क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि टैलेंट तो बचपन से मिलता है और आपकी फूटी किस्मत में सिर्फ एवरेज रहना ही लिखा है? मुबारक हो, आप बड़ी ही शिद्दत से अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। बिना डेलिब्रेट प्रैक्टिस के आप सिर्फ एक ही गलती को बार बार दोहरा कर खुद को एक्सपर्ट समझ रहे हैं, जो कि सबसे बड़ा मजाक है।
अगर आप आज भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं, तो आप कभी अपनी फील्ड के किंग नहीं बन पाएंगे। एंडर्स एरिक्सन की बुक पीक हमें बताती है कि कैसे सही प्रैक्टिस से कोई भी जीनियस बन सकता है। आइये जानते हैं वह ३ लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।
लेसन १ : डेलिब्रेट प्रैक्टिस - क्या आप सिर्फ मेहनत कर रहे हैं या वाकई ग्रो कर रहे हैं?
अगर आप सोचते हैं कि आप पिछले दस साल से ड्राइविंग कर रहे हैं और आप दुनिया के सबसे बेहतरीन ड्राइवर बन चुके हैं, तो थोड़ा रुकिए और अपनी इस गलतफहमी का अंतिम संस्कार कर दीजिए। सच्चाई यह है कि आप सिर्फ वही काम दस साल से बार बार दोहरा रहे हैं, जिसे साइकोलॉजी में ऑटोमेटिक परफॉरमेंस कहा जाता है। पीक बुक के राइटर एंडर्स एरिक्सन कहते हैं कि किसी भी फील्ड में टॉप पर पहुँचने के लिए केवल प्रैक्टिस करना काफी नहीं है, बल्कि डेलिब्रेट प्रैक्टिस करना जरूरी है।
अब आप पूछेंगे कि भाई यह डेलिब्रेट प्रैक्टिस किस चिड़िया का नाम है? मान लीजिए आप जिम जाते हैं और हर रोज वही ५ किलो का डंबल उठाते हैं। आप पूरे साल पसीना बहाते हैं लेकिन आपकी बॉडी में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आता। क्यों? क्योंकि आप अपने कंफर्ट जोन में फंस चुके हैं। डेलिब्रेट प्रैक्टिस का मतलब है अपनी कमजोरियों को पकड़ना और जानबूझकर उन पर काम करना जो आपको करने में सबसे ज्यादा तकलीफ देते हैं। इसमें आपको एक गुरु या कोच की जरूरत होती है जो आपकी छोटी छोटी गलतियों पर ऊँगली उठाए और आपको आईना दिखाए।
मान लीजिए आप एक गिटार बजाना सीख रहे हैं। एक एवरेज इंसान वही धुन बजाता रहेगा जो उसे पहले से आती है क्योंकि उसे सुनने में मजा आता है। लेकिन एक डेलिब्रेट प्रैक्टिस करने वाला बंदा उस स्पेसिफिक धुन या उस कठिन कॉर्ड पर फोकस करेगा जहाँ उसकी उँगलियाँ बार बार फंसती हैं। वह तब तक उसे बजाएगा जब तक वह परफेक्ट न हो जाए। यह बोरिंग है, थका देने वाला है और इसमें दिमाग का दही हो जाता है। लेकिन यही वह रास्ता है जो एक मामूली गिटारिस्ट को रॉकस्टार बनाता है।
ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए फेल नहीं होते कि उनमें टैलेंट की कमी है, बल्कि इसलिए फेल होते हैं क्योंकि वे प्रैक्टिस तो बहुत करते हैं लेकिन प्रोग्रेस गायब होती है। वे बस ऑफिस जाते हैं, ईमेल लिखते हैं और घर आ जाते हैं। उन्हें लगता है कि एक्सपीरियंस बढ़ रहा है, जबकि असल में वह सिर्फ एक ही साल के अनुभव को दस बार रिपीट कर रहे होते हैं। अगर आप डेलिब्रेट प्रैक्टिस नहीं कर रहे, तो आप बस एक कोल्हू के बैल की तरह गोल गोल घूम रहे हैं और आपको लग रहा है कि आप मंजिल के करीब पहुँच रहे हैं।
डेलिब्रेट प्रैक्टिस के लिए आपको फीडबैक की सख्त जरूरत होती है। बिना फीडबैक के आप वैसे ही हैं जैसे कोई बिना नेट के टेनिस खेल रहा हो। आपको पता ही नहीं चलेगा कि बॉल बाउंड्री के बाहर गई या अंदर। इसलिए अगर आप वाकई अपनी फील्ड का बाप बनना चाहते हैं, तो उन चीजों को करना शुरू करें जो आपको मुश्किल लगती हैं। कंफर्ट जोन में सिर्फ घास उगती है, सक्सेस नहीं। डेलिब्रेट प्रैक्टिस ही वह चाबी है जो एक्सपर्टीज का दरवाजा खोलती है।
लेसन २ : मेंटल रिप्रेजेंटेशन - दुनिया को देखने का चश्मा बदलिए
क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक ग्रैंड मास्टर चेस खेलता है, तो उसे बोर्ड पर सिर्फ मोहरे दिखाई देते हैं या कुछ और? एक आम इंसान के लिए वह सिर्फ लकड़ी के टुकड़े हैं, लेकिन एक एक्सपर्ट के लिए वह पूरी की पूरी जंग की चालें हैं। इसे ही एंडर्स एरिक्सन मेंटल रिप्रेजेंटेशन कहते हैं। यह आपके दिमाग में बना वह नक्शा है जो आपको किसी भी जानकारी को प्रोसेस करने और उस पर रिएक्ट करने में सुपर फ़ास्ट बना देता है।
मान लीजिए आप एक नौसिखिया कुक हैं और मैं आपको एक डिश बनाने को कहता हूँ। आप बार बार रेसिपी बुक देखेंगे, नमक की मात्रा चेक करेंगे और हर स्टेप पर डरेंगे कि कहीं खाना जहर न बन जाए। लेकिन एक प्रोफेशनल शेफ को देखिए। वह बस कढ़ाई में सब्जी डालता है और उसे पता होता है कि कब मसाला भुन गया है और कब नमक डालना है। उसके दिमाग में उस डिश का एक मेंटल रिप्रेजेंटेशन बना हुआ है। उसे हर छोटी चीज याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती, उसका दिमाग पहले से ही जानता है कि एंड रिजल्ट कैसा होना चाहिए।
मेंटल रिप्रेजेंटेशन का असली फायदा तब होता है जब आप मुश्किल हालात में होते हैं। एक प्रो फुटबॉल खिलाड़ी को यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ती कि बॉल कहाँ आएगी। उसके दिमाग में खेल के हजारों पैटर्न पहले से सेव हैं। वह अपनी आँखों के कोने से भी देख लेता है कि उसका साथी खिलाड़ी कहाँ खड़ा होगा। वहीं आप और हम जैसे लोग अगर मैदान में उतरें, तो जब तक हम बॉल की पोजीशन समझेंगे, तब तक विपक्षी टीम गोल करके सेलिब्रेट भी कर चुकी होगी। हमारा दिमाग डेटा को कलेक्ट नहीं कर पाता, जबकि एक्सपर्ट का दिमाग उसे चुटकियों में डिकोड कर लेता है।
आप अपनी फील्ड में जितने ज्यादा मेंटल रिप्रेजेंटेशन बनाएंगे, आपकी परफॉरमेंस उतनी ही निखरती जाएगी। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपने शहर की गलियों को जानते हैं। आपको जीपीएस की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि आपके दिमाग में शहर का मैप छपा हुआ है। लेकिन किसी अनजान शहर में आप बिना मैप के एक कदम भी नहीं चल सकते। लाइफ और करियर में भी यही होता है। अगर आप सिर्फ रट्टा मार रहे हैं, तो आप कभी अपनी फील्ड के मास्टर नहीं बनेंगे। आपको उन पैटर्न्स को समझना होगा जो आपके काम को कंट्रोल करते हैं।
जितनी ज्यादा आप डेलिब्रेट प्रैक्टिस करेंगे, आपके मेंटल रिप्रेजेंटेशन उतने ही मजबूत होंगे। और एक बार जब यह मजबूत हो जाते हैं, तो आप खुद अपनी गलतियों को सुधारने लगते हैं। आपको किसी कोच की जरूरत भी नहीं पड़ती क्योंकि आपका दिमाग खुद कहने लगता है कि भाई, यहाँ कुछ गड़बड़ है। यह वैसा ही है जैसे गाना गाते वक्त एक सिंगर को खुद महसूस हो जाता है कि उसका सुर बिगड़ गया है। अगर आप अपनी फील्ड के लेजेंड बनना चाहते हैं, तो जानकारी को रटने के बजाय उसके पैटर्न्स को दिमाग में बैठाना शुरू कीजिए।
लेसन ३ : नो नेचुरल टैलेंट - टैलेंट का बहाना बनाना बंद कीजिए
अगर आप आज भी यह सोचकर सोफे पर लेटे रहते हैं कि "अरे भाई, शर्मा जी का लड़का तो पैदा ही जीनियस हुआ था", तो आप खुद को दुनिया का सबसे बड़ा चूना लगा रहे हैं। पीक बुक का सबसे कड़वा लेकिन सच लेसन यही है कि नेचुरल टैलेंट जैसी कोई चीज नहीं होती। एंडर्स एरिक्सन ने अपनी पूरी रिसर्च में यह पाया कि जिसे हम जादुई टैलेंट कहते हैं, वह असल में सालों की सही ट्रेनिंग और दिमागी मेहनत का नतीजा होता है। हमारा दिमाग किसी मिट्टी के लोंदे की तरह है, जिसे आप जैसा चाहें वैसा आकार दे सकते हैं।
आपने मोजार्ट का नाम तो सुना ही होगा, जिन्हें लोग संगीत का भगवान मानते हैं। लोग कहते हैं कि वह बचपन से ही धुनें बनाना जानते थे। लेकिन क्या आपको पता है कि मोजार्ट के पिता खुद एक संगीतकार थे और उन्होंने मोजार्ट के पैदा होते ही उनकी ट्रेनिंग शुरू कर दी थी? जब तक दूसरे बच्चे कंचे खेल रहे थे, मोजार्ट हजारों घंटे की प्रैक्टिस पूरी कर चुके थे। अगर मोजार्ट किसी ऐसे घर में पैदा होते जहाँ संगीत का नामोनिशान नहीं होता, तो शायद वह आज एक मामूली क्लर्क होते। टैलेंट सिर्फ एक लेबल है जो हम उन लोगों पर चिपका देते हैं जिनकी मेहनत हमें दिखाई नहीं देती।
यह बात सुनने में थोड़ी बुरी लग सकती है क्योंकि अब आपके पास फेल होने का कोई बहाना नहीं बचा। हम अक्सर कहते हैं कि "मेरी तो मैथ्स कमजोर है" या "मेरी तो ड्राइंग खराब है"। सच तो यह है कि आपने उन चीजों में कभी उतना वक्त और सही प्रैक्टिस दी ही नहीं। हमारा दिमाग न्यूरोप्लास्टिसिटी के सिद्धांत पर काम करता है। इसका मतलब है कि आप जितनी ज्यादा मेहनत किसी स्पेसिफिक स्किल पर करेंगे, आपका दिमाग उस काम के लिए नए रास्ते बना लेगा। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे जंगल में बार बार चलने से एक पक्का रास्ता बन जाता है।
लंदन के टैक्सी ड्राइवर्स को दुनिया का सबसे मुश्किल मैप याद करना पड़ता है जिसे द नॉलेज कहते हैं। रिसर्च में पाया गया कि जो ड्राइवर्स इस टेस्ट को पास कर लेते हैं, उनके दिमाग का वह हिस्सा जो नेविगेशन संभालता है (हिप्पोकैम्पस), वह आम लोगों से काफी बड़ा हो जाता है। यह कोई कुदरती करिश्मा नहीं था, बल्कि हजारों घंटों की प्रैक्टिस का नतीजा था। यानी आपका दिमाग जिम जाने वाली बॉडी की तरह है, इसे जितना ट्रेन करोगे यह उतना ही ताकतवर बनेगा।
इसलिए अब से किस्मत को कोसना और दूसरों के टैलेंट से जलना बंद कीजिए। अगर कोई आपसे बेहतर है, तो इसका सीधा सा मतलब है कि उसने आपसे ज्यादा और सही तरीके से प्रैक्टिस की है। टैलेंट के पीछे छुपना कायरों का काम है। एक्सपर्ट बनने का रास्ता सबके लिए खुला है, बस शर्त यह है कि क्या आप अपने कंफर्ट को छोड़कर वह दर्द सहने को तैयार हैं? याद रखिए, आप क्या बन सकते हैं इसकी कोई सीमा नहीं है, सीमा सिर्फ आपकी सोच और आपकी मेहनत में है।
तो दोस्तों, अब बहाने बनाना छोड़िए और अपनी फील्ड के मास्टर बनने की जर्नी आज से ही शुरू कीजिए। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा टैलेंट का रोना रोता रहता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आप आज से कौन सी नई स्किल पर काम करना शुरू कर रहे हैं। याद रखिए, जीनियस पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#PeakBookSummary #SuccessTips #SelfImprovement #ExpertAdvice #PersonalGrowth
_