क्या आप भी अपने बिज़नेस को उसी पुराने घिसे पिटे तरीके से चला रहे हैं। सच तो यह है कि आपकी मेहनत बेकार जा रही है क्योंकि आपको पता ही नहीं कि कस्टमर सुनना क्या चाहता है। अपनी ईगो को छोड़िये वरना आप बस एक साधारण फेलियर बनकर रह जाएंगे।
इस आर्टिकल में हम फ्रैंक लुंट्ज़ की किताब विन से वो सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके ऑर्डिनरी बिज़नेस को एक्स्ट्राऑर्डिनरी बना देंगे। यहाँ दिए गए ३ लेसन आपकी पूरी सोच और काम करने का तरीका बदल देंगे।
लेसन १ : भाषा की असली ताकत और आपका शब्द जाल
क्या आपको लगता है कि आप बहुत अच्छा बोलते हैं। अगर हाँ तो शायद यही आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। फ्रैंक लुंट्ज़ अपनी किताब विन में बहुत साफ़ कहते हैं कि यह मायने नहीं रखता कि आप क्या कह रहे हैं बल्कि सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि सामने वाला क्या सुन रहा है। मान लीजिये आप एक दुकान पर जाते हैं और दुकानदार आपसे कहता है कि यह सामान सस्ता है। आपको शायद लगेगा कि इसकी क्वालिटी खराब होगी। लेकिन वही दुकानदार अगर कहे कि यह वैल्यू फॉर मनी है तो आपका दिमाग तुरंत पॉजिटिव सोचने लगता है। शब्द वही हैं पर असर बिलकुल अलग है। बिज़नेस में लोग अक्सर भारी भरकम शब्दों और जार्गन का इस्तेमाल करके खुद को स्मार्ट दिखाने की कोशिश करते हैं। पर हकीकत में वे अपने कस्टमर को कंफ्यूज कर रहे होते हैं।
सोचिये आप एक डेट पर गए हैं और वहां आप अपनी कंपनी के टर्नओवर और टेक्निकल कोडिंग के बारे में बात करने लगें। क्या आपको लगता है कि आपको दूसरी डेट मिलेगी। बिलकुल नहीं। वहां आपको सामने वाले की भावनाओं को समझना होता है। बिज़नेस भी एक तरह का रिलेशनशिप ही है। अगर आप अपने एम्प्लोई से कहते हैं कि हमें इस महीने ज्यादा काम करना है तो उनके चेहरे लटक जाएंगे। लेकिन अगर आप कहें कि इस महीने हम सब मिलकर अपनी कंपनी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाले हैं और इसका फायदा सबको मिलेगा तो माहौल बदल जाएगा। इसे ही विनिंग कम्युनिकेशन कहते हैं।
भारत में हम अक्सर कहते हैं कि ग्राहक भगवान है पर क्या हम उनसे भगवान की तरह बात करते हैं। ज्यादातर बिज़नेस ओनर अपने कस्टमर को सिर्फ एक नंबर समझते हैं। लुंट्ज़ समझाते हैं कि आपको शब्दों का चुनाव बहुत सावधानी से करना चाहिए। आपको लोगों के डर और उनकी उम्मीदों को समझना होगा। अगर आप अपनी बात को सरल और इमोशनल टच के साथ नहीं कह सकते तो आपकी मार्केटिंग की सारी मेहनत नाली में जा रही है। आप करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च कर दीजिये लेकिन अगर आपका मैसेज दिल को नहीं छूता तो लोग आपको इग्नोर कर देंगे।
इंसानी दिमाग बहुत आलसी होता है। उसे सादगी पसंद है। अगर आप उसे उलझाएंगे तो वह भाग जाएगा। जैसे कुछ लोग अपनी सेल्स पिच में इतने टेक्निकल शब्द डाल देते हैं कि लगता है वे बिज़नेस नहीं बल्कि रॉकेट साइंस पढ़ा रहे हैं। हकीकत यह है कि आपको एक छोटे बच्चे की तरह अपनी बात कहनी आनी चाहिए। जब आप अपनी भाषा पर पकड़ बना लेते हैं तो आप सिर्फ सामान नहीं बेचते बल्कि आप लोगों का भरोसा जीतते हैं। और याद रखिये जिस दिन आपने लोगों के कान के बजाय उनके दिल तक पहुंचना सीख लिया उस दिन से आपका बिज़नेस ऑर्डिनरी नहीं रहेगा। यह लेसन हमें सिखाता है कि कम्युनिकेशन कोई हुनर नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है। अगर आप गलत शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप अपनी सफलता का दरवाजा खुद बंद कर रहे हैं। अब चुनाव आपका है कि आपको शोर मचाना है या लोगों के दिलों में जगह बनानी है।
लेसन २ : विश्वास का निर्माण और ईमानदारी का तड़का
अगर आपको लगता है कि बिज़नेस का मतलब सिर्फ लोगों को टोपी पहनाना है तो मुबारक हो आप बहुत जल्द सड़क पर आने वाले हैं। फ्रैंक लुंट्ज़ अपनी किताब विन में बताते हैं कि बिना ट्रस्ट के आपकी हर जीत अधूरी और टेंपरेरी है। आज के इंटरनेट वाले जमाने में जहाँ लोग एक मिनट में आपकी कुंडली निकाल सकते हैं वहां झूठ बोलना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। विश्वास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप दुकान से खरीद लें। इसे कमाना पड़ता है और वो भी हर दिन।
सोचिये आप एक पुरानी कार खरीदने गए हैं। सेल्समैन आपको मुस्कुराकर कहता है कि यह गाड़ी तो स्वर्ग से सीधे आपके लिए उतरी है और इसमें कोई कमी नहीं है। क्या आप उस पर भरोसा करेंगे। बिल्कुल नहीं। बल्कि आपको शक होगा कि दाल में कुछ काला है। लेकिन अगर वही सेल्समैन आपसे कहे कि सर इस गाड़ी का इंजन बढ़िया है पर इसके टायर थोड़े घिसे हुए हैं जिन्हें आपको अगले छह महीने में बदलना होगा। तो अचानक आपका उस पर भरोसा बढ़ जाता है। उसने अपनी कमजोरी बताकर आपकी नजर में अपनी ईमानदारी साबित कर दी। बिज़नेस में इसे स्ट्रेटेजिक ऑनेस्टी कहते हैं।
भारत में हम अक्सर देखते हैं कि लोग काम पकड़ने के लिए आसमान के तारे तोड़ लाने के वादे कर देते हैं। लेकिन जब डिलीवरी का समय आता है तो वे फोन उठाना बंद कर देते हैं। यह रवैया एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी बिज़नेस को गटर में ले जाने के लिए काफी है। लुंट्ज़ कहते हैं कि आपको अपनी गलतियों को स्वीकार करना आना चाहिए। अगर आपसे कोई गलती हुई है तो उसे छुपाने के बजाय सामने आकर बोलिये। लोग माफ़ कर देते हैं लेकिन धोखा कभी नहीं भूलते।
आजकल की दुनिया में हर कोई खुद को परफेक्ट दिखाने की रेस में लगा है। कंपनियां अपने विज्ञापनों में ऐसे दावे करती हैं जैसे उनका प्रोडक्ट इस्तेमाल करते ही आपकी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। पर असली विनर वो है जो असली रहता है। पारदर्शिता या ट्रांसपेरेंसी का मतलब यह नहीं कि आप अपनी तिजोरी की चाबी सबको दे दें। इसका मतलब यह है कि आपके कस्टमर और आपकी टीम को पता होना चाहिए कि आप जो कह रहे हैं वही आप कर रहे हैं।
एक बॉस के तौर पर भी अगर आप अपनी टीम को सिर्फ हुक्म देते हैं और अपनी कमियां नहीं बताते तो आपकी टीम आपसे कभी दिल से नहीं जुड़ेगी। वे बस घड़ी देखकर काम करेंगे और मौका मिलते ही भाग जाएंगे। लेकिन जब आप उनके साथ सच्चाई साझा करते हैं तो वे आपके मिशन को अपना मिशन मान लेते हैं। याद रखिये पैसा तो कोई भी कमा सकता है पर जो भरोसा कमाता है वही असली लीडर कहलाता है। अगर आप अपने बिज़नेस में ईमानदारी का तड़का नहीं लगा सकते तो आप बस एक और आम दुकानदार बनकर रह जाएंगे जिसकी कोई पहचान नहीं होगी। इसलिए शब्दों की मिठास के साथ सच्चाई की बुनियाद रखना बहुत जरूरी है।
लेसन ३ : विजुअलाइजिंग सक्सेस और दूर की सोच
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सुबह बस इसलिए उठते हैं क्योंकि ऑफिस जाना है। अगर आपका विजन धुंधला है तो आपका बिज़नेस भी अंधेरे में ही रहेगा। फ्रैंक लुंट्ज़ अपनी किताब विन में समझाते हैं कि एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीडर वही है जो न केवल खुद भविष्य को देख सके बल्कि अपनी पूरी टीम को भी वह सपना दिखा सके। इसे विजुअलाइजेशन कहते हैं। यह कोई जादू टोना नहीं है बल्कि आपके दिमाग को सफलता के लिए ट्रेन करने का तरीका है।
कल्पना कीजिये कि आप एक बस में चढ़े हैं और ड्राइवर से पूछते हैं कि बस कहाँ जाएगी। ड्राइवर बड़े प्यार से कहता है कि भाई साहब कहीं न कहीं तो पहुँच ही जाएंगे बस बैठ जाइये। क्या आप उस बस में रुकेंगे। कभी नहीं। आप तुरंत नीचे उतर जाएंगे। बिज़नेस में भी यही होता है। अगर आपके एम्प्लोई और कस्टमर को यह नहीं पता कि आप उन्हें कहाँ ले जा रहे हैं तो वे आपका साथ छोड़ देंगे। भारत में लोग अक्सर आज की कमाई के चक्कर में कल का विजन भूल जाते हैं। वे बस आज का गल्ला भरने में लगे रहते हैं। लेकिन लुंट्ज़ कहते हैं कि असली जीत तब होती है जब आप आज की मेहनत को कल के बड़े इनाम से जोड़ देते हैं।
मान लीजिये आप एक स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। अगर आप सिर्फ अपनी टीम को यह बताते रहेंगे कि कोडिंग कैसे करनी है तो वे बोर हो जाएंगे। लेकिन अगर आप उन्हें यह दिखा सकें कि आपका यह ऐप लाखों लोगों की जिंदगी कैसे आसान बनाएगा तो उनका जोश बढ़ जाएगा। यहाँ ह्यूमर की बात यह है कि कुछ लोग विजन के नाम पर केवल बड़ी बड़ी बातें करते हैं पर उनके पास कोई प्लान नहीं होता। वे मुंगेरी लाल के हसीन सपने तो देखते हैं पर जमीन पर जीरो होते हैं।
सफलता को विजुअलाइज करने का मतलब है कि आपको पता होना चाहिए कि जीत कैसी दिखती है। जब आप जीतेंगे तो आपके कस्टमर क्या कह रहे होंगे। आपकी ऑफिस की दीवारें कैसी होंगी। आपकी कंपनी की वैल्यू क्या होगी। जब आप इन चीजों को बारीकी से देखते हैं तो आपका दिमाग उन रास्तों को खोजना शुरू कर देता है। लुंट्ज़ ने दुनिया के बड़े बड़े लीडर्स और पॉलिटिशियन के साथ काम किया है और उन्होंने एक ही बात नोटिस की है कि विनर्स कभी भी अंधेरे में तीर नहीं चलाते। उनके पास एक साफ़ तस्वीर होती है।
यह सब जुड़ा हुआ है। पहले आपने सही भाषा चुनी (लेसन ०१), फिर उस भाषा से विश्वास पैदा किया (लेसन ०२) और अब उस विश्वास को एक बड़े विजन में बदल दिया (लेसन ०३)। अगर आप इन तीनों का तालमेल बिठा लेते हैं तो आपको एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनने से कोई नहीं रोक सकता। अब समय है अपनी कुर्सी से उठने का और सिर्फ सोचने के बजाय एक्ट करने का। क्या आप वह विनर बनने के लिए तैयार हैं या फिर से वही साधारण जिंदगी जीना चाहते हैं। फैसला आपके हाथ में है। आज ही अपने विजन को कागज पर उतारिये और अपनी टीम के साथ साझा कीजिये। आपकी असली जीत की शुरुआत यहीं से होती है।
अगर आपको भी लगता है कि अब आपके बिज़नेस में बड़े बदलाव की जरूरत है तो नीचे कमेंट में अपना सबसे बड़ा गोल लिखिये। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो मेहनत तो बहुत करता है पर उसे सही दिशा नहीं मिल रही। याद रखिये आपकी एक छोटी सी पहल किसी का पूरा करियर बदल सकती है।
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