क्या आप भी हर मीटिंग में पूरी तैयारी के साथ जाते हैं पर लोग आपकी बात को अनसुना कर देते हैं। बधाई हो आप उन लाखों लोगों में शामिल हैं जो बिना जाने गलत सिग्नल्स भेज रहे हैं। जब आप नर्वस होकर पैर हिलाते हैं या बिना कॉन्फिडेंस के हाथ मिलाते हैं तो लोग आपकी मेहनत को नहीं बल्कि आपकी कमजोरी को देखते हैं। इस अनजान गलती के कारण आप अपनी लाइफ में प्रमोशन और अच्छे रिश्ते दोनों खो रहे हैं।
घबराइए मत इस नुकसान से बचने का रास्ता बहुत आसान है। आज हम डीवाई बुक्स पर वनेसा वैन एडवर्ड्स की शानदार किताब क्युज के तीन सबसे असरदार और प्रैक्टिकल लेसन के बारे में बात करेंगे। यह लेसन आपको बातचीत की गुप्त भाषा सिखाकर एक बेहद प्रभावशाली और आकर्षक इंसान बनने में मदद करेंगे।
लेसन १ : वर्बल और नॉन वर्बल क्युज का सही बैलेंस
मान लीजिए आप एक बहुत जरूरी जॉब इंटरव्यू में बैठे हैं। आपके सामने बैठे इंटरव्यूअर ने आपसे एक सीधा सवाल पूछा। आपने रात भर रट्टा मारकर तैयार किया हुआ एक बेहद शानदार और भारी भरकम शब्दों वाला जवाब दे दिया। आपको लगता है कि आपने मैदान मार लिया है। लेकिन रुकिए। ठीक उसी समय आपके पैर लगातार कांप रहे थे। आपके हाथ टेबल के नीचे आपस में बुरी तरह से उलझ रहे थे। आपकी आवाज में एक अजीब सी घबराहट साफ महसूस हो रही थी।
अब आप खुद सोचिए कि वह सामने बैठा मैनेजर आपकी बातों पर भरोसा करेगा या आपकी बॉडी लैंग्वेज पर। जवाब सीधा है। वह आपकी कांपती हुई आवाज और हिलते पैरों को देखेगा। हमारा दिमाग शब्दों से ज्यादा सामने वाले के सिग्नल्स को पकड़ता है। जब आपके शब्द कुछ और कहते हैं और आपकी बॉडी कुछ और कहानी बयां करती है तो समझो खेल खत्म। लोग तुरंत समझ जाते हैं कि दाल में कुछ काला है।
अक्सर हमें सिखाया जाता है कि इंटरव्यू या मीटिंग में क्या बोलना चाहिए। लोग बड़े बड़े शब्दों की लिस्ट रट लेते हैं। लेकिन कोई यह नहीं बताता कि बोलते समय बैठना कैसे है। अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना कितना जरूरी है। सामने वाले की आंखों में देखकर बात करना कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर आपके शब्द बहुत दमदार हैं पर आपकी नजरें फर्श को चूम रही हैं तो आपका पूरा प्रभाव एक पल में गायब हो जाता है।
इस पहले लेसन का सबसे बड़ा सच यही है। आपके मुँह से निकले शब्द और आपकी बॉडी से निकले सिग्नल्स दोनों एक ही दिशा में चलने चाहिए। जब आप कहें कि आप इस काम को करने के लिए पूरी तरह से तैयार और कॉन्फिडेंट हैं तो आपके कंधे भी पीछे की तरफ होने चाहिए। आपके चेहरे पर एक हल्की और रिलैक्स्ड मुस्कान होनी चाहिए। आपकी वॉइस टोन में एक ठहराव होना चाहिए।
जब आप इन दोनों चीजों को आपस में मिला देते हैं तो एक जादू होता है। लोग आपकी बात को सिर्फ सुनते नहीं हैं बल्कि उस पर पूरा भरोसा भी करते हैं। इसे ही करिश्माई कम्युनिकेशन कहते हैं। यह कोई पैदाइशी हुनर नहीं है बल्कि एक ऐसी आर्ट है जिसे सही सिग्नल्स को समझकर कोई भी सीख सकता है।
लेसन २ : वार्मथ और कॉम्पिटेंस का कॉम्बिनेशन
जब आप अपने शब्दों और बॉडी लैंग्वेज को एक साथ मिलाना सीख जाते हैं तो असली परीक्षा शुरू होती है। अब आपको दुनिया के सामने अपनी असली पर्सनैलिटी को पेश करना होता है। समाज में दो तरह के लोग सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं। पहले वो जो बहुत सीधे और प्यारे होते हैं। वो हर किसी की बात पर मुस्कुराते हैं। हर काम के लिए हाँ कह देते हैं। लोग उन्हें बहुत पसंद तो करते हैं पर उनको कभी कोई बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन नहीं देते। लोग सोचते हैं कि यह इंसान बहुत अच्छा है पर इसके बस की कुछ नहीं है।
अब बात करते हैं दूसरे तरह के लोगों की। यह लोग अपने काम में बहुत उस्ताद होते हैं। उनके पास हर समस्या का हल होता है। लेकिन उनका स्वभाव बहुत कड़क और खूसट होता है। वो किसी से सीधे मुँह बात नहीं करते। लोग उनके काम की इज्जत तो करते हैं पर उनके पास बैठने से भी डरते हैं। मौका मिलते ही लोग ऐसे खडूस बॉस या कलीग से पीछा छुड़ा लेते हैं।
अब आप खुद से पूछिए कि आप इन दोनों में से कौन सा इंसान बनना चाहते हैं। वनेसा कहती हैं कि एक महान और करिश्माई लीडर बनने के लिए आपको इन दोनों का मिक्सचर बनना होगा। इसे साइंस की भाषा में वार्मथ और कॉम्पिटेंस का बैलेंस कहते हैं। वार्मथ का मतलब है कि आप लोगों के लिए कितने मददगार और दयालु हैं। कॉम्पिटेंस का मतलब है कि आप अपने काम में कितने काबिल और होशियार हैं।
अगर आप सिर्फ वार्मथ दिखाएंगे तो लोग आपको कमजोर समझकर आपका फायदा उठाएंगे। अगर आप सिर्फ कॉम्पिटेंस दिखाएंगे तो लोग आपको घमंडी समझकर आपसे दूर भागेंगे। इसलिए आपको बातचीत के दौरान इन दोनों सिग्नल्स को एक साथ भेजना सीखना होगा।
जब आप किसी मीटिंग में बैठें तो सामने वाले की बात को ध्यान से सुनें और अपने सिर को हल्का सा झुकाकर मुस्कुराएं। यह आपकी वार्मथ को दिखाता है। इसके ठीक बाद जब आप बोलना शुरू करें तो अपनी आवाज को थोड़ा गहरा करें और ठोस तथ्यों के साथ अपनी बात रखें। यह आपकी काबिलियत यानी कॉम्पिटेंस को दिखाता है। जब लोग आपके अंदर यह दोनों चीजें एक साथ देखते हैं तो वो आपके दीवाने हो जाते हैं। वो न सिर्फ आपकी इज्जत करते हैं बल्कि आपसे दिल से जुड़ना भी चाहते हैं।
यह बैलेंस आपको एक ऐसा लीडर बनाता है जिसके लिए लोग अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं। लेकिन इस बैलेंस को बनाए रखने के लिए आपको बातचीत के दौरान आने वाले खतरों से भी बचना होगा। जिसके बारे में हम अगले लेसन में जानेंगे।
लेसन ३ : खतरे के सिग्नल्स को पहचानना
जब आप अपनी बातों और बॉडी लैंग्वेज में बैलेंस बनाना सीख जाते हैं और वार्मथ के साथ कॉम्पिटेंस का तड़का भी लगा लेते हैं तब आप कामयाबी की राह पर तेजी से बढ़ने लगते हैं। लेकिन इस सफर में सबसे बड़ा ट्विस्ट अभी बाकी है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप किसी से बहुत प्यार से बात कर रहे होते हैं और अपनी पूरी काबिलियत दिखा रहे होते हैं ठीक उसी समय सामने वाला इंसान मन ही मन आपके खिलाफ कोई खिचड़ी पका रहा हो। जी हां लाइफ इतनी सिंपल नहीं होती। आपके रास्ते में कई ऐसे लोग भी आएंगे जो मुँह पर तो आपके साथ होने का दिखावा करेंगे पर अंदर ही अंदर आपको नुकसान पहुँचाने की ताक में बैठे होंगे।
वनेसा कहती हैं कि एक स्मार्ट लीडर वही है जो बातचीत के दौरान सामने वाले के चेहरे और बॉडी पर आने वाले खतरे के छोटे सिग्नल्स को तुरंत पकड़ ले। इसे साइंस में डेंजर क्युज कहते हैं। मान लीजिए आप अपने ऑफिस में अपने नए प्रोजेक्ट का आईडिया सबके सामने रख रहे हैं। आपका बॉस आपकी बात सुनकर सिर हिला रहा है। लेकिन ध्यान से देखिए। ठीक उसी पल उसने अपने दोनों होठों को अंदर की तरफ दबा लिया है और उसकी भौंहें थोड़ी सी सिकुड़ गई हैं।
अगर आप एक आम इंसान हैं तो आप सोचेंगे कि बॉस को आपकी बात बहुत अच्छी लग रही है। लेकिन अगर आपने क्युज की इस सीक्रेट भाषा को पढ़ा है तो आप तुरंत समझ जाएंगे कि बॉस को आपका आईडिया बिलकुल पसंद नहीं आया है या वह आपकी किसी बात से पूरी तरह असहमत है। होठों का इस तरह सिकुड़ना मन के अंदर छिपे गुस्से या अविश्वास को दिखाता है। यह एक रेड फ्लैग है।
अगर आप इस सिग्नल को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं तो मीटिंग खत्म होने के बाद आपको सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी। लेकिन एक करिश्माई कम्युनिकेटर इस खतरे को भांपते ही अपनी बात का गियर बदल देता है। वह तुरंत रुककर बॉस से पूछ सकता है कि क्या इस प्लान में हमें कुछ और बदलाव करने की जरूरत है। ऐसा करते ही आप खेल को बिगड़ने से पहले ही संभाल लेते हैं।
यह हुनर आपको सिर्फ ऑफिस में ही नहीं बल्कि आपके पर्सनल रिश्तों में भी बड़े नुकसान से बचाता है। जब आपका पार्टनर आपसे कहे कि सब कुछ ठीक है पर उसकी आँखें साइड में देख रही हों या वह अपने हाथों को अपनी छाती पर कसकर बांध ले तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है। सामने वाला इंसान आपसे सच छुपा रहा है या वह उस बातचीत से दूर भागना चाहता है।
इन संकेतों को पहचानना कोई जादू नहीं है बल्कि एक साइंस है। जब आप बातचीत के पहले लेसन यानी वर्बल और नॉन वर्बल के बैलेंस को समझ लेते हैं और दूसरे लेसन यानी वार्मथ और कॉम्पिटेंस को अपना लेते हैं तब यह तीसरा लेसन आपको दुनिया के हर धोखे और नुकसान से बचाने के लिए एक ढाल की तरह काम करता है। इन तीनों लेसन को मिलाकर ही आप एक ऐसे परफेक्ट इंसान बनते हैं जिसे कोई भी नजरअंदाज नहीं कर सकता।
तो दोस्तों आज हमने वनेसा वैन एडवर्ड्स की किताब से यह सीखा कि हमारी बॉडी हमारे शब्दों से कहीं ज्यादा तेज बोलती है। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप अब भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके से बिना सोचे समझे सिग्नल्स भेजते रहना चाहते हैं या फिर आज से ही अपनी बॉडी लैंग्वेज और वॉइस टोन को बदलकर एक बेहद दमदार और आकर्षक लीडर बनना चाहते हैं।
आज ही अपनी अगली मीटिंग या बातचीत में इन तीनों लेसन को आजमा कर देखिए। अपने कंधों को सीधा रखिए चेहरे पर एक सच्ची वार्मथ वाली मुस्कान लाइए और सामने वाले के सिग्नल्स पर पैनी नजर रखिए। आपको अपनी लाइफ में बदलाव खुद ब खुद महसूस होने लगेगा।
अगर आपको यह आर्टिकल मददगार लगा और आप अपनी लाइफ में ऐसे ही बेहतरीन बदलाव लाना चाहते हैं तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो हमेशा मीटिंग्स में नर्वस हो जाते हैं। नीचे कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताएं कि इन तीनों में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और आप उसे अपनी लाइफ में कब से लागू करने जा रहे हैं। डीवाई बुक्स पर आने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
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