अगर आप भी हर महीने के आखिर में खाली बैंक अकाउंट देखकर अपनी फूटी किस्मत को कोसते हैं तो बधाई हो आप बर्बादी के रास्ते पर हैं। बिना फाइनेंशियल प्लानिंग के जीना खुद को गरीबी के कुएं में धकेलना है और यह वीडियो इग्नोर करना उस कुएं में छलांग लगाना है।
लेकिन परेशान मत होइए क्योंकि आज हम टिफनी अलीशे की मशहूर किताब से कुछ ऐसे जादुई तरीके सीखेंगे जो आपकी डूबती नैया को पार लगाएंगे। चलिए सीधे उन तीन सबसे बड़े लाइफ चेंजिंग लेसन्स पर नजर डालते हैं जो आपको अमीर बनाएंगे।
लेसन १ : फाइनेंशियल होपनेस बजटिंग से शुरू होती है
क्या आपको याद है कि पिछली बार जब आपकी सैलरी आई थी तो वह पांच दिन में कहां गायब हो गई थी। नहीं याद होगा क्योंकि हम सब पैसे खर्च करने में उस्ताद हैं लेकिन उसका हिसाब रखने में बिल्कुल पैदल हैं। टिफनी अलीशे कहती हैं कि अमीर बनने का सफर किसी गुप्त खजाने को खोजने से नहीं बल्कि अपने ही पैसों का एक सही बजट बनाने से शुरू होता है। हमारे देश में बजट शब्द सुनते ही लोगों के चेहरे ऐसे बन जाते हैं जैसे उनसे उनकी किडनी मांग ली गई हो। लोग सोचते हैं कि बजट बनाने का मतलब है अपनी सारी खुशियों पर ताला लगा देना और समोसे के साथ मिलने वाली एक्स्ट्रा चटनी के लिए भी भीख मांगना। लेकिन असल में यह आपकी आजादी का रास्ता है।
बजट बनाना अपनी इच्छाओं का गला घोंटना नहीं है बल्कि अपने पैसों को तमीज सिखाना है। जब आप अपने हर एक रुपए को एक काम सौंप देते हैं तो आपका पैसा फालतू जगह भटकना बंद कर देता है। जरा सोचिए कि आप बिना मैप के किसी अनजान शहर में गाड़ी चला रहे हैं। क्या होगा। आप कहीं नहीं पहुंचेंगे और पेट्रोल अलग से फूंकेंगे। बिना बजट के लाइफ जीना भी बिल्कुल वैसा ही है। आप बस कमा रहे हैं और उड़ा रहे हैं। जब महीने के पहले हफ्ते में वीकेंड आता है तो हम सब खुद को किसी देश का राजा समझने लगते हैं। महंगे कैफे में जाकर ऐसी कॉफी आर्डर करते हैं जिसका नाम भी ठीक से बोलना नहीं आता। लेकिन जैसे ही बीस तारीख आती है हमारी हालत किसी भीख मांगते हुए फकीर जैसी हो जाती है जो सिर्फ पारले जी खाकर दिन काटता है।
इस जाल से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही तरीका है और वह है फाइनेंशियल होपनेस। इसका मतलब है कि आपको अपने पैसे के साथ पूरी तरह ईमानदार होना पड़ेगा। टिफनी अपनी इस किताब में नूडल बजट का एक बहुत ही शानदार आइडिया देती हैं। यह एक ऐसा बजट है जो आपको सिखाता है कि जब लाइफ में बहुत बुरा वक्त आ जाए तो आपको अपने खर्चों को कम से कम लेवल पर कैसे लाना है। यानी सिर्फ जिंदा रहने के लिए जितने पैसों की जरूरत है उतने में काम चलाना। लेकिन हमारे यहां लोग क्या करते हैं। जैसे ही बोनस मिलता है सबसे पहले नया आईफोन खरीदने भागते हैं भले ही घर का राशन उधार पर चल रहा हो। यह दिखावे की बीमारी ही हमें कभी अमीर नहीं बनने देती।
अगर आपको अपनी इस हालत को बदलना है तो आज ही से अपने पैसों को काम पर लगाइए। एक सिंपल पेपर उठाइए और लिखिए कि कितना पैसा आ रहा है और कितना जा रहा है। जब आप अपनी आंखों के सामने अपने फालतू खर्चों का तमाशा देखेंगे तो आपको खुद पर हंसी भी आएगी और गुस्सा भी आएगा। जब तक आप अपने पैसों को कंट्रोल करना नहीं सीखेंगे तब तक पैसा आपको नचाता रहेगा। और याद रखिए कि यह तो सिर्फ शुरुआत है क्योंकि जब आप अपने पैसों को संभालना सीख जाते हैं तभी आप उस बड़े खतरे से लड़ने के लिए तैयार होते हैं जो कभी भी बिना बताए आपके दरवाजे पर दस्तक दे सकता है।
लेसन २ : इमरजेंसी फंड आपका असली रक्षक है
जब आप बजट बनाकर अपने पैसों को थोड़ी तमीज सिखा देते हैं, तब आपको समझ आता है कि लाइफ सिर्फ आज का दिन काटने का नाम नहीं है। लाइफ का दूसरा नाम है अनिश्चितता, यानी कब आपके साथ कोई बड़ा मजाक हो जाए, आपको खुद पता नहीं चलेगा। टिफनी कहती हैं कि हर इंसान की लाइफ में एक ऐसा पल जरूर आता है जब किस्मत आपके सामने आकर खड़ी हो जाती है और कहती है कि लाओ भाई अब पैसे निकालो। उस वक्त आपके काम कोई दोस्त या रिश्तेदार नहीं आता, बल्कि सिर्फ एक ही चीज काम आती है और वह है आपका इमरजेंसी फंड। हमारे देश में लोग इमरजेंसी फंड के नाम पर भगवान भरोसे जीते हैं। लोग सोचते हैं कि जब कोई मुसीबत आएगी तो देखा जाएगा, अभी से क्यों सोचना।
लेकिन सच तो यह है कि मुसीबत कभी भी ढोल बजाकर या आपको व्हाट्सएप पर मैसेज करके नहीं आती। वह सीधे आपके दरवाजे पर आकर खड़ी हो जाती है। मान लीजिए कि अचानक आपकी नौकरी चली गई या आपकी गाड़ी का इंजन बीच रास्ते में धुआं छोड़ गया। उस वक्त आप क्या करेंगे। क्या आप अपने बॉस को रोते हुए फोन करेंगे या सड़क पर बैठकर भीख मांगेंगे। अगर आपके पास छह महीने के खर्च का एक अलग फंड तैयार है, तो आप उस मुसीबत के सामने छाती तानकर खड़े हो सकते हैं। लेकिन हमारे देश के युवाओं का इमरजेंसी फंड क्या होता है। क्रेडिट कार्ड की लिमिट। लोग सोचते हैं कि जेब में प्लास्टिक का कार्ड है तो दुनिया मुट्ठी में है।
यह क्रेडिट कार्ड असल में एक ऐसा जाल है जो आपको कभी अमीर नहीं बनने देता। जब भी कोई जरूरत आती है, लोग तुरंत कार्ड स्वाइप कर देते हैं और फिर अगले पांच साल तक उसका भारी ब्याज भरते रहते हैं। यह वैसी ही बेवकूफी है जैसे भूख लगने पर अपनी ही उंगली काटकर खा लेना। टिफनी कहती हैं कि आपको एक ऐसा फंड बनाना होगा जिसे आप कभी भी नॉर्मल दिनों में हाथ नहीं लगाएंगे। यह पैसा आपके रेगुलर बैंक अकाउंट से दूर किसी ऐसी जगह होना चाहिए जहां तक आपकी पहुंच थोड़ी मुश्किल हो। क्योंकि अगर वह पैसा आपकी नजरों के सामने रहेगा, तो आपको ऑनलाइन सेल देखते ही उसमें से शॉपिंग करने की तीव्र इच्छा होने लगेगी।
जरा सोचिए कि आप रात को चैन की नींद सो रहे हैं और आपको इस बात का कोई डर नहीं है कि कल सुबह क्या होगा। यह सुकून आपको दुनिया की कोई महंगी गाड़ी या महंगा फोन नहीं दे सकता। यह सुकून सिर्फ और सिर्फ एक मजबूत इमरजेंसी फंड ही दे सकता है। लेकिन इसे बनाने के लिए आपको अपनी उन इच्छाओं पर थोड़ा काबू पाना होगा जो हर वीकेंड पर जाग जाती हैं। जब तक आप अपने आज के मजे को कल की सुरक्षा के लिए थोड़ा नहीं छोड़ेंगे, तब तक आप हमेशा डर के साए में जिएंगे। और जब आप इस रक्षक को अपने पास तैयार कर लेते हैं, तब आप असल मायने में बेखौफ होकर अगले कदम की तरफ बढ़ सकते हैं, जहां आपको अपने पैसों को ऑटोमेटिक मोड पर डालना होता है।
लेसन ३ : कर्ज से लड़ने के लिए ऑटोमेशन का इस्तेमाल करे
जब आपका बजट सेट हो जाता है और एक मजबूत इमरजेंसी फंड आपके पीछे ढाल बनकर खड़ा हो जाता है, तब बारी आती है इस पूरे सिस्टम को एक मजबूत किले में बदलने की। टिफनी अलीशे कहती हैं कि इंसान का दिमाग बहुत ही कमजोर और आलसी होता है। हम चाहे जितने भी बड़े-बड़े वादे खुद से कर लें, लेकिन जब बात बैंक से पैसे निकालकर सेविंग्स अकाउंट में डालने की आती है, तो हमारा हाथ कांपने लगता है। हम सोचते हैं कि चलो इस महीने थोड़ी ज्यादा पार्टी कर लेते हैं, अगले महीने डबल बचा लेंगे। लेकिन वह अगला महीना कभी नहीं आता। इस इंसानी कमजोरी का सबसे बेस्ट इलाज है ऑटोमेशन, यानी अपने पैसों को एक ऑटोमेटिक मशीन बना देना।
आज के समय में टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन हम उसका इस्तेमाल सिर्फ फालतू के रील्स देखने या ऑनलाइन शॉपिंग करने में करते हैं। टिफनी का कहना है कि जैसे ही आपकी सैलरी आपके अकाउंट में आए, वैसे ही आपकी सेविंग्स, आपके इन्वेस्टमेंट्स और आपके लोन की किस्तें अपने आप कट जानी चाहिए। जब पैसा आपकी आंखों के सामने ही नहीं रहेगा, तो आप उसे खर्च करने के सपने भी नहीं बुन पाएंगे। जरा सोचिए, हमारे देश में लोग हर महीने बिल भरने की आखिरी तारीख भूल जाते हैं और फिर पेनल्टी भरते घूमते हैं। यह वैसी ही बात हुई कि आप खुद अपने हाथों से अपने ही पैसे को आग लगा रहे हैं और फिर रो रहे हैं कि जेब खाली है।
ऑटोमेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके और आपके पैसों के बीच के इमोशंस को खत्म कर देता है। जब आपकी मर्जी के बिना पैसा सही जगह पर चला जाता है, तो आप अनजाने में ही सही, लेकिन अमीर बनने की राह पर चल पड़ते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे सुबह उठकर बिना सोचे-समझे ब्रश करना। आपको उसके लिए कोई मोटिवेशनल वीडियो नहीं देखना पड़ता क्योंकि वह आपकी आदत बन चुका है। अपने पैसों के साथ भी आपको यही करना होगा। कर्ज से मुक्ति पाने और वेल्थ क्रिएट करने का इससे आसान और कोई रास्ता इस दुनिया में नहीं बना है।
जब आप इन तीनों लेसन्स को अपनी लाइफ में एक साथ जोड़ देते हैं, तो आपकी लाइफ का पूरा फाइनेंशियल ड्रामा हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। आप सिर्फ पैसे कमाते नहीं हैं, बल्कि आप उस पैसे के असली मालिक बन जाते हैं।
मेरे प्यारे दोस्तों, जिंदगी आपकी है और इसे संभालना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। हर महीने खाली हाथ बैठकर अपनी किस्मत का रोना रोने से बेहतर है कि आज ही उठकर अपने पैसों का कंट्रोल अपने हाथ में लिया जाए। यह किताब हमें सिर्फ अमीर बनना नहीं सिखाती, बल्कि हमें मानसिक शांति की तरफ ले जाती है। जरा ठंडे दिमाग से सोचिए कि आप कब तक इस डर में जीते रहेंगे। आज ही कमेंट बॉक्स में लिखकर मुझे बताइए कि इन तीनों में से कौन सा लेसन आप आज से ही अपनी लाइफ में लागू करने वाले हैं। अगर आप सच में अपनी लाइफ बदलना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए जो हर महीने के आखिर में आपसे उधार मांगते हैं।
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