Be a Real Estate Millionaire (Hindi)


क्या आप भी अपनी नौ से पांच वाली जॉब में घिस रहे हैं और पड़ोसी की नई चमचमाती गाड़ी देखकर अंदर ही अंदर जल रहे हैं? मुबारक हो। आप अपनी लाइफ के सबसे कीमती साल और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं क्योंकि आपको रियल एस्टेट का 'र' भी नहीं पता। जब दुनिया सो रही थी तब स्मार्ट लोग डीन ग्राज़ियोसी के सीक्रेट्स से करोड़ों छाप रहे थे और आप अभी भी 'अगले महीने से सेविंग शुरू करूँगा' वाले जोक सुना रहे हैं।

आज का यह आर्टिकल आपकी आंखें खोलने के लिए काफी है। हम डीन ग्राज़ियोसी की मास्टरक्लास बुक बी अ रियल एस्टेट मिलेनियर के उन 3 बड़े लेसन के बारे में बात करेंगे जो आपको सच में अमीर बना सकते हैं।


लेसन १ : मार्केट के डर को अपना दोस्त बनाना सीखें

दोस्तो, ज्यादातर लोग तब प्रॉपर्टी खरीदने का सोचते हैं जब हर कोई प्रॉपर्टी की बातें कर रहा होता है। न्यूज चैनल पर चिल्लाया जा रहा होता है कि रेट आसमान छू रहे हैं और आपके शर्मा जी भी अपनी आधी अधूरी नॉलेज के साथ आपको ज्ञान दे रहे होते हैं। लेकिन डीन ग्राज़ियोसी कहते हैं कि अगर आप तब खरीद रहे हैं जब सब खुश हैं तो समझो आप अपनी बर्बादी का सामान खुद पैक कर रहे हैं। असली पैसा तो तब बनता है जब मार्केट में सन्नाटा हो और लोग डर के मारे अपनी जायदाद औने पौने दाम में बेचने को तैयार हों।

सोचिए आप एक सेल में गए हैं। वहां एक ब्रांडेड शर्ट पर अस्सी परसेंट का डिस्काउंट है। क्या आप वहां से भाग जाएंगे क्योंकि बाकी लोग उसे नहीं खरीद रहे? बिल्कुल नहीं। आप तो शायद दो की जगह चार शर्ट उठा लेंगे। लेकिन जब बात रियल एस्टेट की आती है तो हमारा दिमाग उल्टा चलने लगता है। हम डर जाते हैं कि कहीं रेट और न गिर जाए। डीन इसी मानसिकता को बदलने की बात करते हैं। वह कहते हैं कि एक रियल एस्टेट मिलेनियर कभी भी मार्केट के ऊपर जाने का इंतजार नहीं करता बल्कि वह मार्केट के गिरने का जश्न मनाता है।

हमारे देश में लोग अक्सर कहते हैं कि भाई अभी तो मंदी चल रही है अभी हाथ मत डालना। जबकि हकीकत यह है कि मंदी ही वह जादुई चिराग है जो आपको रातों रात अमीर नहीं तो कम से कम सही रास्ते पर जरूर डाल सकता है। जब मार्केट गिरता है तो सेलर्स घबराए हुए होते हैं। उन्हें पैसे की सख्त जरूरत होती है। यही वह समय है जब आप टेबल पर बैठकर अपनी शर्तों पर डील कर सकते हैं। आप उनसे वह कीमत मांग सकते हैं जिसकी कल्पना उन्होंने कभी नहीं की होगी।

मान लीजिए आपके इलाके में एक बहुत बड़ा प्लॉट है जिसकी कीमत पिछले साल एक करोड़ थी। अब मार्केट थोड़ा डाउन है और कोई खरीदार नहीं मिल रहा। मालिक को अपनी बेटी की शादी करनी है या कोई पुराना कर्ज चुकाना है। अब वह डरा हुआ है। आप वहां एंट्री मारते हैं। आप उसे सत्तर लाख का ऑफर देते हैं। वह शायद पहले मना करे लेकिन जब उसे कोई और रास्ता नहीं दिखेगा तो वह आपके पास वापस आएगा। आपने बिना किसी एक्स्ट्रा मेहनत के तीस लाख का प्रॉफिट उसी दिन कमा लिया जिस दिन आपने प्रॉपर्टी खरीदी।

यही वह सीक्रेट है जो बड़े इन्वेस्टर किसी को नहीं बताते। वे मार्केट के उतार चढ़ाव को एक दुश्मन की तरह नहीं बल्कि एक ऐसे दोस्त की तरह देखते हैं जो उनके लिए सस्ती डील्स लेकर आता है। लोग रोते रहते हैं कि पैसा नहीं है लेकिन असलियत में उनके पास सही नजरिया नहीं होता। अगर आप इस डर वाले गेम को समझ गए तो समझिए आपने अपनी पहली जीत हासिल कर ली है।

लेकिन याद रखिए सिर्फ सस्ता खरीदना काफी नहीं है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि उस डील को बिना अपनी जेब खाली किए कैसे क्लोज करना है। और यही चीज हमें हमारे अगले लेसन की तरफ ले जाती है जहाँ हम पैसों के असली खेल को समझेंगे।


लेसन २ : बिना अपनी जेब खाली किए डील पक्की करना

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो हमेशा रोते रहते हैं कि भाई पैसा होगा तभी तो इन्वेस्ट करेंगे और दूसरे वो जो दूसरों के पैसों पर अपना साम्राज्य खड़ा कर देते हैं। डीन ग्राज़ियोसी कहते हैं कि अगर आप अपनी जेब से पैसा लगाकर अमीर बनने की सोच रहे हैं तो आप बहुत लंबी और थका देने वाली रेस में दौड़ रहे हैं। असली खिलाड़ी तो वो है जो ओनर फाइनेंसिंग और क्रिएटिव तरीकों से डील क्लोज करना जानता है। लोग सोचते हैं कि रियल एस्टेट सिर्फ रईस खानदान के बच्चों का खेल है लेकिन यह बात उतनी ही सच है जितना कि यह कहना कि जिम जाने से बॉडी अपने आप बन जाती है। बिना दिमाग चलाए तो सिर्फ बैंक अकाउंट खाली होता है।

मान लीजिए आपको एक बढ़िया घर दिखा जिसकी कीमत पचास लाख है। अब आपके पास तो बैंक बैलेंस के नाम पर सिर्फ अगले महीने का किराया और नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन बचा है। एक आम आदमी वही करेगा जो सब करते हैं यानी हार मानकर चुपचाप घर बैठ जाएगा। लेकिन एक स्मार्ट इन्वेस्टर क्या करेगा? वह सेलर के पास जाएगा और उसकी मजबूरी या जरूरत को समझेगा। हो सकता है सेलर को पूरा पैसा एक साथ न चाहिए हो। आप उसे ऑफर दे सकते हैं कि भाई मैं आपको अभी पांच लाख देता हूँ और बाकी पैसा किश्तों में दूँगा। या फिर आप किसी ऐसे पार्टनर को ढूँढ सकते हैं जिसके पास पैसा तो है पर डील ढूँढने का टाइम और हुनर नहीं है।

आपने बचपन में वो दोस्त तो देखा ही होगा जिसके पास बैट होता था लेकिन उसे बैटिंग करनी नहीं आती थी। आप क्या करते थे? आप उसे अपनी टीम में लेते थे ताकि आप उसके बैट से चौके छक्के मार सकें। रियल एस्टेट भी बिल्कुल ऐसा ही है। मार्केट में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास करोड़ों रुपये बैंक में सड़ रहे हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि सही जमीन कहाँ है। आपको बस वो "बैट" यानी पैसा ढूँढना है। डीन सिखाते हैं कि जब आप वैल्यू देना सीख जाते हैं तो पैसा अपने आप खिंचा चला आता है।

लोग अक्सर बैंक के चक्कर काटकर अपनी चप्पलें घिस लेते हैं और जब लोन रिजेक्ट होता है तो किस्मत को कोसते हैं। अरे भाई बैंक इकलौता जरिया नहीं है। क्या आपने कभी सेलर फाइनेंसिंग के बारे में सुना है? जहाँ बेचने वाला ही आपका बैंक बन जाता है। उसे हर महीने एक फिक्स्ड इनकम मिलती रहती है और आपको बिना भारी ब्याज दिए प्रॉपर्टी मिल जाती है। सुनने में यह फिल्मी लगता है लेकिन इंडिया के मार्केट में आज भी कई लोग टैक्स बचाने या रेगुलर इनकम के चक्कर में ऐसी डील्स के लिए तैयार हो जाते हैं। बस आपकी जुबान में वो दम होना चाहिए कि आप उन्हें अपना विजन समझा सकें।

यह सारा खेल भरोसे का है। अगर आप सेलर को यह यकीन दिला सकें कि उसकी प्रॉपर्टी आपके हाथों में सेफ है और उसे उसका हक समय पर मिलेगा तो वह आपके लिए रेड कार्पेट बिछा देगा। लोग सोचते हैं कि बिना पैसे के कुछ नहीं होता लेकिन असल में बिना आइडिया के कुछ नहीं होता। एक बार जब आप इस कला को मास्टर कर लेते हैं तो आपके लिए आसमान की कोई सीमा नहीं रह जाती। आपके पास जितने ज्यादा ऑप्शन्स होंगे आप उतने ही बड़े लेवल पर खेल पाएंगे।

लेकिन याद रखिए कि डील ढूंढना और उसे फाइनेंस करना तो सिर्फ शुरुआत है। असली चुनौती तब आती है जब आपको उस डील को संभालना होता है और खुद को एक बड़े लेवल के लिए तैयार करना होता है। और यही वह पॉइंट है जहाँ आपकी मानसिकता यानी आपका माइंडसेट सबसे बड़ा रोल निभाता है जिसके बारे में हम अगले लेसन में चर्चा करेंगे।


लेसन ३ : मिलेनियर माइंडसेट और खुद पर भरोसा

दोस्तो, अगर आपके पास दुनिया की सबसे बेहतरीन स्ट्रेटेजी हो और बैंक में करोड़ों रुपये भी हों लेकिन अगर आपके कंधे के ऊपर वाले हिस्से यानी आपके दिमाग में कचरा भरा है तो आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे। डीन ग्राज़ियोसी अपनी किताब में बार-बार कहते हैं कि रियल एस्टेट का खेल प्रॉपर्टी से ज्यादा आपकी मानसिकता का है। लोग अक्सर बड़ी डील्स इसलिए हाथ से जाने देते हैं क्योंकि उनके अंदर बैठा एक छोटा सा डर उनसे कहता है कि भाई तू यह नहीं कर पाएगा। यह डर बिल्कुल उस रिश्तेदार की तरह होता है जो हर शुभ काम में टांग अड़ाने आ जाता है। अगर आप इस डर की बात सुनते रहे तो आप अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ दूसरों की सक्सेस स्टोरी पढ़ते हुए ही बिता देंगे।

जरा सोचिए जब आपने पहली बार साइकिल चलाना सीखा था। क्या आप पहले दिन ही स्टंट मारने लगे थे? नहीं ना। आप गिरे होंगे आपके घुटने छिले होंगे और शायद पड़ोस के डोगी ने भी आपका पीछा किया होगा। लेकिन आपने हार नहीं मानी। रियल एस्टेट में भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। शुरुआत में गलतियां होंगी शायद कोई डील हाथ से निकल जाए या कोई ब्रोकर आपको चूना लगाने की कोशिश करे। लेकिन एक असली मिलेनियर वही है जो इन ठोकरों को ठोकर नहीं बल्कि आगे बढ़ने की सीढ़ी समझता है। डीन कहते हैं कि आपका विजन इतना साफ़ होना चाहिए कि आपको आने वाली मुश्किलें सिर्फ एक छोटे से स्पीड ब्रेकर की तरह लगें।

हमारे यहाँ अक्सर लोग कहते हैं कि जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए। लेकिन डीन कहते हैं कि अगर चादर छोटी है तो नई और बड़ी चादर खरीदने की औकात बनाओ। यह जो "मिडिल क्लास माइंडसेट" हमें बचपन से सिखाया जाता है वही हमारी सबसे बड़ी जंजीर है। लोग रिस्क लेने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सब कुछ डूब जाएगा। पर सच तो यह है कि सबसे बड़ा रिस्क तो वह है जब आप कोई रिस्क ही नहीं लेते और साठ साल की उम्र में यह सोचकर पछताते हैं कि काश उस दिन वह रिस्क ले लिया होता।

सफलता का असली राज आपके अंदर छिपा है। जब आप सुबह सोकर उठते हैं तो क्या आप खुद से यह कहते हैं कि आज मैं कुछ बड़ा करूँगा? या फिर आप अलार्म को दस बार स्नूज़ करके फिर से उसी उबाऊ लाइफ में वापस चले जाते हैं? रियल एस्टेट मिलेनियर बनने के लिए आपको अपनी आदतों को बदलना होगा। आपको उन लोगों के साथ उठना बैठना होगा जो आपसे दस गुना ज्यादा कामयाब हैं। अगर आप पांच फेलियर लोगों के साथ घूमते हैं तो छठे फेलियर आप खुद होंगे। लेकिन अगर आप पांच करोड़पतियों के बीच बैठते हैं तो यकीन मानिए छठे करोड़पति बनने की बारी आपकी है।

पैसा कमाना सिर्फ एक नतीजा है असली जीत तो आपके व्यक्तित्व की होती है। डीन ग्राज़ियोसी की यह किताब हमें सिर्फ घर खरीदना नहीं सिखाती बल्कि हमें उस काबिल बनाती है कि हम किसी भी मुश्किल हालात में अपना रास्ता खुद बना सकें। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप आज भी उसी भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ शिकायत करना जानती है या फिर आप उस एक परसेंट क्लब में शामिल होना चाहते हैं जो अपनी किस्मत खुद लिखता है?

उठिए अपनी डर की जंजीरों को तोड़िए और आज ही अपना पहला कदम बढ़ाइए। याद रखिए कि कल कभी नहीं आता जो है आज है और अभी है।


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