Will It Fly? (Hindi)


आप अपना कीमती पैसा और सालों की मेहनत उस आईडिया पर बर्बाद कर रहे हैं जो असल में एक कचरा है। मुबारक हो। आप अपनी नाकामी की तैयारी खुद कर रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपका आईडिया क्रांतिकारी है। जबकि हकीकत में उसे कोई फ्री में भी नहीं पूछेगा।

आज हम पैट फ्लिन की बुक विल इट फ्लाई से जानेंगे कि कैसे आप अपने बिज़नेस आईडिया को हकीकत की कसौटी पर परख सकते हैं। ये ३ लेसन आपको डूबने से बचाएंगे और आपके आईडिया को असली उड़ान देंगे।


लेसन १ : द एयरपोर्ट टेस्ट - क्या आपका बिज़नेस आपकी खुशियों का गला घोंट देगा?

ज़रा सोचिए। आज से ५ साल बाद आप एयरपोर्ट के लाउंज में बैठे हैं। अचानक आपका एक पुराना दोस्त मिल जाता है। वो आपसे पूछता है कि भाई कैसी चल रही है ज़िंदगी? आप उसे बताते हैं कि लाइफ एकदम सेट है। आप खुश हैं। आपका बिज़नेस वैसा ही चल रहा है जैसा आपने सपना देखा था। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वो सपना असल में दिखता कैसा है? ज़्यादातर लोग बिज़नेस आईडिया के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई कुत्ता चलती गाड़ी के पीछे भागता है। उसे पता ही नहीं होता कि अगर गाड़ी रुक गई तो वो उसका करेगा क्या।

पैट फ्लिन कहते हैं कि किसी भी आईडिया पर काम शुरू करने से पहले आपको खुद से यह पूछना चाहिए कि क्या यह बिज़नेस मुझे वो लाइफ देगा जो मैं जीना चाहता हूँ? मान लीजिए आपने एक ऐसा शानदार बिज़नेस शुरू किया जो दिन के १८ घंटे आपसे काम करवाता है। आपके पास बैंक बैलेंस तो बहुत है पर उसे खर्च करने का समय ही नहीं है। अपने बच्चों की शक्ल आप सिर्फ फोटो में देख पा रहे हैं क्योंकि जब आप घर पहुँचते हैं तब तक वो सो चुके होते हैं। क्या आप ऐसी कामयाबी चाहते हैं? बिलकुल नहीं। इसे ही लेखक द एयरपोर्ट टेस्ट कहते हैं।

लोग अक्सर जोश में आकर ऐसा काम शुरू कर देते हैं जो उनकी पर्सनैलिटी से मैच ही नहीं करता। जैसे कोई ऐसा इंसान जिसे लोगों से बात करना नापसंद है पर वो एक सेल्स वाला स्टार्टअप खोल ले। ये तो वही बात हुई कि आपको तैरना नहीं आता और आपने शार्क से भरे समंदर में छलांग लगा दी। सिर्फ इसलिए क्योंकि किसी यूट्यूबर ने कहा था कि पानी में बहुत पैसा है। भाई पैसा तो होगा पर उसे भोगने के लिए आप बचेंगे ही नहीं।

आपका बिज़नेस आईडिया आपके पैशन और आपकी लाइफस्टाइल के साथ फिट बैठना चाहिए। अगर आप सुबह देर से उठना पसंद करते हैं और आपने कोई ऐसा काम शुरू किया जिसमें सुबह ४ बजे दुकान खोलनी पड़े तो यकीन मानिए आप उस बिज़नेस को ६ महीने में नफरत की निगाह से देखने लगेंगे। लोग आईडिया को वैलिडेट करने के चक्कर में अपनी आत्मा को वैलिडेट करना भूल जाते हैं।

सच्चाई तो ये है कि हम सब एक चूहा दौड़ में दौड़ रहे हैं। फर्क बस इतना है कि बिज़नेस ओनर बनकर आप एक सोने के पिंजरे वाले चूहे बन जाते हैं। अगर आपका बिज़नेस आईडिया आपकी हेल्थ और फैमिली टाइम के बीच में आ रहा है तो समझ लीजिए कि वो आईडिया नहीं बल्कि एक मुसीबत है। बिज़नेस आपको आज़ाद करने के लिए होना चाहिए ना कि आपको गुलाम बनाने के लिए।

तो अगली बार जब कोई क्रांतिकारी आईडिया दिमाग में आए तो उसे अपनी लाइफ के ५ साल आगे वाले वर्जन से मैच करके देखिएगा। अगर उस आईडिया को सुनकर आपके भविष्य वाले वर्जन के चेहरे पर मुस्कान आती है तभी आगे बढ़िए। वरना उस आईडिया को वही छोड़ देना ही समझदारी है। क्योंकि एक असफल बिज़नेस से बुरा सिर्फ एक ऐसा सफल बिज़नेस है जो आपसे आपकी शांति छीन ले।


लेसन २ : मार्केट सैंडविच - क्या लोग आपके आईडिया के लिए सच में अपनी जेब ढीली करेंगे?

ज़्यादातर नए बिज़नेस ओनर्स को लगता है कि उनका आईडिया दुनिया का आठवां अजूबा है। वो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के पास जाते हैं और पूछते हैं कि भाई मेरा ये आईडिया कैसा है? अब बेचारे रिश्तेदार तो यही कहेंगे कि बहुत बढ़िया है क्योंकि उन्हें आपसे झगड़ा नहीं करना। लेकिन जब आप उनसे कहते हैं कि चलो फिर इसके लिए ५०० रुपये निकालो तो अचानक उनकी याददाश्त चली जाती है। वो लोग जो कल तक आपके आईडिया की तारीफ कर रहे थे अब फोन उठाना बंद कर देते हैं।

पैट फ्लिन हमें मार्केट सैंडविच का कांसेप्ट समझाते हैं। इसका मतलब है अपने कस्टमर्स को बहुत बारीकी से पहचानना। लोग अक्सर गलती ये करते हैं कि वो सबको अपना कस्टमर मान लेते हैं। अगर आप सबको खुश करने की कोशिश करेंगे तो अंत में आप किसी को भी खुश नहीं कर पाएंगे। ये वही बात हुई कि आप एक ऐसी दुकान खोलें जहाँ बिरयानी भी मिलती है और कंप्यूटर रिपेयरिंग भी होती है। कोई भी आपके पास नहीं आएगा क्योंकि लोगों को स्पेशलिस्ट पसंद हैं।

मार्केट सैंडविच का पहला हिस्सा है उन लोगों को ढूंढना जो आपके आईडिया में इंटरेस्ट रखते हैं। दूसरा हिस्सा है उन प्लेटफॉर्म्स को ढूंढना जहाँ ये लोग अपना वक्त बिताते हैं। और सबसे ज़रूरी बीच का हिस्सा है उनकी असली प्रॉब्लम को समझना। लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते। लोग अपनी लाइफ की प्रॉब्लम का सलूशन खरीदते हैं। अगर आप किसी प्यासे इंसान को हीरा बेचेंगे तो वो उसे लात मार देगा। उसे उस वक्त सिर्फ पानी चाहिए।

आपको ये रिसर्च करनी होगी कि आपके आईडिया जैसा कुछ और मार्केट में पहले से है या नहीं। अगर मार्केट में कोई कॉम्पिटिशन नहीं है तो खुश मत होइए। इसका मतलब ये भी हो सकता है कि उस चीज़ की किसी को ज़रूरत ही नहीं है। पैट फ्लिन कहते हैं कि कॉम्पिटिशन होना अच्छी बात है। इसका मतलब है कि वहां लोग पैसे खर्च कर रहे हैं। आपको बस उनसे बेहतर या थोड़ा अलग बनना है।

अगर आप एक गंजे इंसान को कंघी बेचने की कोशिश कर रहे हैं तो आप कितने भी बड़े सेल्समैन हों आप फेल ही होंगे। लेकिन अगर आप उसी गंजे इंसान को विग या हेयर ट्रांसप्लांट का आईडिया देंगे तो वो शायद अपना घर बेचकर भी आपको पैसे दे दे। यही फर्क होता है एक फालतू आईडिया और एक वैलिडेटेड आईडिया में। मार्केट सैंडविच आपको सिखाता है कि कस्टमर के जूते में पैर डालकर देखो कि कांटा कहाँ चुभ रहा है।

अक्सर लोग अपना सारा पैसा और समय एक ऐप या वेबसाइट बनाने में लगा देते हैं और बाद में पता चलता है कि किसी को उसकी ज़रूरत ही नहीं थी। ये वैसा ही है जैसे आप बिना किसी को बुलाए पार्टी की पूरी तैयारी कर लें और अंत में आप अकेले बैठकर समोसे खा रहे हों। मार्केट की डिमांड को समझना ही असली बिज़नेस है। बाकी सब सिर्फ दिखावा है।


लेसन ३ : प्रोटोटाइप और प्री सेलिंग - असली बिज़नेस शुरू करने से पहले ही पैसे कमाना

ज़्यादातर लोग बिज़नेस का मतलब समझते हैं कि पहले ऑफिस लो। शानदार फर्नीचर लगवाओ। १० लोगों की टीम हायर करो और फिर भगवान से प्रार्थना करो कि कोई कस्टमर आ जाए। पैट फ्लिन कहते हैं कि ये बिज़नेस करने का सबसे बेवकूफाना तरीका है। इसे वो कहते हैं "बिल्ड एंड प्रे" मॉडल। यानी बनाओ और दुआ करो। हकीकत में ये मॉडल सिर्फ आपको बैंकप्ट बनाने के काम आता है।

असली समझदारी है लेसन ३ को अपनाने में। यानी अपना प्रोटोटाइप बनाना और उसकी प्री सेलिंग करना। प्रोटोटाइप का मतलब ये नहीं कि आपको कोई बहुत हाईटेक मशीन बनानी है। इसका मतलब है अपने आईडिया का सबसे छोटा और सस्ता वर्जन तैयार करना जिसे लोग इस्तेमाल कर सकें। अगर आप एक रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं तो पहले अपनी छत पर दोस्तों के लिए वैसी कुकिंग करके देखिए। अगर वो दोबारा मांगते हैं तभी आगे बढ़िए। वरना अपनी कुकिंग का शौक घर वालों तक ही सीमित रखिए।

लेकिन सबसे कमाल की चीज़ है प्री सेलिंग। इसका मतलब है कि प्रोडक्ट अभी बना ही नहीं है और आपने लोगों से उसके लिए पैसे ले लिए हैं। आप कहेंगे कि ये तो धोखाधड़ी है। जी नहीं। ये दुनिया का सबसे बेहतरीन वैलिडेशन है। अगर लोग आपके आईडिया के लिए एडवांस में पैसे देने को तैयार हैं तो इसका मतलब है कि आपके आईडिया में वाकई दम है। अगर लोग कहें कि "भाई बहुत अच्छा आईडिया है जब बनेगा तब बता देना" तो समझ लीजिए कि वो सिर्फ आपका दिल रखने के लिए झूठ बोल रहे हैं।

मान लीजिए आप एक ऐसी टी-शर्ट बेचना चाहते हैं जो कभी गंदी नहीं होती। आप १० लाख रुपये लगाकर स्टॉक भर लें और फिर विज्ञापन चलाएं तो ये बहुत बड़ा रिस्क है। इसकी जगह आप सिर्फ एक टी-शर्ट का डिज़ाइन बनाइए और फेसबुक पर विज्ञापन डालिए कि "प्री-ऑर्डर पर ५०% डिस्काउंट"। अगर १०० लोग पैसे जमा कर देते हैं तो बधाई हो। आपके पास बिज़नेस चलाने के लिए पैसा भी आ गया और कस्टमर भी। और अगर किसी ने नहीं खरीदा? तो आपके सिर्फ ५०० रुपये विज्ञापन में गए। १० लाख डूबने से बच गए।

पैट फ्लिन का कहना है कि जब तक आपकी जेब में कस्टमर का पैसा नहीं आता तब तक आपका आईडिया सिर्फ एक हाइपोथिसिस है। एक कल्पना है। लोग इमोशनल होकर अपने बिज़नेस में डूब जाते हैं पर याद रखिए बिज़नेस नंबर्स पर चलता है जज्बात पर नहीं। अगर आप किसी को अपना समय और मेहनत देने जा रहे हैं तो पहले ये पक्का कर लीजिए कि क्या वो उसके लायक है।

ज़िंदगी बहुत छोटी है गलत बिज़नेस में बर्बाद करने के लिए। प्री सेलिंग आपको वो कॉन्फिडेंस देती है जो किसी भी मोटिवेशनल वीडियो से नहीं मिल सकता। जब आपके बैंक अकाउंट में अनजान लोगों का पैसा आता है तो समझ लीजिए कि आपका आईडिया उड़ान भरने के लिए तैयार है।


दोस्तो, बिज़नेस शुरू करना कोई जुआ नहीं है। ये एक सोची समझी प्रोसेस है। अगर आप भी किसी आईडिया पर काम कर रहे हैं तो आज ही उसे इन ३ लेसन की कसौटी पर परखें। क्या आप अपनी मेहनत का पैसा बचाने के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट में बताएं कि आपका "एयरपोर्ट टेस्ट" क्या कहता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिना सोचे समझे स्टार्टअप शुरू करने का प्लान बना रहा है। उसे डूबने से बचा लीजिए।

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