Business Model Generation (Hindi)


हर महीने लाखों का नुकसान!

क्या आपका बिजनेस भी चुपचाप बंद होने की कगार पर खड़ा है?

90 प्रतिशत नए स्टार्टअप्स पहले ही साल में ताला बंद क्यों कर देते हैं?

अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ एक बढ़िया आइडिया और थोड़ा सा पैसा लगाकर आप सफल बिजनेसमैन बन जाएंगे, तो आप जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं। बिना सही बिजनेस मॉडल के काम शुरू करना वैसा ही है जैसे बिना मैप के जंगल में गाड़ी चलाना। आपका आइडिया कितना भी शानदार हो, अगर पैसे कमाने और वैल्यू डिलीवर करने का सिस्टम सही नहीं है, तो आपका डूबना तय है।

आज हम इस बर्बादी का सबसे बड़ा सीक्रेट कोड खोलने वाले हैं। अलेक्जेंडर ओस्टरवाल्डर की किताब बिजनेस मॉडल जनरेशन के वे 3 पावरफुल लेसन्स, जो आपके किसी भी साधारण आइडिया को एक नोट छापने वाली मशीन में बदल सकते हैं। इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ने के बाद, आप अपने बिजनेस के हर उस लीक को बंद कर पाएंगे जो आपका पैसा और समय दोनों बर्बाद कर रहा है।

चलिए, सीधे मुद्दे पर आते हैं और समझते हैं कि दुनिया के सबसे सफल स्टार्टअप्स अपना ढांचा कैसे बनाते हैं।


लेसन १ : केवल प्रोडक्ट मत बेचिए, 9 ब्लॉक्स का एक मजबूत बिजनेस मॉडल बनाइए

ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते समय क्या गलती करते हैं? वे एक बढ़िया प्रोडक्ट बनाते हैं, एक सुंदर दुकान या वेबसाइट खोलते हैं, और सोचते हैं कि ग्राहक खुद-ब-खुद भागे चले आएंगे। फिर कुछ महीने बीतते हैं, बिक्री नहीं होती, और वे किस्मत को दोष देने लगते हैं। सच्चाई यह है कि लोग सिर्फ आपका प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वे उस पूरे तरीके को खरीदते हैं जिससे आप उन तक पहुँचते हैं और अपनी सर्विस देते हैं। इसी पूरे ढांचे को बिजनेस मॉडल कहते हैं।

अलेक्जेंडर ओस्टरवाल्डर ने इस पूरे ढांचे को बेहद आसान बनाने के लिए बिजनेस मॉडल कैनवास का आविष्कार किया। यह एक ऐसा फ्रेमवर्क है जो आपके पूरे बिजनेस को एक सिंगल पेज पर 9 जरूरी हिस्सों में बाँट देता है।

इसे एक रियल लाइफ उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके एक दोस्त ने बहुत ही शानदार समोसा बनाने की रेसिपी खोज ली। समोसा इतना टेस्टी है कि जो भी खाता है, उंगलियां चाटता रह जाता है। अब उसने लाखों रुपये खर्च करके शहर के सबसे महंगे मॉल में एक बड़ी सी दुकान खोल ली। उसे लगा कि लोग लाइन लगाकर समोसा खरीदेंगे। लेकिन 6 महीने बाद दुकान पर ताला लग गया। क्यों? क्योंकि समोसा तो नंबर वन था, लेकिन उसका बिजनेस मॉडल पूरी तरह फ्लॉप था। उसने यह नहीं सोचा कि मॉल में आने वाली ऑडियंस 200 रुपये का समोसा खरीदने नहीं, बल्कि ब्रांडेड कपड़े खरीदने आती है। उसके पास डिलीवरी का कोई रास्ता नहीं था और न ही कोई रेगुलर कस्टमर बेस।

इसी जगह काम आता है बिजनेस मॉडल कैनवास। यह आपको 9 अलग-अलग सवालों के जवाब देता है:
  1. आपके मेन कस्टमर्स कौन हैं?
  2. आप उनको क्या खास वैल्यू दे रहे हैं?
  3. आप उन तक किस रास्ते से पहुँच रहे हैं?
  4. आप उनके साथ कैसा रिश्ता बना रहे हैं?
  5. आपके पास पैसा कहाँ से आ रहा है?
  6. इस काम के लिए कौन-कौन से मुख्य रिसोर्स चाहिए?
  7. आपको रोजाना क्या-क्या काम करने होंगे?
  8. आपके सबसे जरूरी पार्टनर्स कौन हैं?
  9. इस पूरे सिस्टम को चलाने में कितना खर्च आएगा?

जब आप इन 9 ब्लॉक्स को एक बोर्ड पर लिखकर आपस में मिलाते हैं, तो आपको अपने बिजनेस का असली रूप दिखता है। आपको समझ आता है कि कहाँ पैसा व्यर्थ बह रहा है और कहाँ नया मौका छुपा है। अगर आपके दोस्त ने दुकान खोलने से पहले एक सिंपल व्हाइटबोर्ड पर यह 9 ब्लॉक्स बना लिए होते, तो उसके लाखों रुपये डूबने से बच जाते।

अगर आप भी अपना नया काम शुरू करने जा रहे हैं या पुराने काम को बड़ा बनाना चाहते हैं, तो बिना इस कैनवास के एक कदम भी आगे मत बढ़िए। अपनी टेबल पर एक नोटबुक रखिए और आज ही इन 9 ब्लॉक्स में अपने आइडिया को ढालिए।

अब जब आपने अपने बिजनेस का पूरा ढांचा एक पन्ने पर तैयार कर लिया है और आपको पता चल गया है कि 9 ब्लॉक्स का बैलेंस कैसे बनाना है, तो अगला सवाल यह उठता है कि इस पूरे ढांचे का दिल यानी आपका कस्टमर आपसे असल में चाहता क्या है? चलिए चलते हैं अगले लेसन की तरफ और समझते हैं कि सही वैल्यू कैसे डिलीवर की जाती है।


लेसन २ : कस्टमर की जरूरत समझिए और सही वैल्यू प्रपोजिशन डिलीवर कीजिए

अब जब आपने अपने बिजनेस का पूरा ढांचा एक पन्ने पर तैयार कर लिया है, तो सवाल उठता है कि इस ढांचे में जान कौन डालेगा? जवाब है आपका कस्टमर। लेकिन यहाँ 99 प्रतिशत नए बिजनेसमैन मात खा जाते हैं। वे सोचते हैं कि जो प्रोडक्ट उनको पसंद है, वही उनके कस्टमर को भी पसंद आएगा। वे अपनी ही बनाई दुनिया में खोए रहते हैं। अलेक्जेंडर ओस्टरवाल्डर कहते हैं कि जब तक आप कस्टमर के दर्द को नहीं समझेंगे, तब तक आपका कोई भी आइडिया एक रुपये की कमाई करके नहीं देगा।

इसे एक मजेदार उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक फिटनेस फ्रीक हैं। आपने सोचा कि शहर में एक ऐसा जिम खोला जाए जहाँ सिर्फ उबली हुई सब्जियाँ और प्रोटीन शेक मिले। आपने जिम का इंटीरियर बहुत ही प्रीमियम बनाया। दीवारों पर महंगे पोस्टर टांगे और बेहतरीन म्यूजिक सिस्टम लगाया। लेकिन आपके इलाके में रहने वाले ज्यादातर लोग शाम को तली-भुनी चीजें और कड़क चाय पीना पसंद करते हैं। अब आप जिम का दरवाजा खोलकर बैठे हैं और ग्राहक नदारद हैं। गलती क्या हुई? आपने अपने मन की बात सुनी, कस्टमर के दिल का दर्द नहीं समझा। अगर आपने उनको वजन घटाने का एक ऐसा तरीका दिया होता जो उनकी रोज की आदतों से मेल खाता, तो शायद आपकी दुकान पर लाइन लगी होती।

बिजनेस में इसे वैल्यू प्रपोजिशन कहते हैं। यानी आप कस्टमर की जिंदगी की कौन सी समस्या सुलझा रहे हैं? क्या आप उसका समय बचा रहे हैं? क्या आप उसका पैसा बचा रहे हैं? या फिर आप उसे समाज में एक अलग पहचान दे रहे हैं?

जब आप अपने कस्टमर को ध्यान में रखकर वैल्यू तैयार करते हैं, तो बिक्री अपने आप होती है। उदाहरण के लिए, जब लोगों को कैब बुक करने के लिए सड़क पर खड़े होकर ऑटो वाले से चिकचिक करनी पड़ती थी, तब ओला और उबर ने आकर वह दर्द दूर किया। उन्होंने कोई नई कार नहीं बनाई, उन्होंने बस लोगों की परेशानी को एक क्लिक में खत्म कर दिया।

अगर आप अपने प्रोडक्ट की सही वैल्यू समझना चाहते हैं, तो आज ही मार्केट में उतरिए। लोगों से बातें कीजिए। उनकी शिकायतें सुनिए। अपनी मेज पर एक स्मार्टफोन रखिए, कस्टमर के फीडबैक रिकॉर्ड कीजिए और अपनी डायरी में उनकी असली समस्याओं को नोट कीजिए। जिस दिन आप उनकी समस्या का सबसे आसान समाधान खोज लेंगे, उस दिन आपका कस्टमर आपको मुँह माँगी कीमत देने को तैयार हो जाएगा।

लेकिन रुकिए! सही वैल्यू खोज लेना और शानदार कस्टमर ढूंढ लेना ही सफलता की पूरी गारंटी नहीं है। मान लीजिए आपके पास बहुत बेहतरीन आइडिया है, लेकिन उसे मार्केट में लाने के लिए आपने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी एक ही बार में लगा दी और टेस्ट फेल हो गया? फिर क्या होगा? चलिए आगे बढ़ते हैं और समझते हैं कि बिना बड़ा रिस्क लिए अपने आइडिया को कैसे टेस्ट किया जाता है।


लेसन ३ : रिस्क कम करने के लिए बड़ा पैसा लगाने से पहले छोटे टेस्ट कीजिए

सही वैल्यू खोज लेना और शानदार कस्टमर ढूंढ लेना ही सफलता की पूरी गारंटी नहीं है। मान लीजिए आपके पास बहुत बेहतरीन आइडिया है, लेकिन उसे मार्केट में लाने के लिए आपने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी एक ही बार में लगा दी और टेस्ट फेल हो गया? फिर क्या होगा?

ज्यादातर नए बिजनेसमैन यही सबसे बड़ी गलती करते हैं। वे अपने आइडिया से इतना प्यार करने लगते हैं कि बिना किसी टेस्टिंग के सीधे बड़ा दांव खेल देते हैं। अलेक्जेंडर ओस्टरवाल्डर कहते हैं कि एक समझदार बिजनेसमैन कभी भी शुरुआत में बड़ा रिस्क नहीं लेता। वह पहले अपने आइडिया को बहुत छोटे लेवल पर टेस्ट करता है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक नया क्लॉथिंग ब्रांड शुरू करना चाहते हैं। अब दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह है कि आप लाखों रुपये का लोन लें, एक बड़ी दुकान किराए पर लें, ढेर सारा कपड़ा एडवांस में खरीद लें और फिर दुकान खोलकर बैठ जाएं। अगर लोगों को आपकी डिजाइन पसंद नहीं आई, तो आप रातों-रात रोड पर आ जाएंगे।

दूसरा रास्ता है स्मार्ट तरीका। आप सिर्फ 5 या 10 बेहतरीन डिजाइन तैयार कीजिए। उनकी अच्छी तस्वीरें खींचिए और सोशल मीडिया पर एक छोटा सा पेज बनाकर टेस्ट कीजिए। देखिए कि लोग आपकी डिजाइन पर कैसा रिस्पांस दे रहे हैं। क्या वे दाम पूछ रहे हैं? क्या वे आर्डर देने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं? अगर रिस्पांस अच्छा मिले, तभी बड़े लेवल पर माल बनाइए।

इसी छोटे टेस्ट को बिजनेस की भाषा में मिनिमम वायबल प्रोडक्ट कहते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि बिना बड़ा पैसा और समय गंवाए, अपने आइडिया की सच्चाई का पता लगाना।

बड़ी-बड़ी कंपनियां भी नए प्रोडक्ट लॉन्च करने से पहले छोटे शहरों में टेस्ट रन करती हैं। वे देखती हैं कि ग्राहक को उनका प्रोडक्ट समझ आ रहा है या नहीं। अगर टेस्ट फेल होता है, तो वे तुरंत अपने मॉडल में बदलाव कर लेती हैं। इससे उनका करोड़ों रुपये का नुकसान होने से बच जाता है।

अगर आप भी कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो आज ही बड़ा पैसा रोकने का फैसला लीजिए। एक नोटपैड उठाइए, अपने आइडिया के सबसे सस्ते टेस्ट का प्लान बनाइए और एक कैलकुलेटर से अपना शुरुआती बजट हिसाब में रखिए। याद रखिए, मार्केट में तेजी से फेल होना और तुरंत सीखकर आगे बढ़ना ही असली सफलता की चाबी है।


बिजनेस मॉडल जनरेशन किताब हमें सिखाती है कि कोई भी बिजनेस अचानक सफल या असफल नहीं होता। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपना ढांचा कितना मजबूत बनाया है, अपने कस्टमर को कितना समझा है और कितने स्मार्ट तरीके से टेस्ट किए हैं।

अगर आप भी अपने सपनों का बिजनेस खड़ा करना चाहते हैं, तो आज ही अपने 9 ब्लॉक्स का कैनवास बनाना शुरू कीजिए।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और इससे आपको कुछ नया सीखने को मिला, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपना नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं। कमेंट करके बताइए कि आप अपने बिजनेस में कौन सा लेसन सबसे पहले लागू करने वाले हैं। ऐसे ही बेहतरीन बुक समरी पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब करना न भूलें।

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