क्या आप अभी भी घिसी पिटी लिनियर ग्रोथ के पीछे भाग रहे हैं। बड़े दुख की बात है कि आपका छोटा विजन आपको कंगाली की ओर ले जा रहा है। जबकि दुनिया एक्सपोनेंशियल हो रही है और आप अभी भी बैलगाड़ी वाले आइडियाज पर अटके हैं। यकीन मानिए यह आलस आपको बहुत भारी पड़ने वाला है।
आज का यह आर्टिकल आपकी छोटी सोच की धज्जियां उड़ाने वाला है। हम पीटर डियामांडिस की बुक बोल्ड से वह ३ पावरफुल लेसन सीखेंगे जो आपको जीरो से सीधा ग्लोबल इम्पैक्ट तक ले जाएंगे। चलिए बिजनेस की इस नई दुनिया को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : एक्सपोनेंशियल टेक्नोलॉजी की ताकत को पहचानना
आजकल के दौर में अगर आप कछुए की चाल से चलने वाले बिजनेस के बारे में सोच रहे हैं तो सच मानिए आप अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं। हमारे दादा परदादा के जमाने में चीजें लिनियर चलती थी यानी १ के बाद २ और २ के बाद ३। लेकिन आज की दुनिया एक्सपोनेंशियल है जहां १ के बाद २ और फिर सीधा ४ और ८ होता है। अगर आप इस अंतर को नहीं समझ पा रहे हैं तो शायद आप अभी भी उसी नोकिया फोन वाले युग में जी रहे हैं जो यह सोचकर बैठा था कि उसका मार्केट कोई नहीं छीन सकता। पीटर डियामांडिस कहते हैं कि टेक्नोलॉजी आज इतनी तेजी से बढ़ रही है कि अगर आप आज सोकर उठे और अपने बिजनेस को अपडेट नहीं किया तो कल तक आप आउटडेटेड हो चुके होंगे।
मान लीजिए आप एक टैक्सी कंपनी खोलना चाहते हैं और आप अपनी जेब से पैसे लगाकर १० कारें खरीदते हैं। यह है लिनियर सोच। इसमें आपको और कारें बढ़ाने के लिए और पैसा और समय चाहिए होगा। लेकिन उबर ने क्या किया। उन्होंने एक ऐप बनाया और दुनिया भर की कारों को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ दिया। उन्होंने किसी कार को खरीदा नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके रातों रात ग्लोबल बन गए। इसे कहते हैं एक्सपोनेंशियल ग्रोथ। अगर आप अपनी छोटी सी दुकान के बाहर बोर्ड लगाकर ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं तो आप सिर्फ अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं। दुनिया आपके फोन के अंदर सिमट चुकी है और अगर आप वहां नहीं हैं तो आप कहीं भी नहीं हैं।
जरा सोचिए जब डिजिटल कैमरा पहली बार आया था तो कोडक जैसी बड़ी कंपनी ने उसे खिलौना समझकर नजरअंदाज कर दिया था। उन्हें लगा कि लोग रील वाले फोटो ही पसंद करेंगे। नतीजा क्या हुआ। कोडक का नामो निशान मिट गया और इंस्टाग्राम जैसी कंपनी ने कुछ ही सालों में अरबों की वैल्यू खड़ी कर दी। यह लेसन हमें यह सिखाता है कि हमें आने वाली टेक्नोलॉजी से डरना नहीं है बल्कि उसका इस्तेमाल करना है। अगर आप एआई और डेटा जैसी चीजों को सिर्फ साइंटिस्ट का काम मानकर छोड़ देंगे तो यकीन मानिए आपका कॉम्पिटिटर इन्ही चीजों का इस्तेमाल करके आपको मार्केट से लात मारकर बाहर निकाल देगा।
ज्यादातर लोग यह गलती करते हैं कि वह कल के चश्मे से आज को देखते हैं। वह सोचते हैं कि जो काम पिछले २० साल से चल रहा है वह आगे भी चलेगा। भाई साहब जाग जाइए। आज की दुनिया में आपकी मेहनत से ज्यादा आपकी स्मार्टनेस और आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी मायने रखती है। अगर आप अपनी ग्रोथ का ग्राफ सीधा रखना चाहते हैं तो मुबारक हो आप एक बहुत ही बोरिंग और फेलियर वाली लाइफ की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर आप बोल्ड बनना चाहते हैं तो आपको एक्सपोनेंशियल सोचना शुरू करना होगा। यह लेसन सिर्फ बिजनेस के लिए नहीं बल्कि आपकी अपनी स्किल्स के लिए भी है। अगर आप वही पुरानी स्किल्स लेकर बैठे हैं जो आपने कॉलेज में सीखी थी तो आप उस पुराने जंग लगे लोहे की तरह हैं जिसकी कोई कीमत नहीं है।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे आप अकेले सर पटकने के बजाय पूरी दुनिया की ताकत को अपने साथ जोड़ सकते हैं जिसे हम क्राउडसोर्सिंग कहते हैं। लेकिन उससे पहले यह पक्का कर लीजिए कि क्या आप अपनी लिनियर सोच को कचरे के डिब्बे में फेंकने के लिए तैयार हैं।
लेसन २ : क्राउडसोर्सिंग और दुनिया की ताकत का इस्तेमाल
पुराने जमाने के बिजनेस में एक बहुत बड़ा ईगो होता था कि मेरा ऑफिस होगा मेरे कर्मचारी होंगे और सब कुछ मेरे कंट्रोल में होगा। अगर आप आज भी इसी ईगो के साथ जी रहे हैं तो यकीन मानिए आप एक बहुत बड़े गधे हैं। पीटर डियामांडिस कहते हैं कि दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोग आपकी कंपनी के पेरोल पर नहीं हैं। वह बाहर कहीं और बैठे हैं। बोल्ड बनने का असली मतलब है यह समझना कि आपको हर काम खुद करने की जरूरत नहीं है। अगर आप आज भी अपनी छोटी सी टीम के साथ कमरे में बैठकर दुनिया बदलने का ख्वाब देख रहे हैं तो शायद आपने अभी तक इंटरनेट की असली ताकत को चखा ही नहीं है।
मान लीजिए आपको अपनी कंपनी का लोगो बनवाना है। एक तरीका यह है कि आप एक महंगा डिजाइनर रखें उसे हर महीने सैलरी दें और फिर उसके नखरे झेलें। दूसरा तरीका है क्राउडसोर्सिंग। आप इंटरनेट पर एक कॉन्टेस्ट डालिए और दुनिया भर के १००० डिजाइनर्स को अपनी आईडिया भेजिए। आपको कुछ ही घंटों में बेहतरीन ऑप्शंस मिल जाएंगे और आपको सिर्फ सबसे बेस्ट वाले को पैसे देने होंगे। इसे कहते हैं दिमाग का इस्तेमाल करना। जो लोग आज भी सब कुछ अपने घर की खेती समझते हैं वह बस अपनी पीठ थपथपाते रह जाते हैं जबकि स्मार्ट लोग क्राउड का इस्तेमाल करके रॉकेट की रफ्तार से आगे निकल जाते हैं।
क्या आपको पता है कि विकिपीडिया ने दुनिया की सबसे बड़ी एनसाइक्लोपीडिया कंपनी ब्रिटानिका को कैसे हरा दिया। ब्रिटानिका के पास बड़े बड़े एक्सपर्ट्स की टीम थी जिन्हें वह पैसे देते थे। लेकिन विकिपीडिया ने पूरी दुनिया को ही अपना एडिटर बना दिया। लोग खुद आए जानकारी डाली और आज वह दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञान का भंडार है। यह है पावर ऑफ क्राउड। अगर आप अपनी प्रॉब्लम को दुनिया के सामने रखते हैं तो दुनिया आपको उसका सलूशन भी देती है और रिसोर्स भी। अगर आप आज भी चवन्नी बचाने के चक्कर में सब कुछ अपने हाथ में रखना चाहते हैं तो आप कभी भी बड़ा इम्पैक्ट नहीं डाल पाएंगे।
आजकल तो पैसा जुटाने के लिए भी आपको बैंकों के तलवे चाटने की जरूरत नहीं है। अगर आपका आईडिया दमदार है तो किकस्टार्टर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर जाकर आप सीधे जनता से पैसे मांग सकते हैं। इसे क्राउडफंडिंग कहते हैं। लोग आपके आईडिया पर पैसा लगाते हैं क्योंकि उन्हें आप पर भरोसा होता है। लेकिन अगर आप अभी भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके से लोन लेने के लिए फाइल्स लेकर घूम रहे हैं तो मुबारक हो आप अपनी आधी जिंदगी कागजों में ही गुजार देंगे। बोल्ड लोग जानते हैं कि दुनिया में टैलेंट और पैसे की कमी नहीं है बस कमी है तो उसे मांगने की हिम्मत और सही प्लेटफॉर्म की।
तो क्या आप अभी भी अपने आप को मिस्टर परफेक्ट समझते हैं जो सब कुछ खुद कर सकता है। अगर हां तो फिर आप अपनी उस छोटी सी दुनिया में ही खुश रहिए जहां आपकी तरक्की की छत बहुत नीची है। लेकिन अगर आप आसमान छूना चाहते हैं तो आपको लोगों को अपने साथ जोड़ना होगा। आपको अपनी बाउंड्रीज तोड़नी होंगी और दुनिया को अपना पार्टनर बनाना होगा। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस अपनी सोच को थोड़ा सा बोल्ड बनाने की बात है।
अगले लेसन में हम बात करेंगे उस फ्रेमवर्क की जो आपके साधारण से आईडिया को एक डिजिटल साम्राज्य में बदल सकता है। लेकिन उससे पहले यह सोचिए कि क्या आप अपना ईगो छोड़कर दुनिया के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं।
लेसन ३ : ६ डी (6 Ds) फ्रेमवर्क और बिजनेस का डिजिटाइजेशन
अगर आपका बिजनेस आज भी सिर्फ कागज और फाइलों पर चल रहा है तो समझ लीजिए कि आप डायनासोर के जमाने में जी रहे हैं। पीटर डियामांडिस ने एक बहुत ही कमाल का फ्रेमवर्क दिया है जिसे ६ डी (6 Ds) कहा जाता है। यह कोई स्कूल का फार्मूला नहीं है बल्कि अमीर बनने की वो जादुई चाबी है जिसे बड़े बड़े स्टार्टअप्स इस्तेमाल करते हैं। इसका सबसे पहला स्टेप है डिजिटाइजेशन। अगर आपकी सर्विस या प्रोडक्ट बिट्स और बाइट्स में नहीं बदल सकता तो आप कभी भी स्केल नहीं कर पाएंगे। जो लोग अभी भी फिजिकल दुकानों के भरोसे बैठे हैं उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि डिजिटल की दुनिया में बाउंड्री नाम की कोई चीज नहीं होती।
पुराने जमाने में जब हमें गाना सुनना होता था तो हम दुकान पर जाकर कैसेट या सीडी खरीदते थे। यह एक फिजिकल प्रोडक्ट था जिसे बनाने और बेचने में बहुत खर्चा आता था। फिर आया डिजिटाइजेशन और गानों को एमपीथ्री में बदल दिया गया। इसके बाद जो हुआ उसे कहते हैं डिसेप्शन। शुरुआत में डिजिटल म्यूजिक की क्वालिटी खराब थी और लोगों को लगा कि यह कभी सीडी की जगह नहीं ले पाएगा। लेकिन धीरे धीरे यह इतना बेहतर हुआ कि इसने पूरी म्यूजिक इंडस्ट्री को ही बदल कर रख दिया। इसे कहते हैं डिसरप्शन। अगर आप आज किसी को सीडी बेचने की कोशिश करेंगे तो वह आपको पागल समझेगा और शायद फ्री में भी न ले।
अगला स्टेप है डीमटेरियलाइजेशन। याद कीजिए वो दौर जब आपके पास टॉर्च, कैमरा, कैलकुलेटर और घड़ी अलग अलग होती थी। आज यह सब आपके स्मार्टफोन के अंदर एक ऐप के रूप में मौजूद हैं। चीजों का वजूद ही खत्म हो गया और वह डिजिटल बन गईं। इसके बाद आता है डीमोनेटाइजेशन यानी चीजों का सस्ता होना। जो कैमरा पहले लाखों का आता था वह आज आपके फोन में मुफ्त के बराबर है। और अंत में आता है डेमोक्रेटाइजेशन यानी वो चीज अब हर किसी की पहुंच में है। आज एक गांव का लड़का भी वही इंफॉर्मेशन एक्सेस कर सकता है जो गूगल का सीईओ कर रहा है। अगर आप इस प्रोसेस को नहीं समझ रहे हैं तो आप बस अपनी किस्मत को दोष देते रह जाएंगे।
ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वह शुरुआत के डिसेप्शन वाले फेज में ही हार मान लेते हैं। जब आपका बिजनेस नया होता है और डिजिटल होता है तो शुरुआत में उसकी ग्रोथ बहुत धीमी दिखती है। लोग आपका मजाक उड़ाते हैं और कहते हैं कि यह फालतू का काम छोड़कर कुछ असली काम करो। लेकिन जो बोल्ड होते हैं वह जानते हैं कि यह सिर्फ तूफान से पहले की शांति है। जैसे ही आपका बिजनेस डिसरप्शन वाले फेज में आता है आपकी तरक्की इतनी तेज होती है कि आपके जलने वाले पड़ोसियों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं होता।
तो क्या आप अभी भी उस पुराने सिस्टम के गुलाम बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ आपको थकाता है और पैसे के नाम पर चवन्नी पकड़ाता है। बोल्ड बनने का मतलब है इस ६ डी फ्रेमवर्क को अपने जीवन और काम में उतारना। अपनी स्किल्स को डिजिटाइज करिए अपने नेटवर्क को डेमोक्रेटाइज करिए और फिर देखिए कैसे पूरी दुनिया आपकी मुट्ठी में होती है। अगर आप आज भी लकीर के फकीर बने रहेंगे तो यकीन मानिए इतिहास के पन्नों में आपका नाम भी उन्हीं लोगों के साथ होगा जिन्होंने बदलाव को ठुकरा दिया था और फिर खुद ही खत्म हो गए।
दुनिया बहुत बड़ी है और यहां मौके भी अनगिनत हैं। बस जरूरत है तो अपनी उस छोटी सी सोच के पिंजरे से बाहर निकलने की। बोल्ड बनना कोई चॉइस नहीं है बल्कि आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। अगर आप हारने से डरते रहेंगे तो कभी भी जीत का स्वाद नहीं चख पाएंगे। इसलिए आज ही फैसला करें कि आप एक्सपोनेंशियल सोचेंगे और दुनिया पर अपना एक गहरा इम्पैक्ट छोड़ेंगे।
क्या आप आज से ही अपनी लाइफ में एक बोल्ड स्टेप लेने के लिए तैयार हैं। कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताएं कि आप कौन सा बड़ा गोल अचीव करना चाहते हैं। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी सो रहे हैं ताकि वह भी जाग सकें।
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