क्या आप भी उस कैटेगरी के महान इंसान हैं जो आग लगने पर कुआं खोदने की प्लानिंग करते हैं। मुबारक हो क्योंकि आपकी यह शांति आपको जल्द ही एक शानदार फेलियर की तरफ ले जा रही है। जब दुनिया रॉकेट की स्पीड से बदल रही है तब आप कछुए की चाल चलकर खुद को सेफ समझ रहे हैं। यह आर्टिकल पढ़कर शायद आपकी नींद उड़ जाए या फिर आप सच में कुछ उखाड़ लें।
जॉन कोटर की किताब ए सेंस ऑफ अर्जेंसी हमें सिखाती है कि बिना किसी ठोस कारण के भागना बेवकूफी है पर सही समय पर सही एक्शन न लेना सुसाइड के बराबर है। आइए समझते हैं वह ३ बड़े लेसन जो आपकी लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : रियल अर्जेंसी और फाल्स अर्जेंसी के बीच का खेल समझना
आजकल के ऑफिसों में आपने एक अलग ही लेवल का सर्कस देखा होगा। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सुबह से शाम तक बस इधर से उधर फाइलें लेकर भागते रहते हैं। उनके चेहरे पर इतना स्ट्रेस होता है जैसे कल सुबह ही दुनिया खत्म होने वाली है और सिर्फ वही उसे बचा सकते हैं। जॉन कोटर इसे फाल्स अर्जेंसी कहते हैं। यह वह नकली भागदौड़ है जिसमें शोर बहुत है पर रिजल्ट जीरो है। लोग मीटिंग पर मीटिंग करते हैं। ईमेल का रिप्लाई ऐसे देते हैं जैसे कोई ओलंपिक मेडल जीतना हो। पर असलियत में वह सिर्फ खुद को बिजी दिखा रहे होते हैं ताकि बॉस को लगे कि बंदा बहुत मेहनती है।
सोचिए आपके घर में आग लगी है और आप बैठकर यह डिस्कस कर रहे हैं कि बाल्टी का रंग लाल होना चाहिए या नीला। यही फाल्स अर्जेंसी है। इसमें लोग डर और घबराहट में काम करते हैं। वे पैनिक बटन दबाकर बैठ जाते हैं पर हाथ पैर नहीं चलाते। हमारे यहाँ २८ से ३४ साल के यंग प्रोफेशनल्स अक्सर इसी जाल में फंसते हैं। वे सोचते हैं कि अगर वह रात के १० बजे तक ऑफिस में बैठे हैं तो वह बहुत बड़े तोप मार रहे हैं। असल में वे सिर्फ अपनी पर्सनल लाइफ और सेहत का कचुम्बर निकाल रहे होते हैं। फाल्स अर्जेंसी एक ऐसी बीमारी है जो आपको थका तो देती है पर आपको कहीं ले नहीं जाती।
अब बात करते हैं रियल अर्जेंसी की। यह वह आग है जो अंदर से लगती है। रियल अर्जेंसी वाला इंसान पागलों की तरह भागता नहीं है। वह शांत रहता है पर वह हर पल फोकस्ड रहता है। उसे पता है कि मार्केट बदल रहा है और अगर आज वह अपनी स्किल्स अपग्रेड नहीं करेगा तो कल कोई और उसकी जगह ले लेगा। रियल अर्जेंसी का मतलब यह नहीं है कि आप हर काम कल ही कर लें। इसका मतलब यह है कि आप आज वह काम जरूर करें जो आपके लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए जरूरी है।
असली अर्जेंसी में आप उन चीजों को कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं जो आपका टाइम वेस्ट करती हैं। आप उन फालतू गपशप वाली मीटिंग्स से बाहर निकलते हैं जहाँ सिर्फ चाय और बिस्कुट का हिसाब होता है। आप बहाने बनाना छोड़ देते हैं। जब आपके अंदर रियल अर्जेंसी होती है तो आप हर दिन एक ऐसा कदम उठाते हैं जो आपको आपकी मंजिल के करीब ले जाता है। यह डर से नहीं बल्कि एक विजन से आता है। आपको पता होता है कि अगर आपने आज एक्शन नहीं लिया तो आप वह मौका खो देंगे जो शायद फिर कभी न आए। इसलिए अपने अंदर की उस नकली घबराहट को पहचानिए और उसे असली एक्शन में बदलिए।
लेसन २ : कॉम्प्लेसेन्सी यानी संतुष्टि के खतरनाक जाल से बचना
दुनिया में सबसे खतरनाक जगह बिस्तर नहीं है बल्कि वह सोफा है जहाँ बैठकर आप सोचते हैं कि आपने तो लाइफ में सब कुछ हासिल कर लिया है। जॉन कोटर इसे कॉम्प्लेसेन्सी कहते हैं। यह वह मीठा जहर है जो तब चढ़ता है जब कंपनी का प्रॉफिट अच्छा चल रहा हो या आपकी सैलरी टाइम पर आ रही हो। जब इंसान को लगता है कि उसे सब आता है और अब कुछ नया सीखने की जरूरत नहीं है तो समझ लीजिए कि उसका उल्टी गिनती शुरू हो गई है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक पहाड़ की चोटी पर खड़े होकर नीचे नहीं देख रहे और पीछे से कोई आपको धक्का देने वाला है।
आजकल के दौर में तो यह और भी डरावना है। लोग एक अच्छी नौकरी मिलते ही ऐसे सुस्त हो जाते हैं जैसे उन्होंने दुनिया जीत ली हो। वे भूल जाते हैं कि जिस टेक्नोलॉजी पर वे आज घमंड कर रहे हैं वह कल सुबह तक पुरानी हो जाएगी। आप नोकिया या कोडक जैसी बड़ी कंपनियों को देख लीजिए। वे अपने जमाने के राजा थे। उन्हें लगा कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उनके मैनेजमेंट को लगा कि लोग हमेशा उनके कीपैड वाले फोन ही पसंद करेंगे। यह ओवर कॉन्फिडेंस ही उनकी बर्बादी की वजह बना। वे अपनी पुरानी सक्सेस की चादर ओढ़कर सो गए और जब जागे तब तक मार्केट का खेल खत्म हो चुका था।
हकीकत यह है कि सक्सेस आपको आलसी बनाती है। जब आप फेल होते हैं तब तो आप भागते हैं पर जब आप जीत रहे होते हैं तब आप रुक जाते हैं। असली लीडर वह है जो जीत के जश्न के बीच में भी यह सोच रहा हो कि अगला खतरा कहाँ से आ सकता है। आपको अपनी टीम और खुद के अंदर हमेशा एक ऐसी हलचल बनाए रखनी चाहिए कि हमें अभी और बेहतर करना है। अगर आपको लग रहा है कि आपके ऑफिस में सब कुछ बहुत स्मूथ चल रहा है और कोई प्रॉब्लम नहीं है तो यह सबसे बड़ी प्रॉब्लम है। इसका मतलब है कि आप रिस्क लेना बंद कर चुके हैं।
संतुष्ट होना अच्छी बात है पर प्रोग्रेस से संतुष्ट हो जाना बेवकूफी है। अपने चारों तरफ की बाउंड्री को तोड़िए। उन लोगों से मिलिए जो आपसे ज्यादा सक्सेसफुल हैं ताकि आपको अपनी औकात का पता चले। जब आप अपने से बेहतर लोगों को देखते हैं तो आपकी नींद उड़ती है और वही उड़ी हुई नींद आपको रियल अर्जेंसी की तरफ ले जाती है। अपने बीते हुए कल के मेडल को साफ करना छोड़िए और आज के लिए एक नया चैलेंज ढूंढिए। याद रखिए कि अगर आप खुद को नहीं बदलेंगे तो कोई और आपको आकर बदल देगा और वह बदलाव आपको बिल्कुल पसंद नहीं आएगा।
लेसन ३ : हर दिन अर्जेंसी को अपनी आदत बनाना
बहुत से लोग सोचते हैं कि अर्जेंसी कोई ऐसी चीज है जिसे किसी क्राइसिस के वक्त तिजोरी से बाहर निकाला जाता है। जैसे जब बॉस चिल्लाए या डेडलाइन सिर पर हो तभी काम करना है। जॉन कोटर कहते हैं कि यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। असली अर्जेंसी वह है जो आपकी रगों में हर रोज दौड़ती है। यह कोई वन टाइम शो नहीं है बल्कि यह एक लाइफस्टाइल है। अगर आप सिर्फ बड़े मौकों पर ही सीरियस होते हैं तो आप एक स्प्रिंटर बन सकते हैं पर लाइफ की मैराथन नहीं जीत सकते। आपको हर छोटी मीटिंग और हर साधारण सी बातचीत में वह जोश और फोकस दिखाना होगा।
सोचिए आप किसी रेस्टोरेंट में गए और वेटर आपको आधे घंटे बाद पानी देने आया। वह बिल्कुल रिलैक्स है क्योंकि उसे लगता है कि होटल तो चल ही रहा है। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। कभी नहीं। यही हाल आपके करियर का भी है। अगर आप अपने क्लाइंट या अपने कोलैग्स को यह महसूस कराते हैं कि आप उनके काम को लेकर सीरियस नहीं हैं तो आप धीरे-धीरे अपनी वैल्यू खो रहे हैं। हर दिन जब आप ऑफिस के लिए निकलते हैं तो खुद से पूछिए कि आज मैं ऐसा क्या अलग करने वाला हूं जो कल की तुलना में बेहतर हो। यह सवाल आपको आलस के दलदल से बाहर खींच लेगा।
अर्जेंसी को आदत बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप २४ घंटे स्ट्रेस में रहें। इसका मतलब है कि आप फालतू के काम को ना कहना सीखें। हम में से ज्यादातर लोग उन कामों में अपना वक्त बर्बाद करते हैं जिनका हमारे गोल्स से कोई लेना-देना नहीं होता। कभी किसी की बुराई करने में तो कभी सोशल मीडिया पर किसी अंजान इंसान से बहस करने में। यह सब टाइम पास आपको कंफर्ट जोन में रखता है। असली अर्जेंसी वाला इंसान अपने वक्त को लेकर बहुत कंजूस होता है। वह जानता है कि बिता हुआ समय वापस नहीं आएगा। वह अपनी हर मीटिंग को एक मकसद के साथ शुरू करता है और उसे जल्दी खत्म करके एक्शन मोड में आ जाता है।
अपने आसपास के माहौल को भी ऐसा बनाइए जहाँ काम करने की भूख नजर आए। अगर आप ऐसे दोस्तों के साथ बैठते हैं जो सिर्फ वीकेंड की प्लानिंग करते हैं तो आप कभी अर्जेंट महसूस नहीं करेंगे। ऐसे लोगों का साथ ढूंढिए जो आपको चैलेंज करें। जो आपसे कठिन सवाल पूछें। जब आप हर दिन को एक नई चुनौती की तरह देखते हैं तो आपकी प्रोडक्टिविटी अपने आप बढ़ जाती है। अर्जेंसी वह ईधन है जो आपकी गाड़ी को तब भी चलाता है जब रास्ता मुश्किल हो। इसे अपनी पहचान बनाइए ताकि जब लोग आपका नाम लें तो उन्हें पता हो कि यह इंसान चीजों को टालता नहीं बल्कि उन्हें अंजाम देता है।
आज ही फैसला कीजिए। क्या आप उन लोगों में रहना चाहते हैं जो सिर्फ बदलाव का इंतजार करते हैं या उन लोगों में जो खुद बदलाव लेकर आते हैं। आपकी जिंदगी की फिल्म का हीरो आप खुद हैं और क्लैप बज चुका है। अब और वेट मत कीजिए। उठिए और आज से ही अपनी लाइफ में वह रियल अर्जेंसी लेकर आइए जिसकी जॉन कोटर बात करते हैं। क्योंकि याद रखिए कि दुनिया में जगह सिर्फ उन्हीं के लिए है जो तेज दौड़ते हैं। बाकी सब तो बस भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाते हैं।
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