क्या आप भी अपनी पुरानी घिसी पिटी बिजनेस स्ट्रेटजी को छाती से लगाकर बैठे हैं और कस्टमर्स के गायब होने का मातम मना रहे हैं? मुबारक हो। आप बहुत जल्द इतिहास की किताबों में मिलने वाले हैं। जब दुनिया रॉकेट की स्पीड से डिजिटल हो रही है तब आप बैलगाड़ी लेकर मार्केट में डिजिटल प्यार ढूंढ रहे हैं। यह आर्टिकल मत पढ़ना वरना आप गलती से प्रॉफिट कमाना सीख जाएंगे और आपकी बर्बादी का सपना अधूरा रह जाएगा।
हावर्ड टियर्सकी की किताब विनिंग डिजिटल कस्टमर्स हमें बताती है कि कैसे आज के जमाने में बिजनेस को रद्दी बनने से बचाना है। चलिए जानते हैं वह ३ पावरफुल लेसन जो आपके बिजनेस को डिजिटल दुनिया का राजा बना सकते हैं।
लेसन १ : डिजिटल लव और कस्टमर की वफादारी
आज के जमाने में अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ एक सस्ती वेबसाइट बनाकर आप डिजिटल दुनिया के अंबानी बन जाएंगे तो भाई साहब आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। हावर्ड टियर्सकी कहते हैं कि कस्टमर को सिर्फ सामान नहीं चाहिए बल्कि उसे आपसे प्यार चाहिए और वह भी डिजिटल वाला प्यार। अब आप सोचेंगे कि क्या अब हमें कस्टमर को डेट पर ले जाना होगा? बिल्कुल नहीं। डिजिटल लव का मतलब है कि जब कोई यूजर आपकी एप या वेबसाइट पर आए तो उसे ऐसा महसूस होना चाहिए जैसे वह किसी फाइव स्टार होटल में आया है न कि किसी सरकारी दफ्तर के धक्के खा रहा है।
अक्सर बिजनेस वाले अपनी वेबसाइट ऐसी बनाते हैं जैसे कोई भूलभुलैया हो। कस्टमर आता है पेमेंट बटन ढूंढने और उसे मिलता है ४०४ एरर वाला थप्पड़। यह वही बात हो गई कि आप किसी लड़की को इम्प्रेस करने गए और वहां जाकर अपनी ही बुराइयां करने लगे। अगर आपका डिजिटल एक्सपीरियंस स्मूथ नहीं है तो समझ लीजिए कि आपका कस्टमर किसी और के पास सेटल हो चुका है। लोग आजकल इतने आलसी हो गए हैं कि अगर बटन दबने में एक सेकंड की भी देरी हुई तो वह आपको छोड़कर कॉम्पिटिटर की बाहों में चले जाते हैं।
मान लीजिए आपको भूख लगी है और आप एक फूड डिलीवरी एप खोलते हैं। अब एप आपसे पहले ५० सवाल पूछती है जैसे कि आपके दादाजी का नाम क्या था या आपको बचपन में कौन सा रंग पसंद था। क्या आप वहां खाना ऑर्डर करेंगे? बिल्कुल नहीं। आप तुरंत उस एप को डिलीट करेंगे और उसे गाली देते हुए दूसरी एप पर जाएंगे जहाँ सिर्फ दो क्लिक में पिज्जा घर आ जाता है। यही है डिजिटल लव का असली खेल। जो बिजनेस कस्टमर का समय बचाता है और उसे वीआईपी वाली फीलिंग देता है वही मार्केट में टिकता है।
आज का कस्टमर बहुत स्मार्ट है उसे पता है कि उसके पास हजारों ऑप्शंस हैं। अगर आपकी सर्विस उसे रुला रही है तो वह आपको ब्लॉक करने में एक पल भी नहीं लगाएगा। इसलिए अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को इतना आसान बनाइए कि एक ५ साल का बच्चा भी उसे चला सके और एक ८० साल के दादाजी भी। जब आप कस्टमर की जरूरतों को उनसे पहले समझने लगते हैं तब जाकर वह आपसे इमोशनली जुड़ता है। उसे लगना चाहिए कि यह ब्रांड सिर्फ मेरा पैसा नहीं चाहता बल्कि मेरी लाइफ आसान बनाना चाहता है। और एक बार जब यह डिजिटल लव वाली चिंगारी जल जाती है तो फिर कोई भी डिस्काउंट या सेल आपके कस्टमर को आपसे छीन नहीं सकती। क्या आप अपने कस्टमर्स को वह प्यार दे रहे हैं या फिर उन्हें बस एक डेटा का टुकड़ा समझकर इग्नोर कर रहे हैं?
लेसन २ : द फाइव फेजेस ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन
डिजिटल लव की बातें तो बहुत हो गईं लेकिन यह प्यार परवान कैसे चढ़ेगा? इसके लिए आपको अपने बिजनेस का कायाकल्प करना होगा जिसे हावर्ड ट्रांसफॉर्मेशन के ५ चरण कहते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप जिम जाने का फैसला करते हैं। पहले दिन जोश में आकर फोटो खिंचवाते हैं और दूसरे दिन सोफे पर पड़े रहते हैं। बिजनेस के साथ भी यही दिक्कत है। लोग सोचते हैं कि फेसबुक पर पेज बना लिया तो अब पैसा आसमान से बरसेगा। लेकिन भाई साहब यह ट्रांसफॉर्मेशन कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे घुमाया और सब ठीक हो गया। इसमें आपको अपनी पुरानी आदतों को आग लगानी पड़ती है।
सबसे पहला चरण है विजन। आपको पता होना चाहिए कि आप आखिर जा कहाँ रहे हैं। बहुत से बिजनेस मालिक तो ऐसे होते हैं जिन्हें पता ही नहीं कि उनका डिजिटल विजन क्या है। वह बस दूसरों को देखकर भेड़चाल में शामिल हो जाते हैं। अगर आपका विजन धुंधला है तो आपका बिजनेस भी कोहरे में फंसी बस की तरह कहीं भी ठुक जाएगा। दूसरा चरण है कस्टमर को समझना। आपको उनके जूतों में पैर डालकर देखना होगा कि कांटा कहाँ चुभ रहा है। अगर आप अपने कस्टमर की प्रॉब्लम ही नहीं जानते तो आप सॉल्यूशन क्या खाक देंगे? तीसरा चरण है स्ट्रेटजी बनाना। बिना प्लानिंग के डिजिटल जंग में उतरना मतलब बिना हेलमेट के बाइक चलाना है। एक्सीडेंट तो पक्का ही होगा।
चौथा चरण है एक्जीक्यूशन। यहाँ आकर असली पसीना निकलता है। बहुत से लोग बड़ी बड़ी बातें तो करते हैं लेकिन जब काम करने की बारी आती है तो बहाने बनाने लगते हैं। और आखिरी चरण है ऑप्टिमाइजेशन। यानी जो आपने बनाया है उसे बार बार चेक करना और सुधारना। इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपने एक ऑनलाइन कपड़ों की दुकान खोली। आपने बहुत बढ़िया फोटो डाली और तगड़ी मार्केटिंग की। लेकिन जब कस्टमर ने शर्ट खरीदी तो उसे पता चला कि बटन ही नहीं हैं। अब आप क्या करेंगे? क्या आप यह कहेंगे कि शर्ट तो अच्छी थी बस बटन ही तो नहीं थे? बिल्कुल नहीं। आपको अपनी गलती माननी होगी और उसे ठीक करना होगा।
डिजिटल दुनिया में कुछ भी परमानेंट नहीं है। जो आज ट्रेंडिंग है वह कल कचरा हो सकता है। इसलिए आपको हमेशा सतर्क रहना होगा। अगर आप इन पांच फेजेस को ठीक से फॉलो नहीं करते तो आप उसी दुकानदार की तरह रह जाएंगे जो दुकान के बाहर मक्खियां मारता है और कहता है कि जमाना खराब है। जमाना खराब नहीं है आपकी स्ट्रेटजी पुरानी है। आपको खुद को बार बार अपडेट करना होगा वरना आपका बिजनेस किसी पुराने नोकिया फोन की तरह हो जाएगा जिसे लोग सिर्फ यादों में रखते हैं इस्तेमाल कोई नहीं करता। क्या आप बदलने के लिए तैयार हैं या फिर आप भी उसी पुरानी बैलगाड़ी पर सवार रहना चाहते हैं?
लेसन ३ : कस्टमर जर्नी मैपिंग और आखिरी टचपॉइंट
अब बात करते हैं उस आखिरी तीर की जो आपके शिकार यानी कि मार्केट को फतह करेगा। इसे कहते हैं कस्टमर जर्नी मैपिंग। आसान भाषा में कहें तो यह कस्टमर के साथ आपका वह सफर है जो वेबसाइट देखने से शुरू होता है और सामान घर पहुँचने के बाद भी जारी रहता है। हावर्ड कहते हैं कि अक्सर बिजनेसमैन सिर्फ अपनी सेल पर ध्यान देते हैं लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि कस्टमर को असली दर्द कहाँ हो रहा है। अगर आप अपने कस्टमर की जर्नी को मैप नहीं कर रहे हैं तो आप एक अंधे ड्राइवर की तरह हैं जो बस एक्सीलेटर दबाए जा रहा है और उसे पता ही नहीं कि सामने खाई है।
जरा सोचिए आप एक बहुत महंगे रेस्टोरेंट में जाते हैं। बाहर से डेकोरेशन एकदम चमक धमक वाली है। वेटर आपको सलाम ठोकता है और आप खुश हो जाते हैं। लेकिन जैसे ही आप मेन्यू खोलते हैं तो पता चलता है कि हर डिश का नाम लैटिन में लिखा है और फोटो एक भी नहीं है। आपको समझ ही नहीं आ रहा कि आपको पनीर मिलेगा या घास फूस। फिर आप वेटर को बुलाते हैं और वह आधे घंटे बाद आता है। खाना तो छोड़िए आपका तो वहां से भागने का मन करने लगेगा। यही होता है जब आप अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कस्टमर जर्नी को नजरअंदाज करते हैं। आपकी वेबसाइट सुंदर हो सकती है लेकिन अगर कस्टमर को चेकआउट करने में पसीने आ रहे हैं तो आपकी मेहनत जीरो है।
मान लीजिए आप एक इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर गए। आप चाहते हैं कि आपका काम जल्दी हो जाए। लेकिन वेबसाइट आपको एक ऐसे फॉर्म पर ले जाती है जहाँ आपको अपनी सात पीढ़ियों की जानकारी देनी पड़ती है। अंत में जब आप सबमिट बटन दबाते हैं तो स्क्रीन गोल गोल घूमने लगती है और फिर लिखा आता है समथिंग वेंट रोंग। अब आप क्या करेंगे? क्या आप दोबारा वह फॉर्म भरेंगे? कभी नहीं। आप उस कंपनी को और उनके खानदान को कोसते हुए किसी ऐसी जगह जाएंगे जहाँ सिर्फ आधार नंबर डालते ही काम हो जाए। डिजिटल कस्टमर को नखरे पसंद नहीं हैं उसे बस रिजल्ट चाहिए।
हावर्ड समझाते हैं कि आपको अपनी सर्विस के हर एक टचपॉइंट को एक जासूस की तरह चेक करना चाहिए। क्या आपका साइन अप प्रोसेस आसान है? क्या पेमेंट गेटवे भरोसेमंद है? क्या डिलीवरी के बाद कस्टमर को फीडबैक देने का मौका मिला? अगर आप इन छोटे छोटे डॉट्स को नहीं जोड़ पा रहे हैं तो आपकी जर्नी अधूरी है। याद रखिए एक खराब एक्सपीरियंस आपके सालों के भरोसे को एक सेकंड में राख कर सकता है। आज के दौर में इर्रेलेवेंट होना मौत के बराबर है। अगर आप कस्टमर के दिल का रास्ता नहीं ढूंढ पाए तो आप भी उन हजारों कंपनियों की भीड़ में खो जाएंगे जो कभी बहुत बड़ी हुआ करती थीं। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप अपने कस्टमर के लिए रेड कारपेट बिछाएंगे या फिर उनके रास्ते में कांटों भरे फॉर्म और एरर मैसेज रखेंगे?
दोस्त, दुनिया बदल चुकी है और अब आपकी बारी है। अगर आप भी अपने बिजनेस को रद्दी होने से बचाना चाहते हैं तो आज ही अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को कस्टमर के नजरिए से देखना शुरू करें। नीचे कमेंट में बताएं कि आपके डिजिटल एक्सपीरियंस में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज क्या है? इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अब भी पुरानी सोच लेकर बैठे हैं। चलिए मिलकर बिजनेस की इस नई डिजिटल दुनिया के राजा बनते हैं।
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