Big Data (Hindi)


क्या आपको लगता है कि आप अपनी मर्जी से फोन चला रहे हैं? गलत। आप तो बस एक कठपुतली हैं जिसे बिग डेटा नचा रहा है। अगर आप इस बुक के लेसन नहीं जानते तो मुबारक हो। आप अपनी प्राइवेसी और करियर दोनों दांव पर लगा रहे हैं। दुनिया बदल रही है और आप अभी भी पुराने जमाने के तुक्कों के भरोसे बैठे हैं। सच में बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं आप।

आज हम विक्टर मेयर शोनबर्गर की किताब बिग डेटा की गहराई में उतरेंगे। यह बुक आपको बताएगी कि डेटा की यह नई दुनिया कैसे काम करती है। चलिए इस डिजिटल रेवोल्यूशन के ३ सबसे बड़े लेसन को समझते हैं जो आपकी सोच बदल देंगे।


लेसन १ : अब क्यों नहीं, क्या मायने रखता है (कोरिलेशन ओवर कोजेशन)

पुराने जमाने में हमारे बड़े बुजुर्ग और साइंस वाले लोग हमेशा एक ही बात के पीछे पड़े रहते थे कि भाई साहब यह चीज हुई तो हुई क्यों। अगर शर्मा जी का लड़का फेल हुआ तो क्यों हुआ। अगर शेयर मार्केट गिरा तो क्यों गिरा। हम हमेशा उस क्यों यानी कारण के पीछे अपनी जान छिड़कते थे। लेकिन यह बुक हमें एक बहुत ही कड़वा और मजेदार सच बताती है। अब दुनिया इतनी तेज हो गई है कि हमारे पास यह सोचने का टाइम ही नहीं है कि कोई चीज क्यों हो रही है। अब जमाना है कोरिलेशन का। यानी बस यह जान लो कि क्या हो रहा है और आगे क्या होगा।

मान लीजिए आप एक ई-कॉमर्स वेबसाइट चलाते हैं। आपके डेटा ने आपको बताया कि जब भी दिल्ली में बारिश होती है, अचानक लोग ऑनलाइन पीली टी-शर्ट ज्यादा खरीदने लगते हैं। अब एक आम आदमी का दिमाग चकरा जाएगा। वह सोचेगा कि भाई बारिश का पीली टी-शर्ट से क्या कनेक्शन है। क्या लोग बारिश में पीले रंग के मेंढक बनकर घूमना चाहते हैं। या शायद पीले रंग से उन्हें बिजली गिरने का डर कम लगता है। अब अगर आप इसके पीछे का कारण यानी क्यों ढूंढने बैठेंगे तो आधी जिंदगी निकल जाएगी और तब तक बारिश का सीजन भी खत्म हो जाएगा।

स्मार्ट आदमी वह है जो इस डेटा को पकड़े और तुरंत पीली टी-शर्ट पर सेल लगा दे। बिग डेटा कहता है कि भाड़ में जाए कारण। हमें बस यह दिख रहा है कि बारिश और पीली टी-शर्ट का गहरा रिश्ता है। बस इसी रिश्ते का फायदा उठाओ और पैसा छापो। यही वह सीक्रेट है जिसे बड़ी कंपनियाँ जैसे अमेज़न और नेटफ्लिक्स इस्तेमाल करती हैं। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आपको रात के २ बजे कोई फालतू सी हॉरर फिल्म क्यों देखनी है। उन्हें बस यह पता है कि पिछली बार आपने ऐसी फिल्म देखी थी, तो इस बार भी आप वही कचरा देखेंगे।

आज की डेट में डेटा के पास हमारी हर छोटी हरकत का हिसाब है। आप इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं, कितनी देर रुक रहे हैं और कब पेज छोड़ रहे हैं, यह सब कोरिलेशन है। यह सब देखकर एल्गोरिदम को पता चल जाता है कि आप अगले ५ मिनट में क्या करने वाले हैं। शायद आपको लग रहा होगा कि आप बहुत यूनिक हैं और आपके फैसले आपके खुद के हैं। लेकिन सच तो यह है कि आपका डेटा आपसे ज्यादा आपके बारे में जानता है। वह जानता है कि जब आपका ब्रेकअप होता है, तो आप उदास गानें सुनते हैं और फिर पिज्जा ऑर्डर करते हैं। अब कंपनी को यह जानने की जरूरत नहीं कि ब्रेकअप क्यों हुआ। उन्हें बस यह पता है कि अब पिज्जा बेचने का सही टाइम है।

अगर आप आज भी पुराने तरीकों से काम कर रहे हैं और हर चीज के पीछे लॉजिक ढूंढ रहे हैं, तो आप रेस में बहुत पीछे छूटने वाले हैं। बिग डेटा की इस दुनिया में सक्सेसफुल वही है जो डेटा के पैटर्न्स को पढ़ना सीख जाए। कारण ढूंढना फिलॉसफर्स का काम है, पैसे कमाना और आगे बढ़ना डेटा का काम है। जब हमारे पास लाखों करोड़ों डेटा पॉइंट्स मौजूद हैं, तो हमें बस उन डॉट्स को जोड़ना है। यह लेसन हमें सिखाता है कि अपनी ईगो को साइड में रखो और जो डेटा दिख रहा है उस पर भरोसा करो। क्योंकि डेटा झूठ नहीं बोलता, भले ही उसका कोई मतलब हमें समझ न आए।


लेसन २ : एक्यूरेसी छोड़ो और मेसी बनो (एक्सेप्टिंग मेसीनेस)

हम इंसानों की एक बहुत पुरानी और गंदी आदत है। हमें हर चीज बिल्कुल परफेक्ट और साफ-सुथरी चाहिए होती है। स्कूल की नोटबुक से लेकर ऑफिस की एक्सेल शीट तक, अगर एक भी स्पेलिंग गलत हो गई या एक नंबर ऊपर-नीचे हो गया, तो हमारे टीचर और बॉस ऐसे देखते हैं जैसे हमने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो। लेकिन यह बुक कहती है कि बिग डेटा की दुनिया में यह परफेक्शन का भूत उतार कर फेंक देना चाहिए। जब डेटा बहुत बड़ा (Big) होता है, तो वह थोड़ा गंदा और मेसी (Messy) भी होता है। और मजे की बात यह है कि यही गंदगी हमें सच के करीब ले जाती है।

मान लीजिए आप एक हलवाई की दुकान पर गए और आपने सिर्फ एक लड्डू चखा। वह लड्डू शायद बहुत अच्छा बना हो क्योंकि उसे बनाने वाले ने बहुत मेहनत की थी। अब उस एक लड्डू के दम पर आपने मान लिया कि पूरी दुकान के सारे लड्डू वर्ल्ड क्लास हैं। यह है पुरानी दुनिया का सैंपल सर्वे। लेकिन असलियत में जब आप पूरा डिब्बा खरीदते हैं, तो पता चलता है कि दो लड्डू तो टूटे हुए हैं और एक में शायद चीनी थोड़ी कम है। बिग डेटा कहता है कि भाई, एक परफेक्ट लड्डू के पीछे मत भागो। पूरी दुकान के हजार लड्डू देखो। भले ही उनमें से १० खराब निकलें, लेकिन उन हजार लड्डुओं का औसत (Average) आपको ज्यादा सही जानकारी देगा कि हलवाई कितना पानी में है।

गूगल ट्रांसलेट को ही देख लीजिए। शुरुआत में साइंटिस्ट्स ने कंप्यूटर को ग्रामर के सारे रूल्स सिखाने की कोशिश की। वह चाहते थे कि कंप्यूटर एक एक शब्द बिल्कुल परफेक्ट ट्रांसलेट करे। नतीजा? बहुत ही घटिया और रोबोटिक भाषा। फिर उन्होंने अपना तरीका बदला। उन्होंने इंटरनेट पर मौजूद करोड़ों डाक्यूमेंट्स, चाहे वो गलत लिखे हों या सही, सबको सिस्टम में डाल दिया। उन्होंने परफेक्शन छोड़ दिया और मेसीनेस को गले लगाया। अब कंप्यूटर यह नहीं देखता कि रूल क्या है, वह यह देखता है कि करोड़ों लोगों ने उस बात को कैसे लिखा है। आज गूगल ट्रांसलेट इतना स्मार्ट है कि वह आपकी टूटी-फूटी भाषा भी समझ लेता है।

हम लोग अक्सर डेटा को साफ करने में इतना टाइम खराब कर देते हैं कि तब तक उस डेटा की वैल्यू ही खत्म हो जाती है। आप अपनी लाइफ में भी यही करते हैं। आप सोचते हैं कि जब सारे हालात परफेक्ट होंगे, जब बैंक में करोड़ों रुपये होंगे और जब दुनिया की सारी नॉलेज मिल जाएगी, तब बिजनेस शुरू करेंगे। बिग डेटा हमें सिखाता है कि भाई, मैदान में उतरो। गलतियां होंगी, डेटा गंदा होगा, लोग गालियां भी देंगे, लेकिन वह जो मेस (Messy) इन्फॉर्मेशन मिलेगी, वही असली गोल्ड माइन है।

अगर आप एक स्मार्ट मैनेजर बनना चाहते हैं, तो छोटे और परफेक्ट डेटा के बजाय बड़े और थोड़े से खराब डेटा पर भरोसा करना सीखिए। क्योंकि जब डेटा का वॉल्यूम बढ़ता है, तो छोटी-मोटी गलतियाँ अपने आप दब जाती हैं और असली ट्रेंड उभर कर बाहर आता है। परफेक्शन एक बीमारी है जो आपको स्लो कर देती है। बिग डेटा की इस रेस में वही जीतता है जो गंदगी में छिपे हुए मौकों को पहचान लेता है। तो अगली बार जब कोई कहे कि आपका डेटा थोड़ा गड़बड़ है, तो मुस्कुरा कर कहिए कि यही तो इसकी खूबसूरती है।


लेसन ३ : डेटा ही असली खजाना है (डेटाफिकेशन का जादू)

आज के समय में अगर आपसे कोई पूछे कि दुनिया की सबसे कीमती चीज क्या है, तो आप शायद सोना, जमीन या फिर शायद आईफोन १६ प्रो मैक्स का नाम लेंगे। लेकिन यह बुक हमें सिखाती है कि असली वैल्यू अब उन चीजों में नहीं है जो हमें दिखाई देती हैं। असली वैल्यू उस जानकारी में है जो हम हर सेकंड पैदा कर रहे हैं। इसे कहते हैं डेटाफिकेशन। यानी जीवन की हर छोटी से छोटी चीज को डेटा में बदल देना। आपकी लोकेशन, आपकी नींद का टाइम, आपकी धड़कन और यहाँ तक कि आपकी गाड़ी चलाने का तरीका, सब कुछ अब एक नंबर है।

मान लीजिए आप अपनी कार में बैठे हैं। पुराने जमाने में कार का मतलब था बस एक जगह से दूसरी जगह जाना। लेकिन आज आपकी कार एक जासूस है। वह जानती है कि आप ब्रेक कितनी जोर से मारते हैं। वह जानती है कि आप मोड़ पर कितनी तेजी से मुड़ते हैं। अब मान लीजिए एक इंश्योरेंस कंपनी यह सारा डेटा खरीद लेती है। अब जैसे ही आप अपनी कार का इंश्योरेंस रिन्यू कराने जाएंगे, वह आपसे ज्यादा पैसे मांगेंगे। क्यों? क्योंकि उनके डेटा ने बता दिया है कि आप सडक पर किसी स्टंटबाज से कम नहीं हैं। अब आप चाहे कितनी भी शरीफ बनने की एक्टिंग करें, आपका डेटा आपकी पोल खोल चुका है।

यही हाल आपके फोन का भी है। आपको लगता है कि आप फ्री में सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन याद रखिए, अगर आप किसी चीज के लिए पैसे नहीं दे रहे, तो आप कस्टमर नहीं हैं, बल्कि आप खुद वह प्रोडक्ट हैं जिसे बेचा जा रहा है। आपका हर लाइक, हर कमेंट और हर वो वीडियो जिसे आपने बीच में छोड़ दिया, वह सब डेटा है। बड़ी कंपनियाँ इस डेटा को रिसाइकल करती हैं। जैसे कचरे से बिजली बनाई जाती है, वैसे ही आपके डेटा के कचरे से करोड़ों का मुनाफा बनाया जाता है।

बिग डेटा का सबसे बड़ा लेसन यही है कि आने वाले समय में वही इंसान या कंपनी राज करेगी जिसके पास सबसे ज्यादा डेटा होगा। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे पहले के जमाने में जिसके पास सबसे ज्यादा जमीन होती थी, वही राजा कहलाता था। आज डेटा ही वह नई जमीन है। अगर आप एक छोटा बिजनेस भी चलाते हैं, तो यह सोचना बंद कर दीजिए कि आप सिर्फ सामान बेच रहे हैं। आप असल में डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। जिस दिन आपने यह समझ लिया कि आपके कस्टमर की पसंद और नापसंद का डेटा आपके स्टॉक से ज्यादा कीमती है, उस दिन आपकी तरक्की पक्की है।

तो दोस्तों, यह डिजिटल दुनिया कोई जादू नहीं है, यह सिर्फ नंबर्स का खेल है। हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ हमारी प्राइवेसी और हमारी पहचान सब कुछ इस डेटा के समंदर में तैर रही है। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप इस समंदर की लहरों पर सवार होकर आगे बढ़ना चाहते हैं, या फिर इसके नीचे दबकर गायब होना चाहते हैं? याद रखिए, डेटा कभी नहीं सोता और वह कभी कुछ नहीं भूलता।


आज का यह सफर सिर्फ एक बुक समरी नहीं थी, बल्कि आपके भविष्य का आईना था। अगर आपको लगता है कि इस जानकारी ने आपकी आँखें खोल दी हैं, तो इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो अभी भी डिजिटल दुनिया को सिर्फ मनोरंजन समझते हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि क्या आप अपने डेटा को लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं या आपको भी लगता है कि कोई आपको हर वक्त देख रहा है। जागरूक बनिए, क्योंकि डेटा की दुनिया में सिर्फ वही बचता है जो अपडेटेड रहता है।

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