Crowdfunded (Hindi)



अगर आपको लगता है कि आपका आईडिया बिना इन्वेस्टर के करोड़ों कमा लेगा तो आप शायद नींद में हैं। बिना सही कम्युनिटी के अपना कैंपेन लॉन्च करना मतलब अपने ही पैसे में आग लगाना है। क्या आपको सच में लगता है कि लोग आपके बोरिंग आइडिया के लिए खुद पैसे देंगे।

मार्क पेकोटा की यह बुक उन लोगों के लिए एक कड़वा सच है जो सिर्फ ख्वाब देखते हैं और सिस्टम को नहीं समझते। चलिए आज इस आर्टिकल में उन ३ सीक्रेट लेसन्स को गहराई से समझते हैं जो आपके स्टार्टअप को अर्श से फर्श पर गिरने से बचा सकते हैं।


लेसन १ : लॉन्च से पहले ही जीत पक्की करें

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि क्राउडफंडिंग का मतलब है एक बढ़िया सा वीडियो बनाना और किकस्टार्टर पर डाल देना। उन्हें लगता है कि जैसे ही वे 'पब्लिश' बटन दबाएंगे, दुनिया भर से लोग उन पर नोटों की बारिश कर देंगे। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो यकीन मानिए आप सिर्फ एक खूबसूरत हार की तैयारी कर रहे हैं। मार्क पेकोटा अपनी बुक में बहुत साफ कहते हैं कि असली खेल कैंपेन शुरू होने से महीनों पहले ही खत्म हो चुका होता है। इसे वे 'प्री लॉन्च' फेज कहते हैं। अगर आपके पास लॉन्च वाले दिन ही लाइन लगाकर खड़े होने वाले कस्टमर्स नहीं हैं, तो आपका कैंपेन उस खाली दुकान की तरह है जहाँ सेल्समैन खुद ही मक्खियाँ मार रहा होता है।

जरा सोचिए, आप एक रेस्टोरेंट खोलते हैं। आप बिना किसी को बताए चुपचाप फीता काट देते हैं। आप अंदर बैठ जाते हैं और इंतजार करते हैं कि कोई भूखा प्यासा रास्ता भटक कर आपकी दुकान में आ जाए। क्या ऐसा होता है। बिल्कुल नहीं। आप पहले ढिंढोरा पीटते हैं, दोस्तों को बुलाते हैं, फ्री टेस्ट कराते हैं। क्राउडफंडिंग में यही काम आपकी 'ईमेल लिस्ट' करती है। मार्क पेकोटा के अनुसार, आपके पास कम से कम इतने ईमेल होने चाहिए जो आपके गोल का ३० परसेंट पहले ही दिन पूरा कर दें। इसे 'सोशल प्रूफ' कहते हैं। जब दूसरे लोग देखते हैं कि अरे भाई, इस प्रोडक्ट को तो पहले ही हजारों लोग खरीद रहे हैं, तो उनकी भेड़ चाल वाली फितरत जाग जाती है। वे भी अपना बटुआ निकाल लेते हैं। लेकिन अगर पहले दिन मीटर जीरो पर अटका रहा, तो लोग समझेंगे कि आपका प्रोडक्ट किसी काम का नहीं है, भले ही आपने मंगल ग्रह पर जाने वाली चप्पल ही क्यों न बनाई हो।

बहुत से लोग अपने परिवार और दोस्तों को अपनी लिस्ट मान लेते हैं। उन्हें लगता है कि उनके शर्मा जी वाले अंकल उनके नए गैजेट में इन्वेस्ट करेंगे। हकीकत यह है कि शर्मा जी तभी पैसे देंगे जब उन्हें लगेगा कि इसमें उनका कोई बड़ा फायदा है, वरना वे सिर्फ 'बधाई हो' वाला व्हाट्सएप मेसेज भेजकर गायब हो जाएंगे। आपको उन अजनबियों को ढूंढना है जो आपके प्रोडक्ट के लिए सच में दीवाने हों। यह काम होता है एक बढ़िया 'लैंडिंग पेज' के जरिए। आप फेसबुक या इंस्टाग्राम पर छोटा सा ऐड चलाते हैं, लोगों को एक पेज पर लाते हैं और उनसे कहते हैं कि अगर आप लॉन्च के दिन डिस्काउंट चाहते हैं, तो अपना ईमेल दें। यह एक तरह का फिल्टर है। जो ईमेल दे रहा है, वही आपका असली कस्टमर है। बाकी तो सिर्फ आपकी फोटो लाइक करने वाले फ्री के दर्शक हैं।

मार्क पेकोटा समझाते हैं कि डेटा कभी झूठ नहीं बोलता। अगर आपकी ईमेल लिस्ट ठंडी है, तो आपका लॉन्च भी बर्फ की तरह जम जाएगा। आपको अपनी कम्युनिटी के साथ रिश्ता बनाना पड़ता है। उन्हें अपडेट्स देने पड़ते हैं। उन्हें महसूस कराना पड़ता है कि वे किसी बड़ी चीज का हिस्सा हैं। जब आप ऐसा करते हैं, तो लॉन्च वाला दिन सिर्फ एक औपचारिकता बन जाता है। आपकी जीत तो उसी दिन तय हो गई थी जिस दिन आपने अपना हजारवाँ ईमेल एड्रेस अपनी लिस्ट में जोड़ा था। बिना तैयारी के मैदान में उतरना बहादुरी नहीं, बेवकूफी है। और इस बेवकूफी की कीमत आपको अपने डूबते हुए बिजनेस से चुकानी पड़ती है। इसलिए, अपनी फौज पहले तैयार करें, जंग तो अपने आप जीत ली जाएगी।


लेसन २ : ईमेल की ताकत और एड्स का गणित

अगर आपको लगता है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने से आपका प्रोडक्ट बिक जाएगा तो आप बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं। मार्क पेकोटा इस बुक में बार-बार एक ही बात पर जोर देते हैं कि क्राउडफंडिंग की दुनिया में ईमेल ही राजा है। इंस्टाग्राम की लाइक्स और फेसबुक के शेयर्स से घर की रोटी नहीं चलती और न ही कैंपेन हिट होते हैं। आपके फॉलोअर्स सिर्फ आपकी चमक-धमक देखने आते हैं लेकिन आपका असली खरीदार आपकी ईमेल लिस्ट के अंदर छुपा बैठा होता है। इसे ऐसे समझिए कि आप एक शादी में गए हैं जहाँ हजारों लोग नाच रहे हैं पर शगुन का लिफाफा सिर्फ वही दस करीबी रिश्तेदार देंगे जिन्हें आपने खास तौर पर कार्ड भेजा था।

क्राउडफंडिंग में फेसबुक एड्स एक ऐसी मशीन की तरह हैं जिसमें आप एक तरफ से पैसा डालते हैं और दूसरी तरफ से कस्टमर्स निकलते हैं। लेकिन यहाँ भी लोग एक बड़ी गलती करते हैं। वे सीधा अपना प्रोडक्ट बेचने की कोशिश करते हैं। मार्क कहते हैं कि सीधा प्रोडक्ट बेचना उस लड़के की तरह है जो पहली डेट पर ही शादी का प्रस्ताव रख देता है। सामने वाला इंसान डर कर भाग जाएगा। आपको पहले एड्स के जरिए लोगों को अपने लैंडिंग पेज पर लाना है और उनका ईमेल मांगना है। जब एक बार वे अपनी जानकारी दे देते हैं तब जाकर उनके और आपके बीच एक भरोसे का रिश्ता शुरू होता है। और यकीन मानिए यह भरोसा ही है जो बाद में उनके क्रेडिट कार्ड से पैसे बाहर निकलवाता है।

सबसे मजेदार बात यह है कि लोग एड्स पर पैसा खर्च करने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि यह तो जुआ है। लेकिन असल में यह एक गणित का सवाल है। अगर आप एक ईमेल पाने के लिए सौ रुपये खर्च कर रहे हैं और वह कस्टमर भविष्य में आपको पाँच हजार रुपये का फायदा देने वाला है तो यह दुनिया का सबसे बेहतरीन सौदा है। लोग बिना सोचे समझे अपनी पोस्ट्स को 'बूस्ट' करते रहते हैं और फिर बाद में मार्क जुकरबर्ग को अपनी बर्बादी का जिम्मेदार ठहराते हैं। असल में गलती आपकी है क्योंकि आपने कभी एड्स के डेटा को समझा ही नहीं। आपको यह देखना होगा कि कौन सा ऐड काम कर रहा है और कौन सा सिर्फ आपका पैसा पानी की तरह बहा रहा है।

मार्क पेकोटा की यह स्ट्रैटेजी आपको एक बिजनेस माइंडसेट देती है। वे कहते हैं कि आपको अपना कैंपेन एक साइंटिस्ट की तरह चलाना चाहिए न कि किसी इमोशनल आर्टिस्ट की तरह। अगर एक ऐड पर क्लिक नहीं आ रहे हैं तो उसका शोक मत मनाइए बल्कि उसे तुरंत बंद करके नया फोटो या हेडलाइन ट्राई कीजिए। आपकी ईगो आपके बिजनेस की सबसे बड़ी दुश्मन है। आपको वही बेचना है जो लोग खरीदना चाहते हैं न कि वह जो आपको पसंद है। जब आप सही टारगेट ऑडियंस तक पहुँच जाते हैं और उन्हें अपनी ईमेल लिस्ट में शामिल कर लेते हैं तब आप असल मायने में अपने ब्रांड को कंट्रोल कर रहे होते हैं। वरना आप सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठे एक जुआरी ही कहलाएंगे।


लेसन ३ : स्केलिंग और ब्रांड का भविष्य

जब आपका कैंपेन सफल हो जाता है और पैसा आने लगता है, तब असली चुनौती शुरू होती है। बहुत से लोग समझते हैं कि क्राउडफंडिंग के गोल को पूरा करना ही अंत है। लेकिन मार्क पेकोटा के अनुसार, यह तो सिर्फ शुरुआत है। असली ब्रांड वही है जो इस सफलता को एक लंबे सफर में बदल दे। अगर आपने कैंपेन के बाद अपने कस्टमर्स को भुला दिया, तो आप उस नेता की तरह हैं जो चुनाव जीतने के बाद जनता को पहचानता भी नहीं। और यकीन मानिए, इंटरनेट की जनता बहुत जल्दी हिसाब बराबर करती है।

क्राउडफंडिंग से मिला पैसा सिर्फ ऑर्डर पूरा करने के लिए नहीं है। यह आपके ब्रांड को स्केल करने का एक फ्यूल है। पेकोटा समझाते हैं कि कैंपेन खत्म होने के तुरंत बाद आपको अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट तैयार रखनी चाहिए। जो लोग कैंपेन के दौरान नहीं खरीद पाए, वे अब आपकी साइट पर आएंगे। अगर आपकी दुकान तैयार नहीं है, तो आप बहती गंगा में हाथ धोने का मौका गँवा रहे हैं। लोग अक्सर जश्न मनाने में इतने खो जाते हैं कि वे भूल जाते हैं कि अब उन्हें हजारों लोगों को जवाब देना है। समय पर डिलीवरी करना और लोगों के सवालों के जवाब देना ही आपके ब्रांड की साख बनाता है।

एक कड़वा सच यह भी है कि लोग अक्सर शिपिंग और लॉजिस्टिक्स के खर्च को भूल जाते हैं। उन्हें लगता है कि जितना पैसा आया है वह सब उनका मुनाफा है। वे खुशी-खुशी नई गाड़ी बुक कर लेते हैं और बाद में पता चलता है कि प्रोडक्ट को चीन से इंडिया भेजने में ही आधे पैसे खत्म हो गए। मार्क पेकोटा कहते हैं कि एक प्रोफेशनल की तरह अपने मार्जिन को पहले ही कैलकुलेट करें। अपने कस्टमर्स के साथ ईमानदार रहें। अगर डिलीवरी में देरी हो रही है, तो उन्हें बताएं। झूठे वादे करना उस दुकानदार जैसा है जो कहता है कि 'बस लड़का निकल गया है' जबकि लड़का अभी घर पर सो रहा होता है।

क्राउडफंडिंग सिर्फ पैसे जुटाने का जरिया नहीं बल्कि मार्केट रिसर्च का सबसे बड़ा हथियार है। आपको पता चल चुका है कि लोग क्या पसंद कर रहे हैं। अब उस डेटा का इस्तेमाल करके नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कीजिए। मार्क पेकोटा की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे एक छोटे से आईडिया को मिलियन डॉलर ब्रांड में बदला जाता है। यह रास्ता कठिन है, थका देने वाला है और कभी-कभी डरावना भी है। लेकिन अगर आप सिस्टम को फॉलो करते हैं, तो सफलता कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक पक्का रिजल्ट है। अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और आज ही अपना पहला कदम बढ़ाएं।


क्या आप भी अपना खुद का कुछ शुरू करने का सपना देख रहे हैं या सिर्फ दूसरों की कामयाबी की कहानियाँ सुनकर खुश हो रहे हैं। याद रखिए, बिना एक्शन के ज्ञान सिर्फ एक बोझ है। अगर इस आर्टिकल से आपको थोड़ी भी हिम्मत मिली है, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा 'अपना स्टार्टअप' शुरू करने की बातें करता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वो कौन सा आईडिया है जिसे आप दुनिया के सामने लाना चाहते हैं। चलिए, साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं।

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