अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि दिन-रात पागलों की तरह काम करने से और बकवास पीपीटी बनाने से आपका बिजनेस अमेज़न जैसा बड़ा बन जाएगा तो बधाई हो आप बिल्कुल गलत रास्ते पर हैं। आप बस अपनी कीमती एनर्जी और टाइम बर्बाद कर रहे हैं। अमेज़न की सीक्रेट स्ट्रेटेजी जाने बिना आप रेस में बहुत पीछे छूट रहे हैं।
आज हम कॉलिन ब्रायर और बिल कार की फेमस बुक वर्किंग बैकवर्ड्स से अमेज़न के वो गहरे राज जानेंगे जिन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनाया। चलिए इस सफर को शुरू करते हैं और देखते हैं कि असली ग्रोथ कैसे मिलती है।
लेसन १ : वर्किंग बैकवर्ड्स फ्रॉम कस्टमर नीड्स
अमेज़न कंपनी की सफलता का सबसे बड़ा राज है उनका काम करने का अनोखा तरीका। आम तौर पर कंपनियां क्या करती हैं। पहले एक बढ़िया सा प्रोडक्ट बनाती हैं। फिर उसे बेचने के लिए कस्टमर ढूंढती हैं। यह तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसे पहले शादी का सूट सिलवा लेना और बाद में दूल्हा ढूंढना। अमेज़न इसके बिल्कुल उलट काम करता है। वह पहले कस्टमर की बड़ी समस्या को पकड़ता है। फिर पीछे की तरफ काम करना शुरू करता है। इसे ही वर्किंग बैकवर्ड्स कहते हैं।
मान लीजिए आप एक नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। आप सोचते हैं कि मार्केट में एक नया ऐप लाएंगे। आप बिना सोचे-समझे कोडिंग शुरू कर देते हैं। रात-दिन एक करके ऐप तैयार करते हैं। ऐप लॉन्च होता है पर उसे कोई डाउनलोड नहीं करता। क्यों। क्योंकि आपने कभी कस्टमर से पूछा ही नहीं कि उसे क्या चाहिए। आपने बस अपनी मर्जी का खिलौना बना दिया। जेफ बेजोस का मानना है कि जो कंपनी कस्टमर की जरूरत को नहीं समझती वह बहुत जल्द बंद हो जाती है।
अमेज़न में जब भी कोई नया आइडिया आता है तो सबसे पहले एक प्रेस रिलीज लिखी जाती है। जी हां प्रोडक्ट बनने से पहले ही उसकी सफलता की खबर लिख दी जाती है। इस प्रेस रिलीज में साफ-साफ लिखा होता है कि यह नया प्रोडक्ट क्या है। इससे कस्टमर की कौन सी बड़ी मुसीबत हल होगी। और इसे इस्तेमाल करना कितना आसान है। अगर वह प्रेस रिलीज पढ़ने में मजेदार नहीं लगती तो उस प्रोडक्ट का आइडिया वहीं दफन कर दिया जाता है। कोई कोडिंग नहीं होती। कोई फालतू का पैसा बर्बाद नहीं होता।
यह तरीका सुनने में बहुत सीधा लगता है पर इसे करना उतना ही मुश्किल है। लोग अक्सर अपने आइडिया से प्यार कर बैठते हैं। उन्हें लगता है कि उनका आइडिया दुनिया का सबसे बेस्ट आइडिया है। पर असलियत में राजा सिर्फ कस्टमर होता है। अगर आपका प्रोडक्ट कस्टमर की लाइफ को आसान नहीं बना रहा है तो आपका आइडिया बेकार है। अमेज़न ने किंडल और प्राइम जैसी बड़ी सर्विसेज इसी तरीके से बनाई हैं। उन्होंने पहले सोचा कि कस्टमर को एक क्लिक में किताब चाहिए। फिर उस पर काम शुरू किया।
इसलिए अपने बिजनेस में सबसे पहले कस्टमर की आंखों से देखना सीखिए। उनकी तकलीफ को पहचानिए। जब आप कस्टमर की समस्या को अपनी समस्या बना लेते हैं तब आपका प्रोडक्ट अपने आप हिट हो जाता है। बिना प्लानिंग के हवा में तीर चलाना बंद कीजिए। पहले कस्टमर का दिल जीतिए फिर मार्केट अपने आप आपका हो जाएगा।
लेसन २ : द टू पिज्जा टीम रूल
जब आप कस्टमर की समस्या समझ लेते हैं और उस पर काम करना शुरू करते हैं तो आपको एक टीम की जरूरत होती है। पर ज्यादातर कंपनियां यहीं पर सबसे बड़ी गलती करती हैं। वे एक छोटे से काम के लिए पचास लोगों की फौज खड़ी कर देती हैं। फिर क्या होता है। काम कम होता है और बकवास ज्यादा होती है। अमेज़न इस बीमारी का एक बहुत ही मजेदार इलाज ढूंढ कर लाया है। जेफ बेजोस ने इसे द टू पिज्जा टीम रूल का नाम दिया है।
इस रूल का सीधा सा मतलब है कि आपकी टीम में उतने ही लोग होने चाहिए जिन्हें दो पिज्जा खिलाकर उनका पेट भरा जा सके। यानी एक टीम में पांच से आठ लोग ही होने चाहिए। अब आप सोचेंगे कि इतनी बड़ी अमेज़न कंपनी को भला आठ लोगों की छोटी सी टीम कैसे चला सकती है। यही तो सारा खेल है। जब टीम बहुत बड़ी होती है तो बातें ज्यादा होती हैं और काम करने की स्पीड कछुए जैसी हो जाती है। हर छोटे फैसले के लिए दस मीटिंग करनी पड़ती हैं।
मान लीजिए आपको घर में एक छोटी सी पेंटिंग लगानी है। अगर आप अकेले हैं तो बाजार जाएंगे और कील ठोककर पेंटिंग लगा देंगे। पर अगर आप इसके लिए अपने पूरे खानदान को बुला लें तो क्या होगा। चाचा कहेंगे पेंटिंग टेढ़ी है। ताऊ कहेंगे दीवार का रंग खराब है। मौसा जी कहेंगे कील की क्वालिटी अच्छी नहीं है। नतीजा यह होगा कि शाम तक पेंटिंग तो नहीं लगेगी पर आपस में झगड़ा जरूर हो जाएगा। बड़ी टीमों में भी ठीक ऐसा ही होता है।
अमेज़न में हर नया प्रोजेक्ट एक छोटी टीम को दे दिया जाता है। इस टीम के पास अपने फैसले खुद लेने की पूरी आजादी होती है। उन्हें किसी बड़े बॉस की परमिशन के लिए हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ता। वे खुद ही कोडिंग करते हैं। खुद ही टेस्टिंग करते हैं। और खुद ही प्रोडक्ट को लॉन्च करते हैं। इससे काम करने की स्पीड इतनी तेज हो जाती है कि विरोधी कंपनियां सोचती ही रह जाती हैं और अमेज़न नया कमाल कर देता है।
छोटी टीम का एक और बड़ा फायदा है। वहां कोई भी आलसी इंसान छुप नहीं सकता। जब टीम में सिर्फ छह लोग होंगे तो हर किसी का काम साफ-साफ दिखाई देगा। वहां कोई दूसरों की मेहनत पर मलाई नहीं खा सकता। हर इंसान को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही पड़ती है। इसीलिए अगर आप अपने बिजनेस को रॉकेट की स्पीड से बढ़ाना चाहते हैं तो अपनी टीम का साइज छोटा रखिए। लोगों की भीड़ मत जमा कीजिए बल्कि काम करने वाले चीते पालिए।
लेसन ३ : ६ पेज नैरेटिव्स इंसटिड ऑफ़ पीपीटी
जब आपकी छोटी और तेज तर्रार टीम तैयार हो जाती है और वह कस्टमर की जरूरत के हिसाब से काम करना शुरू करती है तो सबसे बड़ी रुकावट आती है मीटिंग्स में। आम तौर पर ऑफिस की मीटिंग्स में क्या होता है। एक सीनियर मैनेजर आता है। वह रंग-बिरंगी पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन यानी पीपीटी चालू करता है। उसमें बड़े-बड़े ग्राफ और एंनgroupिमेशन होते हैं। आधे लोग उसे देखकर सो जाते हैं और बाकी के आधे लोग फोन चलाने लगते हैं। अमेज़न ने इस बोरिंग और बेकार तरीके को अपनी कंपनी से हमेशा के लिए लात मारकर बाहर निकाल दिया है। जेफ बेजोस ने नियम बनाया कि अमेज़न की किसी भी मीटिंग में पीपीटी का इस्तेमाल नहीं होगा। इसकी जगह छह पेज का एक लिखित डॉक्यूमेंट इस्तेमाल होगा जिसे नैरेटिव कहते हैं।
इस रूल के पीछे एक बहुत ही मजेदार और गहरी सोच है। जब कोई इंसान पीपीटी बनाता है तो उसका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि स्लाइड कितनी सुंदर दिख रही है। वह अच्छे फोंट्स और बढ़िया कलर्स ढूंढने में अपना कीमती समय बर्बाद करता है। पर असली मुद्दे की बात गायब हो जाती है। पीपीटी में सिर्फ बुलेट पॉइंट्स होते हैं जिससे पूरी बात समझ में नहीं आती। अमेज़न में मीटिंग शुरू होते ही सबसे पहले सन्नाटा छा जाता है। जी हां कोई भी इंसान स्टेज पर खड़े होकर भाषण नहीं देता। मीटिंग रूम में बैठे सभी लोग पहले पंद्रह से बीस मिनट तक उस छह पेज के डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ते हैं। जब सब लोग उसे पढ़कर समझ लेते हैं तब जाकर उस पर बहस शुरू होती है।
मान लीजिए आप अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं। एक दोस्त आता है और पीपीटी दिखाता है कि थियेटर की सीट कितनी शानदार है और पॉपकॉर्न का डिब्बा कितना बड़ा है। दूसरा दोस्त आता है और आपको एक पेपर पर लिखकर देता है कि फिल्म की कहानी क्या है और उसे क्यों देखना चाहिए। आप किसे चुनेंगे। बिल्कुल सही आप कहानी वाले को चुनेंगे। अमेज़न भी यही कहता है कि बिजनेस में दिखावा नहीं बल्कि कहानी और गहराई जरूरी है। जब आप छह पेज का डॉक्यूमेंट लिखते हैं तो आपको खुद समझ आता है कि आपके आइडिया में कितना दम है। लिखने से दिमाग साफ होता है और फालतू की बातें अपने आप दूर हो जाती हैं।
अमेज़न का यह नियम हमें सिखाता है कि अपने बिजनेस में दिखावे को कम कीजिए। जब आप किसी नए प्रोजेक्ट पर बात करें तो लंबी और उबाऊ मीटिंग्स बंद करें। अपनी टीम को कहें कि वे अपने आइडिया को साफ-साफ शब्दों में लिखकर लाएं। इससे समय बचता है और सही फैसले तेजी से लिए जाते हैं।
तो दोस्तों, आज हमने अमेज़न के वो तीन बड़े सीक्रेट्स जाने जो किसी भी बिजनेस को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकते हैं। पहला कस्टमर की जरूरत से शुरुआत करना। दूसरा टीम का साइज हमेशा छोटा रखना। और तीसरा पीपीटी के दिखावे को छोड़कर लिखने की आदत डालना। यह केवल अमेज़न के नियम नहीं हैं बल्कि कामयाबी के वो मूल मंत्र हैं जिन्हें अपनाकर आप भी अपने काम में क्रांति ला सकते हैं। अब सोचना बंद कीजिए और आज ही से इन लेसन्स को अपनी लाइफ में लागू कीजिए।
आपको अमेज़न का कौन सा रूल सबसे ज्यादा पसंद आया। क्या आप भी अपनी टीम का साइज छोटा करने वाले हैं। नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ जरूर शेयर करें। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें जो एक बड़ा बिजनेस खड़ा करना चाहते हैं।
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