अभी भी आप यही सोचते हैं कि दुनिया खत्म होने वाली है और महंगाई आपको खा जाएगी। आपकी यह छोटी सोच और न्यूज चैनलों का डर आपको उस दौलत और तरक्की से दूर रख रहा है जो आपके सामने खड़ी है। आप बस रोते रहिये जबकि दुनिया बदल रही है।
आज हम पीटर डियामैंडिस की किताब अबन्डन्स की मदद से जानेंगे कि कैसे आने वाला समय गरीबी का नहीं बल्कि बेशुमार मौकों का होने वाला है। चलिए इन ३ लाइफ चेंजिंग लेसन्स को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : स्कार्सिटी सिर्फ एक नजरिया है
क्या आपको भी लगता है कि पानी खत्म हो रहा है या तेल की कमी से दुनिया रुक जाएगी। असल में कमी रिसोर्स की नहीं बल्कि हमारी टेक्नोलॉजी की है। पुराने समय में एल्युमिनियम सोने से भी ज्यादा कीमती हुआ करता था। राजा महाराजा अपनी शान दिखाने के लिए एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना खाते थे। क्यों। क्योंकि तब उसे जमीन से निकालने का तरीका बहुत महंगा और मुश्किल था। फिर एक दिन इलेक्ट्रोलिसिस की तकनीक आई और वही एल्युमिनियम आज आपकी रसोई में मामूली डिब्बों की शक्ल में पड़ा है। स्कार्सिटी से अबन्डन्स तक का यह सफर सिर्फ एक सही आईडिया की दूरी पर था।
यही हाल आज पानी का है। लोग कहते हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी धरती का सत्तर परसेंट हिस्सा पानी से ढका है। बस वो नमक वाला है। जैसे ही हम सोलर पावर से चलने वाली डीसैलिनेशन तकनीक को सस्ता कर लेंगे तो समंदर का पानी आपकी नल की टोटी तक पहुँच जाएगा। हम कमी के दौर में नहीं बल्कि एक्सेस के दौर में जी रहे हैं। बस समस्या यह है कि हमारा दिमाग अभी भी पाषाण काल वाले मोड में फंसा है। जहाँ हमें लगता है कि अगर पड़ोसी को कुछ मिल गया तो मेरा हिस्सा कम हो जाएगा। यह जीरो सम गेम वाली सोच आपको कभी अमीर नहीं बनने देगी।
आज का मिडिल क्लास इंसान वो सुख सुविधाएं भोग रहा है जो सौ साल पहले के किसी राजा के नसीब में भी नहीं थीं। आपके हाथ में जो स्मार्टफोन है वो नब्बे के दशक के सुपर कंप्यूटर से भी ज्यादा पावरफुल है। तब के अरबपति भी अपनी जेब में इतना बड़ा ज्ञान का भंडार लेकर नहीं घूम सकते थे जितना आज एक आम लड़का बस के सफर में लेकर घूमता है। आप कमी का रोना इसलिए रोते हैं क्योंकि आप न्यूज की हेडलाइन्स देख रहे हैं न कि बढ़ती हुई प्रोग्रेस को। डर बेचना मीडिया का बिजनेस है और उस डर को खरीदना आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी है।
जब आप यह समझ जाते हैं कि टेक्नोलॉजी हर मुश्किल चीज को आसान और सस्ती बना देती है तो आपका डर खत्म हो जाता है। आप उस दुनिया को देखने लगते हैं जहाँ बिजली इतनी सस्ती होगी कि मीटर लगाने का खर्चा बिजली के दाम से ज्यादा होगा। यह कोई सपना नहीं है बल्कि हकीकत बनने की राह पर है। बस आपको अपनी नजर बदलनी होगी। अगर आप अब भी यही सोचते रहे कि सब कुछ खत्म हो रहा है तो आप उस मौके को कभी नहीं पकड़ पाएंगे जो आपके ठीक सामने खड़ा है।
लेसन २ : एक्सपोनेंशियल टेक्नोलॉजी की रफ़्तार
क्या आपको याद है वो समय जब नोकिया का छोटा सा फोन हाथ में होना बड़ी बात थी। आज वही फोन खिलौना भी नहीं लगता। हम इंसानों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि हमारा दिमाग लीनियर तरीके से सोचता है। मतलब एक के बाद दो और दो के बाद तीन। लेकिन टेक्नोलॉजी एक्सपोनेंशियल चलती है। यानी एक के बाद दो और दो के बाद सीधा चार और फिर आठ। यही वजह है कि हम आने वाले बदलाव का अंदाजा नहीं लगा पाते और जब वो आता है तो हमारे होश उड़ जाते हैं। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप किसी तालाब में कमल के फूल को रोज डबल होते देखें। पहले पच्चीस दिन आपको कुछ खास फर्क नहीं दिखेगा। लेकिन अगले पांच दिन में पूरा तालाब भर जाएगा।
आज एआई और रोबोटिक्स इसी रफ़्तार से बढ़ रहे हैं। लोग डर रहे हैं कि मशीनें उनकी नौकरी खा जाएंगी। सच तो यह है कि मशीनें बोरियत वाली नौकरियां खत्म कर रही हैं ताकि आप कुछ बड़ा सोच सकें। पुराने जमाने में एक फोटो खींचने के लिए आपको कैमरा और रील खरीदनी पड़ती थी। फिर उसे धुलवाने के लिए दुकान के चक्कर काटने पड़ते थे। आज आपके फोन में करोड़ों फोटो खींचने की ताकत है और वो भी बिल्कुल मुफ्त। इसे कहते हैं डीमटेरियलाइजेशन और डीमोनेटाइजेशन। यानी जो चीज पहले महंगी और भारी थी अब वो सॉफ्टवेयर बनकर गायब हो चुकी है और उसकी कीमत जीरो हो गई है।
कल्पना कीजिये कि आने वाले कुछ सालों में सोलर पैनल इतने एडवांस हो जाएं कि आपकी बिजली का बिल आना बंद हो जाए। या फिर वर्टिकल फार्मिंग से सब्जियां आपके घर के पास ही इतनी सस्ती उगने लगें कि भुखमरी का नामो निशान मिट जाए। यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है। यह एक्सपोनेंशियल ग्रोथ का नतीजा है। जो लोग आज भी पुराने ढर्रे पर बैठकर सिर्फ मेहनत के दम पर अमीर बनना चाहते हैं वे पीछे रह जाएंगे। आज का समय स्मार्टनेस और टेक्नोलॉजी के साथ हाथ मिलाने का है। अगर आप कल की तकनीक को आज नहीं समझ रहे तो आप भविष्य के कबाड़खाने में नजर आएंगे।
दुनिया बदल रही है और बहुत तेजी से बदल रही है। हम एक ऐसे दौर में घुस रहे हैं जहाँ कमी शब्द डिक्शनरी से बाहर हो जाएगा। बस शर्त यह है कि आप अपनी सोच की रफ़्तार को भी बढ़ाएं। अगर आप भी पुरानी रफ़्तार से चलेंगे तो तरक्की की यह ट्रेन आपको प्लेटफॉर्म पर ही छोड़कर निकल जाएगी। और फिर आप बैठकर सिर्फ दूसरों की कामयाबी के किस्से सुनते रहेंगे। टेक्नोलॉजी का यह जादू उनके लिए है जो इसे समझने की हिम्मत रखते हैं न कि उनके लिए जो बदलाव से डरकर कोनों में छिप जाते हैं।
लेसन ३ : डू इट योरसेल्फ इनोवेटर्स का पावर
पुराने जमाने में अगर आपको कोई बड़ा बदलाव लाना होता था तो आपको या तो किसी देश का राजा होना पड़ता था या फिर बहुत बड़ा बिजनेसमैन। लेकिन आज का दौर अलग है। आज एक कमरे में बैठा हुआ एक नौजवान अपनी कोडिंग या एक छोटे से आईडिया से पूरी दुनिया की किस्मत बदल सकता है। इसे लेखक ने डीआईवाई यानी डू इट योरसेल्फ इनोवेटर्स का नाम दिया है। अब बड़े आविष्कार किसी सरकारी लैब की बंद दीवारों में नहीं बल्कि गैराज और छोटे स्टार्टअप्स में हो रहे हैं। आज आपके पास वो सारे टूल्स मौजूद हैं जो कल तक सिर्फ नासा के पास हुआ करते थे। अब कमी साधनों की नहीं बल्कि आपके अंदर के जुनून की है।
सोचिये पहले एक सैटलाइट लॉन्च करने के लिए करोड़ों डॉलर और बड़ी सरकारों की परमिशन चाहिए होती थी। आज कॉलेज के लड़के अपने हाथों से नैनो सैटलाइट बनाकर अंतरिक्ष में भेज रहे हैं। यह पावर कहाँ से आई। यह आई है टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण से। अब ज्ञान और रिसोर्स किसी एक अमीर इंसान की जागीर नहीं रहे। अगर आपके पास एक अच्छा आईडिया है तो क्राउडफंडिंग के जरिए दुनिया भर के लोग आपको पैसा देने को तैयार हैं। अब आपको बैंक के सामने हाथ फ़ैलाने की जरूरत नहीं है। बस आपके विजन में दम होना चाहिए और आपको पता होना चाहिए कि आप किस प्रॉब्लम को सॉल्व कर रहे हैं।
यह लेसन हमें यह सिखाता है कि हमें मसीहा का इंतजार करना बंद कर देना चाहिए। कोई सरकार या कोई चमत्कार आकर आपकी गरीबी दूर नहीं करेगा। आपको खुद वो मसीहा बनना होगा। आप आज इंटरनेट के जरिए वो सब कुछ सीख सकते हैं जो आपको एक सफल इंसान बना सकता है। अगर आप आज भी बेरोजगार बैठे हैं और किस्मत को दोष दे रहे हैं तो गलती सिस्टम की नहीं बल्कि आपकी है। आप उस समंदर के किनारे खड़े हैं जहाँ पानी ही पानी है और आप कह रहे हैं कि मुझे प्यास लगी है। यह आलस और बहानेबाजी आपको कहीं का नहीं छोड़ेगी।
जब दुनिया के करोड़ों दिमाग आपस में इंटरनेट के जरिए जुड़ते हैं तो एक ग्लोबल ब्रेन बनता है। यह कलेक्टिव इंटेलिजेंस दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं जैसे कैंसर का इलाज या क्लीन एनर्जी का समाधान ढूंढ रही है। आप इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं या बस एक तमाशबीन बनकर तालियां बजाना चाहते हैं यह फैसला आपका है। आने वाला भविष्य उन्हीं का है जो खुद हाथ बढ़ाकर अपनी किस्मत लिखना जानते हैं। अबंडन्स का दरवाजा खुल चुका है बस आपको अंदर कदम रखना है।
भविष्य उतना डरावना नहीं है जितना टीवी पर दिखाया जाता है। असल में यह सबसे सुनहरा समय है जीने के लिए। अपनी सोच को कमी से हटाकर बेशुमार मौकों पर लगाइए। इस आर्टिकल को उन लोगों के साथ शेयर करें जो अभी भी कल के डर में जी रहे हैं। कमेंट में बताएं कि आपको कौन सी टेक्नोलॉजी सबसे ज्यादा एक्साइट करती है। चलिए मिलकर एक बेहतर भविष्य की शुरुआत करते हैं।
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