Split the Pie (Hindi)


क्या आप भी हर बिजनेस डील या सैलरी डिस्कशन में खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं? बधाई हो, आप अकेले नहीं हैं। दुनिया के अधिकतर लोग नेगोशिएशन के नाम पर बस अपनी बेइज्जती करवा कर आते हैं और सोचते हैं कि उन्होंने बहुत तीर मार लिया। अगर आप भी इसी तरह अपनी मेहनत की मलाई दूसरों को मुफ्त में बांट रहे हैं, तो यकीन मानिए आप बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं।

आज हम बैरी नेलबफ की बेहतरीन किताब स्प्लिट द पाई की मदद से नेगोशिएशन का वह सीक्रेट तरीका जानेंगे जो आपको हर डील का असली विनर बनाएगा। आइए इस किताब के तीन सबसे महत्वपूर्ण लेसन को बहुत ही आसान और मजेदार तरीके से समझते हैं।


लेसन १ : असली पाई को पहचानना सीखो वरना जिंदगी भर धोखा खाओगे

क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा झूठ क्या है? वह झूठ यह है कि नेगोशिएशन का मतलब है सामने वाले को लूट लेना। अधिकतर लोग जब किसी डील के लिए बैठते हैं तो उनका दिमाग एक छोटे बच्चे जैसा हो जाता है। मुझे सब चाहिए। मुझे ज्यादा हिस्सा चाहिए। सामने वाले को कम मिलना चाहिए। बैरी नेलबफ कहते हैं कि यहीं पर आप सबसे बड़ी गलती करते हैं। आप उस पाई को ही नहीं समझ पाते जिसके लिए आप लड़ रहे हैं।

सोचिए दो लोग मिलकर एक नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। पहला इंसान कहता है कि आइडिया मेरा है इसलिए मुझे सत्तर परसेंट चाहिए। दूसरा कहता है कि पैसा मेरा है इसलिए मुझे सत्तर परसेंट चाहिए। अब दोनों मिलकर एक ऐसी चीज पर लड़ रहे हैं जो अभी तक बनी ही नहीं है। यह वैसी ही बेवकूफी है जैसे बिना मुर्गी खरीदे उसके अंडों का ऑमलेट बनाने की तैयारी करना।

किताब हमें सिखाती है कि नेगोशिएशन में दो तरह की वैल्यू होती है। एक वह जो आप अकेले भी कमा सकते हैं। दूसरी वह जो सिर्फ साथ आने से बनती है। असली पाई वही एक्स्ट्रा वैल्यू है जो दोनों के मिलने से पैदा हुई है। अगर आप अकेले रहकर दस हजार कमाते हैं और दूसरा इंसान अकेले रहकर बीस हजार कमाता है। अब अगर आप दोनों साथ आते हैं और मिलकर पचास हजार कमाते हैं। तो यहाँ असली पाई पचास हजार नहीं है। असली पाई है वह एक्स्ट्रा बीस हजार जो आपके साथ आने से बने हैं।

लोग अक्सर इस बेसिक गणित को भूल जाते हैं। वे टोटल अमाउंट पर नजर गड़ाए रहते हैं। वे सोचते हैं कि जो ज्यादा चिल्लाएगा उसे ज्यादा मिलेगा। जो टेबल पर हाथ पटकेगा वह जीत जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि ऐसी सोच रखने वाले लोग केवल अपना नुकसान करते हैं। जब आप असली पाई को नहीं देखते तो आप सामने वाले को अपना दुश्मन मान लेते हैं। आप भूल जाते हैं कि अगर वह इंसान नहीं होगा तो वह एक्स्ट्रा वैल्यू कभी बनेगी ही नहीं।

इसलिए अगली बार जब आप किसी सैलरी डिस्कशन या बिजनेस डील में बैठें तो पहले ठंडे दिमाग से सोचें। यह देखें कि आपके और सामने वाले के मिलने से क्या नया क्रिएट हो रहा है। वह क्या चीज है जो आपके बिना अधूरी है और उसके बिना नामुमकिन है। जब आप इस एक्स्ट्रा वैल्यू यानी असली पाई को देखना सीख जाएंगे तो आपकी आधी लड़ाई वहीं खत्म हो जाएगी। आप एक लालची इंसान की तरह नहीं बल्कि एक समझदार लीडर की तरह बात करेंगे। सामने वाला भी आपकी बात सुनेगा क्योंकि उसे दिखेगा कि आप केवल अपना फायदा नहीं सोच रहे हैं। आप उस वैल्यू को बड़ा कर रहे हैं जो आप दोनों के भविष्य को बदल सकती है।


लेसन २ : बराबरी का हकदार वही है जो पाई को आधा आधा बांटना जानता है

जब असली पाई सामने आ जाती है तो असली खेल शुरू होता है। लोग यहाँ पर आकर सबसे बड़े चतुर बनने की कोशिश करते हैं। वे सोचने लगते हैं कि अब सामने वाले को कैसे कम से कम हिस्से पर राजी किया जाए। पहला पार्टनर सोचेगा कि मैं ज्यादा समझदार हूँ तो मुझे साठ परसेंट मिलना चाहिए। दूसरा सोचेगा कि मेरी मार्केट में इज्जत ज्यादा है तो मुझे साठ परसेंट मिलना चाहिए। बैरी नेलबफ कहते हैं कि यह सोच ही नेगोशिएशन को खत्म कर देती है।

किताब हमें एक बहुत ही सीधा और सच्चा नियम सिखाती है। वह नियम है बराबरी का हक। जब आपने वह एक्स्ट्रा वैल्यू यानी असली पाई पहचान ली है जो आप दोनों के साथ आने से बनी है, तो उस पर दोनों का बराबर का अधिकार है। उसे सीधा आधा आधा बांटना ही सबसे सही तरीका है। लोग इस बात को पचा नहीं पाते। उनका अहंकार बीच में आ जाता है। वे सोचते हैं कि अगर मैंने आधा दे दिया तो मैं बड़ा खिलाड़ी कैसे कहलाऊँगा।

सोचिए दो दोस्त मिलकर एक पुरानी कार खरीदते हैं। एक दोस्त को कार की मरम्मत करना आता है और दूसरे को उसे अच्छे दाम पर बेचना आता है। दोनों मिलकर उस कार से बीस हजार का मुनाफा कमाते हैं। अब मरम्मत करने वाला कहता है कि अगर मैं पसीना न बहाता तो कार कबाड़ रहती इसलिए मुझे पंद्रह हजार चाहिए। बेचने वाला कहता है कि अगर मैं ग्राहक न लाता तो कार गैरेज में ही सड़ती इसलिए मुझे पंद्रह हजार चाहिए। दोनों खुद को ऊपर दिखाने की रेस में लग जाते हैं।

वे यह भूल जाते हैं कि अगर दोनों में से एक भी पीछे हट जाता तो वह बीस हजार का मुनाफा कभी पैदा ही नहीं होता। वह मुनाफा दोनों की वजह से है। इसलिए उस मुनाफे पर दोनों का पचास पचास परसेंट का हक है। जब आप इस बात को स्वीकार कर लेते हैं तो आपके बीच का टकराव खत्म हो जाता है। सामने वाले को भी लगता है कि आप उसके काम की इज्जत कर रहे हैं। नेगोशिएशन का मतलब किसी को दबाना नहीं बल्कि साथ मिलकर आगे बढ़ना है।

अक्सर लोग सोचते हैं कि जो इंसान ज्यादा चालाक है वह ज्यादा हिस्सा लेकर जाएगा। लेकिन सच यह है कि ऐसी चालाकी केवल एक बार काम आती है। अगली बार आपके साथ कोई डील नहीं करना चाहेगा। मार्केट में आपकी इमेज एक लालची इंसान की बन जाएगी। बैरी नेलबफ हमें दूर की सोचने की सलाह देते हैं। जब आप पाई को बराबर बांटते हैं तो आप एक मजबूत रिश्ता बनाते हैं। वह रिश्ता आपको भविष्य में और बड़ी डील्स दिलाता है।

इसलिए अपने अंदर के इस लालच को बाहर निकालिए। सामने वाले को अपना पार्टनर समझिए, कोई दुश्मन नहीं। जब आप टेबल पर बैठकर साफ दिल से कहेंगे कि जो भी एक्स्ट्रा फायदा होगा उसे हम आधा आधा बांटेंगे, तो सामने वाले का भरोसा आप पर सौ गुना बढ़ जाएगा। वह आपके साथ मिलकर काम करने के लिए और ज्यादा मेहनत करेगा। यही एक सच्चे और सफल बिजनेसमैन की असली पहचान होती है।


लेसन ३ : पावर का असली सच और गेम बदलने वाली आखिरी चाल

जब आप असली पाई को पहचान लेते हैं और उसे आधा आधा बांटने के लिए तैयार हो जाते हैं, तब आता है इस खेल का सबसे खतरनाक पड़ाव। लोग सोचते हैं कि नेगोशिएशन में जिसके पास ज्यादा पावर है, वह पूरी बाजी मार ले जाएगा। जिसके पास बड़ी गाड़ी है, बड़ा नाम है या ज्यादा पैसा है, वह सामने वाले को अपनी उंगलियों पर नचाएगा। लेकिन बैरी नेलबफ कहते हैं कि यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। पावर का मतलब सामने वाले को डराना या दबाना नहीं होता। पावर का असली मतलब होता है उस डील को टूटने से बचाना और उसे बड़ा बनाना।

सोचिए एक बहुत बड़ी कंपनी एक छोटे से स्टार्टअप को खरीदना चाहती है। बड़ी कंपनी के पास बहुत पैसा है और बहुत बड़ी वकीलों की टीम है। वे सोचते हैं कि हम इस छोटे स्टार्टअप को बहुत कम पैसों में समेट देंगे। वे अपनी पावर का धौंस दिखाते हैं। लेकिन छोटा स्टार्टअप जानता है कि उनके पास एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसके बिना बड़ी कंपनी का काम आगे नहीं बढ़ सकता। अब यहाँ असली पावर किसके पास है? क्या उस बड़ी कंपनी के पास जिसके पास पैसा है? या उस छोटे स्टार्टअप के पास जिसके पास वह अनोखा आइडिया है? सच तो यह है कि पावर दोनों के पास है। लेकिन अगर दोनों अपनी पावर का इस्तेमाल एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए करेंगे, तो डील कभी होगी ही नहीं।

किताब हमें सिखाती है कि अपनी ताकत का घमंड दिखाने वाले लोग अंत में अकेले रह जाते हैं। जब आप अपनी पावर का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आप सामने वाले को यह भरोसा दिलाते हैं कि आपका साथ उनके लिए कितना जरूरी है। आप अपनी पावर से पाई का साइज बड़ा करते हैं। आप एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ सामने वाला असुरक्षित महसूस नहीं करता। वह समझ जाता है कि आप उसके साथ मिलकर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं।

अक्सर लोग नेगोशिएशन टेबल पर अपनी बात मनवाने के लिए अड़ जाते हैं। वे सोचते हैं कि झुकना कमजोरी की निशानी है। लेकिन समझदारी इसी में है कि आप कहाँ झुक रहे हैं और क्यों झुक रहे हैं। अगर थोड़ा सा झुकने से एक बहुत बड़ी डील पक्की होती है और एक लंबा चलने वाला पार्टनरशिप का रिश्ता बनता है, तो वह आपकी कमजोरी नहीं बल्कि आपकी सबसे बड़ी समझदारी है। दुनिया के सबसे सफल बिजनेसमैन कभी भी टेबल पर चिल्लाते नहीं हैं। वे बहुत शांति से अपनी बात रखते हैं और सामने वाले को अपनी पावर का अहसास बिना कहे करा देते हैं।


तो दोस्तों, नेगोशिएशन कोई जंग नहीं है जिसे आपको जीतना है और सामने वाले को हराना है। यह तो एक खूबसूरत डांस है जहाँ दोनों को ताल से ताल मिलाकर चलना होता है। जब आप असली पाई को ढूंढना सीख जाते हैं, उसे बिना किसी लालच के आधा आधा बांटने का दम रखते हैं और अपनी पावर का इस्तेमाल रिश्ता बनाने के लिए करते हैं, तो आप सिर्फ एक डील नहीं जीतते, आप मार्केट में अपना एक नाम बनाते हैं। अब यह आपके हाथ में है कि आप एक लालची नेगोशिएटर बनना चाहते हैं या एक स्मार्ट और कामयाब लीडर जो सबके साथ मिलकर आगे बढ़ता है। आज ही अपनी सोच बदलिए, असली पाई को पहचानिए और अपनी हर डील को एक बड़ी सक्सेस में बदल दीजिए।

-----






#BookSummary #NegotiationSkills #BusinessStrategy #PersonalGrowth #SuccessTips


_

Post a Comment

Previous Post Next Post