Empowered (Hindi)


क्या आप भी अपनी टीम को रोबोट समझकर सिर्फ काम सौंपते हैं और फिर रात को खराब रिजल्ट्स देखकर अपना सिर पकड़ लेते हैं? बधाई हो, आप अकेले नहीं हैं जो इस भयानक गलती के साथ अपने बिजनेस को डुबा रहे हैं। जब तक आप अपनी पुरानी घिसी-पिटी सोच से बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक साधारण लोग कभी भी असाधारण काम नहीं कर पाएंगे।

तो चलिए, आज डीवाई बुक्स पर मार्टी केगन की इस शानदार किताब से तीन ऐसे धांसू लेसन सीखते हैं जो आपकी टीम मैनेजमेंट और लीडरशिप के तरीके को हमेशा के लिए बदल देंगे।


लेसन १ : टीम को काम मत सौंपो बल्कि प्रॉब्लम सॉल्व करने की आजादी दो

ज्यादातर कंपनियों में बॉस का एक ही काम होता है। सुबह ऑफिस आकर अपनी टीम के सिर पर बैठ जाना। फिर उन्हें एक लंबी लिस्ट थमा देना कि आज तुम्हें यह फाइल बनानी है और वह कोडिंग करनी है। मैनेजर्स को लगता है कि वे बहुत बड़ा तीर मार रहे हैं। लेकिन मार्टी केगन अपनी इस किताब में कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। अगर आप अपनी टीम के लोगों को सिर्फ काम सौंप रहे हैं तो आप उनका दिमाग खुद अपने हाथों से बंद कर रहे हैं। आप उन्हें एक रोबोट बना रहे हैं जो सिर्फ बटन दबाने पर चलता है।

मान लीजिए आपको अपने घर में एक नया कमरा बनवाना है। अब आप एक अच्छे कारपेंटर को बुलाते हैं। आप उसे बताते हैं कि मुझे इस दीवार पर एक खिड़की चाहिए और यहाँ एक अलमारी होनी चाहिए। कारपेंटर चुपचाप आपकी बात सुनता है और काम शुरू कर देता है। दो दिन बाद जब आप कमरा देखते हैं तो खिड़की से धूप सीधे आपके चेहरे पर आती है और अलमारी का दरवाजा बेड से टकराता है। अब आप कारपेंटर पर चिल्लाते हैं। लेकिन गलती कारपेंटर की नहीं बल्कि आपकी है। आपने उसे सिर्फ काम बताया। आपने उसे यह नहीं बताया कि आप इस कमरे में शांति से बैठना चाहते हैं और यहाँ खुली हवा चाहते हैं।

मार्टी केगन कहते हैं कि एक बेहतरीन कंपनी और एक साधारण कंपनी में यही सबसे बड़ा फर्क होता है। साधारण कंपनियाँ अपनी टीम को काम यानी फीचर्स बनाने के लिए कहती हैं। वहीं शानदार कंपनियाँ अपनी टीम को असली प्रॉब्लम बताती हैं। वे अपनी टीम से कहती हैं कि हमारे कस्टमर्स को ऐप इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही है और आपको इस समस्या को दूर करना है। जब आप टीम को समस्या सुलझाने की आजादी देते हैं तब उनका असली टैलेंट बाहर आता है।

जब लोग सिर्फ काम पूरा करने के लिए काम करते हैं तो वे अपना सौ परसेंट कभी नहीं देते। वे बस घड़ी देखते हैं कि कब शाम के छह बजेंगे और कब वे ऑफिस से भागेंगे। लेकिन जब आप उन्हें एक चैलेंज देते हैं तो उनका ईगो जाग जाता है। वे खुद को उस कंपनी का हिस्सा मानने लगते हैं। साधारण से साधारण दिखने वाला इंसान भी तब ऐसे आइडियाज लेकर आता है जो बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स भी नहीं सोच पाते।

अगर आप अपने बिजनेस में असाधारण रिजल्ट्स देखना चाहते हैं तो आज से ही अपनी टीम को हुक्म देना बंद कीजिए। उन्हें यह मत बताइए कि क्या करना है। उन्हें यह बताइए कि कंपनी का लक्ष्य क्या है और परेशानी कहाँ आ रही है। फिर देखिए कि वही साधारण लोग कैसे कमाल के रिजल्ट्स लेकर आते हैं। जब टीम को जिम्मेदारी मिलती है तब वे सिर्फ एम्प्लॉई नहीं रहते बल्कि कंपनी के पार्टनर बन जाते हैं। यही असली एम्प्लॉई एम्पावरमेंट है जिसकी बात लेखक इस किताब में बार-बार करते हैं।


लेसन २ : लीडर का काम हुक्म चलाना नहीं बल्कि कोचिंग देना है

पहले लेसन में हमने देखा कि टीम को प्रॉब्लम सॉल्व करने की आजादी देना कितना जरूरी है। लेकिन जब आप टीम को आजादी देते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि लीडर आराम से सो जाए। मार्टी केगन कहते हैं कि असली लीडरशिप का मतलब यह नहीं कि आप राजा की तरह गद्दी पर बैठकर सिर्फ हुक्म चलाएं। एक सच्चे लीडर का असली काम अपनी टीम को लगातार कोचिंग देना और उन्हें सही रास्ता दिखाना है। लेकिन आज के समय में ज्यादातर मैनेजर्स खुद को भगवान समझने लगते हैं। वे सोचते हैं कि उनके पास हर समस्या का जादुई इलाज है और टीम का काम सिर्फ उनके पीछे-पीछे चलना है।

मान लीजिए आप भारतीय क्रिकेट टीम के कोच हैं। मैच के दौरान आपका सबसे बेहतरीन बल्लेबाज क्रीज पर जाता है। वह पहली दो बॉल्स को मिस कर देता है। अब आप बाउंड्री पर खड़े होकर चिल्लाने लगते हैं कि अरे सीधे बल्ले से खेलो, पैर आगे निकालो, ऐसे मत करो। अगर आप ऐसा करेंगे तो वह बल्लेबाज अगली बॉल पर पक्का आउट हो जाएगा। एक अच्छा कोच मैच के बीच में पिच पर जाकर बल्ला नहीं पकड़ता। वह मैच से पहले नेट्स पर बल्लेबाज की कमियों को दूर करता है। वह उसे सिखाता है कि मुश्किल वक्त में कैसे शांत रहना है। वह उसका हौसला बढ़ाता है ताकि मैदान पर वह खुद सही फैसला ले सके।

कंपनियों में भी यही होता है। जब कोई प्रोजेक्ट खराब होने लगता है, तो बॉस तुरंत मीटिंग बुलाकर चिल्लाना शुरू कर देते हैं। वे खुद को बहुत बड़ा एक्सपर्ट दिखाने के चक्कर में पूरी टीम का कॉन्फिडेंस जीरो कर देते हैं। लेखक कहते हैं कि अगर आपकी टीम बार-बार गलतियाँ कर रही है, तो इसका मतलब है कि आप एक फेल लीडर हैं। आप उन्हें सही तरीके से कोचिंग नहीं दे पा रहे हैं।

एक शानदार लीडर अपनी टीम के हर मेंबर की ताकत और कमजोरी को पहचानता है। वह हर हफ्ते अपनी टीम के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग करता है। वह उनसे पूछता है कि आपको काम में कहाँ दिक्कत आ रही है। वह उन्हें सीधे जवाब नहीं देता, बल्कि उनसे ऐसे सवाल पूछता है जिससे टीम खुद सही जवाब ढूंढ सके। जब आप अपनी टीम को इस तरह तैयार करते हैं, तो उनका डर खत्म हो जाता है। वे नए आइडियाज पर काम करने से घबराते नहीं हैं।

जब लीडर अपनी टीम को कोच की तरह गाइड करता है, तो टीम के अंदर एक अलग ही एनर्जी आ जाती है। वे सिर्फ अपना काम पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि लीडर के भरोसे को बनाए रखने के लिए बेस्ट परफॉर्मेंस देते हैं। इसलिए अगर आप एक सफल बिजनेस खड़ा करना चाहते हैं, तो बॉस बनना बंद कीजिए। अपनी टीम के लिए एक बेहतरीन कोच बनिए जो उन्हें हर मुश्किल से लड़ना सिखाए। जब लीडर अपनी टीम को इस तरह संभालता है, तभी कंपनी में असली बदलाव आता है और लोग बड़े लक्ष्य हासिल कर पाते हैं।


लेसन ३ : बिजनेस की सक्सेस के लिए प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी और सही लोग जरूरी हैं

पिछले लेसन में हमने देखा कि एक लीडर को कोच की तरह अपनी टीम को गाइड करना चाहिए। लेकिन आप कितनी भी अच्छी कोचिंग दे दें, अगर आपके पास सही खिलाड़ी नहीं हैं और मैच जीतने का कोई प्लान नहीं है, तो आप कभी नहीं जीत सकते। मार्टी केगन कहते हैं कि बिजनेस को आसमान पर ले जाने के लिए दो चीजें सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं। पहली है एक दमदार प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी और दूसरी है सही लोगों का सिलेक्शन। लेकिन ज्यादातर कंपनियां यहाँ भी पूरी तरह फेल हो जाती हैं। वे बिना किसी प्लान के बस हर दिशा में हाथ-पैर मारने लगती हैं।

मान लीजिए आप एक नया ढाबा खोलते हैं। अब आप अपने ढाबे पर चाइनीज, इटालियन, साउथ इंडियन और पंजाबी सब कुछ बेचने की कोशिश करते हैं। आपने जो शेफ रखा है, उसे सिर्फ चाय और समोसा बनाना आता है। अब आपके पास कोई फिक्स स्ट्रेटेजी नहीं है कि आपका स्पेशल फूड क्या है। नतीजा यह होगा कि आपके ढाबे का खाना खाकर लोग सीधे डॉक्टर के पास जाएंगे। आप सबको खुश करने के चक्कर में किसी एक को भी अच्छा खाना नहीं खिला पाएंगे। बिजनेस में भी यही होता है। जब आपके पास सही लोग नहीं होते और कोई साफ रास्ता नहीं होता, तो कंपनी डूब जाती है।

मार्टी केगन कहते हैं कि प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी का मतलब यह नहीं कि आप सब कुछ करने की कोशिश करें। इसका मतलब होता है कि आप उन कुछ खास चीजों को चुनें जो आपकी कंपनी को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचा सकती हैं। आपको अपनी पूरी ताकत सिर्फ उन्हीं चीजों पर लगानी चाहिए। जब आपके पास एक साफ फोकस होता है, तो टीम को पता होता है कि उन्हें किस दिशा में भागना है।

इसके बाद नंबर आता है सही लोगों को टीम में रखने का। लेखक कहते हैं कि आपको सिर्फ डिग्री देखकर लोगों को काम पर नहीं रखना चाहिए। आपको ऐसे लोग चाहिए जो सच में प्रोडक्ट को लेकर सीरियस हों और जिनमें प्रॉब्लम्स को सुलझाने की भूख हो। जब आप ऐसे टैलेंटेड लोगों को चुनते हैं और उन्हें एक बेहतरीन प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी देते हैं, तो जादू होता है। तब आपको उनके सिर पर बैठकर काम नहीं करवाना पड़ता। वे खुद जिम्मेदारी लेते हैं और कंपनी को आगे बढ़ाते हैं।

जब प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी और सही लोग एक साथ मिलते हैं, तो कंपनी में एक मजबूत सिस्टम बनता है। फिर चाहे मार्केट में कितना भी कम्पटीशन हो, आपकी कंपनी हमेशा नंबर वन पर रहती है। इसलिए आज ही अपने बिजनेस को देखिए। अपनी स्ट्रेटेजी को साफ कीजिए और अपनी टीम में सिर्फ बेस्ट लोगों को शामिल कीजिए। जब आपके पास सही प्लान और सही लोग होंगे, तभी आप वो एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स हासिल कर पाएंगे जिसका सपना हर बिजनेसमैन देखता है।


मार्टी केगन की यह किताब हमें सिखाती है कि असली लीडरशिप टीम को कंट्रोल करने में नहीं बल्कि उन्हें एम्पावर करने में है। जब आप अपनी टीम को प्रॉब्लम सॉल्व करने की आजादी देते हैं, उन्हें कोच की तरह गाइड करते हैं और एक सही स्ट्रेटेजी के साथ आगे बढ़ते हैं, तो आपकी कंपनी को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अब आपकी बारी है। क्या आप आज से अपने बिजनेस में इन बदलावों को लागू करने के लिए तैयार हैं? अपनी राय नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें और इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो एक टीम संभाल रहे हैं।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#ProductLeadership #TeamManagement #BusinessStrategy #ProductManagement #EmplolyeeEmpowerment


_

Post a Comment

Previous Post Next Post