क्या आप अभी भी भेड़चाल में फंसे हैं। अपनी वैल्यूज को बेचकर सिर्फ पैसा कमाना आपको ब्रांड नहीं बल्कि एक सस्ता मजदूर बना रहा है। अगर आप अब भी हु टू बी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं।
आज के कॉम्पिटिशन वाले दौर में सिर्फ काम करना काफी नहीं है। पेट्रिक जेन्टेम्पो की यह किताब हमें सिखाती है कि कैसे एक स्टैंड लेना आपके बिजनेस को अमर बना सकता है। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।
लेसन १ : आप कौन हैं यह तय करना क्या करना है से ज्यादा जरूरी है
क्या आपने कभी सोचा है कि मार्केट में हजारों दुकानें होने के बाद भी आप कुछ खास ब्रांड्स के ही दीवाने क्यों हैं। असल में हम अक्सर यह सोचने की गलती कर बैठते हैं कि बिजनेस का मतलब सिर्फ सामान बेचना या सर्विस देना है। पेट्रिक जेन्टेम्पो कहते हैं कि दुनिया को इसकी परवाह नहीं है कि आप क्या करते हैं। दुनिया को परवाह इस बात की है कि आप कौन हैं।
ज्यादातर लोग सुबह उठकर अपनी टू डू लिस्ट देखते हैं। वह पागलों की तरह काम में जुट जाते हैं। लेकिन वह कभी रुककर खुद से यह नहीं पूछते कि वह अपनी कंपनी को किस पहचान के साथ खड़ा कर रहे हैं। इसे एक मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए एक मोहल्ले में दो हलवाई हैं। पहला हलवाई सिर्फ मिठाई बेचता है। उसका ध्यान सिर्फ मुनाफे पर है। वह मिलावट भी कर लेता है क्योंकि उसका मकसद सिर्फ व्हाट टू डू यानी बेचना है। वहीं दूसरा हलवाई यह तय करता है कि वह शुद्धता का प्रतीक बनेगा। उसका हु टू बी यानी उसकी पहचान एक ईमानदार इंसान की है। अब भले ही उसकी मिठाई थोड़ी महंगी हो पर लोग लाइन लगाकर वहीं जाएंगे।
यही फर्क है एक आम दुकानदार और एक ब्रांड में। जब आप अपनी पहचान यानी अपनी वैल्यूज तय कर लेते हैं तो आपके फैसले आसान हो जाते हैं। अगर आप खुद को एक क्वालिटी लीडर के रूप में देखते हैं तो आप कभी घटिया माल नहीं बेचेंगे। भले ही उसके लिए आपको शॉर्ट टर्म में नुकसान उठाना पड़े। लेकिन अगर आप सिर्फ काम के पीछे भागेंगे तो आप एक मशीन बनकर रह जाएंगे।
इंडियन मार्केट में हम अक्सर देखते हैं कि लोग दूसरों की नकल करने में लगे रहते हैं। अगर पड़ोसी ने मोमोज की दुकान खोली और वह चल पड़ी तो आप भी वही करने लगते हैं। यह वॉट टू डू वाली सोच है। लेकिन अगर आप यह तय करें कि आप शहर के सबसे हाइजीनिक फूड सर्व करने वाले इंसान बनेंगे तो वह आपका हु टू बी होगा। लोग आपके काम को नहीं बल्कि आपके उस स्टैंड को याद रखेंगे।
बिना किसी गहरी पहचान के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना इंजन के कार को धक्का मारना। आप कितनी भी दूर चले जाएं पर आप थक जाएंगे। लेकिन जब आपकी एक मजबूत पहचान होती है तो वह इंजन की तरह आपको आगे बढ़ाती है। तो आज ही अपनी डायरी निकालिए और यह लिखना बंद कीजिए कि आपको कल क्या करना है। इसके बजाय यह लिखिए कि आप अपने कस्टमर्स की नजर में कौन बनना चाहते हैं। क्या आप एक भरोसेमंद साथी बनना चाहते हैं या सिर्फ एक और मतलबी सेल्समैन। फैसला आपका है क्योंकि आपकी पहचान ही आपके ब्रांड का असली चेहरा है।
लेसन २ : स्टैंड लेने की ताकत और सही ऑडियंस का चुनाव
क्या आप उन लोगों में से हैं जो सबको खुश करने की कोशिश करते हैं। अगर हाँ तो बधाई हो आप एक बहुत ही बोरिंग और एवरेज ब्रांड बनने की राह पर हैं। पेट्रिक जेन्टेम्पो इस किताब में बड़ी कड़वी मगर सच्ची बात कहते हैं। अगर आप किसी चीज के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते तो आप किसी चीज के लिए भी खड़े नहीं हैं। एक ब्रांड का मतलब ही यही है कि आपकी अपनी एक राय हो। भले ही उस राय की वजह से कुछ लोग आपसे नफरत करने लगें।
आजकल के दौर में बिजनेसमैन डरते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिससे किसी को बुरा लग गया तो उनका कस्टमर चला जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि जब आप सबके लिए बनने की कोशिश करते हैं तो आप किसी के लिए भी खास नहीं रह जाते। इसे एक देसी मिसाल से समझते हैं। आपने देखा होगा कि कुछ जिम ट्रेनर बड़े सख्त होते हैं। वह साफ कहते हैं कि अगर आप डाइट फॉलो नहीं कर सकते तो मेरी क्लास में मत आना। अब कुछ लोगों को यह बात बड़ी कड़वी और घमंडी लग सकती है। लेकिन जो लोग अपनी फिटनेस को लेकर सीरियस हैं उनके लिए वह ट्रेनर एक भगवान बन जाता है। उस ट्रेनर ने एक स्टैंड लिया और उस स्टैंड ने आलसी लोगों को दूर भगा दिया लेकिन वफादार कस्टमर्स की एक फौज खड़ी कर दी।
सच्चा ब्रांड वही है जो रिजेक्शन से नहीं डरता। जब आप यह साफ कर देते हैं कि आप किन वैल्यूज के साथ हैं तो आप उन लोगों को फिल्टर कर देते हैं जो आपके लिए सही नहीं हैं। आप अपनी एनर्जी उन लोगों पर बर्बाद करना बंद कर देते हैं जो सिर्फ मोलभाव करने आए हैं। याद रखिए अगर आपके ब्रांड का कोई दुश्मन नहीं है तो समझ लीजिए आपका कोई सच्चा दोस्त भी नहीं है।
भारत में लोग अक्सर डरते हैं कि कहीं पड़ोसी या रिश्तेदार क्या कहेंगे। बिजनेस में भी हम इसी डर के साथ जीते हैं। लेकिन जरा उन बड़े ब्रांड्स के बारे में सोचिए जो अपने उसूलों के लिए जाने जाते हैं। वह कभी डिस्काउंट नहीं देते क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी क्वालिटी का एक स्टैंड है। वह जानते हैं कि जो ग्राहक सिर्फ सस्ता ढूंढ रहा है वह कभी उनका वफादार नहीं होगा।
स्टैंड लेने का मतलब सिर्फ शोर मचाना नहीं है। इसका मतलब है अपने काम में अपनी ईमानदारी को झलकने देना। जब आप किसी गलत चीज के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हैं या अपनी क्वालिटी पर अड़ जाते हैं तो लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। यह भरोसा ही आगे चलकर आपकी ब्रांड इक्विटी बनता है। तो अगली बार जब कोई आपसे कहे कि थोड़ा एडजस्ट कर लो तो रुक कर सोचिए। क्या वह एडजस्टमेंट आपकी पहचान खोने की कीमत पर है। अगर हाँ तो साफ मना करना सीखिए। क्योंकि जब आप ना कहना सीख जाते हैं तभी आपके हां की कोई वैल्यू होती है।
लेसन ३ : सत्य और स्पष्टता ही आपके बिजनेस की असली आत्मा है
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिजनेस में थोड़ा बहुत झूठ तो चलता है। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप एक बहुत ही कमजोर नींव पर अपना महल खड़ा कर रहे हैं। पेट्रिक जेन्टेम्पो हमें याद दिलाते हैं कि एक ब्रांड तब तक ही जिंदा रहता है जब तक वह अपने सत्य यानी अपनी ट्रुथ पर कायम रहता है। बिजनेस में स्पष्टता का होना उतना ही जरूरी है जितना चाय में पत्ती का होना। बिना इसके सब फीका है।
अक्सर हम मार्केटिंग के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करते हैं। हम वो वादे कर देते हैं जिन्हें हम कभी पूरा नहीं कर पाते। इसे आप एक सेल्समैन की चालाकी कह सकते हैं पर एक ब्रांड का अंत यहीं से शुरू होता है। मान लीजिए आपने एक ऑनलाइन कोर्स शुरू किया। आपने प्रॉमिस किया कि आप हर स्टूडेंट को पर्सनल मेंटरशिप देंगे। लेकिन पैसे आने के बाद आप गायब हो गए। यहाँ आपने अपने वॉट टू डू यानी पैसे कमाने में तो जीत हासिल कर ली पर अपने ब्रांड के सत्य को मार दिया।
सच्चाई का मतलब सिर्फ सच बोलना नहीं है बल्कि अपनी हर बात में पारदर्शिता रखना है। जब आप अपने कस्टमर से साफ बात करते हैं तो आप उनके साथ एक इमोशनल रिश्ता जोड़ते हैं। आज का जो युवा है वह बहुत स्मार्ट है। उसे पता चल जाता है कि कब कोई उसे बेवकूफ बना रहा है और कब कोई दिल से बात कर रहा है। अगर आपसे कोई गलती हुई है तो उसे मान लेना ही एक महान ब्रांड की निशानी है। लोग परफेक्ट ब्रांड को पसंद नहीं करते लोग उन ब्रांड्स को पसंद करते हैं जो असली और ईमानदार होते हैं।
भारत के लोग इमोशनल होते हैं। अगर आपने एक बार उनका भरोसा जीत लिया तो वह आपके लिए ब्रांड एम्बेसडर बन जाएंगे। लेकिन अगर आपने उन्हें धोखा दिया तो वह सोशल मीडिया पर आपकी लंका लगा देंगे। इसलिए अपनी वैल्यूज में स्पष्टता रखिए। आपके एम्प्लॉई से लेकर आपके कस्टमर तक सबको पता होना चाहिए कि आपकी कंपनी किन सिद्धांतों पर चलती है। जब आपकी कथनी और करनी एक होती है तो आपको मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। आपका काम ही आपकी पहचान बन जाता है।
अंत में बस इतना याद रखिए कि पैसा तो कोई भी कमा सकता है पर सम्मान और वफादारी सिर्फ वही कमाता है जो अपने स्टैंड पर अड़ा रहता है। पेट्रिक जेन्टेम्पो की यह किताब हमें यही सिखाती है कि अपने बिजनेस को सिर्फ एक जरिया मत बनाइए बल्कि इसे अपनी पहचान का एक हिस्सा बनाइए। जब आप गर्व से कह सकें कि यह मेरा ब्रांड है और यह मेरी वैल्यूज हैं तब समझ लीजिए कि आप सही मायनों में कामयाब हो गए हैं।
तो क्या आप तैयार हैं अपनी एक नई पहचान बनाने के लिए। क्या आप आज वह स्टैंड लेंगे जो आपके बिजनेस को हमेशा के लिए बदल देगा। उठिए और तय कीजिए कि आप कौन बनना चाहते हैं। दुनिया आपका इंतजार कर रही है।
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