अगर आप भी अपनी प्रेजेंटेशन और बातों में उबाऊ नंबर्स और अंतहीन डेटा दिखाकर लोगों को सुला रहे हैं, तो बधाई हो, आप अपनी वैल्यू जीरो कर रहे हैं। बिना सही तरीके के नंबर्स बताना लोगों को सीधे ब्लॉग या वीडियो बंद करने पर मजबूर करता है। क्या आप भी यही बड़ी भूल लगातार कर रहे हैं।
सच तो यह है कि नंबर्स को सिर्फ दिखाना काफी नहीं है। डेटा को इंसानी रूप देकर समझाना एक कला है। आइए इस ब्लॉग में हम इस किताब के तीन सबसे बड़े और जरूरी लेसन के बारे में बात करते हैं जो आपके नंबर्स को देखने और दिखाने का नजरिया हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : यूजर फ्रेंडली नंबर्स का जादू
मान लीजिए आपका एक दोस्त आकर आपसे कहता है कि भाई मेरी नई गाड़ी की लंबाई पाँच लाख मिलीमीटर है। आप उसे देखकर क्या कहेंगे। यही ना कि भाई तू सीधा सीधा मीटर या फीट में बात कर। हमारा दिमाग बड़ी और पेचीदा संख्याओं को देखकर तुरंत काम करना बंद कर देता है। यही सबसे बड़ी गड़बड़ तब होती है जब लोग अपनी प्रेजेंटेशन या बिजनेस मीटिंग्स में करोड़ों और अरबों के आंकड़े फेंकने लगते हैं। मेकिंग नंबर्स काउंट किताब के लेखक हमें सिखाती हैं कि अगर आप लोगों के दिमाग में अपनी बात बिठाना चाहते हैं, तो आपको अपने नंबर्स को यूजर फ्रेंडली बनाना होगा। यूजर फ्रेंडली नंबर्स का मतलब है कि बड़े और अजीब दिखने वाले आंकड़ों को ऐसे छोटे और जाने-पहचाने रूप में बदलो जिसे कोई बच्चा भी समझ सके।
मान लीजिए एक कंपनी का मालिक अपनी टीम के सामने आकर गर्व से चिल्लाता है कि इस साल हमारी कंपनी ने चौबीस बिलियन डॉलर्स का रेवेन्यू कमाया है। अब यह सुनकर टीम के लोग तालियाँ तो बजा देंगे क्योंकि बॉस खड़ा है, लेकिन सच कहूँ तो किसी के पल्ले कुछ नहीं पड़ेगा। चौबीस बिलियन में कितने जीरो होते हैं, यह सोचने में ही आधा दिमाग खर्च हो जाता है। अब इसी बात को अगर लेखक के स्टाइल में कहा जाए तो बात कुछ अलग होगी।
बॉस को अपनी टीम से कहना चाहिए कि दोस्तों, इस साल हमने इतना कमाया है कि अगर हम हर एक सेकंड में अस्सी हजार रुपये भी खर्च करना शुरू करें, तो भी हमें इस पूरी रकम को खत्म करने में पूरे एक हजार साल लग जाएंगे। अब सोचिए, कहाँ वह उबाऊ चौबीस बिलियन का आंकड़ा और कहाँ यह हजार साल तक पैसे उड़ाने वाली बात। इस तरीके को सुनते ही पूरी टीम की आँखें फटी की फटी रह जाएंगी। लोगों को तुरंत समझ आ जाएगा कि कंपनी ने वाकई में बहुत तगड़ा काम किया है।
जब आप नंबर्स को इस तरह से पेश करते हैं, तो लोग आपके डेटा से डरते नहीं हैं बल्कि उससे जुड़ जाते हैं। पेचीदा आंकड़े लोगों को सिर्फ हैरान कर सकते हैं, लेकिन यूजर फ्रेंडली नंबर्स लोगों को प्रभावित करते हैं। अगर आप भी अपने करियर में लोगों को अपनी बातों से दीवाना बनाना चाहते हैं, तो आज से ही बड़े नंबर्स को इंसानी भाषा में बदलना शुरू कर दीजिए। जब तक आपके आंकड़े सीधे दिल पर चोट नहीं करेंगे, तब तक लोग आपकी बात सुनकर भी अनसुना करते रहेंगे।
लेसन २ : नंबरों को सजीव और वास्तविक बनाना
पिछले लेसन में आपने देखा कि कैसे एक हजार साल तक पैसे उड़ाने वाला आइडिया आपके दिमाग में छप गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह नंबर आपके लिए सजीव हो गया। मेकिंग नंबर्स काउंट किताब में चिप हीथ और कार्ला स्टार हमें दूसरा सबसे बड़ा सीक्रेट सिखाते हैं कि नंबर्स को सिर्फ कागज पर मत लिखो, उन्हें लोगों को महसूस कराओ। जब तक लोग आपके आंकड़े को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर नहीं देखेंगे, तब तक उनके लिए वह सिर्फ एक बेजान संख्या बनी रहेगी। आपके नंबर्स में एक धड़कन होनी चाहिए जो सीधे सुनने वाले के दिल से जाकर टकराए।
आइए इसे एक ऐसे उदाहरण से समझते हैं जो आज के हर भारतीय युवा को तुरंत समझ आएगा। मान लीजिए आप एक हेल्थ सप्लीमेंट कंपनी चलाते हैं। आप स्टेज पर आते हैं और बहुत ही गंभीर चेहरा बनाकर कहते हैं कि दोस्तों, हमारी इस नई ड्रिंक की एक बोतल में पूरे सत्तर ग्राम शुगर यानी चीनी है। अब यह सुनकर लोग कहेंगे कि अच्छा, ठीक है, शायद ज्यादा होगी। लेकिन कोई भी चौकेगा नहीं क्योंकि सत्तर ग्राम कितना होता है, यह कोई आंखें बंद करके सोच नहीं पाता। अब जरा इसी बात को घुमाते हैं और लेखक के एकदम धांसू स्टाइल में पेश करते हैं।
आप स्टेज पर जाइए, अपने हाथ में चीनी का एक बड़ा डिब्बा रखिए और एक खाली गिलास लीजिए। अब लोगों के सामने उस गिलास में एक, दो, तीन नहीं बल्कि पूरी चौदह चम्मच चीनी डालिए। जब चम्मच से चीनी गिलास में गिरेगी और उसकी खनखनाहट लोगों के कानों में जाएगी, तब असली जादू होगा। अब लोगों से कहिए कि जब आप हमारी यह एक बोतल पीते हैं, तो आप सीधे यह चौदह चम्मच चीनी अपने पेट के अंदर डाल रहे होते हैं। अब सोचिए, क्या कोई भी इंसान इसके बाद उस ड्रिंक को छूने की हिम्मत करेगा। चौदह चम्मच चीनी का वह पहाड़ लोगों के दिमाग में ऐसा डर पैदा करेगा कि वे जिंदगी भर आपकी बात नहीं भूलेंगे।
यही होता है नंबर्स को सजीव बनाने का असली पावर। जब आप लोगों को सिर्फ संख्या बताने के बजाय उसका एक जीता जागता रूप दिखा देते हैं, तो आपकी बात में एक अलग ही दम आ जाता है। उबाऊ डेटा लोगों को सुला देता है, लेकिन जब वही डेटा एक कड़वी सच्चाई बनकर आँखों के सामने नाचने लगता है, तो लोग तुरंत एक्शन लेते हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी प्रेजेंटेशन या आपकी बातें सुनकर लोग तुरंत मान जाएं, तो अपने आंकड़ों को ऐसी सजीव तस्वीरों में बदलिए जो लोगों को सीधे दिखाई दें।
लेसन ३ : तुलना का सही पैमाना सेट करना
पिछले लेसन में आपने देखा कि कैसे चौदह चम्मच चीनी के उदाहरण ने आपके दिमाग में एक साफ तस्वीर बना दी। यह कमाल इसलिए हुआ क्योंकि वहाँ तुलना करने का पैमाना एकदम सही था। मेकिंग नंबर्स काउंट किताब में चिप हीथ और कार्ला स्टार हमें तीसरा और सबसे जरूरी लेसन सिखाते हैं कि नंबर्स को कभी भी अकेला मत छोड़ो। जब तक आप किसी संख्या की तुलना किसी ऐसी चीज से नहीं करेंगे जिसे लोग रोज देखते हैं, तब तक लोगों को उसकी गंभीरता समझ में नहीं आएगी। सही पैमाना सेट करने का मतलब है कि लोगों के दिमाग में पहले से मौजूद किसी बेसलाइन का इस्तेमाल करना।
आइए इसे एक ऐसे उदाहरण से समझते हैं जो आज का हर युवा अपने ऑफिस या बिजनेस में रोज देखता है। मान लीजिए आपकी कंपनी का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत बड़ा है और आपका मैनेजर मीटिंग में आकर कहता है कि दोस्तों, हमारी कंपनी का नया डेटा सेंटर पूरे चार लाख स्क्वायर फीट का है। अब यह सुनकर हर कोई सिर हिला देगा लेकिन किसी को अंदाजा नहीं मिलेगा कि यह कितना बड़ा है।
अब इसी बात को लेखक के स्टाइल में पेश करते हैं। मैनेजर को कहना चाहिए कि दोस्तों, हमारा नया डेटा सेंटर इतना बड़ा है कि उसमें एक साथ पूरे सात फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं। फुटबॉल का मैदान देखते ही हर इंसान का दिमाग तुरंत उस साइज की कल्पना कर लेता है। चार लाख स्क्वायर फीट सुनते ही जो दिमाग सुन्न हो गया था, वह सात फुटबॉल मैदान सुनते ही पूरी तरह जाग जाता है।
यही होता है तुलना का सही पैमाना सेट करने का जादू। जब आप अपने डेटा को किसी ऐसी चीज के बगल में खड़ा कर देते हैं जिसे दुनिया अच्छी तरह जानती है, तो आपकी बात का वजन सौ गुना बढ़ जाता है। पेचीदा आंकड़े लोगों को उलझा सकते हैं, लेकिन जब आप उन्हें सही पैमाना दे देते हैं, तो आपका पूरा मैसेज एकदम क्रिस्टल क्लियर हो जाता है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी प्रेजेंटेशन का हर एक पॉइंट लोगों के दिमाग में सीधे हिट करे, तो अपने नंबर्स को सही पैमाने के साथ पेश करना सीखिए।
तो दोस्तों, चिप हीथ और कार्ला स्टार की किताब मेकिंग नंबर्स काउंट हमें यही सिखाती है कि डेटा सिर्फ गणित नहीं है बल्कि यह बातचीत करने की एक कला है। जब आप अपने नंबर्स को यूजर फ्रेंडली बनाते हैं, उन्हें सजीव उदाहरणों से जोड़ते हैं और सही पैमाना सेट करते हैं, तो आपकी बात सीधे लोगों के दिलों में उतर जाती है। आज से ही अपनी प्रेजेंटेशन और मीटिंग्स में सूखे आंकड़े फेंकना बंद कीजिए और उन्हें कहानियों में बदलना शुरू कीजिए। क्या आप अपने अगले प्रोजेक्ट में इन तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। कमेंट में लिखकर जरूर बताइए और इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी उबाऊ प्रेजेंटेशन से सबको सुलाते हैं।
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