क्या आपको अभी भी लगता है कि आपकी ९ से ५ की घिसी पिटी नौकरी आपको लाइफ में बहुत आगे ले जाएगी? अगर हाँ तो मुबारक हो आप एक बड़े धोखे में जी रहे हैं। पूरी दुनिया बदल रही है और आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चलकर अपनी लाइफ बर्बाद कर रहे हैं। बिना गिग माइंडसेट के आप सिर्फ एक रोबोट बनकर रह जाएंगे जिसके पास न समय होगा और न ही असली पैसा।
आज हम पॉल एस्टेस की बुक गिग माइंडसेट से वो खास तरीके सीखेंगे जो आपके काम करने के नजरिए को पूरी तरह बदल देंगे। ये ३ लेसन आपको एवरेज से एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनाने की ताकत रखते हैं। चलिए इस सफर की शुरुआत करते हैं।
लेसन १ : डेलिगेशन की कला: खुद को सुपरमैन समझना बंद करें
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें लगता है कि ऑफिस की मेल का रिप्लाई करने से लेकर घर का किराना लाने तक सारा काम अगर वो खुद नहीं करेंगे तो दुनिया रुक जाएगी? अगर आपका जवाब हाँ है तो यकीन मानिए आप तरक्की की रेस में सबसे पीछे खड़े हैं। पॉल एस्टेस कहते हैं कि आज के दौर में सबसे बड़ी बेवकूफी हर काम खुद करना है। लोग अक्सर अपनी १००० रुपये प्रति घंटे की वैल्यू को भूलकर १०० रुपये वाले काम में पूरा दिन खराब कर देते हैं। सोचिए अगर आप अपनी स्किल्स पर ध्यान देने के बजाय फाइलों को रीनेम करने या ईमेल सॉर्ट करने में ३ घंटे लगा रहे हैं तो आप खुद को ही लूट रहे हैं।
आज का जमाना डेलिगेशन का है। डेलिगेशन का मतलब काम चोरी नहीं बल्कि स्मार्ट वर्क है। गिग इकॉनमी ने हमें यह पावर दी है कि हम दुनिया के किसी भी कोने से किसी एक्सपर्ट को अपना छोटा मोटा काम सौंप सकें। मान लीजिए आपको एक प्रेजेंटेशन बनानी है। अब आप खुद बैठकर घंटों पावरपॉइंट के रंगों से खेल सकते हैं या फिर किसी फ्रीलांसर को कुछ पैसे देकर वो काम करवा सकते हैं और उस बचे हुए समय में अपनी अगली बड़ी डील क्रैक कर सकते हैं।
हंसी तो तब आती है जब लोग ५० रुपये बचाने के चक्कर में ५०० रुपये का पेट्रोल और ३ घंटे का समय बर्बाद कर देते हैं। इसे कहते हैं गरीबी वाला माइंडसेट। गिग माइंडसेट वाला इंसान जानता है कि समय ही असली पैसा है। वह उन कामों की लिस्ट बनाता है जो उसे पसंद नहीं हैं या जिनमें वह एक्सपर्ट नहीं है। फिर वह उन कामों को आउटसोर्स कर देता है।
मान लीजिए राहुल एक सॉफ्टवेयर डेवलपर है जिसकी सैलरी काफी अच्छी है। लेकिन राहुल भाई को लगता है कि घर की पेंटिंग भी वो खुद ही करेंगे क्योंकि बाहर वाला ज्यादा पैसे लेगा। अब राहुल भाई हफ्ते भर ब्रश लेकर दीवारों से कुश्ती लड़ रहे हैं। नतीजा क्या हुआ? ऑफिस का जरूरी प्रोजेक्ट लेट हो गया और बॉस से डांट पड़ी वो अलग। अगर राहुल ने किसी प्रोफेशनल को बुलाया होता तो काम भी बढ़िया होता और वो अपने करियर पर फोकस कर पाता।
सच्चाई यही है कि जो इंसान डेलिगेशन नहीं सीखता वह कभी लीडर नहीं बन पाता। वह बस एक थका हुआ एम्प्लॉई बनकर रह जाता है जो हमेशा बिजी होने का नाटक करता है। अगर आपको लाइफ में बड़े मुकाम हासिल करने हैं तो आपको यह समझना होगा कि हर काम के लिए आप ही इकलौते मसीहा नहीं हैं। दूसरों पर भरोसा करना और उन्हें काम सौंपना ही आपको फ्रीडम दिलाएगा। इस फ्रीडम का इस्तेमाल नई चीजें सीखने में करें न कि फालतू के कामों में उलझे रहने में।
लेसन २ : स्किल ओवर जॉब सिक्योरिटी: अपनी कुर्सी से प्यार करना बंद करें
क्या आप भी उस सुहाने सपने में खोए हुए हैं कि आपकी कंपनी आपको रिटायरमेंट तक पालती रहेगी? अगर हाँ तो जाग जाइए क्योंकि वो जमाना अब इतिहास बन चुका है। आजकल जॉब सिक्योरिटी जैसी कोई चीज नहीं होती। आज आप कंपनी के स्टार परफॉर्मर हो सकते हैं और कल शायद आपके डेस्क पर पिंक स्लिप रखी हो। पॉल एस्टेस कहते हैं कि असली सिक्योरिटी आपकी जॉब में नहीं बल्कि आपकी स्किल्स में है। जो इंसान हर दिन कुछ नया नहीं सीख रहा है वह धीरे-धीरे मार्केट से गायब हो रहा है।
गिग माइंडसेट का मतलब है हमेशा एक स्टूडेंट बने रहना। सोचिए अगर आप आज भी वही काम कर रहे हैं जो आपने ५ साल पहले सीखा था तो आप खुद को अपग्रेड नहीं बल्कि डिग्रेड कर रहे हैं। दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि एआई और नई टेक्नोलॉजीज पुराने कामों को निगल रही हैं। ऐसे में अगर आप अपनी एक कुर्सी को पकड़कर बैठे रहेंगे तो जब वो कुर्सी हटेगी तो आप सीधे जमीन पर गिरेंगे। आपको अपनी स्किल्स का एक ऐसा पोर्टफोलियो बनाना होगा कि अगर एक रास्ता बंद हो तो दस और रास्ते खुल जाएं।
लोग अपनी शादी के एल्बम पर घंटों बर्बाद कर देते हैं लेकिन अपनी प्रोफाइल या रिज्यूमे को अपडेट करने में उन्हें आलस आता है। उन्हें लगता है कि एक बार डिग्री मिल गई तो अब पूरी उम्र बस मजे करने हैं। असलियत में मार्केट को आपकी पुरानी डिग्री से कोई मतलब नहीं है। मार्केट सिर्फ यह देखता है कि आप आज उसकी कौन सी प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हैं। अगर आपके पास प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स हैं तो आप कभी बेरोजगार नहीं रहेंगे।
हमारे शर्मा जी पिछले १५ साल से एक ही कंपनी में क्लर्क थे। उन्हें लगता था कि वो कंपनी के पिलर हैं। लेकिन जैसे ही कंपनी ने नया सॉफ्टवेयर अपनाया शर्मा जी के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने सीखने के बजाय शिकायत करना शुरू कर दिया। नतीजा? कंपनी ने उन्हें विदाई दे दी। वहीं दूसरी तरफ युवा अमित ने जॉब के साथ-साथ फ्रीलांसिंग सीखी और डेटा एनालिसिस में महारत हासिल की। जब मंदी आई और उसकी कंपनी बंद हुई तो अमित को एक दिन भी खाली नहीं बैठना पड़ा क्योंकि उसके पास ऐसी स्किल थी जिसकी हर जगह डिमांड थी।
इसलिए खुद को एक एम्प्लॉई के बजाय एक ब्रांड की तरह देखें। अपनी स्किल्स को धार देते रहें। छोटे-छोटे साइड प्रोजेक्ट्स हाथ में लें ताकि आप अलग-अलग टूल्स और प्लेटफॉर्म्स से वाकिफ रहें। गिग इकॉनमी आपको अपनी काबिलियत आजमाने के हजारों मौके देती है। अगर आप सिर्फ एक सैलरी चेक के भरोसे जी रहे हैं तो आप एक बहुत बड़ा रिस्क ले रहे हैं। अपनी स्किल्स को इतना पावरफुल बनाइए कि काम आपके पास खुद चलकर आए न कि आपको काम की भीख मांगनी पड़े।
लेसन ३ : नेटवर्क ही नेटवर्थ है: अकेले रेस जीतना मुमकिन नहीं है
अगर आपको लगता है कि आप अपने कमरे के कोने में छुपकर मेहनत करेंगे और एक दिन अचानक सफलता आपके कदम चूमेगी तो शायद आप किसी फिल्मी दुनिया में जी रहे हैं। पॉल एस्टेस साफ कहते हैं कि आज के डिजिटल युग में आपकी असली ताकत वो लोग हैं जिन्हें आप जानते हैं और जो आपके काम को जानते हैं। गिग माइंडसेट वाला इंसान कभी भी 'लोन वुल्फ' बनने की कोशिश नहीं करता। वह जानता है कि एक मजबूत नेटवर्क का मतलब है अपॉर्चुनिटीज की बाढ़। जब आपके पास सही लोगों का साथ होता है तो आपको काम ढूंढने के लिए धक्के नहीं खाने पड़ते बल्कि काम आपके पास खुद चलकर आता है।
नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं है कि आप लोगों को जबरदस्ती फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजें या किसी इवेंट में जाकर जबरदस्ती के हाथ मिलाएं। असली नेटवर्किंग का मतलब है वैल्यू देना। जब आप दूसरों की मदद करते हैं या अपनी नॉलेज शेयर करते हैं तो लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। डिजिटल दुनिया में आपका नेटवर्क ही आपका सेफ्टी नेट है। अगर आज आपकी नौकरी चली जाए तो क्या आपके पास ऐसे ५ लोग हैं जिन्हें आप फोन करें और वो कहें कि भाई मेरे पास तुम्हारे लिए एक प्रोजेक्ट है? अगर नहीं तो आपने अब तक सिर्फ वक्त काटा है करियर नहीं बनाया।
लोग नेटफ्लिक्स पर सीरीज देखने के लिए तो पूरी रात जाग सकते हैं लेकिन लिंकडइन पर किसी प्रोफेशनल से बात करने में उन्हें शर्म आती है। उन्हें लगता है कि लोग क्या सोचेंगे। भाई लोग वैसे भी आपके बारे में कुछ अच्छा नहीं सोच रहे तो कम से कम अपने फायदे की बात तो कर लीजिए। गिग इकॉनमी में आपकी विजिबिलिटी ही आपकी एबिलिटी है। अगर आप दिखेंगे नहीं तो आप बिकेंगे नहीं।
मान लीजिए सतीश एक बेहतरीन ग्राफिक डिजाइनर है लेकिन वह किसी से बात नहीं करता और अपना काम किसी को नहीं दिखाता। दूसरी तरफ रीता है जो शायद सतीश जितनी अच्छी डिजाइनर नहीं है लेकिन वह सोशल मीडिया पर एक्टिव है और दूसरे डिजाइनर्स के साथ जुड़ी हुई है। जब किसी बड़ी कंपनी को एक अर्जेंट प्रोजेक्ट के लिए डिजाइनर चाहिए होगा तो उन्हें सतीश का ख्याल कभी नहीं आएगा क्योंकि वो तो किसी के रडार पर ही नहीं है। वो सीधा रीता को कांटेक्ट करेंगे। सतीश भाई घर बैठकर अपनी किस्मत को कोसते रहेंगे जबकि रीता पैसे और नाम दोनों कमा लेगी।
इसलिए अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलिए। उन लोगों से जुड़िये जो आपसे ज्यादा स्मार्ट हैं। कम्युनिटीज का हिस्सा बनिए और अपनी स्किल्स का प्रदर्शन कीजिए। गिग माइंडसेट आपको सिखाता है कि आप अकेले एक छोटी नाव की तरह हैं लेकिन एक अच्छे नेटवर्क के साथ आप एक विशाल जहाज बन जाते हैं जिसे कोई भी मंदी या परेशानी डुबो नहीं सकती। याद रखिए आपकी नेटवर्थ उतनी ही होगी जितनी मजबूती से आप अपने नेटवर्क को संभालेंगे।
तो दोस्तों, यह थे गिग माइंडसेट के वो ३ बड़े लेसन जो आपकी जिंदगी और करियर को फर्श से अर्श पर ले जा सकते हैं। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चलकर अपनी सुरक्षा की झूठी उम्मीद में जीना चाहते हैं या फिर आप इस नई लहर पर सवार होकर अपने समय और करियर के खुद मालिक बनना चाहते हैं? याद रखिए वक्त किसी का इंतजार नहीं करता और बदलाव ही एकमात्र सच है।
आज ही अपने अंदर के उस डर को खत्म कीजिए जो आपको नई स्किल्स सीखने या दूसरों को काम सौंपने से रोकता है। एक छोटा कदम उठाइए। चाहे वो अपनी किसी स्किल को निखारना हो या किसी प्रोफेशनल से हाथ मिलाना। कमेंट में हमें जरूर बताएं कि आप इन ३ लेसन्स में से सबसे पहले किस पर काम शुरू करने वाले हैं? इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपनी नौकरी से परेशान हैं और कुछ बड़ा करना चाहते हैं। आपकी एक शेयरिंग किसी का करियर बचा सकती है।
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