Brick by Brick (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बस आइडिया नया होना चाहिए और आप रातों रात अमीर बन जाएंगे। बधाई हो। आप लेगो की तरह अपना सब कुछ डुबाने की तैयारी कर रहे हैं। बिना सोचे समझे किया गया इनोवेशन आपको तरक्की नहीं बल्कि सीधा दिवालियापन की तरफ ले जाता है।

लेगो कंपनी ने भी यही गलती की थी और वो लगभग खत्म हो चुकी थी। लेकिन उन्होंने अपनी उस प्लास्टिक की एक छोटी ईंट से फिर से दुनिया को कैसे जीता। आज हम इस आर्टिकल में उन 3 लेसन्स की गहराई में जाएंगे जो आपके बिजनेस और लाइफ को फेल होने से बचा सकते हैं।


लेसन १ : बिना मतलब का इनोवेशन मौत है

आज के जमाने में हर किसी को इनोवेटिव बनना है। जैसे ही कोई नया स्टार्टअप खुलता है फाउंडर के दिमाग में खुजली होने लगती है कि कुछ ऐसा कर दूँ जो आज तक किसी ने न किया हो। लेगो के साथ भी यही हुआ था। नब्बे के दशक के अंत में लेगो को लगा कि वो सिर्फ खिलौने बनाने वाली कंपनी बनकर बोर हो गई है। उन्होंने सोचा कि चलो अब हम ज्वेलरी बनाएंगे। कपड़े बेचेंगे। और यहाँ तक कि वीडियो गेम्स की दुनिया में भी तहलका मचा देंगे। सुनने में तो यह बहुत कूल लगता है ना। लेकिन असलियत में यह एक सुसाइड मिशन था। लेगो ने इतने सारे नए और अजीबोगरीब प्रोडक्ट्स मार्केट में उतार दिए कि उनके पुराने वफादार कस्टमर्स ही कन्फ्यूज हो गए। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि वो खिलौने खरीदने आए हैं या किसी मेले में घूम रहे हैं।

यही हाल आजकल के कई यंग एंटरप्रेन्योर्स का है। अभी एक बिजनेस सेट हुआ नहीं कि दूसरे में पैर फँसा लेते हैं। इसे कहते हैं बिना सिर पैर का इनोवेशन। लेगो के इंजीनियर्स को लगा कि वो जितने ज्यादा कलर्स और शेप्स बनाएंगे लोग उतने ही खुश होंगे। उन्होंने ईंटों के इतने सारे अलग अलग पार्ट्स बना दिए कि कंपनी का खर्चा आसमान छूने लगा। लेकिन सेल्स। वो तो जमीन के नीचे धंसती जा रही थी। सच तो यह है कि जब आप हर किसी को खुश करने की कोशिश करते हैं तो आप अंत में किसी को भी खुश नहीं कर पाते। लेगो ने इनोवेशन के नाम पर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली थी। वो भूल गए थे कि लोग उन्हें उनकी सादगी के लिए पसंद करते थे। न कि उन फालतू के तामझाम के लिए जो उन्होंने जबरदस्ती लोगों पर थोप दिए थे।

मान लीजिए आपकी गली में एक समोसे वाला है जिसका समोसा पूरी सिटी में फेमस है। अब अचानक उसे इनोवेशन का भूत सवार हो जाए। वो समोसे के अंदर चॉकलेट भरने लगे। ऊपर से पास्ता डाल दे। और साथ में स्ट्रॉबेरी की चटनी देने लगे। क्या आप वहाँ दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। आप उसे पागल समझकर ब्लॉक कर देंगे। लेगो भी वही समोसे वाला बन गया था जो अपने कोर प्रोडक्ट का कबाड़ा कर रहा था। इनोवेशन करना अच्छी बात है लेकिन अगर वो आपकी पहचान ही मिटा दे तो समझ लेना कि आपकी बर्बादी शुरू हो चुकी है। लेगो को यह बात तब समझ आई जब उनके पास बैंक में पैसे खत्म होने लगे और क्रेडिटर्स उनके दरवाजे पर खड़े हो गए। तब उन्हें एहसास हुआ कि ज्यादा स्मार्ट बनने के चक्कर में उन्होंने अपनी असली ताकत ही खो दी है।


लेसन २ : अपने कोर पर वापस लौटो

जब पानी सिर के ऊपर निकल गया और लेगो का दिवालिया निकलना तय हो गया तब उन्हें समझ आया कि वो रास्ता भटक चुके हैं। उन्होंने एक नए CEO को काम पर रखा जिसने आकर सबसे पहले यह पूछा कि भाई आखिर हम हैं कौन। जवाब मिला कि हम खिलौने बनाने वाली कंपनी हैं। तो फिर हम यह ज्वेलरी और वीडियो गेम्स क्यों बेच रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी जिम में जाएं और वहाँ आपको ट्रेडमिल की जगह समोसे की दुकान मिले। लेगो ने अपनी उन फालतू की मशीनों को बेच दिया जो उन पार्ट्स को बनाती थीं जिनकी किसी को जरूरत ही नहीं थी। उन्होंने अपने इन्वेंटरी के कलर्स और शेप्स को आधा कर दिया। इसे कहते हैं बैक टू बेसिक्स। यानी अपनी जड़ों की तरफ लौटना।

अक्सर हमें लगता है कि अगर हम अपनी लाइफ में बहुत सारी चीजें एक साथ करेंगे तो हम ज्यादा सक्सेसफुल हो जाएंगे। लेकिन लेगो ने सिखाया कि ताकत सब कुछ करने में नहीं बल्कि किसी एक चीज को दुनिया में सबसे बेहतर करने में है। उन्होंने वापस उसी छोटी सी प्लास्टिक की ईंट पर ध्यान देना शुरू किया जिसे एक बच्चा दूसरे के साथ जोड़कर अपनी कल्पना की दुनिया बना सकता था। उन्होंने अपनी उन डिजाइन्स को कचरे के डिब्बे में डाल दिया जो बच्चों को समझ ही नहीं आ रही थीं। उन्होंने समझा कि उनकी असली पावर उस ईंट की सादगी में ही छिपी है।

सोचिए एक लड़का है जिसे अपनी क्रश को इम्प्रेस करना है। अब वो इम्प्रेस करने के चक्कर में गिटार भी सीख रहा है। फ्रेंच भाषा भी बोल रहा है। और साथ में जिम जाकर बॉडी भी बना रहा है। नतीजा क्या होगा। वो न तो गिटार बजा पाएगा। न फ्रेंच बोल पाएगा। और जिम में तो सिर्फ थकान ही मिलेगी। आखिर में लड़की किसी ऐसे लड़के के साथ चली जाएगी जो शायद सिर्फ अच्छी बातें करना जानता हो। लेगो ने भी यही किया। उन्होंने दुनिया भर के ड्रामे बंद किए और सिर्फ उस एक चीज पर फोकस किया जो उनकी पहचान थी। जब उन्होंने अपनी फालतू की वैरायटी कम की तो उनका मैनेजमेंट आसान हो गया और प्रॉफिट अपने आप बढ़ने लगा। यह लेसन हमें सिखाता है कि जब आप मुसीबत में हों तो नई चीजें ट्राई करने के बजाय उन चीजों को बेहतर बनाओ जो आपको यहाँ तक लेकर आई हैं।


लेसन ३ : कस्टमर ही असली इंजीनियर है

लेगो ने अपनी जड़ों को तो पकड़ लिया था लेकिन अब उन्हें दुनिया के सबसे बड़े सीक्रेट का पता चला। वो सीक्रेट था उनके फैंस। लेगो को समझ आया कि उनके सबसे अच्छे डिजाइन्स उनके ऑफिस के एयर कंडीशंड कमरों में नहीं बल्कि उन घरों में बन रहे हैं जहाँ बच्चे और बड़े फर्श पर बैठकर ईंटों से खेल रहे हैं। उन्होंने अपनी कंपनी के दरवाजे खोल दिए और अपने कस्टमर्स को ही अपना पार्टनर बना लिया। इसे कहते हैं क्राउडसोर्सिंग। उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जहाँ कोई भी अपना डिजाइन भेज सकता था और अगर लोग उसे पसंद करते तो लेगो उसे असलियत में मार्केट में उतार देता।

आजकल बहुत से ब्रांड्स को लगता है कि वो कस्टमर से ज्यादा स्मार्ट हैं। वो बंद कमरों में बैठकर फैसले लेते हैं और फिर हैरान होते हैं कि उनका प्रोडक्ट फ्लॉप क्यों हो गया। लेगो ने अपनी अकड़ को साइड में रखा और अपने फैंस की बात सुनी। उन्होंने देखा कि एडल्ट फैंस यानी बड़े लोग भी लेगो के साथ उतनी ही दीवानगी से जुड़े हैं जितने कि बच्चे। उन्होंने उनके लिए कॉम्प्लेक्स और चैलेंजिंग सेट्स बनाना शुरू किया। जब आप अपने कस्टमर को यह एहसास कराते हैं कि उसकी राय मायने रखती है तो वो आपका सिर्फ कस्टमर नहीं रहता। वो आपका सबसे बड़ा प्रमोटर बन जाता है।

मान लीजिए आप अपनी मम्मी के लिए रसोई में एक नया ओवन खरीदकर लाते हैं जिसमें 50 बटन हैं। लेकिन आपकी मम्मी को तो बस रोटी गरम करनी है। अब आप उन्हें जबरदस्ती वो बटन चलाना सिखाएंगे तो वो चिड़चिड़ी ही होंगी। लेकिन अगर आप उनसे पूछकर लाते कि उन्हें क्या चाहिए तो शायद वो आपको एक साधारण और काम का ओवन बतातीं। लेगो ने भी यही किया। उन्होंने खुद को भगवान समझना बंद किया और अपने यूजर्स के फीडबैक को अपनी बाइबल बना लिया। जब लोग खुद आपके प्रोडक्ट को बनाने में मदद करते हैं तो वो उसे खरीदने के लिए लाइन में भी सबसे पहले खड़े होते हैं। लेगो की यही स्ट्रैटेजी उन्हें दुनिया की नंबर वन खिलौना कंपनी बना ले गई।


तो दोस्तों, लेगो की यह कहानी हमें सिखाती है कि फेलियर का मतलब अंत नहीं है। अगर आप बहुत ज्यादा नया करने के चक्कर में बिखर रहे हैं तो रुकिए। अपनी जड़ों की तरफ लौटिए और उन लोगों की सुनिए जिनके लिए आप काम कर रहे हैं। चाहे आपका छोटा सा स्टार्टअप हो या आप अपनी लाइफ की प्लानिंग कर रहे हों। याद रखिए कि ईंट से ईंट जोड़कर ही महल खड़ा होता है। लेकिन सही ईंट और सही जगह का चुनाव आपके हाथ में है।

अगर आपको लेगो का यह सफर इंस्पायरिंग लगा तो नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं कि आपकी लाइफ की वो कौन सी एक ईंट है जिसे आप कभी नहीं छोड़ना चाहेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिना मतलब के इनोवेशन के चक्कर में अपनी लाइफ उलझा रहा है। चलिए मिलकर एक मजबूत फाउंडेशन बनाते हैं।

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