Sometimes You Win Sometimes You Learn (Hindi)


क्या आप भी अपनी हार का रोना रोकर अपनी लाइफ बर्बाद कर रहे हैं। मुबारक हो आप उन लोगों में से हैं जो हारने के बाद भी कुछ नहीं सीख पाते। सच तो यह है कि आपकी ईगो आपको गड्ढे में धकेल रही है और आप अभी भी वही पुरानी गलतियां दोहरा रहे हैं।

जॉन मैक्सवेल की यह किताब आपको सिखाती है कि हारना बुरा नहीं है पर हार से कुछ न सीखना सबसे बड़ी बेवकूफी है। आइए जानते हैं वह ३ लेसन जो आपकी हार को सबसे बड़ी कामयाबी में बदल देंगे।


लेसन १ : ह्यूमिलिटी यानी विनम्रता

जिंदगी में जब भी हम कुछ बड़ा करने निकलते हैं तो अक्सर हमारा पाला दो चीजों से पड़ता है। पहली जीत और दूसरी हार। लेकिन जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि एक तीसरी चीज भी है जो इन दोनों से ऊपर है और वह है ह्यूमिलिटी यानी विनम्रता। अब आप कहेंगे कि भाई हारने के बाद तो वैसे ही चेहरा उतर जाता है अब इसमें विनम्रता कहां से लाएं। असल में दिक्कत हार में नहीं बल्कि हमारी ईगो में होती है। जब हम हारते हैं तो हमारा दिल चीख चीख कर कहना चाहता है कि मेरी कोई गलती नहीं थी। उस वक्त हम खुद को एक महान योद्धा समझने लगते हैं जिसके साथ पूरी दुनिया ने मिलकर साजिश की हो। लेकिन सच तो यह है कि विनम्रता वह चश्मा है जिससे हमें अपनी कमियां साफ दिखने लगती हैं।

सोचिए आप एक क्रिकेट मैच खेल रहे हैं और आप पहली ही बॉल पर आउट हो गए। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप अंपायर को गालियां दें और पिच को खराब बताएं या फिर चुपचाप पवेलियन जाकर यह सोचें कि शायद मेरे पैर का मूवमेंट सही नहीं था। जो इंसान पिच को दोष देता है वह अगली बार भी शून्य पर ही आउट होगा। लेकिन जो अपनी गलती मान लेता है वही अगली बार शतक मारने का दम रखता है। असल में ह्यूमिलिटी का मतलब खुद को कम आंकना नहीं है बल्कि खुद को सही तरह से आंकना है। जब आप यह मान लेते हैं कि आपको सब कुछ नहीं आता तभी आपके दिमाग के दरवाजे नए लेसन के लिए खुलते हैं।

आजकल के दौर में तो लोग अपनी हार को भी सोशल मीडिया पर एक अलग ही लेवल का स्वैग बना देते हैं। वह कहेंगे कि मैं हारा नहीं हूं बस समय मेरा साथ नहीं दे रहा। भाई समय सबका साथ देता है बस आपकी तैयारी में झोल होता है। अगर आप सीखने के लिए तैयार नहीं हैं तो यकीन मानिए आप कभी नहीं जीत पाएंगे। विनम्र इंसान वह है जो अपनी हार के मलबे में बैठकर यह ढूंढता है कि कौन सी ईंट कमजोर थी। वह यह नहीं देखता कि दुनिया उसके बारे में क्या सोच रही है। उसका पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर होता है कि अगली बार वह इस मलबे से एक आलीशान महल कैसे खड़ा करेगा।

जॉन मैक्सवेल बताते हैं कि विनम्रता हमें एक स्टूडेंट बना देती है। और एक स्टूडेंट कभी भी फेल नहीं होता क्योंकि उसके लिए हर हार एक नई क्लास की तरह होती है। अगर आप अपनी ईगो को एक तरफ रखकर अपनी गलतियों की लिस्ट बनाएंगे तो आपको समझ आएगा कि जीतना तो बहुत आसान था बस आप खुद के ही दुश्मन बने बैठे थे। इसलिए अगली बार जब लाइफ आपको जोर का थप्पड़ मारे तो रोने के बजाय एक गहरी सांस लें और कहें कि सिखा भाई और क्या सिखाना चाहता है। यही वह एटीट्यूड है जो एक आम इंसान को लीडर बना देता है। विनम्रता के बिना हर जीत खोखली है और हर हार एक अंत की तरह लगती है। लेकिन अगर आपके पास यह क्वालिटी है तो आप अपनी हार की राख से भी दोबारा जिंदा हो सकते हैं।


लेसन २ : रिस्पोंसिबिलिटी यानी जिम्मेदारी

विनम्रता से जब आपकी आंखों का पर्दा हटता है तो अगला कदम आता है रिस्पोंसिबिलिटी यानी अपनी हार का ठेका खुद लेना। हमारे समाज में एक बहुत बड़ी बीमारी है जिसे ब्लेम गेम कहते हैं। जब हम जीतते हैं तो सीना चौड़ा करके कहते हैं कि यह सब मेरी मेहनत का फल है। लेकिन जैसे ही हार का सामना होता है तो अचानक हमारी किस्मत खराब हो जाती है। हमारे पड़ोसी की नजर लग जाती है या फिर सरकार की नीतियां बदल जाती हैं। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि जब तक आप अपनी लाइफ के रिमोट कंट्रोल को दूसरों के हाथ में रखेंगे तब तक आप कभी चैनल नहीं बदल पाएंगे। जिम्मेदारी लेना कोई सजा नहीं है बल्कि यह खुद को पावरफुल बनाने का सबसे बड़ा जरिया है।

मान लीजिए आपने एक नया बिजनेस शुरू किया और वह बुरी तरह फ्लॉप हो गया। अब एक आम इंसान क्या करेगा। वह कहेगा कि मार्केट बहुत डाउन था या फिर उसके पार्टनर ने उसे धोखा दिया। लेकिन एक असली लीडर खुद से पूछेगा कि मैंने मार्केट रिसर्च क्यों नहीं की। मैंने गलत पार्टनर का चुनाव क्यों किया। जब आप जिम्मेदारी लेते हैं तो आप खुद को उस सिचुएशन का मालिक बना देते हैं। और जब आप मालिक होते हैं तभी आप चीजों को ठीक करने की ताकत रखते हैं। जो इंसान हमेशा दूसरों की तरफ उंगली उठाता है वह असल में एक बेबस शिकार की तरह जी रहा होता है। वह अपनी तकदीर का फैसला दूसरों के भरोसे छोड़ देता है।

आजकल के युवा अपनी बेरोजगारी का दोष कॉलेज को देते हैं और अपनी खराब सेहत का दोष जिम ट्रेनर को। भाई मेहनत आपको करनी थी और पसीना आपको बहाना था। अगर आपकी लाइफ का ग्राफ नीचे जा रहा है तो उसके ड्राइवर आप ही हैं। जॉन मैक्सवेल बड़े मजे से समझाते हैं कि जिम्मेदारी लेने का मतलब यह नहीं है कि आप खुद को कोड़े मारें। इसका सीधा सा मतलब है कि आप अपनी लाइफ के रिजल्ट्स को अपना मान लें। जब आप यह स्वीकार करते हैं कि यह हार मेरी है तभी आप उस हार से मिलने वाले लेसन पर भी अपना हक जमा पाते हैं। अगर हार आपकी नहीं है तो उससे मिलने वाली सीख भी आपकी नहीं हो सकती।

जिम्मेदारी लेने वाला इंसान कभी भी विक्टिम कार्ड नहीं खेलता। उसे पता होता है कि शिकायत करना वक्त की बर्बादी है। वह अपनी एनर्जी को इस बात पर लगाता है कि अब आगे क्या करना है। लाइफ एक गेम की तरह है जिसमें लेवल कठिन होते जाएंगे। अगर आप एक लेवल पर हार गए तो आप गेम बनाने वाले को गाली नहीं दे सकते। आपको अपनी स्किल बढ़ानी होगी और दोबारा कोशिश करनी होगी। जिम्मेदारी वह चाबी है जो आपकी प्रोग्रेस का दरवाजा खोलती है। जो इंसान यह कहता है कि मैं आज जहां भी हूं अपनी वजह से हूं वही इंसान कल अपनी सफलता का श्रेय भी गर्व से ले पाएगा। बिना जिम्मेदारी के आप सिर्फ एक यात्री हैं और जिम्मेदारी के साथ आप अपनी लाइफ के पायलट बन जाते हैं।


लेसन ३ : इवैल्यूएशन यानी मूल्यांकन

अब आपने विनम्रता भी सीख ली और जिम्मेदारी भी ले ली। लेकिन क्या सिर्फ जिम्मेदारी लेने से काम चल जाएगा। बिल्कुल नहीं। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि बिना इवैल्यूएशन यानी मूल्यांकन के अनुभव का कोई मतलब नहीं है। बहुत से लोग कहते हैं कि तजुर्बा सबसे बड़ा टीचर है। पर सच तो यह है कि तजुर्बा नहीं बल्कि तजुर्बे का सही विश्लेषण सबसे बड़ा टीचर है। अगर आप हर बार एक ही गलती कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मुझे तजुर्बा हो रहा है तो भाई आप तजुर्बेकार नहीं बल्कि एक नंबर के जिद्दी इंसान हैं। इवैल्यूएशन वह प्रोसेस है जहां आप अपनी हार को चीर फाड़ कर देखते हैं कि आखिर गड़बड़ हुई कहां।

सोचिए आपने किसी को इम्प्रेस करने के लिए बहुत महंगी डेट प्लान की पर अंत में उस इंसान ने आपको ब्लॉक कर दिया। अब आप जिम्मेदारी लेकर बैठ गए कि हां मेरी गलती थी। लेकिन जब तक आप इवैल्यूएट नहीं करेंगे कि क्या आपने बहुत ज्यादा दिखावा किया या आपकी बातें बोरिंग थीं तब तक आप अगली डेट पर भी ब्लॉक ही होंगे। इवैल्यूएशन का मतलब है रुकना और अपनी परफॉरमेंस का पोस्टमार्टम करना। जो लोग हमेशा भागते रहते हैं और यह नहीं देखते कि वह कहां जा रहे हैं वह अक्सर गलत मंजिल पर पहुंच जाते हैं। रुककर अपनी हार की समीक्षा करना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी की निशानी है।

लाइफ में बहुत से लोग अपनी मेहनत का ढिंढोरा पीटते हैं। वह कहेंगे कि मैंने १८ घंटे काम किया फिर भी फेल हो गया। भाई गधा भी पूरे दिन काम करता है पर उसे जंगल का राजा नहीं कहा जाता। राजा वही बनता है जो अपनी स्ट्रैटेजी को इवैल्यूएट करता है। जॉन मैक्सवेल समझाते हैं कि जब हम हारते हैं तो हमें एक नोटबुक लेकर बैठना चाहिए और उन मोमेंट्स को लिखना चाहिए जहां चीजें हाथ से निकल गईं। क्या आपकी प्लानिंग में कमी थी। क्या आपने गलत समय पर फैसला लिया। या फिर आपने अपनी काबिलियत से ज्यादा बड़ा रिस्क ले लिया। जब आप सवालों के जवाब ढूंढ लेते हैं तो आपकी हार एक पावरफुल लेसन बन जाती है।

इवैल्यूएशन हमें इमोशंस से ऊपर उठकर लॉजिक से सोचना सिखाता है। हारने पर दुख होना लाजमी है पर उस दुख में डूबे रहना बेवकूफी है। एक स्मार्ट इंसान अपनी हार के आंसू पोंछता है और मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर अपनी गलतियों को ढूंढने निकल पड़ता है। उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हार कितनी बड़ी थी उसे बस इस बात से मतलब होता है कि वह लेसन कितना बड़ा था। जब आप अपनी लाइफ का इवैल्यूएशन करना शुरू करते हैं तो आप अचानक नोटिस करेंगे कि आप पहले से ज्यादा शांत और कॉन्फिडेंट हो गए हैं। क्योंकि अब आपको पता है कि अगर अगली बार कोई समस्या आएगी तो आपके पास उसे सुलझाने का डेटा और दिमाग दोनों होंगे।

अंत में बस इतना समझ लीजिए कि हारना और जीतना लाइफ के दो पहलू हैं। लेकिन जो इंसान अपनी हार का सही मूल्यांकन करता है वह हारकर भी जीत जाता है। लाइफ आपको बार बार गिराएगी पर हर बार गिरने के बाद जब आप उठकर अपनी मिट्टी झाड़ेंगे और यह सोचेंगे कि इस बार पैर क्यों फिसला तभी आप अगली बार मजबूती से खड़े रह पाएंगे। जॉन मैक्सवेल की यह बातें सिर्फ सुनने के लिए नहीं बल्कि अपनी जिंदगी के हर छोटे बड़े फेलियर पर लागू करने के लिए हैं।


दोस्तो, हार कोई फुल स्टॉप नहीं है बल्कि वह एक कोमा है जो आपको बेहतर तैयारी करने का मौका देती है। अगर आप आज किसी मोड़ पर खुद को हारा हुआ महसूस कर रहे हैं तो घबराइए मत। अपनी ईगो को साइड में रखें जिम्मेदारी लें और ठंडे दिमाग से सोचें कि आप क्या बेहतर कर सकते थे। आपकी अगली बड़ी जीत आपकी आज की हार के लेसन में ही छुपी हुई है।

क्या आपने कभी अपनी किसी बड़ी हार से कोई बहुत जरूरी लेसन सीखा है। कमेंट सेक्शन में अपनी कहानी शेयर करें ताकि दूसरों को भी हिम्मत मिले। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो अभी बुरे दौर से गुजर रहा है। याद रखिए सीखना बंद तो जीतना बंद।

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