अगर आपको लगता है कि रातों रात सक्सेस मिल जाएगी तो मुबारक हो आप अपनी जिंदगी के सबसे कीमती साल एक झूठे सपने के पीछे बर्बाद कर रहे हैं। बिना कंसिस्टेंसी के आप सिर्फ एक फेलियर की तरह गोल गोल घूमते रहेंगे और दुनिया आपका मजाक उड़ाएगी।
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बड़े बड़े सपने तो देखते हैं पर उन्हें पूरा करने का सिस्टम नहीं जानते। टॉमी बेकर की बुक द 1% रूल हमें सिखाती है कि कैसे छोटे बदलाव लाइफ में बड़ा धमाका करते हैं। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : द 1% रूल का असली जादू
क्या आपको भी लगता है कि सक्सेस पाने के लिए किसी बड़े चमत्कार की जरूरत है। अगर हाँ तो आप शायद उसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ लोग सोचते हैं कि जिम जाते ही पहले दिन बॉडी बन जाएगी। असलियत तो यह है कि दुनिया के सबसे कामयाब लोग किसी रॉकेट साइंस का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि वे सिर्फ एक परसेंट रूल को फॉलो करते हैं। टॉमी बेकर कहते हैं कि अगर आप हर दिन खुद को कल से सिर्फ एक परसेंट बेहतर बनाने का लक्ष्य रखते हैं तो साल के अंत तक आप पहले से सैंतीस गुना ज्यादा बेहतर इंसान बन जाएंगे। यह सुनने में शायद बहुत छोटा लगे पर यही वो गैप है जो एक विनर और एक लूजर के बीच की खाई को भरता है।
कल्पना कीजिए कि आप एक नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या अपनी हेल्थ सुधारना चाहते हैं। अब अगर आप पहले ही दिन से चौबीस घंटे काम करने का या दस किलोमीटर भागने का प्लान बनाएंगे तो आपका दिमाग दो दिन में ही सरेंडर कर देगा। वह आपसे कहेगा कि भाई यह अपने बस की बात नहीं है चलो सो जाते हैं। लेकिन अगर आप खुद से कहें कि मुझे बस आज अपनी स्किल्स में एक परसेंट सुधार करना है या बस पांच मिनट एक्स्ट्रा वर्कआउट करना है तो आपका दिमाग इसे आसानी से मान लेगा। यह एक तरह का माइंड गेम है जहाँ आप अपनी सुस्ती को बेवकूफ बनाते हैं।
हमारे आसपास ऐसे बहुत से नमूने मिल जाएंगे जो हर न्यू ईयर पर जिम की मेंबरशिप लेते हैं और दो हफ्ते बाद सोफे पर चिपके मिलते हैं। उनका प्रॉब्लम यह नहीं है कि उनमें टैलेंट की कमी है बल्कि उनका प्रॉब्लम यह है कि वे पहले ही दिन से सुपरमैन बनना चाहते हैं। वे उस एक परसेंट की ताकत को नहीं समझते जो धीरे धीरे उनके करैक्टर को बिल्ड करती है। जब आप हर दिन छोटे सुधार करते हैं तो आपके अंदर एक ऐसा कॉन्फिडेंस पैदा होता है जो बड़े बड़े मोटिवेशनल वीडियो देखकर भी नहीं आता।
मान लीजिए आप एक ब्लॉगर बनना चाहते हैं। अब अगर आप रोज यह सोचकर दुखी होंगे कि मेरे पास लाखों व्यूज क्यों नहीं आ रहे तो आप एक महीने में लिखना छोड़ देंगे। लेकिन अगर आपका फोकस सिर्फ इस बात पर है कि आज का आर्टिकल कल वाले से एक परसेंट बेहतर कैसे हो सकता है तो आप धीरे धीरे मास्टरी हासिल कर लेंगे। आपको पता भी नहीं चलेगा और आपकी राइटिंग स्टाइल इतनी जबरदस्त हो जाएगी कि लोग आपकी तारीफ करते नहीं थकेंगे।
सक्सेस कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप एक झटके में पकड़ सकें। यह तो उन छोटे छोटे निर्णयों का नतीजा है जो आप हर रोज लेते हैं। जब आप सुबह अलार्म बजने पर उसे स्नूज करने के बजाय बिस्तर छोड़ देते हैं तो आप एक परसेंट जीत जाते हैं। जब आप फालतू की रील्स देखने के बजाय एक पेज बुक पढ़ लेते हैं तो आप एक परसेंट आगे बढ़ जाते हैं। यही छोटी छोटी जीतें जुड़कर एक दिन पहाड़ जैसी सफलता खड़ी कर देती हैं। तो क्या आप तैयार हैं उस एक परसेंट के लिए जो आपकी लाइफ को पूरी तरह बदल देगा। याद रखिए कि पहाड़ चढ़ने वाला हर इंसान पहले एक छोटा कदम ही बढ़ाता है।
लेसन २ : प्रोसेस से प्यार करना सीखें
ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए दुखी रहते हैं क्योंकि उनकी नजर हमेशा ट्रॉफी पर होती है। वे उस रास्ते का मजा ही नहीं लेते जो उन्हें उस ट्रॉफी तक ले जाता है। टॉमी बेकर कहते हैं कि अगर आप सिर्फ मंजिल के बारे में सोचते रहेंगे तो आप रास्ते में आने वाली चुनौतियों से चिढ़ने लगेंगे। असली खिलाड़ी वो नहीं है जो सिर्फ गोल्ड मेडल के सपने देखता है बल्कि वो है जिसे रोज सुबह पसीना बहाने से प्यार है। जब आप रिजल्ट के बजाय प्रोसेस को गले लगा लेते हैं तो आपकी एंग्जायटी अपने आप गायब हो जाती है।
आजकल के सोशल मीडिया के जमाने में सबको इंस्टेंट नूडल्स जैसी सक्सेस चाहिए। लोगों को लगता है कि एक वीडियो डालेंगे और कल सुबह तक वे सेलिब्रिटी बन जाएंगे। जब ऐसा नहीं होता तो वे भगवान को कोसते हैं या अपनी किस्मत का रोना रोते हैं। वे भूल जाते हैं कि एक बरगद का पेड़ खड़ा होने में सालों का समय लगता है। अगर आप सिर्फ फल मिलने के इंतजार में बैठे रहेंगे तो आप उस माली की तरह बन जाएंगे जो हर दो घंटे में बीज को जमीन से बाहर निकाल कर देखता है कि वो उगा या नहीं।
प्रोसेस से प्यार करने का मतलब है कि आपको अपने रोज के काम में एक अलग तरह का सुकून मिलने लगे। मान लीजिए आप वजन कम करना चाहते हैं। अगर आप रोज वजन चेक करेंगे तो आप फ्रस्ट्रेट हो जाएंगे। लेकिन अगर आपको सुबह की ताजी हवा और वर्कआउट के बाद होने वाले दर्द से प्यार हो गया तो समझ लीजिए आप जीत गए। अब आपको कोई रोक नहीं सकता क्योंकि अब आपका मोटिवेशन बाहर की किसी चीज पर निर्भर नहीं है। आप खुद अपने आप में एक पावर हाउस बन चुके हैं।
बहुत से लोग सोचते हैं कि जब उनके पास करोड़ों रुपये होंगे तब वे खुश होंगे। वे आज अपनी जिंदगी को नर्क बनाकर रखते हैं ताकि कल स्वर्ग देख सकें। पर सच तो यह है कि जिसे आज के छोटे काम में खुशी नहीं मिलती उसे करोड़ों रुपये मिलने के बाद भी सिर्फ नया तनाव ही मिलेगा। प्रोसेस से प्यार करना आपको वर्तमान में जीना सिखाता है। यह आपको सिखाता है कि कैसे हर मुश्किल टास्क को एक गेम की तरह एन्जॉय करना है।
जब आप प्रोसेस पर फोकस करते हैं तो आपकी क्वालिटी अपने आप बढ़ जाती है। आप काम को निपटाने के लिए नहीं बल्कि उसे बेहतर बनाने के लिए करते हैं। यही वो सीक्रेट है जो प्रोफेशनल और एमेच्योर के बीच का अंतर बताता है। एक एमेच्योर सिर्फ फिनिश लाइन देखता है जबकि एक प्रोफेशनल अपनी हर चाल को परफेक्ट बनाने में लगा रहता है। जब आपकी हर छोटी एक्टिविटी में परफेक्शन आने लगता है तो रिजल्ट्स को मजबूर होकर आपके पास आना ही पड़ता है।
तो अगली बार जब आपको लगे कि आपका काम बोरिंग है या आपको रिजल्ट नहीं मिल रहे तो खुद से एक सवाल पूछिए। क्या मैं आज के इस प्रोसेस का आनंद ले रहा हूँ। अगर जवाब नहीं है तो अपनी सोच बदलिए। रिजल्ट्स आपके कंट्रोल में नहीं हैं पर आपका एफर्ट और आपका नजरिया पूरी तरह आपके हाथ में है। जब आप प्रोसेस के साथ इश्क करने लगते हैं तो सक्सेस एक बाय प्रोडक्ट बन जाती है। आप सिर्फ मंजिल तक नहीं पहुँचते बल्कि आप उस सफर के दौरान एक बेहतरीन इंसान भी बन जाते हैं।
लेसन ३ : कंसिस्टेंसी का असली पावर
क्या आपने कभी सोचा है कि पानी की एक छोटी सी बूंद पत्थर में छेद कैसे कर देती है। क्या उस बूंद में बहुत ज्यादा ताकत होती है। बिल्कुल नहीं। पत्थर में छेद उसकी ताकत से नहीं बल्कि उसके बार बार गिरने की जिद से होता है। इसी को कंसिस्टेंसी कहते हैं। टॉमी बेकर समझाते हैं कि टैलेंटेड होना अच्छी बात है पर कंसिस्टेंट होना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है। दुनिया ऐसे टैलेंटेड लोगों से भरी पड़ी है जो अपनी सुस्ती की वजह से आज गुमनामी में जी रहे हैं। लेकिन एक औसत इंसान भी अगर अपनी जिद पर अड़ जाए तो वो इतिहास रच सकता है।
ज्यादातर लोग जोश जोश में काम शुरू तो कर देते हैं पर जैसे ही थोडा सा रेजिस्टेंस आता है वे हाथ खड़े कर देते हैं। उन्हें लगता है कि अगर आज रिजल्ट नहीं मिला तो कल भी नहीं मिलेगा। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे कोई इंसान कुआं खोदना शुरू करे और दस फीट बाद पानी न मिलने पर दूसरी जगह खुदाई शुरू कर दे। ऐसे लोग पूरी जिंदगी सिर्फ गड्ढे ही खोदते रह जाते हैं प्यास बुझाने के लिए पानी उन्हें कभी नसीब नहीं होता। कंसिस्टेंसी का मतलब है कि चाहे धूप हो या छांव आपका काम रुकना नहीं चाहिए।
हमारे समाज में लोग अक्सर दूसरों की कामयाबी को देखकर कहते हैं कि इसकी तो किस्मत चमक गई। पर कोई उस इंसान की उन रातों को नहीं देखता जब वो अकेले में बिना किसी वाहवाही के काम कर रहा था। जब आप कंसिस्टेंट होते हैं तो आप यूनिवर्स को यह मैसेज देते हैं कि आप अपनी सक्सेस के लिए सीरियस हैं। यह एक कंपाउंडिंग इफेक्ट की तरह काम करता है। शुरुआत में बदलाव शायद नजर भी न आए पर एक वक्त ऐसा आता है जब आपकी प्रोग्रेस रॉकेट की तरह ऊपर भागती है।
सोचिए अगर आप रोज सिर्फ दस पेज किसी अच्छी बुक के पढ़ते हैं। एक दिन में शायद कुछ न बदले। एक हफ्ते में भी आप वैसे ही रहेंगे। पर एक साल बाद आप तीन हजार छह सौ पचास पेज पढ़ चुके होंगे। आपकी सोच और आपकी नॉलेज का लेवल उन लोगों से कोसों आगे होगा जो सिर्फ सोशल मीडिया पर टाइम पास कर रहे थे। यह है कंसिस्टेंसी का असली जादू जो धीरे धीरे आपकी किस्मत की लकीरें बदल देता है। इसमें कोई शॉर्टकट नहीं है और न ही इसकी कोई एक्सपायरी डेट है।
अंत में बस इतना याद रखिए कि बड़े सपने देखना आसान है पर उन्हें सच करने के लिए हर दिन एक ही काम को बार बार करना मुश्किल है। यही वो मोमेंट है जहाँ ९९ परसेंट लोग हार मान लेते हैं। अगर आप उस बचे हुए १ परसेंट क्लब में शामिल होना चाहते हैं तो आपको अपनी आदतों का गुलाम बनने के बजाय उन्हें अपना हथियार बनाना होगा। अपनी जर्नी को आज से ही शुरू कीजिए और हर दिन उस एक परसेंट सुधार की तरफ बढ़िए। आपकी मेहनत का हर कतरा एक दिन समंदर बनकर आपकी कामयाबी की कहानी लिखेगा।
अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप कल की तरह आज भी बहाने बनाएंगे या फिर उस एक परसेंट रूल को अपनाकर अपनी लाइफ को ट्रांसफॉर्म करेंगे। उठिए और आज का पहला छोटा कदम उठाइए क्योंकि बड़े सफर की शुरुआत हमेशा एक छोटे कदम से ही होती है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#PersonalGrowth #SuccessMindset #The1PercentRule #BookSummary #MotivationDaily
_