Permanent Record (Hindi)


आपका फोन केवल एक डिवाइस नहीं है। यह आपके कमरे में बैठा एक हिडन ट्रैकर है जो आपकी हर चैट, हर पासवर्ड और हर प्राइवेट मोमेंट को रिकॉर्ड कर रहा है। आपकी पूरी पर्सनल लाइफ इंटरनेट पर नीलाम हो रही है और आपको इसकी भनक भी नहीं है।

हर एक क्लिक के साथ आप अपनी प्राइवेसी खो रहे हैं। बैंक अकाउंट की डिटेल्स से लेकर आपकी सीक्रेट चैट्स तक, सब कुछ एक पावरफुल सर्विलांस सिस्टम के पास स्टोर हो रहा है। एडवर्ड स्नोडेन की वर्ल्ड फेमस बुक परमानेंट रिकॉर्ड इस छिपे हुए खेल का पूरा सच सामने लाती है। अगर आपने इस आर्टिकल को अभी इग्नोर कर दिया, तो आप अपनी डिजिटल लाइफ को एक बड़े रिस्क में डाल रहे हैं।

इस आर्टिकल के एंड तक आप वह सिस्टम समझ जाएंगे जो बड़ी टेक कंपनियां और गवर्नमेंट्स आपसे छुपा रही हैं। चलिए जानते हैं कि कैसे आप अपने डेटा को सेफ रख सकते हैं और इस डिजिटल ट्रैप से बाहर निकल सकते हैं।


लेसन १ : आपकी डिजिटल प्राइवेसी एक बहुत बड़ा छलावा है

क्या आपको लगता है कि अपने ब्राउज़र की हिस्ट्री डिलीट कर देने से या इनकॉग्निटो मोड खोल लेने से आप इंटरनेट की दुनिया में मिस्टर इंडिया बन जाते हैं। अगर हाँ, तो यह आपकी लाइफ की सबसे बड़ी गलतफहमी है। सच तो यह है कि जब आप रात को दो बजे ऑनलाइन शॉपिंग ऐप पर बिना किसी काम के जूते स्क्रॉल कर रहे होते हैं, तब भी कोई दूर बैठा आपका पूरा प्रोफाइल बना रहा होता है। एडवर्ड स्नोडेन अपनी किताब में बहुत साफ़ शब्दों में बताते हैं कि आज का डिजिटल नेटवर्क एक ऐसा जाल बन चुका है जहाँ प्राइवेसी नाम की चीज़ केवल एक मिथ बन चुकी है।

सोचिए, आप अपने दोस्त के साथ चाय की टपरी पर बैठकर प्लान बनाते हैं कि इस वीकेंड मनाली घूमकर आते हैं। आप अभी घर पहुँचते भी नहीं हैं और आपके फोन की स्क्रीन पर मनाली के सस्ते होटल्स और ट्रैवेल पैकेज के एड्स तैरने लगते हैं। यह कोई चमत्कार नहीं है और ना ही आपका फोन आपका मन पढ़ रहा है। यह एक बहुत बड़ा सर्विलांस नेटवर्क है, जो आपके हर एक कदम, हर एक सर्च और हर एक क्लिक को लगातार ट्रैक कर रहा है। जब आप सोचते हैं कि आप पूरी आज़ादी के साथ इंटरनेट यूज़ कर रहे हैं, असल में आप एक डिजिटल पिंजरे के अंदर होते हैं, जहाँ आपकी कोई भी बात सीक्रेट नहीं है।

हम लोग बिना पढ़े अग्री पर क्लिक करते जाते हैं, जैसे शादी के पेपर पर बिना सोचे समझे दस्तख़त कर रहे हों। हम अपनी पर्सनल लाइफ, अपने दोस्तों की डिटेल्स और अपनी लोकेशन ख़ुद ही इन कंपनियों को प्लेट में सजाकर दे देते हैं। अगर आप अपने डेटा को लेकर थोड़े भी सीरियस नहीं हुए, तो आने वाले टाइम में आपकी हर एक पर्सनल चॉइस कोई और कंट्रोल करेगा। अपने डिवाइस को सेफ रखने के लिए और ट्रैकिंग से बचने के लिए एक अच्छा वेबकैम कवर प्राइवेसी स्लाइडर इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या सर्विलांस सिर्फ एड्स दिखाने तक सीमित है या फिर इसके पीछे कोई ऐसा खेल है जो देश की पूरी सुरक्षा और आपकी आज़ादी से जुड़ा है। यहीं से शुरुआत होती है उस असली कहानी की जो स्नोडेन ने दुनिया के सामने रखी।


लेसन २ : जब सिस्टम ख़राब हो जाए तो आज़ादी के लिए सच बोलना ही पड़ता है

जब स्नोडेन ने देखा कि नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर पूरी दुनिया के आम लोगों का पर्सनल डेटा बिना किसी परमिशन के कलेक्ट किया जा रहा है, तब उनके सामने दो रास्ते थे। पहला रास्ता था कि वह शांत रहकर अपनी लाखों की सैलरी वाली आर्मस्ट्रांग जॉब का मज़ा लेते रहें और सिस्टम का हिस्सा बने रहें। दूसरा रास्ता यह था कि वह अपनी पूरी लाइफ, अपना करियर और अपनी आज़ादी दांव पर लगाकर इस कड़वे सच को दुनिया के सामने ले आएं। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना क्योंकि जब सिस्टम ही सिस्टम के रूल्स तोड़ने लगे, तब चुप रहना भी उस क्राइम का हिस्सा बनने जैसा होता है।

हमारी लाइफ में भी अक्सर ऐसा टाइम आता है जब हम अपने ऑफिस या आर्गनाइजेशन में कुछ गलत होते देखते हैं। लोग सोचते हैं कि जब तक मेरी सैलरी टाइम पर आ रही है, मुझे दुनिया के झमेले से क्या मतलब। लेकिन स्नोडेन कहते हैं कि अगर आप सच को दबाते हैं, तो एक दिन वही झूठ आपके पूरे एनवायरनमेंट को तबाह कर देता है। उन्होंने साबित किया कि एक अकेला इंसान भी अगर सच के साथ खड़ा हो जाए, तो वह दुनिया की सबसे पावरफुल गवर्नमेंट और सिस्टम को भी हिला सकता है।

आज की डेट में अपनी पर्सनल इनफॉरमेशन और सीक्रेट्स को सेफ रखना हर एक वर्किंग प्रोफेशनल की प्रायोरिटी होना चाहिए। इसके लिए आपके पास एक रिलाएबल एन्क्रिप्टेड पेन ड्राइव होना बहुत हेल्पफुल साबित हो सकता है ताकि आपका इम्पोर्टेंट डेटा हमेशा आपकी ग्रिप में रहे। सच बोलने की एक बहुत बड़ी कीमत होती है, लेकिन अपनी अंतरात्मा को बेचकर मिली शांति से बेहतर है कि आप सिस्टम के सामने सीना तानकर खड़े हों।

लेकिन क्या सिर्फ सच बोल देना ही काफी है, या फिर इस डिजिटल एरा में अपनी आज़ादी को हमेशा के लिए बचाए रखने के लिए हमें ख़ुद भी कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। चलिए देखते हैं कि स्नोडेन इस बारे में क्या सलूशन देते हैं।


लेसन ३ : अपनी डिजिटल आज़ादी की चाबी हमेशा अपने हाथ में रखिए

अगर आपको लगता है कि आपकी लाइफ में कुछ छुपाने जैसा नहीं है, इसलिए आपको डेटा लीक्स से कोई फर्क नहीं पड़ता, तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। यह सोच बिल्कुल वैसी ही है जैसे आप यह कहें कि मुझे बोलने की आज़ादी से कोई मतलब नहीं है क्योंकि मेरे पास बोलने के लिए कुछ है ही नहीं। स्नोडेन हमें याद दिलाते हैं कि प्राइवेसी किसी गुनाह को छुपाने के लिए नहीं, बल्कि आपकी पर्सनल फ्रीडम और सेल्फ रेस्पेक्ट को बचाए रखने के लिए होती है।

आजकल जब हम नया स्मार्ट टीवी या ब्लूटूथ स्पीकर लाते हैं, तो ऐसा लगता है कि घर में कोई नया मेहमान आया है। लेकिन असल में वह मेहमान कम और एक जासूस ज़्यादा होता है जो आपकी हर बात रिकॉर्ड कर रहा होता है। स्नोडेन का सबसे बड़ा लेसन यही है कि हमें टेक्नोलॉजी का यूज़र बनना चाहिए, उसका ग़ुलाम नहीं। अगर आप अपने पासवर्ड्स आज भी १२३४५६ रख रहे हैं या हर जगह एक ही ईमेल यूज़ कर रहे हैं, तो आप ख़ुद अपने घर का दरवाज़ा चोरों के लिए खुला छोड़ रहे हैं। अपनी डिजिटल सिक्योरिटी को टाइट रखना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ी सी अवेयरनेस की ज़रूरत है।

अपनी डिजिटल आज़ादी को बचाने के लिए आपको हार्डवेयर लेवल पर भी अलर्ट रहना होगा। इंटरनेट से कनेक्टेड डिवाइसेस को यूज़ करते टाइम हमेशा स्ट्रॉन्ग एन्क्रिप्शन टूल्स का इस्तेमाल करें। अगर आप अपने पर्सनल कंप्यूटर या मैकबुक को सिक्योर रखना चाहते हैं, तो एक अच्छी क्वालिटी का एंटीवायरस सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर आपके सिस्टम के लिए ढाल का काम कर सकता है। अपनी प्राइवेसी की ज़िम्मेदारी किसी टेक कंपनी पर मत छोड़िए, अपनी सुरक्षा का कंट्रोल हमेशा ख़ुद संभालिए।

अब जब आप डिजिटल वर्ल्ड के इस पूरे खेल को समझ चुके हैं, तो क्या आप अब भी आंखें मूंदकर इस सिस्टम का हिस्सा बने रहेंगे या अपनी प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए पहला कदम उठाएंगे।


अगर इस आर्टिकल ने आपकी आंखें खोल दी हैं और आपको अपनी डिजिटल प्राइवेसी की फ़िक्र होने लगी है, तो इस जानकारी को सिर्फ अपने तक मत रखिए। इस आर्टिकल को अभी लाइक करें, अपने फ्रेंड्स और फैमिली के साथ शेयर करें ताकि वे भी इस डिजिटल ट्रैप से बच सकें। नीचे कमेंट सेक्शन में लिखकर ज़रूर बताएं कि क्या आप भी मानते हैं कि आज के दौर में प्राइवेसी एक बहुत बड़ा चैलेंज बन चुकी है। आपके एक शेयर से किसी की डिजिटल लाइफ सेफ हो सकती है।

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