क्या आप अब भी गधों की रेस में घोड़े ढूंढ रहे हैं। अगर आपकी टीम सिर्फ आपके इशारों पर नाचने वाले फॉलोअर्स से भरी है तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी और करियर की कब्र खुद खोद रहे हैं। असली लीडर्स को अट्रैक्ट करना आपके बस की बात नहीं क्योंकि आप खुद अभी तक एक एवरेज बॉस बने बैठे हैं।
जॉन मैक्सवेल की यह बुक हमें सिखाती है कि असली सफलता अकेले भागने में नहीं बल्कि अपनी टीम में पावरफुल लीडर्स को पैदा करने में है। चलिए आज समझते हैं वे तीन कमाल के लेसन जो आपकी लीडरशिप की पूरी कहानी बदल देंगे और आपको एक असली गेम चेंजर बनाएंगे।
लेसन १ : लीडर्स को अट्रैक्ट करना - चुंबक बनिए कबाड़ नहीं
मार्केट में हर कोई कहता है कि भाई अच्छी टीम नहीं मिलती। अच्छे लोग टिकते नहीं हैं। पर क्या आपने कभी आईने में खुद को देखा है। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि आप वही अट्रैक्ट करते हैं जो आप खुद होते हैं। अगर आप खुद एक एवरेज और डरे हुए मैनेजर हैं तो आपके पास चील जैसे विजन वाले लीडर्स कभी नहीं आएंगे। वे आपके पास आकर करेंगे भी क्या। उन्हें तो उड़ने के लिए आसमान चाहिए और आप उन्हें पिंजरे में बंद करके डेली रिपोर्ट मांग रहे हैं।
सोचिए एक ऐसी शादी की जहां दूल्हा खुद कंफ्यूज है कि उसे शादी करनी भी है या नहीं। क्या वहां बाराती जोश में नाचेंगे। बिल्कुल नहीं। वैसे ही अगर आपके विजन में क्लैरिटी नहीं है तो टैलेंटेड लोग आपके ऑफिस का दरवाजा तक नहीं खटखटाएंगे। टैलेंटेड लोग हमेशा ऐसे इंसान को ढूंढते हैं जो उनसे ज्यादा स्मार्ट हो या कम से कम उन्हें ग्रो करने का मौका दे। अगर आप एक १० नंबर के लीडर बनना चाहते हैं तो आपको पहले खुद को ७ या ८ नंबर से ऊपर ले जाना होगा।
अक्सर लोग क्या करते हैं। वे खुद को बहुत बड़ा तीस मार खां समझते हैं और चाहते हैं कि दुनिया के बेस्ट लोग उनके नीचे काम करें। यह तो वही बात हुई कि आप गली की क्रिकेट टीम के कैप्टन हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि विराट कोहली आपकी टीम से खेले। भाई साहब कोहली साहब आपके पास नेट प्रैक्टिस के लिए भी नहीं आएंगे। टैलेंट हमेशा टैलेंट को पहचानता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम में शेर हों तो आपको खुद को सर्कस का रिंग मास्टर नहीं बल्कि जंगल का राजा बनाना होगा।
कई लोग अपने ऑफिस में ऐसे रूल्स बना देते हैं जैसे कोई जेल हो। फिर वे रोते हैं कि कोई क्रिएटिव बंदा हमारे साथ क्यों नहीं टिकता। अरे भाई क्रिएटिव बंदे को आजादी चाहिए उसे आपकी ९ से ६ की हाजिरी वाली चाकरी में कोई इंटरेस्ट नहीं है। अगर आप सिर्फ हुक्म चलाना जानते हैं तो आपके पास सिर्फ जी हुजूर कहने वाले चमचे आएंगे लीडर्स नहीं। और याद रखिए चमचे सिर्फ थाली चाटते हैं वे बिजनेस का साम्राज्य खड़ा नहीं करते।
लीडर्स को अट्रैक्ट करने के लिए आपको अपनी इमेज बदलनी होगी। आपको एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां लोग फेल होने से न डरें। जहां नए आइडियाज पर तालियां बजें न कि उनका मजाक उड़े। जब आप खुद एक हाई परफॉर्मर बनते हैं और दूसरों की इज्जत करते हैं तो मार्केट में आपकी एक अलग ही धमक होती है। तब आपको लोगों के पीछे नहीं भागना पड़ता बल्कि लोग लाइन लगाकर आपके साथ काम करना चाहते हैं।
यह पहला कदम है। एक बार जब आपके पास सही लोग आ जाते हैं तब असली खेल शुरू होता है उन्हें तराशने का। क्योंकि सिर्फ हीरे को तिजोरी में रखने से उसकी कीमत नहीं बढ़ती उसे तराशना पड़ता है ताकि वह दुनिया को अपनी चमक दिखा सके।
लेसन २ : लीडर्स को डेवलप करना - माली बनिए, मूर्तिकार नहीं
जब आपको कुछ अच्छे लोग मिल जाते हैं, तो असली सिरदर्द शुरू होता है। ज़्यादातर लोग यहाँ गलती यह करते हैं कि वे लोगों को कंट्रोल करने लगते हैं। वे सोचते हैं कि अगर मैंने इसे सब सिखा दिया, तो यह मेरी कुर्सी तो नहीं छीन लेगा। यह डर वैसा ही है जैसे कोई पिता अपने बेटे को चलना न सिखाए कि कहीं वह उससे तेज़ न दौड़ने लगे। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि एक सच्चा लीडर वह है जो लोगों को अपनी परछाईं नहीं, बल्कि अपनी रोशनी बनाना सिखाता है।
लोगों को डेवलप करने का मतलब यह नहीं है कि आप उन्हें हर छोटी बात पर टोकें। असल में आपको उन्हें वह खाद और पानी देना है जिससे वे खुद बढ़ सकें। सोचिए एक ऐसे जिम ट्रेनर के बारे में जो खुद ही सारे डंबल उठाता रहे और आपको सिर्फ खड़े होकर देखने को कहे। क्या आपकी बॉडी बनेगी। बिल्कुल नहीं। आपको पसीना बहाना पड़ेगा। वैसे ही एक लीडर के तौर पर आपको अपनी टीम को मुश्किल काम सौंपने होंगे। उन्हें रिस्क लेने दीजिए। जब वे गिरेंगे, तभी तो उन्हें संभलना आएगा।
यहाँ सबसे बड़ी समस्या है 'माइक्रो मैनेजमेंट'। कुछ बॉस को लगता है कि अगर उन्होंने ईमेल का फॉन्ट चेक नहीं किया, तो पूरी कंपनी डूब जाएगी। यह तो वही बात हुई कि आप अपनी कार ड्राइवर को दे रहे हैं, लेकिन स्टीयरिंग व्हील भी खुद ही पकड़ रखा है। ऐसे में एक्सीडेंट तो पक्का है। टैलेंटेड लोगों को जब आप स्पेस नहीं देते, तो वे धीरे-धीरे रोबोट बन जाते हैं। वे अपना दिमाग चलाना बंद कर देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि अंत में तो वही होगा जो 'साहब' बोलेंगे।
कई कंपनीज़ ट्रेनिंग के नाम पर बोरिंग पीपीटी दिखाती हैं और सोचती हैं कि उनके कर्मचारी अगले दिन वारेन बफेट बनकर आएंगे। असली डेवलपमेंट ऑफिस के एसी कमरों में नहीं, बल्कि मुश्किल हालातों में होता है। आपको अपने पोटेंशियल लीडर्स को ऐसी मीटिंग्स में ले जाना चाहिए जहाँ बड़े फैसले होते हैं। उन्हें बोलने का मौका दीजिए। उनकी बात सुनिए, भले ही वह गलत हो। एक लीडर को तराशने का मतलब है उसे यह महसूस कराना कि उसकी राय की कीमत है।
ज्यादातर लोग लोगों को 'यूज' करते हैं ताकि उनका काम हो सके। लेकिन एक ग्रेट लीडर लोगों को 'बिल्ड' करता है ताकि वे खुद अपना काम संभाल सकें। इसमें समय लगता है, मेहनत लगती है और सबसे ज्यादा पेशेंस लगता है। आपको एक कोच की तरह व्यवहार करना होगा। कोच मैदान पर खुद गोल नहीं करता, वह बाउंड्री के बाहर खड़ा होकर अपने खिलाड़ियों को बेस्ट परफॉर्म करने के लिए तैयार करता है।
जब आप लोगों में इन्वेस्ट करते हैं, तो वे सिर्फ आपके एम्प्लोई नहीं रह जाते, वे आपके पार्टनर बन जाते हैं। उनका सक्सेस आपका सक्सेस बन जाता है। और यही वह पॉइंट है जहाँ आपकी टीम एक साधारण ग्रुप से बदलकर एक पावरहाउस बन जाती है। लेकिन क्या सिर्फ उन्हें तैयार करना काफी है। बिल्कुल नहीं। असली जादू तो तब होता है जब वे आगे और लोगों को तैयार करना सीख जाते हैं।
लेसन ३ : लीडर्स को मल्टीप्लाई करना - असली लीडरशिप की चेन रिएक्शन
ज़्यादातर लोग लीडरशिप को एक जोड़ (Addition) की तरह देखते हैं। वे सोचते हैं कि अगर मैं एक और अच्छा बंदा टीम में ले आऊं, तो मेरा काम आसान हो जाएगा। लेकिन जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि असली खिलाड़ी वह है जो 'मल्टीप्लिकेशन' यानी गुणा करना जानता है। इसका मतलब है सिर्फ लीडर बनाना काफी नहीं है, बल्कि आपको ऐसे लीडर्स बनाने होंगे जो खुद आगे जाकर नए लीडर्स पैदा कर सकें।
सोचिए अगर आप एक रेस्टोरेंट के मालिक हैं और आप अपने शेफ को इतना परफेक्ट बना देते हैं कि वह खुद अपनी एक नई ब्रांच खोल सके और वहां नए शेफ तैयार कर सके। अब आपके पास सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि एक पूरा साम्राज्य होगा। लेकिन अगर आप उस शेफ को अपनी किचन तक ही सीमित रखते, तो आप उम्र भर बस नमक-मिर्च ही चेक करते रह जाते। लोग अक्सर डरते हैं कि 'अगर मेरा जूनियर मुझसे बेहतर हो गया तो क्या होगा'। सच तो यह है कि अगर आपका जूनियर आपसे बेहतर नहीं हुआ, तो आप एक फेल लीडर हैं।
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपने बच्चों को साइकिल चलाना सिखाते हैं। शुरू में आप पीछे से पकड़ते हैं, फिर आप धीरे से हाथ छोड़ देते हैं, और एक दिन वह खुद अपने बच्चों को साइकिल चलाना सिखा रहा होता है। इसे कहते हैं जनरेशनल ग्रोथ। बिजनेस में भी यही लॉजिक काम करता है। जब आप लीडर्स को मल्टीप्लाई करते हैं, तो आपकी गैर-मौजूदगी में भी काम उतनी ही रफ़्तार से चलता है।
अजीब बात यह है कि कुछ मैनेजर्स को लगता है कि वे अपनी टीम के लिए 'मसीहा' हैं। वे चाहते हैं कि हर छोटे फैसले के लिए लोग उनके पास आएं ताकि उन्हें अपनी इम्पॉर्टेंस महसूस हो। यह लीडरशिप नहीं, यह ईगो की मसाज है। असली लीडर वह है जो खुद को 'बेकार' (Expendable) बना ले। यानी सिस्टम ऐसा हो कि आपके बिना भी सब कुछ मक्खन की तरह चले। अगर आपके छुट्टी पर जाते ही ऑफिस में हड़कंप मच जाता है, तो समझ लीजिए आपने टीम नहीं, बल्कि बैसाखियां तैयार की हैं।
जरा सोचिए, आप एक ऐसी बस के ड्राइवर हैं जिसके पास स्टीयरिंग तो है पर बाकी सवारी के पास पहिए बदलने के औजार भी हैं। अगर आप थक कर सो भी जाएं, तो बस रुकनी नहीं चाहिए। जब आप लीडर्स को मल्टीप्लाई करते हैं, तो आप अपनी ताकत को हजार गुना बढ़ा लेते हैं। यह एक चेन रिएक्शन है। एक लीडर ने दस को सिखाया, उन दस ने सौ को। यही वह तरीका है जिससे दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां और मूवमेंट्स खड़े हुए हैं।
तो क्या आप तैयार हैं अपनी ईगो को पीछे छोड़कर दूसरों को चमकने का मौका देने के लिए। याद रखिए, आपकी असली वैल्यू इसमें नहीं है कि आपने कितने फॉलोअर्स बनाए, बल्कि इसमें है कि आपने कितने लीडर्स को जन्म दिया। यही लीडरशिप का सबसे बड़ा रिटर्न है।
लीडरशिप कोई पद नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। जॉन मैक्सवेल की यह बातें सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अपनी लाइफ में उतारने के लिए हैं। आज ही अपने आस-पास देखिए, क्या आप लोगों को दबा रहे हैं या उन्हें पंख दे रहे हैं। क्या आप एक ऐसा लीडर बनने के लिए तैयार हैं जिसकी पहचान उसके काम से नहीं, बल्कि उसके द्वारा तैयार किए गए लीडर्स से हो।
कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि आप अपनी टीम के किस एक इंसान को अगले ३ महीनों में लीडर के रूप में देखना चाहते हैं। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो एक टीम लीड कर रहा है या अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहता है। आपकी एक शेयरिंग किसी की पूरी सोच बदल सकती है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#LeadershipGrowth #JohnMaxwell #TeamBuilding #SuccessMindset #IndianEntrepreneurs
_