क्या आपको लगता है कि आप अकेले ही पूरी कंपनी का बोझ उठा सकते हैं। सच तो यह है कि बिना एक धाकड़ सेकंड इन कमांड के आप सिर्फ एक भागते हुए सर्कस के रिंगमास्टर हैं। लोग आपकी गलतियों पर हँस रहे हैं और आप खुद को स्मार्ट समझ रहे हैं।
आज हम इस बात पर बात करेंगे कि कैसे एक सही साथी के बिना आप अपनी ग्रोथ को खुद ही रोक रहे हैं। यह आर्टिकल आपकी आंखें खोलने के लिए काफी है क्योंकि यह आपको बताएगा कि कैसे एक असली सीओओ आपके बिजनेस की काया पलट सकता है।
लेसन १ : सीईओ और सीओओ का तालमेल ही कंपनी की असली ताकत है
अक्सर हमें लगता है कि बिजनेस का मतलब सिर्फ एक सुपरस्टार सीईओ है जो सूट पहनकर मंच पर भाषण देता है। यह ख्याल उतना ही बेवकूफी भरा है जितना कि बिना इंजन के सिर्फ टायर वाली कार चलाना। असलियत में अकेले काम करने की जिद आपकी कंपनी को रसातल में ले जाने के लिए काफी है। एक सीईओ हमेशा भविष्य के सपने देखता है और हवा में बातें करता है। अगर उसे नीचे जमीन पर लाने वाला और उसके सपनों को काम में बदलने वाला कोई साथी नहीं है तो वह सिर्फ एक सपना देखने वाला इंसान बनकर रह जाता है।
कैमरन हेरोल्ड इस किताब में यही समझाते हैं कि कैसे एक सीईओ और एक सीओओ का रिश्ता पति और पत्नी के तालमेल जैसा होना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या मैं ऑफिस में शादी की बात कर रहा हूँ। जी हाँ। अगर आप अपने सीओओ से प्यार नहीं करते या उसका सम्मान नहीं करते तो समझो कि आपकी कंपनी का तलाक होने वाला है। अक्सर लोग सीओओ को सिर्फ एक मैनेजर समझते हैं जो फाइलों पर दस्तखत करता है। यह सबसे बड़ी भूल है। एक सही सीओओ वो है जो आपकी हर बकवास बात को एक ठोस प्लान में बदल दे।
मान लीजिए आपका सीईओ एक दिन कहता है कि हमें कल सुबह तक मंगल ग्रह पर ब्रांच खोलनी है। एक बुरा सीओओ कहेगा कि सर यह नामुमकिन है और वहीं आपका करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन एक असली सेकंड इन कमांड कहेगा कि ठीक है हम इसके लिए रॉकेट साइंस टीम को हायर करते हैं और बजट प्लान करते हैं। वह आपकी पागलपन भरी सोच को एक बिजनेस मॉडल में बदल देता है।
मैंने अक्सर देखा है कि कई फाउंडर खुद को भगवान समझने की गलती करते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने काम नहीं किया तो दुनिया रुक जाएगी। भाई साहब आपकी कंपनी नहीं रुकेगी आप बस अपनी ग्रोथ का गला घोंट रहे हैं। जब आप हर छोटी बात में खुद को घुसाते हैं तो आप एक लीडर नहीं बल्कि एक रोने वाले बच्चे की तरह बन जाते हैं जो हर बात पर माँ को ढूंढता है।
आपका सीओओ वह है जो आपको आईना दिखाता है। वह आपको आपकी नाकामयाबियों के बारे में बिना डरे बताता है। जो इंसान आपको सच बोलने से डरता है वह आपका पार्टनर नहीं बल्कि आपका चाटुकार है। और याद रखिए चाटुकार लोग कभी बिजनेस नहीं बढ़ाते वे सिर्फ आपकी कुर्सी के पायें काटते हैं।
तो क्या आप तैयार हैं अपने ईगो को साइड में रखने के लिए। क्या आप एक ऐसे इंसान को अपने पास बिठा सकते हैं जो आपको कहे कि आप गलत हो। अगर हाँ तो आप बड़े लेवल पर जाने के लिए तैयार हैं। नहीं तो आप वही करेंगे जो बाकी भीड़ कर रही है। बस सपने देखना और आखिर में हाथ मलते रह जाना। यह लेसन आपको यह सिखाता है कि कंपनी में एक अकेला बंदा कभी नहीं जीत सकता। तालमेल ही वह चाबी है जो सफलता के बंद दरवाजे खोलती है।
लेसन २ : ऑपरेशंस को कंट्रोल में रखकर ही बिजनेस तेजी से स्केल होता है
अब जब आपने यह मान लिया है कि आपको एक पार्टनर की जरूरत है तो अगला बड़ा सवाल यह आता है कि आप काम कैसे करते हैं। ज्यादातर स्टार्टअप्स का हाल ऐसा है जैसे बिना ब्रेक वाली ट्रेन जो पूरी स्पीड से दीवार की तरफ जा रही है। लोग कहते हैं कि हम बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन असल में वे बस अफरा-तफरी बढ़ा रहे हैं। इसे बिजनेस नहीं बल्कि पागलपन कहते हैं। अगर आपके पास ऑपरेशंस का कोई सिस्टम नहीं है तो आप दिन भर बस आग बुझाने का काम करते रहेंगे।
कैमरन हेरोल्ड कहते हैं कि एक धाकड़ सेकंड इन कमांड का काम सिर्फ मीटिंग्स करना नहीं है बल्कि कंपनी का सिस्टम बनाना है। सोचिए आप एक रेस्टोरेंट चला रहे हैं और आपका रसोइया हर रोज एक नई रेसिपी बनाता है क्योंकि उसे प्रोसेस का पता नहीं है। क्या ग्राहक वापस आएगा। बिल्कुल नहीं। बिजनेस भी ऐसा ही है। अगर हर काम का तरीका अलग है तो क्वालिटी कभी नहीं आएगी। आप अपनी कंपनी को स्केल करने की बात करते हैं पर आपको यह भी नहीं पता कि आपका अगला आर्डर कैसे पूरा होगा। यह तो वही बात हुई कि आप रेस में भागने के लिए तैयार हैं पर आपने जूते ही नहीं पहने।
एक अच्छा सीओओ यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी की हर छोटी बड़ी प्रोसेस एक मशीन की तरह काम करे। वह ऐसी नीतियां बनाता है कि अगर आज सीईओ भी ऑफिस न आए तो भी काम न रुके। कई लोग इसे बोरियत भरा काम समझते हैं। उन्हें लगता है कि नियम बनाने से उनकी आजादी छिन जाएगी। भाई साहब आजादी के नाम पर आप अपनी कंपनी को कचरा बना रहे हैं। बिना सिस्टम के आप बस एक फ्रीलांसर हैं जो किसी और के लिए काम कर रहा है।
मैंने देखा है कि फाउंडर दिन भर ईमेल का जवाब देने और क्लाइंट्स को खुश करने में लगे रहते हैं। वे सोचते हैं कि यही असली बिजनेस है। जबकि असल बिजनेस तो वह है जहाँ आप पीछे हट जाएं और आपकी टीम अपना काम खुद कर ले। अगर आप ही सारा काम कर रहे हैं तो आपकी कंपनी एक दुकान है जो कभी बड़ा ब्रांड नहीं बन पाएगी। एक सही सीओओ आपके ऑपरेशंस को इतना टाइट रखता है कि आपको दिन में हजार बार फोन उठाने की जरूरत नहीं पड़ती।
जब ऑपरेशंस सही होते हैं तो ग्रोथ अपने आप तेज हो जाती है। आप बस अपने विजन पर ध्यान देते हैं और आपका पार्टनर उस विजन को जमीन पर उतारता है। यह जादू की तरह काम करता है। कई बार सीईओ को लगता है कि सीओओ उनके काम में दखल दे रहा है। अगर आपको भी ऐसा लग रहा है तो यकीन मानिए आप अभी भी अपनी पुरानी आदतों के गुलाम हैं। जो इंसान सिस्टम बनाने से डरता है वह कभी बड़ा साम्राज्य खड़ा नहीं कर पाएगा।
क्या आप अपनी कंपनी को एक प्रोफेशनल सेटअप में बदलना चाहते हैं। क्या आप चाहते हैं कि बिना आपकी मौजूदगी के भी आपका बिजनेस दौड़ता रहे। अगर जवाब हाँ है तो आपको आज ही अपने ऑपरेशंस पर काम करना होगा। याद रखिए जो चीज मापी नहीं जा सकती उसे बदला नहीं जा सकता। और जो बदला नहीं जा सकता वह कभी स्केल नहीं होता। अपने डर को छोड़िए और सिस्टम को अपनाइए। यही वह फर्क है जो एक आम बिजनेस को एक बड़ी कंपनी में बदल देता है।
लेसन ३ : एक शानदार सेकंड इन कमांड वही है जो सीईओ के विजन को हकीकत में बदल दे
बहुत सारे फाउंडर अपने विजन को लेकर इतने भावुक होते हैं कि उन्हें लगता है दुनिया का हर इंसान उसे समझ जाएगा। आप दिन भर अपनी कंपनी की कहानी सुनाते हैं और रात को खुद से पूछते हैं कि आखिर टीम को समझ क्यों नहीं आ रहा। यहाँ गलती टीम की नहीं आपकी है। आपने एक ऐसा इंसान अपनी टीम में रखा ही नहीं जो आपके उन धुंधले सपनों को स्पष्ट आदेशों में बदल सके। एक शानदार सेकंड इन कमांड वही है जो आपकी भाषा समझता है और उसे आम लोगों के लिए आसान बना देता है।
कल्पना कीजिए कि आप एक जहाज के कैप्टन हैं जो सबको बोल रहे हैं कि हमें दूसरी तरफ पहुंचना है। लेकिन आपके पास कोई दिशा-निर्देश देने वाला नहीं है जो बताए कि इंजन कैसे चलेगा और जहाज किस रास्ते जाएगा। आपका विजन बस एक खूबसूरत पेंटिंग बनकर रह जाएगा जो आपके ऑफिस की दीवार पर तो लटकेगी लेकिन उसे देखेगा कोई नहीं। एक सच्चा सीओओ वह होता है जो आपकी अधूरी बातों को पूरा करता है। जब आप बोर्ड मीटिंग में कुछ अटपटा बोलते हैं तो वही होता है जो उसे सलीके से पेश करके सबको कन्विंस करता है।
अक्सर फाउंडर्स को लगता है कि अगर उन्होंने काम को डेलीगेट कर दिया तो लोग उन्हें भूल जाएंगे। यह असुरक्षा की भावना आपकी कंपनी को डूबा देगी। एक अच्छा सीओओ आपकी चमक को कम नहीं करता बल्कि उसे और बढ़ा देता है। जब आपकी कंपनी का हर कर्मचारी यह जानता है कि उसे क्या करना है और क्यों करना है तो आप एक लीडर बन जाते हैं। बिना सेकंड इन कमांड के आप सिर्फ एक भागते हुए इंसान हैं जो खुद भी थका हुआ है और पूरी टीम को भी थका रहा है।
मैंने ऐसे कई फाउंडर्स देखे हैं जो अपने विजन को लेकर इतने जिद्दी होते हैं कि वे किसी की नहीं सुनते। उन्हें लगता है कि वे हमेशा सही हैं। ऐसे लोग अक्सर अकेले ही दौड़ते हैं और अंत में हाफ कर गिर जाते हैं। अगर आप अपने सीओओ पर भरोसा करना सीख जाएं तो आप अपना समय उन कामों में लगा सकते हैं जहाँ आपकी असलियत में जरूरत है। आपकी जगह मीटिंग्स अटेंड करना या ऑफिस की राजनीति सुलझाना नहीं है बल्कि नए मौके तलाशना है।
जो काम आप खुद कर सकते हैं उसे करने में कोई महानता नहीं है। महानता तो उस काम को करवाने में है जिसे आप नहीं कर सकते। आपका सीओओ आपकी वह ढाल है जो आपके विजन को हकीकत का रूप देकर बाजार में उतारता है। जब आपका विजन और उनकी मेहनत मिल जाती है तो एक बड़ी सफलता का जन्म होता है। तो अब वक्त आ गया है कि आप अपनी कुर्सी का मोह छोड़ें और किसी भरोसेमंद साथी को अपने साथ बैठाएं।
अगर आप अभी भी खुद को ही सब कुछ मानकर बैठे हैं तो आप एक बिजनेस नहीं एक छोटा सा काम चला रहे हैं। एक बड़े विजन के लिए बड़े सिस्टम की जरूरत होती है और एक बड़ा सिस्टम बिना एक शानदार सेकंड इन कमांड के नहीं बनता। क्या आप अपनी विरासत बनाने के लिए तैयार हैं या आप बस अपनी मेहनत के बोझ तले दबे रहना चाहते हैं। फैसला आपका है पर याद रहे वक्त किसी का इंतजार नहीं करता।
दोस्त, बिजनेस कोई अकेले का खेल नहीं है। अगर आप आज भी सब कुछ खुद कर रहे हैं तो आप अपनी ही कंपनी के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं। एक बेहतरीन सीओओ को हायर करना या अपनी टीम में से सही इंसान को चुनना आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आज ही इस किताब को पढ़ें और उन जरूरी बदलावों को लागू करें जो आपकी कंपनी को अगले स्तर पर ले जा सकते हैं। कमेंट्स में बताएं कि आप अपनी कंपनी में सबसे पहले कौन सा सिस्टम सुधारने वाले हैं और इस आर्टिकल को अपने उन साथी फाउंडर्स के साथ शेयर करें जो आज भी खुद को भगवान समझ रहे हैं।
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