क्या आप अभी भी वही घिसी पिटी लाइफ जी रहे हैं और सोच रहे हैं कि सक्सेस बस किस्मत वालों को मिलती है। बधाई हो आप अपनी जिंदगी के कीमती ५२ हफ्ते कूड़ेदान में फेंकने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि दुनिया आगे निकल रही है आप बस अगले मंडे का इंतजार करते रहिये।
आज हम विक जॉनसन की बुक ५२ मंडेस से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो आपकी सुस्त जिंदगी में जान फूँक देंगे। ये ३ लेसन्स आपकी प्रोग्रेस की स्पीड को १० गुना बढ़ा देंगे और आपको लाइफ लॉन्ग हैप्पीनेस की राह पर ले जाएंगे।
लेसन १ : हर मंडे एक नया जन्म है
क्या आपको भी संडे की रात को वो पेट में अजीब सी हलचल होती है। जैसे कल ऑफिस या कॉलेज नहीं बल्कि किसी जंग के मैदान में जाना हो। हम में से ज्यादातर लोग मंडे को ऐसे देखते हैं जैसे वो कोई विलेन हो जो हमारी खुशियों का गला घोंटने आया है। लेकिन विक जॉनसन कहते हैं कि अगर आप सक्सेस की रेस में टॉप पर आना चाहते हैं तो आपको अपनी ये नफरत छोड़नी होगी। असल में मंडे कोई बोझ नहीं बल्कि एक गोल्ड माइन है। यह एक रिसेट बटन की तरह है जो आपको हर सात दिन में अपनी गलतियां सुधारने का मौका देता है।
जरा सोचिए आप साल में एक बार न्यू ईयर रेजोल्यूशन लेते हैं और १५ जनवरी तक वो जिम की मेंबरशिप और डाइट चार्ट कचरे के डिब्बे में होता है। क्यों। क्योंकि आपने पूरे साल का बोझ एक साथ अपने नाजुक कंधों पर उठा लिया। अब जरा इस सिचुएशन को बदल कर देखिए। अगर आप हर मंडे को अपना नया साल मानें तो क्या होगा। आपके पास साल में १ नहीं बल्कि ५२ मौके होंगे खुद को साबित करने के। अगर एक हफ्ता खराब गया तो कोई बात नहीं। अगला मंडे फिर से एक कोरी स्लेट लेकर खड़ा है।
मान लीजिए राहुल नाम का एक लड़का है जो गिटार सीखना चाहता है। अब राहुल भाई जोश में आकर सोचते हैं कि वो एक ही महीने में रॉकस्टार बन जाएंगे। नतीजा यह हुआ कि उंगलियों में दर्द हुआ और गिटार कोने में धूल फांकने लगा। अब अगर राहुल ५२ मंडेस वाला फार्मूला लगाता तो वह बस यह सोचता कि इस मंडे से अगले संडे तक मुझे बस तीन कोड्स सीखने हैं। छोटा गोल और कम प्रेशर। जब गोल छोटा होता है तो दिमाग को उसे पूरा करने में मजा आता है। और जब मजा आता है तो आप उसे छोड़ते नहीं हैं।
ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए फेल नहीं होते कि उनके सपने बड़े हैं। बल्कि इसलिए फेल होते हैं क्योंकि वो मंडे को सीरियसली नहीं लेते। वो मंडे को बस गुजारने की कोशिश करते हैं ताकि फ्राइडे जल्दी आ जाए। भाई अगर आप हफ्ते के पांच दिन बस वीकेंड के इंतजार में मर मर के जी रहे हैं तो आप जी नहीं रहे हैं बल्कि आप बस समय काट रहे हैं।
सक्सेसफुल लोग मंडे की सुबह अलार्म बजने से पहले बिस्तर छोड़ देते हैं क्योंकि उनके पास एक हफ्ते का फिक्स प्लान होता है। उन्हें पता है कि इस हफ्ते उन्हें कौन सा पहाड़ तोड़ना है। जब आप मंडे को अपना दोस्त बना लेते हैं तो बाकी के छह दिन आपके गुलाम बन जाते हैं। अपनी ईगो को थोड़ा साइड में रखिये और यह मानना शुरू कीजिये कि आपकी बड़ी जीत आपके छोटे छोटे हफ्तों का टोटल है। अगर आप हर मंडे को जीतना सीख गए तो दुनिया की कोई ताकत आपको आउटरेजियस सक्सेस पाने से नहीं रोक सकती। तो क्या आप तैयार हैं अपने अगले मंडे को एक नई शुरुआत बनाने के लिए।
लेसन २ : कंसिस्टेंसी का असली जादू
क्या आपको भी लगता है कि सक्सेस कोई बिजली का झटका है जो एक रात में आपको सुपरमैन बना देगा। अगर हाँ, तो शायद आप अभी भी परियों की कहानियों में जी रहे हैं। विक जॉनसन इस बुक में बड़े प्यार से समझाते हैं कि आउटरेजियस सक्सेस रातों-रात नहीं आती, बल्कि यह उन छोटे-छोटे कामों का नतीजा है जो आप तब भी करते हैं जब आपका मन नहीं होता। इसे कहते हैं कंसिस्टेंसी। लोग अक्सर जोश में आकर पहले हफ्ते में दस घंटे काम करते हैं और दूसरे हफ्ते सोफे पर पड़े-पड़े चिप्स खाते हुए वेब सीरीज खत्म कर देते हैं। यही वो जगह है जहाँ आम इंसान और एक लेजेंड के रास्ते अलग हो जाते हैं।
मान लीजिए हमारे पास एक भाई हैं जिनका नाम है गोलू। गोलू भाई को अचानक ख्याल आया कि उन्हें सिक्स पैक एब्स चाहिए। अब गोलू पहले मंडे को जिम जाते हैं, पांच घंटे वर्कआउट करते हैं, और शीशे में जाकर देखते हैं कि एब्स आए या नहीं। जब कुछ नहीं दिखता, तो वो दुखी होकर दो किलो जलेबी खा लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ है हमारा दूसरा दोस्त, जो बस हर रोज १५ मिनट एक्सरसाइज करता है, चाहे बारिश हो या धूप। एक साल बाद गोलू भाई वहीं के वहीं हैं, और दूसरा दोस्त फिट होकर घूम रहा है।
सीख यहाँ बहुत साफ़ है। कंसिस्टेंसी का मतलब यह नहीं है कि आप एक ही दिन में पहाड़ तोड़ दें। इसका मतलब यह है कि आप हर हफ्ते थोड़ा-थोड़ा पत्थर हटाते रहें। ५२ मंडेस का असली पावर यही है। जब आप ५२ हफ्तों तक लगातार एक ही दिशा में छोटे कदम बढ़ाते हैं, तो साल के अंत में आप वहां पहुँच जाते हैं जहाँ बाकी लोग पहुँचने का सिर्फ सपना देखते हैं। हमारा दिमाग बहुत चालाक है, इसे बड़े बदलावों से डर लगता है। लेकिन जब आप इसे कहते हैं कि भाई बस इस हफ्ते इतना ही करना है, तो यह चुपचाप मान जाता है।
जरा सोचिए, अगर आप हर हफ्ते अपनी फील्ड के बारे में सिर्फ एक नई चीज सीखते हैं, तो साल के अंत में आप ५२ नई चीजें जान चुके होंगे। यह आपको आपके कॉम्पिटिशन से कोसों आगे खड़ा कर देगा। लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई तू इतना आगे कैसे निकल गया। तब आप उन्हें ये नहीं कहेंगे कि मैंने कोई जादू किया है, आप बस अपनी उस डायरी की तरफ इशारा करेंगे जहाँ आपने हर मंडे का हिसाब लिखा है। सक्सेस बोरिंग होती है क्योंकि इसमें रोज वही काम करना पड़ता है, लेकिन इसका रिजल्ट बहुत ही शानदार और रंगीन होता है।
अगर आप इस हफ्ते भी वही कर रहे हैं जो पिछले हफ्ते किया था, तो आपको वही मिलेगा जो पिछले हफ्ते मिला था। लाइफ में कुछ अलग चाहिए तो अपनी आदतों की लगाम कसनी होगी। कंसिस्टेंसी वो कील है जो आपकी मेहनत को सफलता के बोर्ड पर ठोक देती है। तो क्या आप इस मंडे से अपने काम को लेकर थोड़े और जिद्दी बनने के लिए तैयार हैं। याद रखिये, कछुआ इसलिए जीता था क्योंकि उसने रुकना नहीं सीखा था। आप भी मत रुकिए, बस हर हफ्ते थोड़े बेहतर बनते जाइये।
लेसन ३ : फेलियर को अपना पर्सनल कोच बनाओ
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक छोटी सी गलती होने पर अपना पूरा हफ्ता मातम मनाने में गुजार देते हैं। अगर आपने मंडे को कोई गोल सेट किया और वेडनसडे तक वो पूरा नहीं हुआ, तो क्या आप हार मानकर बैठ जाते हैं। विक जॉनसन कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। असल में सक्सेस का रास्ता फूलों की सेज नहीं है, बल्कि यह उन कांटों से भरा है जिन्हें लोग फेलियर कहते हैं। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि एक आम इंसान फेलियर को दीवार समझकर रुक जाता है, जबकि एक विनर उसे सीढ़ी समझकर ऊपर चढ़ जाता है।
मान लीजिए सतीश भाई ने सोचा कि वो इस मंडे से हेल्दी खाना खाएंगे। मंडे और ट्यूजडे तो उन्होंने घास-फूस खाकर निकाल लिया, लेकिन वेडनसडे को ऑफिस में किसी का बर्थडे था और सतीश भाई ने जोश में आकर तीन समोसे और दो गुलाब जामुन पेल दिए। अब सतीश भाई को लगा कि उनका हफ्ता तो बर्बाद हो गया, तो उन्होंने सोचा कि अब अगले मंडे से ही शुरू करेंगे। और बाकी के चार दिन उन्होंने जी भर के पिज्जा और बर्गर खाया। यही है वो जाल जिसमें ९९ परसेंट लोग फंसते हैं।
भाई, अगर आपकी गाड़ी का एक टायर पंचर हो जाए, तो क्या आप बाकी के तीन टायर भी फाड़ देते हैं। नहीं ना। तो फिर एक छोटी सी गलती होने पर अपने पूरे हफ्ते को कचरा क्यों कर देते हैं। ५२ मंडेस का मतलब यही है कि अगर इस हफ्ते आपने कुछ गलत किया, तो उसे एक लेसन की तरह देखिये। खुद से पूछिए कि गलती कहाँ हुई। क्या आपने बहुत बड़ा गोल सेट कर लिया था या आप आलस कर गए। जब आप अपनी गलतियों का पोस्टमार्टम करना शुरू करते हैं, तो वो फेलियर नहीं बल्कि फीडबैक बन जाता है।
सक्सेसफुल लोग कभी हार नहीं मानते क्योंकि उन्हें पता है कि हर संडे की रात को वो अपने पूरे हफ्ते का हिसाब करेंगे। अगर परफॉरमेंस खराब रही, तो वो रोने के बजाय अगले मंडे की स्ट्रेटेजी बदलते हैं। लाइफ एक लेबोरेटरी की तरह है जहाँ आपको हर हफ्ते नए एक्सपेरिमेंट करने हैं। कुछ काम करेंगे, कुछ नहीं करेंगे। लेकिन जो नहीं करेंगे, वो आपको यह बताएंगे कि अगली बार क्या नहीं करना है। यही वो सीक्रेट है जो आपको लाइफ लॉन्ग हैप्पीनेस की तरफ ले जाता है क्योंकि तब आप हारने से डरना बंद कर देते हैं।
तो चलिए, आज से खुद से एक वादा कीजिये। अगर इस हफ्ते का प्लान फेल भी हो जाए, तो भी आप मैदान नहीं छोड़ेंगे। आप उठेंगे, अपनी धूल झाड़ेंगे और अगले मंडे का इंतजार करेंगे एक नए जोश के साथ। याद रखिये, साल में ५२ मौके हैं खुद को बेहतर बनाने के। अगर आप ५१ बार भी फेल हुए और ५२वीं बार जीत गए, तो भी आप विनर ही कहलायेंगे। आपकी आज की मेहनत ही आपकी कल की पहचान बनेगी। उठिए और इस मंडे को अपनी जीत का पहला कदम बनाइये।
५२ मंडेस सिर्फ एक बुक नहीं है, यह एक लाइफस्टाइल है। आप अपनी जिंदगी के मालिक खुद हैं। क्या आप अगले साल भी इसी जगह खड़े रहना चाहते हैं जहाँ आज हैं, या आप उस आउटरेजियस सक्सेस को चखना चाहते हैं जिसका आपने हमेशा सपना देखा है। चॉइस आपकी है। नीचे कमेंट में अभी लिखिए I AM READY अगर आप इस आने वाले मंडे से अपनी लाइफ बदलने के लिए तैयार हैं। इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा अगले मंडे का बहाना बनाते हैं। चलिए साथ मिलकर इस साल को अपनी जिंदगी का सबसे बेस्ट साल बनाते हैं।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#SuccessTips #BookSummary #MotivationIndia #GoalSetting #52Mondays
_