अगर आपको लगता है कि सिर्फ कड़ी मेहनत से आपका बिजनस रॉकेट बन जाएगा तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। बिना विजन के आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो आँखें बंद करके फेरारी चला रहा है। एक्सीडेंट तो पक्का है बॉस। क्या आप अपनी टीम और पैसा डूबते हुए देखना चाहते हैं।
बिना एक साफ़ विजन के लीडर बनना मतलब अंधेरे में तीर चलाना है। आज हम माइकल हयात की किताब से वो राज सीखेंगे जो आपकी कंपनी और लीडरशिप की दिशा बदल देंगे। चलिए इन 3 लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : विजन कोई सपना नहीं बल्कि एक पक्की स्क्रिप्ट है
ज्यादातर लोग विजन का मतलब समझते हैं कि रात को सोते समय कुछ अच्छा सोच लिया और सुबह उठकर उसे विजन कह दिया। भाई साहब इसे विजन नहीं इसे सिर्फ मुंगेरी लाल के हसीन सपने कहते हैं। माइकल हयात कहते हैं कि अगर आप अपनी कंपनी या अपनी लाइफ के लीडर बनना चाहते हैं तो आपके पास एक विजन स्क्रिप्ट होनी चाहिए। अब आप कहेंगे कि क्या मुझे कोई फिल्म शूट करनी है। हाँ बिल्कुल। आपको अपनी सफलता की फिल्म खुद लिखनी होगी। विजन का मतलब सिर्फ एक छोटा सा स्लोगन नहीं होता जो ऑफिस की दीवार पर धूल खा रहा हो। विजन का मतलब है एक ऐसा डॉक्यूमेंट जो यह बताए कि आने वाले तीन से पांच साल में आपकी टीम कैसी दिखेगी आपका प्रोडक्ट कैसा होगा और आपके कस्टमर आपके बारे में क्या बात करेंगे।
मान लीजिए आप एक नया रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं। एक साधारण मैनेजर सोचेगा कि बस अच्छा खाना खिलाना है और पैसे कमाने हैं। लेकिन एक विजन ड्रिवन लीडर यह सोचेगा कि जब कोई ग्राहक मेरे रेस्टोरेंट में कदम रखेगा तो उसे कैसी खुशबू आएगी। वहां का म्यूजिक कैसा होगा। वेटर्स की स्माइल कितनी चौड़ी होगी। और खाना खाने के बाद वो इंसान अपने दोस्तों को फोन करके क्या तारीफ करेगा। अगर आपके पास यह क्लैरिटी नहीं है तो आप बस एक और ढाबा खोल रहे हैं जहाँ मक्खियाँ ज्यादा और ग्राहक कम होंगे। विजन स्क्रिप्ट आपको वो ताकत देती है कि आप आज के शोर में भी अपनी मंजिल को देख सकें।
बिना स्क्रिप्ट के लीडरशिप वैसी ही है जैसे बिना मैप के जंगल में घूमना। आप बहुत पसीना बहाएंगे बहुत तेज भागेंगे लेकिन अंत में वहीँ खड़े मिलेंगे जहाँ से शुरू किया था। लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उनकी टीम मोटिवेटेड नहीं है। अरे भाई जब आपको खुद नहीं पता कि बस कहाँ जा रही है तो सवारी जोश में कैसे आएगी। आपकी टीम को एक ऐसी कहानी चाहिए जिसमें उन्हें अपना भविष्य चमकता हुआ दिखे। जब आप एक विजन स्क्रिप्ट लिखते हैं तो आप अपनी टीम के दिमाग में एक तस्वीर छाप देते हैं। यह तस्वीर उन्हें सुबह जल्दी उठने और काम पर दिल लगाने के लिए मजबूर कर देती है।
अगर आप अभी भी सोच रहे हैं कि यह सब फालतू की बातें हैं तो याद रखिए कि बिना विजन वाले लीडर इतिहास के पन्नों में नहीं बल्कि कबाड़खाने में मिलते हैं। अपनी विजन स्क्रिप्ट को इतना डिटेल में लिखिए कि पढ़ने वाले को अपनी आंखों के सामने हकीकत दिखने लगे। इसमें आपकी मार्केटिंग सेल्स ऑपरेशंस और कल्चर की साफ तस्वीर होनी चाहिए। जब आपकी स्क्रिप्ट तैयार होगी तभी आप अपनी टीम को उस बड़े मिशन के लिए तैयार कर पाएंगे जिसके बारे में हम अगले लेसन में बात करेंगे।
लेसन २ : अपनी टीम को पैसेंजर नहीं पार्टनर बनाओ
जब आपकी विजन स्क्रिप्ट तैयार हो जाती है तो अगला बड़ा चैलेंज आता है उस विजन को अपनी टीम के दिल में उतारना। माइकल हयात कहते हैं कि एक लीडर अकेले कभी पहाड़ नहीं चढ़ सकता। उसे एक ऐसी फौज चाहिए जो उस विजन को अपना मान ले। लेकिन हमारे यहाँ लीडर्स क्या करते हैं। वो सोचते हैं कि महीने के अंत में सैलरी दे दी तो बस काम हो गया। भाई साहब सैलरी से आप किसी का हाथ खरीद सकते हैं उसका दिल और दिमाग नहीं। अगर आपकी टीम सिर्फ घड़ी देख रही है कि कब छह बजेंगे और कब मैं घर भागूँगा तो समझ लीजिए कि आप एक लीडर नहीं बल्कि सिर्फ एक चौकीदार हैं।
एक विजन ड्रिवन लीडर अपनी टीम को यह महसूस कराता है कि वो किसी बड़े मिशन का हिस्सा हैं। इसे एक मजेदार उदाहरण से समझिए। मान लीजिए दो लोग ईंटें ढो रहे हैं। आप पहले वाले से पूछते हैं कि भाई क्या कर रहे हो। वो गुस्से में कहता है कि दिखता नहीं क्या ईंटें उठा रहा हूँ। अब आप दूसरे वाले से पूछते हैं और वो गर्व से कहता है कि मैं इस शहर का सबसे भव्य मंदिर बना रहा हूँ। काम दोनों एक ही कर रहे हैं लेकिन दूसरे वाले के पास विजन है। अब सोचिए कि मुसीबत आने पर कौन साथ छोड़कर भागेगा। जाहिर है वो ईंटें उठाने वाला जिसे काम से नफरत है।
अपनी टीम के साथ विजन शेयर करने का मतलब यह नहीं है कि साल में एक बार मीटिंग की और स्पीच देकर चले गए। आपको उन्हें यह दिखाना होगा कि इस विजन के पूरा होने पर उनकी लाइफ कैसे बदलेगी। क्या उनकी स्किल्स बढ़ेंगी। क्या उनका करियर ग्राफ ऊपर जाएगा। अगर उन्हें विजन में अपना फायदा नहीं दिखेगा तो वो आपके सपने के लिए अपनी नींद खराब नहीं करेंगे। बहुत से लीडर्स को लगता है कि वो टीम को डराकर काम करवा लेंगे। डराकर आप गधे से भी काम करवा सकते हैं लेकिन विजनरी काम सिर्फ एक इंस्पायर्ड इंसान ही करता है।
तो कुछ बॉस ऐसे होते हैं जो खुद तो विजनरी बनने की एक्टिंग करते हैं लेकिन टीम को पीनट्स देते हैं। और फिर उम्मीद करते हैं कि टीम एलन मस्क जैसा काम करे। ऐसे लीडर्स का विजन कुछ ही दिनों में पंचर हो जाता है। आपको अपनी टीम के साथ ट्रांसपेरेंट होना पड़ेगा। उन्हें प्रोसेस का हिस्सा बनाइए। उनसे सवाल पूछिए। जब टीम को लगता है कि उनके आइडियाज की वैल्यू है तो वो उस विजन को अपनी प्रॉपर्टी समझने लगते हैं। और जब कोई चीज अपनी होती है तो इंसान उसकी रक्षा जान देकर भी करता है। इसलिए अपनी टीम को सिर्फ एम्प्लॉई की तरह ट्रीट करना बंद कीजिए और उन्हें अपने विजन का को-पायलट बनाइए। जब तक आप और आपकी टीम एक ही सुर में नहीं गाएंगे तब तक सफलता का म्यूजिक नहीं बजेगा। और एक बार जब टीम आपके विजन के साथ सिंक हो जाती है तो फिर आपको उन्हें मैनेज करने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि अब विजन उन्हें मैनेज करता है।
लेसन ३ : मुश्किल समय में विजन ही आपका असली जीपीएस है
जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है तो हर कोई अपने आप को बड़ा लीडर समझने लगता है। असली परीक्षा तब होती है जब बिजनस में मंदी आती है या आपका कोई बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो जाता है। माइकल हयात कहते हैं कि एक विजन ड्रिवन लीडर वो नहीं है जिसे कभी हार का सामना न करना पड़े बल्कि वो है जो हार के बीच भी अपने विजन को नहीं छोड़ता। बिना विजन वाले लोग छोटी सी परेशानी आते ही अपना रास्ता बदल लेते हैं। वो उन लोगों की तरह होते हैं जो जिम तो जाते हैं बॉडी बनाने के लिए लेकिन दो दिन मांसपेशियों में दर्द हुआ नहीं कि अगले दिन से समोसे की दुकान पर मिलते हैं।
विजन आपके लिए एक नॉर्थ स्टार यानी ध्रुव तारे की तरह काम करता है। जब आसमान में काले बादल छा जाते हैं और रास्ता नहीं दिखता तब यही विजन आपको बताता है कि आपको किस दिशा में जाना है। इसे एक रियल लाइफ उदाहरण से देखते हैं। मान लीजिए आप एक टेक कंपनी चला रहे हैं और अचानक मार्केट में कोई नई टेक्नोलॉजी आ जाती है जो आपके पुराने प्रोडक्ट को बेकार कर देती है। एक साधारण लीडर पैनिक कर जाएगा और अपने एम्प्लॉई को निकालना शुरू कर देगा। लेकिन एक विजनरी लीडर अपने विजन स्क्रिप्ट को देखेगा और सोचेगा कि मेरा मकसद सिर्फ यह ऐप बेचना नहीं था बल्कि लोगों की लाइफ आसान बनाना था। वो अपनी टीम को इकट्ठा करेगा और उस नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके कुछ और भी बेहतर बना देगा।
सच्चाई तो यह है कि बहुत से लोग लीडरशिप की कुर्सी पर सिर्फ ईगो के लिए बैठते हैं। उन्हें लगता है कि बड़े केबिन में बैठना और लोगों पर हुक्म चलाना ही लीडरशिप है। लेकिन जब संकट आता है तो इनका ईगो सबसे पहले इन्हें डुबो देता है। विजनरी लीडर का ईगो उसके विजन से छोटा होता है। वो जानता है कि रास्ता बदल सकता है पर मंजिल नहीं। अगर आप हर छोटी रुकावट पर अपना विजन बदलते रहेंगे तो लोग आप पर भरोसा करना बंद कर देंगे। कोई भी उस बस में नहीं बैठना चाहता जिसका ड्राइवर हर दो किलोमीटर पर पैसेंजर से पूछता हो कि भाई अब कहाँ जाना है।
कुछ लीडर्स तो इतने कन्फ्यूज होते हैं कि उन्हें खुद नहीं पता होता कि वो आज क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। वो बस सुबह उठते हैं और आग बुझाने में लग जाते हैं। कभी सेल्स की आग कभी क्लाइंट की आग। पूरा दिन फायर फाइटर बने रहते हैं और शाम को थककर सो जाते हैं। यह लीडरशिप नहीं बल्कि मजदूरी है। विजन आपको इस डेली ड्रामे से ऊपर उठाता है। यह आपको ताकत देता है उन चीजों को 'ना' कहने की जो आपके बड़े लक्ष्य की राह में नहीं आतीं। जब आप अपने विजन पर अड़े रहते हैं तो दुनिया भी आपको रास्ता देने लगती है। अंत में आपकी सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने कितनी मेहनत की बल्कि इस बात पर करती है कि क्या आप अपनी मंजिल तक पहुँच पाए।
दोस्तो, लीडरशिप कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको विरासत में मिले बल्कि यह वो चॉइस है जो आप हर रोज लेते हैं। क्या आप आज भी उसी पुराने ढर्रे पर चलना चाहते हैं या अपनी एक नई विजन स्क्रिप्ट लिखकर इतिहास बदलना चाहते हैं। आज ही बैठिए और अपने आने वाले पांच साल की कहानी लिखिए। अपनी टीम के साथ उसे शेयर कीजिए और देखिए कैसे जादू होता है। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया और इसने आपकी सोच में एक छोटा सा बदलाव भी लाया है तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो खुद का बिजनस शुरू करना चाहते हैं या लीडरशिप में आगे बढ़ना चाहते हैं। कमेंट में बताइए कि आपका सबसे बड़ा विजन क्या है। याद रखिए विजन के बिना आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा हैं और विजन के साथ आप लीडर हैं।
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