क्या आप अभी भी गधों की तरह दिन रात मेहनत करके खाली हाथ बैठे हैं। मुबारक हो आप अपनी लाइफ और बिजनेस दोनों का कचरा कर रहे हैं। अगर आपको लगता है कि हर कस्टमर भगवान है और हर काम जरूरी है तो शायद आपको अपनी बुद्धि का इलाज करवाने की सख्त जरूरत है।
आज हम पेरी मार्शल की किताब से वह राज खोलेंगे जो आपको कम मेहनत में अमीर बना देगा। लाइफ में सक्सेस पाने के लिए सिर्फ पसीना बहाना काफी नहीं है बल्कि सही जगह दिमाग लगाना जरूरी है। चलिए देखते हैं इस बुक के वह 3 शानदार लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।
लेसन १ : 80/20 का असली जादू और आपकी मेहनत का सच
दोस्तो, क्या आपको भी लगता है कि जितना ज्यादा काम आप करेंगे उतनी ही ज्यादा तरक्की आपको मिलेगी। अगर हां तो सच मानिए आप एक बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं। पेरी मार्शल अपनी किताब में साफ कहते हैं कि दुनिया का एक बहुत ही अजीब लेकिन सच नियम है जिसे हम 80 20 प्रिंसिपल कहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी लाइफ के 80 परसेंट रिजल्ट्स सिर्फ आपकी 20 परसेंट मेहनत से आते हैं। बाकी की 80 परसेंट मेहनत तो सिर्फ धूल उड़ाने के बराबर है जिससे कुछ खास हासिल नहीं होता।
जरा सोचिए आप दिन भर में 100 काम करते हैं लेकिन उनमें से सिर्फ 20 काम ऐसे होते हैं जो आपकी जेब में पैसा लाते हैं या आपको आगे बढ़ाते हैं। बाकी के 80 काम तो बस चाय पीने गप्पे मारने या फालतू की ईमेल्स चेक करने जैसे होते हैं। अब आप खुद को बहुत बिजी दिखाते हैं और घर जाकर कहते हैं कि आज तो बहुत काम किया। पर भाई साहब असल में आपने सिर्फ अपना टाइम बर्बाद किया है। यह वैसा ही है जैसे आप एक ऐसी दुकान चला रहे हैं जहां 100 कस्टमर आते हैं पर सामान सिर्फ 20 लोग ही खरीदते हैं। अब आप उन 80 लोगों को फ्री की सलाह देने में अपनी जान लगा देते हैं जो कभी कुछ खरीदने वाले ही नहीं हैं। क्या यह बेवकूफी नहीं है।
सेल्स की दुनिया में भी यही होता है। एक सेल्समैन दिन भर में 50 कॉल करता है पर सेल सिर्फ 2 या 3 कॉल से आती है। अब समझदारी इसमें है कि आप उन 2 लोगों को पहचानें और उन पर ज्यादा ध्यान दें ना कि उन 48 लोगों के पीछे भागें जो सिर्फ आपका दिमाग चाटेंगे और आखिर में कहेंगे कि भाई बाद में सोच कर बताऊंगा। पेरी मार्शल कहते हैं कि आपको एक जासूस की तरह अपने काम को देखना होगा। आपको यह ढूंढना होगा कि वह कौन से खास 20 परसेंट काम हैं जो आपको असली सक्सेस दे रहे हैं।
जैसे मान लीजिए आप एक जिम जाते हैं। वहां आप 2 घंटे बिताते हैं लेकिन उसमें से 1 घंटा तो आप सिर्फ मोबाइल चलाने और दूसरों को देखने में निकाल देते हैं। जो असली बॉडी बनती है वह उन 20 मिनट की इंटेंस कसरत से बनती है। लाइफ का हर हिस्सा इसी 80 20 के तराजू पर तौला जा सकता है। अगर आप अपने उन कीमती 20 परसेंट कामों को पहचान कर सारा फोकस वहां लगा दें तो आप कम टाइम में वह सब पा सकते हैं जो दूसरे लोग सालों में भी नहीं पा पाते। लेकिन अफसोस की बात यह है कि ज्यादातर लोग उन फालतू के 80 परसेंट कामों को ही अपनी लाइफ का मकसद मान बैठते हैं। वह बस बिजी रहना चाहते हैं प्रोग्रेस करना नहीं।
मार्केटिंग में भी यही हाल है। लोग फेसबुक इंस्टाग्राम और पता नहीं कहां कहां एड्स चलाते हैं। पर सच तो यह है कि आपका 80 परसेंट बिजनेस सिर्फ किसी एक या दो खास जगह से आ रहा होता है। बाकी जगह तो आप बस अपनी ईगो को खुश करने के लिए पैसा फूंक रहे होते हैं। तो अगली बार जब आप खुद को बहुत थका हुआ महसूस करें तो आईने में देखकर खुद से पूछिए कि क्या मैं सच में काम कर रहा हूं या सिर्फ काम करने का नाटक कर रहा हूं। अपनी एनर्जी को बचाना सीखिए क्योंकि वह बहुत कीमती है। अगर आप कूड़े के ढेर में हीरा ढूंढ रहे हैं तो पहले कूड़ा हटाना सीखिए।
लेसन २ : इनविजिबल मनी और आपके अमीर कस्टमर्स का राज
दोस्तो, क्या आपको पता है कि आपकी तिजोरी की चाबी आपके हाथ में है पर आप फिर भी दूसरों के सामने हाथ फैला रहे हैं। पेरी मार्शल एक बहुत ही कमाल की बात कहते हैं जिसे वह इनविजिबल मनी कहते हैं। यह वह पैसा है जो आपकी आंखों के सामने है लेकिन आपको दिखाई नहीं दे रहा। हम अक्सर नए कस्टमर्स ढूंढने के चक्कर में इतने अंधे हो जाते हैं कि हम उन लोगों को भूल जाते हैं जो पहले से ही हमारे साथ हैं। आप उन लोगों को पटाने में अपनी पूरी एनर्जी लगा देते हैं जो आपको जानते तक नहीं पर जो लोग आप पर भरोसा करते हैं उन्हें आप घास भी नहीं डालते।
सोचिए आपके पास एक पुराना ग्राहक है जिसने आपसे 1000 रुपये का सामान खरीदा। अब ज्यादातर लोग क्या करेंगे। वह उसे भूल जाएंगे और किसी नए आदमी को ढूंढने निकल पड़ेंगे। पर सच तो यह है कि उस 1000 रुपये देने वाले इंसान के अंदर एक ऐसा कस्टमर छुपा है जो शायद आपको 10000 रुपये भी दे सकता था। बस आपने उससे पूछा ही नहीं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी लड़की को डेट पर ले जाएं और उसे सिर्फ पानी पिलाकर वापस छोड़ आएं जबकि वह मन ही मन फाइव स्टार डिनर की उम्मीद कर रही थी। यहाँ गलती लड़की की नहीं बल्कि आपकी है क्योंकि आपने उसे वह बड़ा ऑप्शन दिया ही नहीं।
अमीर लोग और कामयाब बिजनेस इसी फार्मूले पर चलते हैं। वह जानते हैं कि हर 100 कस्टमर्स में से कम से कम 20 लोग ऐसे होते हैं जो ज्यादा पैसा खर्च करने की काबिलियत रखते हैं। वह प्रीमियम सर्विस चाहते हैं। वह वीआईपी ट्रीटमेंट चाहते हैं। पर आप ठहरे सीधे सादे दुकानदार जो सबको एक ही लाठी से हांक रहे हैं। आप सबको वही सस्ता माल बेच रहे हैं जो हर कोई बेच रहा है। अगर आप अपने बिजनेस में सिर्फ एक महंगा प्रोडक्ट या सर्विस जोड़ दें तो आप देखेंगे कि आपके पुराने ग्राहकों में से ही कुछ लोग उसे खुशी खुशी खरीद लेंगे।
इस दुनिया में हर किसी की जेब में पैसा एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो भीड़ से अलग दिखना चाहते हैं। अगर आप स्टारबक्स में जाते हैं तो वहां कॉफी 300 रुपये की मिलती है जबकि बाहर वही कॉफी 20 रुपये की है। स्टारबक्स उन 20 परसेंट लोगों को टारगेट करता है जो सिर्फ कॉफी नहीं बल्कि वह रुतबा खरीदना चाहते हैं। अगर आप भी अपने काम में वही घिसी पिटी सर्विस दे रहे हैं तो आप कभी अमीर नहीं बन पाएंगे। आपको उन खास ग्राहकों को पहचानना होगा जो आपके बिजनेस के असली जैकपॉट हैं।
जरा अपनी कांटेक्ट लिस्ट उठाकर देखिए। वहां कुछ लोग ऐसे होंगे जो आपको बार बार फोन करते होंगे या आपका काम पसंद करते होंगे। वह आपके सबसे बड़े एसेट हैं। उन्हें वह दीजिए जो कोई और नहीं दे रहा। उन्हें स्पेशल फील कराइए। जब आप ऐसा करते हैं तो आपकी मार्केटिंग की कॉस्ट जीरो हो जाती है क्योंकि आपको नया कस्टमर ढूंढने के लिए एड्स पर पैसा नहीं खर्च करना पड़ता। याद रखिए असली पैसा नए लोगों को फंसाने में नहीं बल्कि पुराने लोगों को और ज्यादा वैल्यू देने में है। अगर आप अपने 20 परसेंट बेस्ट कस्टमर्स का ख्याल रखेंगे तो वह आपके बाकी 80 परसेंट बिजनेस को अपने आप संभाल लेंगे। तो आज ही अपनी इनविजिबल मनी को पहचानिए और उसे कैश करना शुरू कीजिए वरना कोई और आकर आपकी मलाई खा जाएगा।
लेसन ३ : मार्केटिंग डीक्ल्टर और फालतू के कामों से आजादी
दोस्तो, अब तक आप समझ गए होंगे कि आपकी मेहनत और आपके कस्टमर्स का गणित क्या है। लेकिन अब बारी आती है उस कचरे को साफ करने की जिसने आपके दिमाग और आपके बिजनेस को जाम कर रखा है। पेरी मार्शल कहते हैं कि एक सफल इंसान वह नहीं है जो सब कुछ करता है बल्कि वह है जिसे पता है कि उसे क्या नहीं करना है। हम इंडियंस की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही है कि हम सर्वगुण संपन्न बनना चाहते हैं। हम खुद ही सेल्समैन बनना चाहते हैं खुद ही अकाउंटेंट और खुद ही ऑफिस का झाड़ू भी लगाना चाहते हैं। पर सच तो यह है कि जब आप हर काम में अपनी उंगली फंसाते हैं तो आप किसी भी काम को ढंग से नहीं कर पाते।
जरा सोचिए आप एक क्रिकेट मैच खेल रहे हैं। अब आप ही बैटिंग करेंगे आप ही बॉलिंग करेंगे और आप ही बाउंड्री पर फील्डिंग भी करेंगे तो क्या आप मैच जीत पाएंगे। बिल्कुल नहीं। आप सिर्फ थक कर चूर हो जाएंगे और हार आपके गले लगेगी। मार्केटिंग में भी यही होता है। आप सोचते हैं कि मैं फेसबुक पर भी रहूं इंस्टाग्राम पर भी रील बनाऊं लिंक्डइन पर ज्ञान बांटूं और घर घर जाकर पर्चे भी बांटूं। पर भाई साहब आपकी जान एक ही है। अगर आप उन 80 परसेंट फालतू के कामों को नहीं छोड़ेंगे जो आपको कोई रिजल्ट नहीं दे रहे तो आप उस 20 परसेंट कीमती काम के लिए टाइम कहां से लाएंगे।
डीक्ल्टर का मतलब है अपनी लाइफ से उस शोर को हटाना जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है। उन ग्राहकों को नमस्ते कह दीजिए जो डिस्काउंट के लिए आपका खून पी जाते हैं पर काम के नाम पर चवन्नी भी नहीं देते। उन मार्केटिंग चैनल्स को बंद कर दीजिए जहां आप पैसा तो पानी की तरह बहा रहे हैं पर वहां से एक भी ढंग की लीड नहीं आ रही। यह सुनने में थोड़ा कड़वा लग सकता है लेकिन अगर आपको उड़ना है तो आपको अपना बोझ हल्का करना ही होगा। जो लोग हर किसी को खुश करने की कोशिश करते हैं वह आखिर में खुद को सबसे ज्यादा दुखी पाते हैं।
मार्केटिंग का असली मतलब सिर्फ शोर मचाना नहीं है बल्कि सही इंसान के कान में सही बात कहना है। जब आप फालतू के कामों से आजादी पा लेते हैं तो आपके पास सोचने का वक्त होता है। आप अपनी स्ट्रेटेजी को बेहतर बना पाते हैं। आप यह देख पाते हैं कि आपका असली कंपटीशन कहां है। याद रखिए दुनिया के सबसे अमीर लोग सबसे कम काम करते हैं क्योंकि वह सिर्फ वही काम करते हैं जो सबसे ज्यादा जरूरी है। वह अपने टाइम की कीमत जानते हैं। अगर आप अपने 1 घंटे की कीमत 5000 रुपये मानते हैं तो क्या आप उस 1 घंटे को 200 रुपये वाले काम में बर्बाद करेंगे। अगर हां तो फिर अपनी गरीबी का रोना रोना बंद कीजिए।
तो आज ही एक पेन और पेपर उठाइए और उन कामों की लिस्ट बनाइए जो आपका टाइम तो खा रहे हैं पर पैसा नहीं दे रहे। उन्हें या तो किसी और को सौंप दीजिए या फिर उन्हें करना ही बंद कर दीजिए। जब आप अपनी लाइफ से यह 80 परसेंट कचरा साफ कर देंगे तभी वह 20 परसेंट हीरे चमकेंगे जो आपको असली सक्सेस दिलाएंगे। कम काम करना आलस नहीं है बल्कि यह एक बहुत बड़ी कला है जिसे हर किसी को सीखना चाहिए। अगर आप इस कला में माहिर हो गए तो सेल्स और मार्केटिंग आपके लिए बच्चों का खेल बन जाएगी।
दोस्तो, 80/20 का यह नियम सिर्फ एक थ्योरी नहीं बल्कि जिंदगी जीने का एक तरीका है। अगर आप आज भी वही पुरानी घिसी पिटी मेहनत करते रहे तो आने वाले 5 सालों में भी आप वहीं खड़े होंगे जहां आज हैं। लेकिन अगर आपने आज हिम्मत करके उन 80 परसेंट फालतू चीजों को छोड़ने का फैसला किया तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। फैसला आपके हाथ में है। क्या आप एक थके हुए मजदूर की तरह जीना चाहते हैं या एक स्मार्ट लीडर की तरह। कमेंट में जरूर बताएं कि आपका वह कौन सा एक काम है जिसे आप आज से ही छोड़ने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो दिन भर बिजी रहने का नाटक करते हैं। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।
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