Choose Your Story Change Your Life (Hindi)


क्या आप भी अपनी लाइफ में हर संडे यही सोचते हैं कि मंडे से दुनिया हिला देंगे पर मंडे आते ही आपका इनर क्रिटिक आपके कान में कहता है कि भाई रहने दे तुझसे नहीं होगा। अगर आप अपनी इस घटिया पुरानी कहानी के साथ जी रहे हैं तो मुबारक हो आप अपनी लाइफ का सबसे कीमती समय और बेहतरीन मौके कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं। जब पूरी दुनिया अपनी किस्मत खुद लिख रही है तब आप सोफे पर बैठकर खुद को कोसने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना रहे हैं।

इस दुखद हकीकत को हमेशा के लिए बदलने का समय आ गया है। किंड्रा हॉल की यह शानदार किताब हमें सिखाती है कि कैसे हम अपने अंदर के इस विलेन को हमेशा के लिए शांत कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस किताब के वह तीन धमाकेदार लेसन जो आपकी लाइफ की पूरी स्क्रिप्ट को बदल देंगे।


लेसन १ : इनर क्रिटिक को पहचानना

मान लीजिए आप ऑफिस में एक बहुत बढ़िया आइडिया लेकर बैठे हैं। बॉस मीटिंग में चिल्लाकर पूछता है कि किसी के पास कोई तगड़ा प्लान है। आप अपनी सीट से खड़े होने ही वाले होते हैं कि अचानक आपके दिमाग के पीछे से एक पतली सी डरावनी आवाज आती है। वह आवाज आपसे कहती है कि अरे छोटे शांत बैठ जा। तेरा आइडिया एकदम बकवास है। अगर बॉस ने सबके सामने बेइज्जती कर दी तो मुंह दिखाने के लायक नहीं बचेगा। आप डरकर वापस बैठ जाते हैं। कोई दूसरा लड़का वही घिसा पिटा आइडिया देता है और बॉस उसकी तारीफों के पुल बांध देता है। आप मन मसोसकर रह जाते हैं। क्या समझे। यही है आपका इनर क्रिटिक। आपका वह अंदर का दुश्मन जो बिना किसी डिग्री के आपकी लाइफ का जज बना बैठा है। किंड्रा हॉल अपनी किताब में सबसे पहले इसी दुश्मन को पहचानने की बात करती हैं। जब तक आप इस आवाज को पकड़ेंगे नहीं तब तक यह आपको हर मोड़ पर ऐसे ही डराती रहेगी।

यह इनर क्रिटिक कोई भूत नहीं है बल्कि आपके ही दिमाग का एक हिस्सा है। यह असल में आपका वह दोस्त है जो आपका भला तो चाहता है पर हमेशा उल्टी सलाह देता है। जैसे जब आप जिम जाने का सोचते हैं तो यह कहता है कि बाहर बहुत धूप है आज सो जाता है। जब आप नया बिजनेस शुरू करने का सोचते हैं तो यह कहता है कि तेरे खानदान में किसी ने बिजनेस किया है क्या जो तू करेगा। मजे की बात यह है कि हम इस आवाज को अपनी असली हकीकत मान लेते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि यह केवल एक आवाज है कोई परम सत्य नहीं। यह आवाज हमारे पुराने डर और असफलताओं से बनी है। जब बचपन में गणित के टेस्ट में कम नंबर आए थे तो इसी आवाज ने आपसे कहा था कि तू पढ़ाई में कमजोर है। आज दस साल बाद भी आप उसी पुरानी बात को सच मानकर बैठे हैं। यह तो वही बात हुई कि बचपन की फटी हुई टी शर्ट को आप आज भी जबरदस्ती पहनने की कोशिश कर रहे हैं।

इस इनर क्रिटिक को पहचानने का सबसे पहला नियम है इसका नामकरण करना। हां आपने बिल्कुल सही सुना। इस आवाज को कोई फनी सा नाम दे दीजिए। जैसे ही यह आपसे कहे कि तुझसे नहीं होगा आप तुरंत मन में कहिए कि लो मिस्टर शर्मा जी फिर आ गए अपनी बकवास राय लेकर। जब आप इस आवाज को खुद से अलग करके एक फनी विलेन की तरह देखते हैं तो इसका डर अपने आप खत्म होने लगता है। आप समझ जाते हैं कि यह जो बोल रहा है वह सिर्फ एक राय है कोई फैक्ट नहीं है। यह प्रोसेस आपको एक पल का ठहराव देता है। यह ठहराव आपको यह सोचने का मौका देता है कि क्या मुझे सच में इस डरपोक आवाज की बात सुननी चाहिए या फिर आगे बढ़कर अपना काम करना चाहिए।

ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी इस आवाज के गुलाम बनकर निकाल देते हैं। वे कभी नया काम शुरू नहीं कर पाते क्योंकि उनका अंदर का क्रिटिक उन्हें हमेशा सुरक्षित रहने की सलाह देता है। सुरक्षा अच्छी चीज है लेकिन पिंजरे में बंद तोता भी सुरक्षित रहता है पर वह कभी आसमान नहीं नाप पाता। आपको अपने इस अंदर के तोते को आजाद करना होगा। जब अगली बार यह आवाज आपके कान में फुसफुसाए तो डरने के बजाय मुस्कुराइए। उसे कहिए कि धन्यवाद आपकी राय के लिए पर अब मेरी बारी है। अपनी इस अंदर की कमेंट्री को पहचानना ही आपकी आजादी की पहली सीढ़ी है। जब आप इस आवाज को पहचानना सीख जाते हैं तभी आप उस काबिल बनते हैं कि इसकी सुनाई हुई पुरानी और सड़ी हुई कहानियों को अपने दिमाग की हार्ड ड्राइव से हमेशा के लिए डिलीट कर सकें।


लेसन २ : पुरानी कहानियों को डिलीट करना

जब आप अपने इनर क्रिटिक को पहचान लेते हैं और उसे एक फनी नाम देकर चुप कराना सीख जाते हैं, तो अगला कदम आता है उन पुरानी कहानियों को डिलीट करना जो आपने खुद के बारे में पाल रखी हैं। किंड्रा हॉल बहुत ही गहराई से समझाती हैं कि हम असल में वे नहीं हैं जो हम सोचते हैं। हम तो वह हैं जो हमने अपने बारे में बार-बार खुद को बताया है। सोचिए एक ऐसे फिल्म राइटर के बारे में जिसने अपनी ही फिल्म की स्क्रिप्ट में खुद को हमेशा एक लूजर का रोल दे रखा है। चाहे क्लाइमेक्स कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह राइटर अपनी स्क्रिप्ट में हीरो की जगह हमेशा विलेन या साइड एक्टर को ही रखता है। आपकी लाइफ की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आपने सालों पहले अपनी एक ऐसी इमेज बना ली कि मैं तो एवरेज हूं, मैं तो बस ऐसा ही हूं या फिर मैं तो कभी रिस्क नहीं ले सकता। यह सब आपकी पुरानी स्टोरीज हैं जो अब एक्सपायर हो चुकी हैं, लेकिन आप उन्हें आज भी ताजा दूध की तरह सहेज कर रखे हुए हैं।

पुरानी कहानियों का सबसे खतरनाक हिस्सा यह है कि ये हमें कंफर्ट ज़ोन के नाम पर ठगती हैं। यह ऐसा है जैसे आपने कोई पुरानी और खराब हो चुकी साइकिल पकड़ रखी हो और आप यह सोच रहे हैं कि इसी से मैं हिमालय फतह कर लूंगा। आप यह नहीं देख रहे कि उस साइकिल की चेन कब की टूट चुकी है और टायर में हवा तक नहीं है। आप बस इसलिए उसे पकड़े हुए हैं क्योंकि वह आपकी अपनी है। जब आपसे कोई कहता है कि भाई तुम कुछ नया क्यों नहीं करते, तो आपका वही पुराना क्रिटिक तुरंत बोलता है कि रहने दे, मेरी तो पुरानी आदत ही ठीक है। असल में आप आदत से मजबूर नहीं हैं, आप उस पुरानी कहानी के शिकार हैं जिसने आपको यह विश्वास दिला दिया है कि आप बदलाव के लिए बने ही नहीं हैं। यह एक मानसिक जाल है जिसमें हम खुद ही अपनी मर्जी से फंस जाते हैं और फिर बाहर निकलने का रास्ता भी नहीं ढूंढते।

इन बेकार की कहानियों को डिलीट करने का तरीका बहुत सीधा है। एक पेपर और पेन उठाइए और लिखिए कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं। जैसे, मुझे पब्लिक स्पीकिंग से डर लगता है या मैं बिजनेस के लिए नहीं बना हूं। अब इन लाइनों को गौर से देखिए। क्या यह सच में फैक्ट हैं या सिर्फ आपकी बनाई हुई थ्योरी। क्या दुनिया के हर महान इंसान ने पहले ही दिन से सब कुछ परफेक्ट कर लिया था। नहीं, बिल्कुल नहीं। उन्होंने भी वही गलतियां की थीं जो आप कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कहानी बदल ली थी। उन्होंने यह सोचना बंद कर दिया कि वे कौन थे और यह सोचना शुरू किया कि वे कौन बन सकते हैं। अपनी पुरानी स्टोरीज को क्रॉस कर दीजिए। उन्हें अपने दिमाग से डिलीट करने का मतलब है कि अब आप नए सिरे से अपने कैरेक्टर को बिल्ड करेंगे। यह वैसा ही है जैसे आप अपने फोन में भारी और बेकार के ऐप्स को हटाते हैं ताकि आपका फोन फिर से सुपर फास्ट काम करने लगे।

जब आप अपनी उन पुरानी, डरी हुई और छोटी कहानियों को डिलीट करते हैं, तो आप एक खाली स्पेस बनाते हैं। यह खाली जगह बहुत जरूरी है। अगर आप अपने दिमाग की हार्ड ड्राइव में पुराने कचरे को भर कर रखेंगे तो नया और अच्छा डेटा कहां से स्टोर करेंगे। लाइफ में बदलाव तब नहीं आता जब आप कुछ नया जोड़ते हैं, बल्कि तब आता है जब आप वो सब हटा देते हैं जो आपकी तरक्की को रोक रहा है। आप एक ऐसी किताब की तरह हैं जिसके पन्ने अभी कोरे हैं। यह आपकी मर्जी है कि आप उस पर घिसे-पिटे दर्द भरे किस्से लिखते हैं या फिर एक ऐसी दास्तां जो आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल बन जाए। पुरानी कहानियां आपकी पहचान नहीं हैं, वे तो बस वे सबक हैं जो आपको अब आगे बढ़ने के लिए काम आएंगे। इन कहानियों से नाता तोड़िए, क्योंकि एक नई और शानदार कहानी आपका इंतजार कर रही है।


लेसन ३ : नई कहानी खुद लिखना

अब जब आपने अपने इनर क्रिटिक को पहचान लिया है और उन पुरानी, घिसी-पिटी कहानियों को अपने दिमाग से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, तो अब बारी है एक ऐसी नई कहानी लिखने की जो आपकी लाइफ की दिशा बदल दे। किंड्रा हॉल का तीसरा लेसन बहुत ही पावरफुल है। यह कहता है कि अपनी नई कहानी खुद लिखिए। ध्यान रखिए, अगर आप खुद अपनी कहानी नहीं लिखेंगे, तो दुनिया के लोग आपकी कहानी लिख देंगे और वे उसे बहुत ही बोरिंग और साधारण बना देंगे। क्या आप चाहते हैं कि लोग तय करें कि आपका किरदार कैसा होगा। क्या आप चाहते हैं कि कोई और बताए कि आपकी लिमिट क्या है। बिल्कुल नहीं। आप अपनी लाइफ के लेखक खुद हैं। यह आपके हाथ में है कि आप अगले पन्ने पर एक संघर्ष की कहानी लिखते हैं या एक शानदार जीत की दास्तां। नई कहानी लिखना मतलब एक ऐसा विजन तैयार करना जो आपको सुबह बिस्तर से उठने के लिए मजबूर कर दे।

बहुत से लोग नई कहानी लिखने के नाम पर केवल सपने देखते हैं। वे सोचते हैं कि काश मैं अमीर बन जाऊं या काश मैं फेमस हो जाऊं। लेकिन असली कहानी वह नहीं होती जो आप खयालों में देखते हैं। असली कहानी वह होती है जिसे आप हर दिन अपने छोटे-छोटे एक्शंस से सच करते हैं। जैसे एक फिल्म का हीरो सिर्फ एक सीन में हीरो नहीं बनता, वह तो पूरी फिल्म के हर छोटे हिस्से में अपना किरदार निभाता है। आप भी हर दिन जो काम कर रहे हैं, वह आपकी नई कहानी का एक हिस्सा है। अगर आप आज कुछ नया सीखने के लिए समय निकाल रहे हैं, तो आप अपनी कहानी में एक नया अध्याय जोड़ रहे हैं। अगर आप आज किसी मुश्किल काम से डरने के बजाय उसे पूरा कर रहे हैं, तो आप अपनी कहानी का एक हीरोइक पल लिख रहे हैं। यह सब बहुत छोटे काम लगते हैं, लेकिन यही छोटे-छोटे काम आपकी बड़ी कहानी बनाते हैं।

नई कहानी लिखते समय आपको एक बात का ध्यान रखना होगा। आपकी कहानी में सिर्फ जीत या सफलता की बातें नहीं होनी चाहिए। उसमें थोड़ी स्ट्रगल, थोड़ी मेहनत और थोड़े फेलियर भी होने चाहिए। असल में यही चीजें आपकी कहानी को यादगार बनाती हैं। अगर कोई फिल्म ऐसी हो जिसमें हीरो को कोई परेशानी न हो और वह सब कुछ आसानी से पा ले, तो आप उसे पांच मिनट भी नहीं देखेंगे। आप बोर हो जाएंगे। आपकी लाइफ की कहानी भी तभी दिलचस्प होगी जब आप उसमें आने वाली दिक्कतों का सामना करेंगे और उनसे जीतकर बाहर निकलेंगे। जब आप अपनी कहानी का ड्राफ्ट तैयार करें, तो उसमें यह जोड़ना मत भूलिए कि आपने गिरकर संभलना कैसे सीखा। यह हिस्सा लोगों को सबसे ज्यादा प्रेरित करता है। लोग आपकी जीत से ज्यादा आपके उस सफर से इंस्पायर होते हैं जो आपने मुश्किलों को पार करके तय किया है।


मैं आपसे यही कहूंगा कि अपनी नई कहानी को पूरे भरोसे के साथ जीजिए। अब तक जो हुआ वह आपकी पुरानी लाइफ थी, लेकिन आज का दिन आपकी नई कहानी का पहला दिन है। अपनी इस कहानी को रोज खुद को सुनाइए। जब भी आप खुद को कमजोर महसूस करें, तो अपनी नई कहानी के उस विजन को याद करिए जिसे आपने बड़े प्यार से लिखा है। आप कोई मामूली इंसान नहीं हैं। आप एक ऐसी ताकत हैं जो अपना रास्ता खुद बना सकती है। आज ही फैसला लीजिए कि आप कौन सी कहानी जीने वाले हैं। क्या आप एक ऐसे इंसान की कहानी चुनेंगे जो हमेशा डर में रहा या फिर उस इंसान की जो हर मुसीबत को धूल चटाकर अपनी मंजिल तक पहुंचा। चॉइस आपकी है और यकीन मानिए यह चॉइस ही आपकी पूरी लाइफ बदलने वाली है।

तो दोस्तों, अब देर किस बात की है। अपनी पुरानी स्क्रिप्ट को फाड़कर फेंक दीजिए और एक ऐसी नई और धाकड़ कहानी लिखना शुरू करिए जिसे दुनिया सालों तक याद रखे। अपनी लाइफ के हीरो बनिए क्योंकि आपको और किसी को नहीं, बल्कि खुद को साबित करना है। अगर आज का यह लेख आपको थोड़ा भी मोटिवेट कर पाया है, तो इसे उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिन्हें अपनी लाइफ की कहानी बदलने की सख्त जरूरत है। याद रखिए, आप ही अपनी लाइफ के बेस्ट राइटर हैं। कमेंट्स में लिखकर बताइए कि आज आप अपनी कौन सी नई कहानी की शुरुआत करने जा रहे हैं।

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