बिना बड़ी डिग्री और बिना करोड़ों के फंड वाले लोग अक्सर चुपचाप अपना बड़ा बिजनेस खड़ा कर लेते हैं और आप अपनी महान नौकरी में सिर्फ बॉस की डांट और सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज ही गिनते रह जाते हैं। यह जलन अच्छी है दोस्त क्योंकि आप एक बहुत बड़ा मौका हाथ से निकाल रहे हैं।
क्या आप भी अपनी घिसी पिटी जिंदगी और रोज की वही बोरिंग समस्याओं से तंग आ चुके हैं। आज हम डैनी वॉरशे की बेहतरीन किताब सी सॉल्व स्केल की मदद से जानेंगे कि कैसे आम लोग अपनी रोज की दिक्कतों को एक बड़े और कामयाब बिजनेस में बदल देते हैं। चलिए इसके ३ सबसे दमदार और जरूरी लेसन्स को बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।
लेसन १ : सी - फाइंड अनसॉल्वड प्रॉब्लम्स
आप हर सुबह उठते हैं। वही पुरानी खराब बस या ट्रेन पकड़ते हैं। रास्ते के गड्ढों को कोसते हैं। ऑफिस पहुंचकर अपनी धीमी इंटरनेट स्पीड पर गुस्सा करते हैं और शाम को थककर घर लौट आते हैं। आप हर दिन समस्याओं का सामना करते हैं पर करते क्या हैं। सिर्फ शिकायत। डैनी वॉरशे कहते हैं कि यहीं आप अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं। जिस समस्या को आप रोज देखकर अनदेखा कर देते हैं वही असल में आपका अगला बड़ा बिजनेस आइडिया बन सकती है। आम लोग जिसे परेशानी समझकर रोते रहते हैं एक चतुर दिमाग वाला इंसान उसमें एक बड़ा अवसर देखता है।
लेखक इस प्रोसेस को See कहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि अपनी आंखें खुली रखना और उन अनसुलझी समस्याओं को ढूंढना जिन्हें लोग मजबूरी मानकर स्वीकार कर चुके हैं। हमारे आस-पास ऐसे कई उदाहरण हैं। सोचिए उस इंसान के बारे में जिसने पहली बार देखा कि लोग रात को ऑटो या कैब ढूंढने के लिए सड़क पर परेशान होते हैं। ड्राइवर मनमाना किराया मांगते हैं। आम इंसान इसे अपनी किस्मत मानकर चुप रहता था पर किसी ने इस समस्या को ध्यान से देखा और जन्म हुआ ओला या उबर जैसे बड़े बिजनेस का।
समस्याओं को देखने के लिए आपको किसी बहुत बड़ी लैब की जरूरत नहीं है। आपको बस अपने आस-पास के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को ध्यान से देखना है। वे किस बात पर गुस्सा होते हैं। उन्हें किस काम को करने में सबसे ज्यादा समय लगता है। वे किस चीज के लिए बार-बार शिकायत करते हैं। जब आप इन सवालों के जवाब ढूंढने निकलेंगे तो आपको एक नहीं बल्कि सैकड़ों बिजनेस आइडिया मिलेंगे। लेकिन इसके लिए आपको अपनी शिकायत करने वाली आदत को छोड़कर एक ऑब्जर्वर बनना होगा।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बिजनेस शुरू करने के लिए कोई अनोखा और जादुई आइडिया चाहिए। यह सोच बिल्कुल गलत है। दुनिया के सबसे सफल स्टार्टअप किसी अनोखे आइडिया से नहीं बल्कि बहुत ही साधारण और आम समस्या को पहली बार सही तरीके से देखने की वजह से शुरू हुए हैं। जब तक आप समस्या को गहराई से नहीं देखेंगे तब तक आप उसका कोई सही समाधान नहीं निकाल पाएंगे। इसलिए अपनी आंखें और कान खुले रखिए क्योंकि आपके आस-पास ही आपका अगला बड़ा सक्सेस छुपा हुआ है।
यह लेसन हमें सिखाता है कि समस्याओं से भागना बंद करो और उन्हें एक खजाने की तरह देखना शुरू करो। लेकिन सिर्फ समस्या को देख लेना ही काफी नहीं होता। असली खेल तो तब शुरू होता है जब आप उस समस्या का एक ऐसा समाधान निकालते हैं जो लोगों की जिंदगी को सच में आसान बना दे। इसी समाधान को कैसे तैयार करना है और बिना पैसे के कैसे शुरुआत करनी है यह हम अगले लेसन में विस्तार से समझेंगे।
लेसन २ : सॉल्व - डिजाइन ए क्रिएटिव सॉल्यूशन
जब आप आंखें खोलकर किसी बड़ी समस्या को देख लेते हैं तो आपके अंदर का जोश सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। आप सोचते हैं कि अब तो मैं सीधे करोड़ों का लोन लूंगा। एक बहुत आलीशान ऑफिस किराए पर लूंगा। सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की एक बड़ी फौज खड़ी करूंगा और रातों-रात कोई जादुई ऐप बनाकर अमीर बन जाऊंगा। डैनी वॉरशे कहते हैं कि ठहरिए। अपनी इस फिल्मी सोच पर थोड़ा ब्रेक लगाइए। यह आपके अमीर बनने का नहीं बल्कि सड़क पर आने का सबसे सीधा रास्ता है। जब आपके पास बड़ा बजट नहीं होता तो बड़ा रिस्क लेना बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी है।
लेखक इस दूसरे कदम को Solve कहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि समस्या का समाधान बहुत ही छोटे और सस्ते स्तर पर शुरू करना। आपको पहले ही दिन एक परफेक्ट और चमचमाती हुई चीज बनाने की कोई जरूरत नहीं है। आपको बस एक बहुत ही साधारण और कच्चा मॉडल बनाना है जिसे बिजनेस की भाषा में प्रोटोटाइप कहते हैं। इस काम के लिए आपको अपनी जेब से लाखों रुपये फूंकने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। आपको बस अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके कम से कम खर्चे में यह देखना है कि क्या लोग आपके समाधान को पसंद कर रहे हैं।
मान लीजिए कि आपने देखा कि आपके इलाके में लोगों को शुद्ध और घर जैसा खाना नहीं मिल रहा है। अब एक तरीका यह है कि आप अपनी नौकरी छोड़ें। अपनी जमा पूंजी दांव पर लगाएं और एक बड़ा रेस्टोरेंट खोल लें। अगर खाना लोगों को पसंद नहीं आया तो आप पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। लेकिन एक चतुर इंसान क्या करेगा। वह पहले दिन सिर्फ पांच टिफिन अपने घर की रसोई में तैयार करेगा। वह अपने आस-पास के पांच कामकाजी लोगों को बहुत ही कम दाम में वह खाना खिलाकर देखेगा।
जब वह पांच लोग उस खाने की तारीफ करेंगे और अगले दिन फिर से खाना मांगेंगे तब आपको समझ आएगा कि आपका समाधान सही रास्ते पर है। इसे ही कहते हैं अपनी जेब को सुरक्षित रखकर बिजनेस के आइडिया को परखना। जब आपके पहले पांच ग्राहक खुश होते हैं तो वे खुद ही आपके लिए पांच और नए ग्राहक ढूंढकर लाते हैं। आपको किसी बहुत बड़े विज्ञापन या मार्केटिंग की जरूरत नहीं पड़ती। आपका काम ही आपकी पहचान बनने लगता है।
ज्यादातर नए जोश वाले उद्यमी इसी स्टेप पर मात खा जाते हैं। वे सीधे आसमान छूना चाहते हैं और जमीन पर पैर रखना भूल जाते हैं। वे महीनों तक सिर्फ प्लानिंग करते रहते हैं। बड़े-बड़े प्रेजेंटेशन बनाते हैं पर हकीकत में एक भी ग्राहक से बात नहीं करते। लेखक कहते हैं कि आपका सबसे बड़ा गुरु आपका पहला ग्राहक है। उसके पास जाइए। उसे अपना बहुत ही साधारण सा समाधान दिखाइए। उसका फीडबैक लीजिए और अपने काम को हर दिन थोड़ा-थोड़ा बेहतर बनाते जाइए।
यह लेसन हमें सिखाता है कि शुरुआत हमेशा छोटी और असरदार होनी चाहिए। जब आप बिना बड़े खर्चे के अपनी बात को सही साबित कर देते हैं तो आपका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन कहानी सिर्फ एक छोटे से टिफिन सर्विस या एक छोटे समाधान पर आकर नहीं रुक जाती। असली चुनौती तो तब आती है जब इस छोटे से समाधान को बहुत बड़े स्तर पर ले जाना हो ताकि आप सोते हुए भी पैसा कमा सकें। इस छोटे समाधान को एक विशाल साम्राज्य में कैसे बदलना है यह हम अगले और सबसे आखिरी लेसन में बहुत ही बारीकी से समझेंगे।
लेसन ३ : स्केल - एक्सपैंड द इम्पैक्ट
जब आप एक छोटी शुरुआत करके अपने समाधान को सही साबित कर देते हैं तो असली चुनौती अब शुरू होती है। आपके पास पांच या दस खुश ग्राहक हैं जो आपके काम की तारीफ कर रहे हैं। आपकी जेब में कुछ पैसे भी आने लगे हैं। अब आप सोचते हैं कि बस जिंदगी सेट है। हर महीने इतना पैसा आ रहा है और मैं आराम से अपनी छोटी दुकान चलाऊंगा। डैनी वॉरशे कहते हैं कि अगर आप यहीं रुक गए तो आप एक बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। एक छोटा समाधान आपको कुछ समय की रोटी दे सकता है पर वह आपको कभी एक बड़ा साम्राज्य बनाकर नहीं दे सकता। असली उद्यमी वह नहीं है जो सिर्फ एक छोटी दुकान चलाए। असली उद्यमी वह है जो अपने काम को इतना बड़ा बनाए कि उसका असर पूरी दुनिया पर दिखे।
लेखक इस तीसरे और आखिरी कदम को Scale कहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि अपने छोटे से समाधान को एक बहुत बड़े और लंबे समय तक चलने वाले बिजनेस मॉडल में बदलना। स्केल करने का मतलब यह नहीं है कि आप दिन-रात खुद ज्यादा काम करने लगें। अगर आप खुद ही हर काम करेंगे तो एक दिन थककर चूर हो जाएंगे। स्केल करने का असली मतलब है एक ऐसा सिस्टम बनाना जो आपके बिना भी उतनी ही तेजी से काम कर सके। आपको अपनी जगह पर सही लोगों को रखना होगा। सही तकनीक का इस्तेमाल करना होगा और अपने काम करने के तरीके को एक नियम में बांधना होगा ताकि आपका बिजनेस आपके सोने के बाद भी आपके लिए पैसा बनाता रहे।
इसे हम अपने पिछले टिफिन वाले उदाहरण से जोड़कर देखते हैं। आपने पांच टिफिन से शुरुआत की थी और लोग आपके हाथ के स्वाद के दीवाने हो गए। अब अगर आप खुद ही सुबह उठकर पचास लोगों का खाना बनाने लगेंगे तो आपकी कमर टूट जाएगी और खाने का स्वाद भी खराब हो जाएगा। एक समझदार इंसान यहाँ पर स्केल का नियम अपनाएगा। वह दो अच्छे रसोइए रखेगा। खाना पैक करने के लिए एक लड़का रखेगा और एक छोटी सी वेबसाइट या ऐप के जरिए पूरे शहर से ऑर्डर लेना शुरू करेगा। अब वह खुद खाना नहीं बना रहा है बल्कि वह उस पूरे सिस्टम को संभाल रहा है। इसे ही कहते हैं एक छोटे से आइडिया को एक बड़े ब्रांड में बदल देना।
ज्यादातर लोग स्केल करने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि काम बड़ा करने से उनका कंट्रोल खत्म हो जाएगा या उनका नुकसान हो जाएगा। यह डर स्वाभाविक है पर इस डर के पीछे छिपी सच्चाई को समझिए। अगर आप अपने बिजनेस को स्केल नहीं करेंगे तो कोई दूसरा आएगा और आपके आइडिया को कॉपी करके आपसे बड़ा बन जाएगा। दुनिया में हर रोज नए बदलाव हो रहे हैं और जो बिजनेस समय के साथ बड़ा नहीं होता वह धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। इसलिए जब आपका समाधान काम करने लगे तो तुरंत उसे बड़े स्तर पर ले जाने की प्लानिंग शुरू कर दीजिए।
यह तीसरा लेसन हमें सिखाता है कि अपनी सोच को कभी भी छोटा मत रखिए। पहले लेसन में हमने समस्या को देखना सीखा। दूसरे लेसन में हमने उसका एक छोटा और प्यारा सा समाधान निकाला। अब इस तीसरे लेसन में हमने उस समाधान को एक विशाल रूप देना सीख लिया है। जब आप इन तीनों कदमों को एक साथ जोड़ देते हैं तो आप सिर्फ एक बिजनेस नहीं खड़ा करते बल्कि आप एक बहुत बड़ी कामयाबी की कहानी लिखते हैं। यही वह तरीका है जिससे दुनिया के बड़े-बड़े स्टार्टअप्स ने जन्म लिया है और आज वे राज कर रहे हैं।
अगर आप भी अपनी वही घिसी पिटी और बोरिंग जिंदगी से परेशान हैं तो आज ही अपने आस-पास की दिक्कतों को देखना शुरू कीजिए। क्या पता आपकी अगली बड़ी सफलता बस एक समस्या को सही से देखने की दूरी पर हो।
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