टनर हैं।
लेकिन हमारे यहाँ तो लोग पड़ोसी से चीनी मांगते वक्त भी दस बार सोचते हैं तो ग्लोबल कोलाबरेशन तो दूर की बात है। अगर आप अपने काम में पीयरिंग को जगह नहीं देते तो आप उस टैलेंट को खो रहे हैं जो शायद आपके ऑफिस के बाहर सड़कों पर घूम रहा है। पीयरिंग का मतलब है कि आप लोगों को कंट्रोल करना छोड़ दें और उन्हें खुद को मैनेज करने की आजादी दें। जब लोग अपनी मर्जी से और बराबरी के भाव से जुड़ते हैं तो जो रिजल्ट निकलता है वो किसी भी बंद कमरे वाली मीटिंग से हजार गुना बेहतर होता है।
आप अकेले शायद एक तेज कार चला सकते हैं लेकिन एक पूरा कारवां बनाने के लिए आपको दूसरों को साथ लेना ही पड़ेगा। और अगर आप सोचते हैं कि आप अकेले ही सब कुछ मैनेज कर लेंगे तो फिर तैयार रहिए किसी कोने में बैठकर अपनी हार का शोक मनाने के लिए। क्योंकि दुनिया अब कोलाबरेशन से चल रही है और आप अभी भी कॉम्पिटिशन के पुराने जाल में फंसे हुए हैं। पीयरिंग का जादू तब चलता है जब आप 'मैं' को छोड़कर 'हम' पर फोकस करते हैं।
लेसन ३ : एक्टिंग ग्लोबल (ग्लोबल लेवल पर सोचना)
अगर आप आज भी यह सोचते हैं कि आपका कॉम्पिटिशन सिर्फ आपके मोहल्ले की दूसरी दुकान या आपके शहर की दूसरी कंपनी से है तो दोस्त जाग जाइए क्योंकि आप गहरी नींद में हैं। विकिनोमिक्स का तीसरा लेसन है एक्टिंग ग्लोबल। इंटरनेट ने दुनिया की दीवारें गिरा दी हैं और अब बाउंड्री जैसी कोई चीज बची ही नहीं है। लेकिन हमारे यहाँ लोग अभी भी इसी में खुश हैं कि चलो कम से कम पूरे मोहल्ले में मेरी दुकान सबसे अच्छी है। अरे भाई जब दुनिया आपके फोन में सिमट चुकी है तो आप अभी भी गलियों में क्यों घूम रहे हैं।
आज एक छोटे से गाँव में बैठा लड़का अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करके अमेरिका की किसी बड़ी कंपनी के साथ काम कर सकता है। इसे कहते हैं ग्लोबल टैलेंट का सही इस्तेमाल। अगर आप एक बिजनेस चला रहे हैं और आप सोचते हैं कि आपको सारे एम्प्लॉई अपने ही ऑफिस में बिठाने पड़ेंगे तो आप सिर्फ बिजली का बिल बढ़ा रहे हैं और कुछ नहीं। दुनिया भर में बिखरा हुआ टैलेंट आपका इंतजार कर रहा है। लेकिन आपको तो बस वही पुराना तरीका पसंद है जहाँ सबको अपनी आँखों के सामने बिठाकर डराना अच्छा लगता है।
मान लीजिए आप एक टी शर्ट का ब्रांड शुरू करना चाहते हैं। पुराने जमाने में आप अपने शहर के टेलर के पास जाते और फिर उसे लोकल मार्केट में बेचते। लेकिन आज आप अपना डिजाइन पेरिस के किसी आर्टिस्ट से बनवा सकते हैं उसका कपड़ा वियतनाम से मंगवा सकते हैं और उसे पूरी दुनिया में ऑनलाइन बेच सकते हैं। अगर आप अभी भी सिर्फ अपने लोकल एरिया तक सीमित हैं तो आप उस समुद्र को नजरअंदाज कर रहे हैं जो मोतियों से भरा पड़ा है।
एक्टिंग ग्लोबल का मतलब यह नहीं है कि आपको कल ही अमेरिका जाकर ऑफिस खोलना है। इसका मतलब है अपनी सोच को बड़ा करना और ग्लोबल रिसोर्सेस का फायदा उठाना। जो कंपनियाँ यह समझ गई हैं कि दुनिया ही उनका वर्कप्लेस है वो आज रॉकेट की तरह ऊपर जा रही हैं। और जो लोग अभी भी अपने लोकल दायरे में सिमटे हुए हैं वो बस धीरे धीरे गायब हो रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई कुएं का मेंढक सोचे कि बस इतना ही पानी है जबकि बाहर पूरा समंदर उसका इंतजार कर रहा हो।
तो अब फैसला आपका है। क्या आप वही पुराने घिसे पिटे तरीके से काम करना चाहते हैं या फिर विकिनोमिक्स के इन जादुई लेसन्स को अपनाकर अपनी जिंदगी और बिजनेस को बदलना चाहते हैं। कोलाबरेशन ओपननेस और ग्लोबल सोच ही वो चाबियाँ हैं जो आपके लिए तरक्की के नए दरवाजे खोलेंगी। अकेले चलना आसान हो सकता है पर दूर तक जाने के लिए साथ मिलकर चलना ही पड़ता है।
उम्मीद है आपको यह तीनों लेसन और विकिनोमिक्स की यह छोटी सी झलक पसंद आई होगी। याद रखिए दुनिया बदल रही है और अगर आप नहीं बदले तो इतिहास बन जाएंगे।
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